" मेम आपका क्लीवेज दिख रखा है ! "
" व्हाट शुभम ... आर यू ....क्या..क्या होता है इसका मतलब जानते हो ...? किसने सीखाया तुम्हे ...?
क्लीवेज अर्थात दरार ..अर्थात स्त्री के सम्बन्ध में ...अर्थात स्तनों का सन्निकट सन्धि स्थल.. अर्थात ...उन दोनों के मध्य की दरार .... ...अर्थात हम मर्दों का कामुकता केंद्र...हमारे शरीर के तापन का प्राक् रसमाधन बिम्ब..गूगल में सर्च होने वाला सबसे चमत्कृत और अलहंकारिक शब्द ..अथवा पद ..
स्त्रियों के लिए बिफॉर ब्लाउज़ पर्चेजिंग का आधार ...दर्जी से इसके गहरा और संकरा न बनने पर वाक् युद्ध का मूल...परपुरुष को आकर्षित और चुम्बित करने का संयन्त्र...प्रतिद्वंदी नार से पार्टियों में आधिकारिक रूप से जियादह दिखने और दिखाने की होड़ का शंखनाद ! और वो बहुत कुछ जो मैं अपने को भद्र प्रस्तुत करने के स्वांग के कारण मैं लिख नही सकता लेकिन सब भद्र होते हुये भी इसे बढ़े चाव से पढ़ सकते है ।
शुभम आयु यही कोई 5-6 साल ..केजी ..वेजी का स्टूडेंट ... एक आम बच्चे की तरह होते हुए भी आम बच्चों का दादा , चच्चा या ग्रेंडफादर ....इसकी माता मिसेज कल्याणी देशराज ...किट्टी पार्टीज में केली उपनाम ...पिता मिस्टर उदय भान देशराज ...माली ..मेड ..रसोइया , ड्राइवर आदि से सम्पन्न परिवार ...
कल्याणी जैसा संस्कारी परन्तु करंटलेस नाम आम तौर पर रईसजादियों का नही होता ...वो तो एक दिन किट्टी पार्टी में मिसेज तलवार उपनाम " लोली " से अगर आफ्टर ड्रिंक "केली" का परसेप्शन विथ स्टैण्डर्ड पर डिबेट के बात हाथतपाई नही होती तो पता ही नही चलता किसी को ...कि मिसेज केली शादी से पहले ही माँ बन चुकी थी और बदनामी के चलते मजबूरन मिस्टर उदय को गॉंव की कल्याणी से विवाह करना पड़ा ...
अंग्रेजी का होम ट्यूटर भी कल्याणी को जुबान से केली नही बना पाया ....क्यूँकि बुद्धि और शरीर दोनों में चर्बी बेशुमार है केली की ...
शादी के सिर्फ तीन महीना ही सर ढका केली ने पल्लू से ...ससुर के ऑफ़ होते ही उन्होंने पल्लू तो नीचे कर लिया ...परन्तु उदय की अनदेखी और अपने वे ऑफ़ लिविंग एन्ड वेअरिंग के चलते केली ने ठान लिया कि वो भी भड़काऊ शहरी औरत बनेगी ताकि पति और समाज दोनों एट्रेक्ट रहे ....
खैर उदय के लिए केली हमेशा कानूनी रमणी रही.. क्यूँकि उसके कुछ चार ग्रामीण फॉर्म हाउस और अनगिनत देशी-विदेशी ट्रिप मौजूद है....और उदय कभी एक रमणी के पास में बनके रहना जानता ही नही था ....
शुभम के पैदा होने में भी कई किवदन्तियाँ है ...लेकिन वो आज भी पैरेंट एस्से में माता पिता का नाम मिस्टर उदय भान देशराज और मिसेज कल्याणी देशराज ही लिखता है ......
शुभम बहुत ही मासूम बच्चा है ...लेकिन मासूम उम्र में ही मुझे उसकी मासूमियत खोने का कर्रा खतरा है ....उसकी मेड उसी के सामने कपड़े चेंज करती है ...कई बार उसने मेड और रसोइये को पैरेंट की एब्सेंस में चिपके हुए भी देखा है .... उसके सवाल भी बचकाने परन्तु बड़े सजीव है ...
जैसे आप शेखर अंकल से मुँह क्यूँ मिलाती है ...वो आपके कपड़े क्यूँ उतारते है ...वगैराह
लेकिन उसपर लेट नाईट ढिक-चिक पार्टीज का वयापक असर है ...हाँलाकि उसकी इन पार्टीज पर इंट्री बैन है ...लेकिन बैन सदैव भारतीय समाज में उत्सुकता का आयाम स्थापित करता है .... नंगापन ..फूहड़ता ..शार्ट काम -क्रीड़ा , हस्त कलाएं आदि आदि ...उसने सजीव देखी है और उन्हें समझने का प्रयास किया है .....
घर में एक मन्दिर भी है ...जहां अक्सर पूजा होती है ...कुछ देवताओं की तस्वीरें भी है जिन्हें कभी हवा ही टेढ़ा करती है और हवा ही सीधा कर जाती है ... जमील शरीफ ड्राइवर है उदय के ...उम्र पक चुकी है लेकिन कर्रे औरतबाज है ...जब शुभम को स्कूल छोड़ते है तो ब्लूटूथ पर अक्सर गर्म बिस्तर वाली बात करते है .....
शुभम बदल रहा है ...जबकि जिस बस्ती से वो स्कूल होकर जाता है उस बस्ती के उसकी हम उम्र के बच्चे या उससे थोड़े से सयाने बच्चे ...मिटटी -गिट्टी से खेलते है ...साईकिल का उतरा पहिया चलाते है ..कंचो को मिट्टी में सान कर चूसते है ...नंगे -भुतंगे घूमते है ...और एक दूसरे के बालों में मिट्टी छिड़कते है .....लेकिन शुभम बालों में जैल लगाने लगा है ...पापा का परफ्यूम ...और उनकी तरह मिरर में देख सिटी बजाना सीख चुका है .....
आज जब उसके पापा उसकी मम्मी के अब्सेंस में दो मिसेज को घर लाये तो उसने इसका मतलब जानना चाहा ...उसे होम वर्क करने की बात बोलकर टाला गया ...उसने एक आदमी -एक औरत का खेल लगभग देख लिया था ...लेकिन एक आदमी और दो औरत का अभी बाकि था ....
उसने दरवाजे के की होल में आँख लगाई ...अंदर एक मिसेज ड्रिंक का गिलास हाथों में लेकर सिगरेट के कश खींच रही तो दूसरी उसके पापा के आगे कपड़े चेंज कर रही थी ....तभी उसके पापा तपाक से बोले ....
" ओह्ह..लेकिन क्लीवेज शो नही हो रहा मिसेज ओबरॉय..."
ये लफ्ज नया था शुभम हेतु ...तभी मिसेज ओबरॉय ने नाइटी को सीने से नीचे सरका दिया और बोली अब तो दिखा न क्लीवेज ?
यही क्लीवेज उसे होम वर्क की कॉपी चेक करते हुए ... उसकी मेम का अचानक साड़ी का पल्लू सरकते हुए दिखाई दिया तो शुभम की शिकायत प्रिंसिपल से हुई ...प्रिंसिपल मॉडर्न थी ...उसने शिक्षिका को इसे लाइटली लेने को कहा ...और कहा " बि मॉडर्न सुमन "
ये सब तो ठीक है ...नंगे तो हम खजुराहों से हैं ... साड़ी हो या बुरखा यदि सोच नंगेपन पे उतर आये तो इनका उतरना कोई गुनाह या पाप नही लेकिन शुभम जैसे मासूम बच्चे अगर बचपन से ही ये लफ्ज सीखने लगे तो ...मुद्दत से इस देश को सींचते और सन्तुलित करते राम , अल्लाह , ईसा, महावीर , बुद्ध , नानक आदि के नामों का क्या होगा ....?
" मिस्टर जुनैद.... ये सारे नाम पॉलिटिकल डिबेट या गरीबों के लिए बने है ...वी आर मॉडर्न , अरबन , रॉयल एंड हायर अंडरस्टैंण्ड ?
"मिसेज केली ने ये जवाब चुपके से तब मुझे दिया था जब वो एक धार्मिक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि और ट्रस्टी बनकर माँ सरस्वती के आगे रखे दीप को प्रज्वल्लित कर रही थी ....इंगिलश में उनकी घिसी कमांड उन्हें वास्तव में रॉयल प्रदर्शित कर रही थी ...भगवान को धोखा तो हम सब देते है लेकिन बचपन को अब भी तबाह हम सब नही महज कुछ करते है इतना मैं समझ चुका था .....नवाजिश
#जुनैद............
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