Wednesday, 17 October 2018

Me too

ऊपर पंखा रुकता है....
नीचे बेबी रोती है ...

वो फू..फू ..फू करता है
बेबी छी..छी..छी करती है !

सुजाता तिलकराज एक जबरदस्त हॉउसवाइफ ...अब सवाल ये कि हाउसवाइफ भी जबरदस्त होती है क्या ...तो मैं क्या कहूँ ...डबल एम.ए,एन.सी.सी ..थ्री इयर कंप्यूटर एनिमेशन एंड इंटीरियर कोर्स, कुछ पेंटर , कुछ सिंगर ...एक बेहतर डांसर  इतना कुछ होने के बाद ...
जो औरत तीन बच्चे पैदा करके ...सुबह 4 बजे से .नेपी , पॉटी , कपड़े , साड़ी तौलिया , चड्डी ..ब्रेकफास्ट ,लंच ..सास-बहु ...कुछ साजिश ..फिर क्राइम ...फिर डिनर ...और फिर हु तू तू ...करके सो जाती है .... वो औरत फिर जबरदस्त  हॉउसवाइफ की उपमा से ही आँकी या जांची जा सकती है .....

सुजाता के पति उत्पल तिलकराज ...पेशे से एक इंजियनियर है ....और अक्सर रात को लेट घर आते है .....सुजाता का पहला त्याग अपने फाडू एकेडमिक रिकॉर्ड के बाद घर की घिसाई था और दुसरा ये कि उसने प्रेम किसी से और विवाह किसी से किया ....

सुजाता सुंदर भी ठीक -ठाक है ...और शरीर से भी गदराई हुई है ....अपार्टमेंट का हर भद्र पुरुष उसका रस चूसना चाहता है ..ये सुजाता भी जानती है ...लेकिन कोई उस के करीब भी इसलिए नही गुजर पाता क्यूँकि सुजाता शांत है ...बेहद शांत ...उसकी जिंदगी किसी एक धुन पर नाचती है .....वो धुन जो उसे अक्सर गैस को खुला छोड़ने , फ्रिज का डोर ओपन रहने देने ....टी .वी को ऑन छोड़ सो जाने ...दूध को उबलता देख उसे बहते देने ...सब्जी काटते हुए अँगुली काट देने ....छने हुए आटे में अँगुली से कुछ लिखने  पर मजबूर कर देती है .....

लेकिन एक अच्छी माँ है सुजाता ....एक आठ साल का बेटा है उसका और एक यही कोई ढेढ़ साल का छोटा बेटा भी है ...इन बच्चों के होने के बाद सुजाता का वक्त अब भला कट जाता है ...लेकिन शादी के शुरुवाती कुछ महीने उसके लिए खूबसूरत थे लेकिन जब जब उसका मिस्करेज हुआ और उसे पता चला कि उसके पेट में बच्ची थी तो उसके बाद उसका जीवन नर्क हो गया ...उसे अपनी की मौत एक श्राप लगी थी ....

वो अब लोगों से मिलने लगी है ...लेकिन पहले पति के काम पर जाते ही वो दरवाजे को अंदर से थ्री पैरल लॉक से बन्द रखती थी ...साथ ही मैंने देखा है उसको ...फिर भी वो सशंकित होती थी तो कभी सोफा , कभी डिनर टेबल को सरका के दरवाजे से मिला देती थी .....पति पहले उसकी इस आदत से अंजान था मगर फिर उसने उसकी इस आदत से कोम्प्रोमाइज कर लिया ...सुजाता ने कोई होम मेड भी एक्जिस्ट नही की ....क्यूँकि उसे तन्हाई में ही सुकून मिलता था ..... क्यूँकि उसे खुद से या किसी से बात करने का वक्त चाहिये।

जब सुजाता पैदा हुई थी तो वो बहुत हँस रही थी , कहते है सुजाता को नजर उसी दौर से लगनी शुरू हुई ,,, 5 साल की थी तो पूरा घर उसके साथ खेलने लगता था , उसकी मुस्कुराहट , उसका कभी न थकना , नकलची बन्दर की तरह हर घर हर आये ज्ञात और अज्ञात  की आवाज और भावों की मिमक्री , दिनभर नाचना-गाना , शोर , ऊधम -पटांग  सुजाता का बचपन था ..एक पण्डित ने तो ये तक भविष्यवाणी की थी कि ये बालिका कल यश के पाथेय रथ की सारथी बनेगी ....डॉक्टर बत्रा सायक्लोजिस्ट ने तो ये दावा किया था कि ये लड़की  बहुत एम्बिसियस और फेमफुल होगी ....सही भविष्यवाणियां थी ये और सुजाता स्कूल से लेकर कॉलेज सब जगह टॉपर रही ... हर स्ट्रीम ,हर प्लेस हर इवेंट में फर्स्ट ....

उस दिन डांसिंग कॉम्पिटिशन में भी फर्स्ट आई थी वो  ... विनिंग कप लेकर जब वो घर लौटी ...तो देखा डोर बाहर से लॉक है , उसने अपनी चाबी से लॉक खोला  ....और कप ड्रॉइंग रूम की टेबल पर रख कर नहाने के लिए जैसे ही बाथरूम में घुसी उसे लगा ..उसने कोई आवाज सुनी ....वो दबे पैर आगे बढ़ी और एक दरवाजे की झिरी से अंदर झांक कर  देखा कि उसके पिता  उसकी नौकरानी की मासूम 7 साला बेटी की फ्रॉक में फूंक मार रहें है ..वो मासूम छी ..छी ..छी कर रही थी .....उसके बाद जो हुआ उसको देख सुजाता बेहोश होकर वहीं गिर पड़ी ,,,, उसे जब होश आया ...तो पता लगा कि घर में चोरी हुई है ...और चोर ने नौकरानी की बेटी के साथ बलत्कार कर उसकी हत्या कर दी है ...
जिंदगी फिर रफ़्तार में लौटने लगी लेकिन सुजाता ने एक चुप्पी खींच ली जो उसको उस समय परिवार की इज्जत और आर्थिकी के हर पैमाने पर न्यायिक लगी .....उसने अपने पिता से बात करना और उनके साथ बैठना सब बन्द कर दिया ...और वो अपने कॅरियर में बीजी हो गई .....
उसकी शादी हुई ...और 1 साल पहले पिता का देहांत ...
आज सुजाता अपने मायके आई हुई है ...वजह बड़े बेटे की समर वेकेशन ... जब तक पिता जीवित थे वो किसी बहाने से आना टाल देती थी ....दो दिन बाद उसने घर की सफाई की सोची ...और स्टोर रूम में नौकर को साथ लेकर सीढ़ी लेने गई ...उसने जैसे ही सीढ़ी उठाई ...छत से एक लहराती हुई एक स्कूली नॉटबुक  उसके पैरों पर आकर गिरी ....जिसको सुजाता ने खोला ....और सफे पलटे ....एक जगह  स्कूली कविता लिखी थी ..
लेकिन अगले ही पेज में कविता के कुछ शब्द बदले हुए थे ....बेबी नाम था उस बच्ची का जिसने अपने साथ हुए शुरुवाती उत्पीड़न को दर्ज करना सीख लिया था .... वो उत्पीड़न जिसको देख कर सुजाता ने खामोश रहना सीख लिया था ......लेकिन आज सुजाता को लगता है ...कि उसकी चुप्पी पाप थी ..और आज इतने साल बाद जब उसने कुछ बोलने की सोची भी तो पापी जिन्दा नही .....लेकिन बेबी अब भी ज़िंदा है ...और उसके पिता जैसे भेड़िये भी ....लेकिन पाप देखकर या सहकर उसके कई साल बाद अगर उसका प्रश्चियत करने का मन करे तो आप में और पाप में कोई अंतर नही क्यूँकि तब तक आपकी चुप्पी से बरी वो पाप न जाने और कितनी मासूम बेबियों  की जिंदगी लील चुका होगा...नवाज़िश
#जुनैद..............

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