" अवनि ..सना ...हाजिर हो... ......"
" अदालत ये जानना चाहती है ...कि आप दोनों ने आखिर लॉ मिनिस्टर का खून क्यूँ किया ....? "
दोनों ने क्रम से मुक़द्दस कुरआन और पवित्र गीता पर हाथ धर के कसम खाई ......
" मैं अवनि ... ...लास्ट इयर ऑफ़ एम. एस. ई फिजिक्स फ्रॉम वेव कॉलेज ऑफ़ सांइन्स ...मैं कोई दुखभरी कहानी नही सुनाऊँगी न ही कोई रोना -धोना ....मैं सिर्फ इतना कहूँगी कि मैं एक साइंटिस्ट एंड एरोनॉटिक्स ऑफ़ स्पेस इंजीनियरिंग का जूनून पाल के अपना लास्ट इयर कम्प्लीट कर रही थी ...सना जिससे मेरी मुलाकात ...आज से तीन साल पहले ...बेंगलुरु के एक सांइन्स सेमीनार में हुई थी ....हम दोनों उस मुलाकत के बाद फिर कभी अजनबी नही रहे ...सना मिस्टर शौकत मलिक की बेटी है जो कॉस्मॉस स्पेस एजेंसी ऑफ़ इण्डिया के चीफ है ...और सना एक ग्रेट पेंटर ...मेरा कोई बॉय फ्रेंड नही था... क्यूँकि मैंने अपने गोल और ऐंबिशन के बीच कभी किसी को नही आने दिया ....पता नही सना कब मेरे जूनून और मेरी हस्ती के बीच आ गई ....
" मैं सना मलिक ...एक वेल एडुकेटेड ..एंड ए क्लास फैमली से बिलोंग करती हूँ ... पापा चाहते थे कि मैं स्पेस इंजीनियर बनूँ लेकिन बचपन से ही मुझे ख़ुशी सितारों में रंग भरने में मिलती थी न कि उन्हें छूने में ....अवनि जो मेरी सोच और स्ट्रीम से बिलकुल जुदा लड़की है ...पता नही कब मुझे वो मेरी पेंटिंग का केनवाश लगने लगी ........
" अदालत जानना चाहती है कि वो क्या हालात थे कि तुम दोनों ने मिलकर एक आदमी का कत्ल किया ...?
" जज सर ! हम दोनों एक दूसरे को जानने लगे थे .... यहाँ तक एक दूसरे से मिलने और साथ वक्त बिताने भी लगे थे ...रात भर फोन पर बात करते -करते कब सुबह हो जाती थी हमें पता ही नही चलता था ... हम बहुत खुश थे एक दूसरे के साथ ....या यूँ कहूँ कि हम एक दूसरे के लिए ही बने है ....
" व्हाट ..? "
" यस सर वी आर लेस्बियन ..."
पूरे कोर्ट परिसर में एक हल्ला दौड़ गया ...
" ऑर्डर..ऑर्डर ....हाँ तो आगे बोलो ...."
" सर ! हमनें साथ जीने के सपने ही नही इरादे भी तय कर लिए थे ...अब न मुझे सितारे छूने की उम्मीद थी ...और न सना को कैनवाश में रंग भरने की ...हम दोनों एक दूसरे में शामिल हो चुके थे ...यहाँ बैठे और बाहर चलते हर इंसान को हम अलग दुनिया के इंसान लगे या फिर बहुत ही घटिया सोच और केरेक्टर के ....लेकिन हम नॉर्मल है ..... वैसे ही जैसे आप है और जैसे यहाँ बैठा हर इंसान है .....
" सना मलिक तुम इकरार करती हो कि जो अवनि कह रही है वो सही है "
" बेशक जज साहब अवनि का हर लफ्ज सच और हक है .... और हमारे जज्बातों को वही झूठ कह सकता है ... जो मुहब्बत और इश्क को नही जानता ....
सर ! हमारी लाइफ इजली स्पेंड हो रही थी ...हमनें ऑस्ट्रेलिया शिफ्ट होने का प्लान भी बना लिया था ... क्यूंकि वहां एल .जी.बी .टी कम्युनिटी के रिलेशन को मान्यता मिल चुकी है ।हम शादी करके एक खुशहाल जिंदगी जीने का सपना भी सजा चुके थे लेकिन हमारे सपने को बुरी नजर लग गई ....
सना का निकाह पक्का हो गया क्यूँकि हमारे रिलेशन की भनक सना के पापा को लग गई थी ...और उन्होंने सना का घर से निकलना बन्द कर दिया ...हमारे बीच सारा कम्युनिकेशन भी खत्म हो गया ...क्यूँकि सना का फोन भी छीन लिया गया ....मेरी जिंदगी में जैसे तेजाब गिर गया ...यहाँ मैं गलने लगी और वहाँ सना ...तभी सना के एक फ्रेंड ने मुझे सना से मिलवाने की बात कही ...
मुझे उस वक्त सना से मिलने की हर शर्त और कीमत मंजूर थी ....लेकिन मैं बस यहीं धोखा खा गई ...वो सना में फादर का एक ट्रेप था ....जिसमें मैं फंस गई थी ....सना के निकाह होने तक मुझे एक आइसोलेटेड प्लेस में नजरबन्द किया गया ....
मुझे जब रिलीज किया गया जब सना का निकाह हो चुका था....मेरा और सना का सब कुछ लुट चुका था .....
दिन बीतने लगे अचानक एक दिन सना का फोन आया ....कि मैं तुम्हारे बिना नही रह सकती ...ले जाओ मुझे यहाँ से...मेरा निकाह मुझसे दुगनी उम्र के आदमी से करा दिया गया है ...वो बिलकुल जानवर है ...प्लीज ले जाओ मुझे !
" एक मिनट ...कोर्ट ये जानना चाहता है कि तुम कौन हो ...क्यूँकि हम सना को तो जान गए है लेकिन तुम्हारे बारे में सब कुछ अभी भी छिपा है .....
" तभी अवनि फूट -फूट कर रोने लगी और कठघरे में घुटनों के बल बैठ गई ..."
सना ने उसको सम्हाला ...और कहा -
" जज सर ! ये खून अवनि ने नही बल्कि मैंने किया है ...और मुझे ख़ुशी है कि मैंने जिस इंसान को कत्ल किया वो इंसान नही एक जानवर था जिसने कल के हँसते -खेलते मासूम लड़के की जिंदगी ही बर्बाद कर दी या यूँ कहूँ उसकी जिंदगी ही बदल दी !
" सना वो इंसान तुम्हारे पति थे ...और हम कुछ समझे नही ..."
" वो मेरा पति जुरूर था जज साहब लेकिन वो एक जानवर भी था ....हमारे ऊपर आरोप है कि हमनें इसलिए उसका कत्ल किया क्यूँकि वी आर लेस्बियन और हम एक होना चाहते थे मगर सच ये है कि वी आर नॉट लेस्बियन ......
अदालत में बैठा हर इंसान उसी तरह सर पकड़ बैठा जैसे इस वक्त इस पोस्ट को पढ़ने वाले पकड़ बैठे होंगे और एक लेखक के तौर पर वो मुझे जुरूर कोसते लेकिन तभी अवनि खड़े हुई और ....
" यस सर ! वी आर नॉट लेस्बियन ...क्यूँकि लेस्बियन का मतलब है दो एक जैसे फीमेल जेंडर के बीच सेक्स या एमोशनल रिलेशन ....जबकि मैं आज की अवनि कल का आकाश हूँ ....10 साल की थी मैं जब इस जानवर यानि सना के शौहर की हवश का शिकार हुई थी ...ये हमारी ही कॉलोनी में रहता था ....मेरे पापा की दूसरी शादी थी ...मैं किसी को कुछ न बता पाई ...और उम्र बढ़ने के साथ मेरे मन में मर्दों के लिये एक हेट ने जगह बना ली ...ये हेट इस कदर बढ़ गई कि...मैंने अपना जेंडर ही चेंज करवा लिया और लड़की बन गया ....लेकिन उस रात जब सना ने अपने हसबैंड की पिक मेरे मोबाइल में सेंड की तब मुझे उस जानवर को देख कर सब याद आ गया ...और मैंने सना को सब कुछ बता दिया ...सना ने उसको जान से मारने की बात कहकर फोन डिस्कनेक्ट कर दिया ...मैं जब तक सना तक पहुँचती सना ने उसके सीने में चाकू उतार दिया था ....लेकिन वो जानवर तब भी जिन्दा था और उसने सना का टेंटुवा पकड़ा हुआ था तो मैंने वही चाकू उस जानवर के सीने से निकाल उसके दिल में उतार दिया था ...क्यूँकि मेरी स्वर्गवासी माँ एक कहानी सुनाया करती थी जिसमें आखिर में शैतान तभी मरता है जब उसके दिल पे वार किया जाता है .....
" दफा 302 लगी और दोनों को रियायत के साथ जेल हुई ....लेकिन आज दोनों आजाद होने के बाद साथ है ....धारा 377 ने उनको ....एक नई जिंदगी एक नई वजह दी है .....
" लेकिन मेरा बस ये सवाल है कि जिंदगी ने अगर ये ही राह पकड़ ली थी तो फिर इंसान की नस्ल कैसे आगे बढ़ेगी ? हाँलाकि विज्ञान जिंदगी बढ़ाने का कोई फार्मूला जरूर खोज लेगा ...लेकिन फिर जो डिसबैलेंस का सैलाब आएगा उसके लिए कश्ती बनाना विज्ञान के बूते की बात नही ........नवाज़िश
#जुनैद........
No comments:
Post a Comment