Monday, 15 October 2018

कम्मो

" अबे ...तैयारी का तौलिया हटा ये बता ...कमरिया हिलाई कौन रही है आज .....कसम से जीत्ते जी घायल कर गी थी पिछली बाली तो ...!

" यार कोई बिजली डंडेपुर वाली है ...सूना बड़ी करारी है ...और बेहद चिकनी भी ...!

" बस भय्ये खाँ आगे न बोल ... लीकेज का मरीज हूँ ...मंत्री जी को अल्लाह और दस साल जितवाये  ईमान से जब से मंत्री बने हैं ...तब से हम उल्झों की सद्दी -मांझा दोनों तना रहता है ....रात को मिलते है ...मंत्री जी की बर्थ डे पार्टी में ..मैं जरा जौहर की नमाज हो आऊँ ....

" अबे हम लेट आयेंगे भैय्ये ...वो क्या है ..लुगाई का फास्ट है आज करवाचौथ का !

रात की पार्टी पार्टी की सारी तैयारियाँ हो चुकी थी ...कोई भी मीडिया कर्मी और कोई भी इंसान के कैमरा और  मोबाइल चमकाई पर कुटाई का दावा था ....मंत्री जी ने सुबह पहले पूजा अर्चना की ...उसके बाद हस्पताल और गरीब बस्ती में फल बँटवाये ..बस्ती की समस्त कन्याओं को  दिन का भोजन करवाया...अपने स्वर्गीय पूज्य माता  - पिता की फोटों में झुककर उनका पैर छुआ ...आज उनकी तस्वीर से महीने भर की सूखी फूलों की माला भी हटाई गई ...अपनी लुगाई के साथ भगवान भोले के भी दर्शन किये...दिन भर नंगे बदन एक धोती में घूमे ...गले में रुद्राक्ष धारण किया था ...माथे पर चन्दन गेरू ..इस कारण थोड़ा जुकाम हो चला था ...बीवी ने भण्डारघर ले जाकर चुपके से दो पैग रम के गले नीचे करवा दिए तो थोड़ा आराम मिला ...कुछ देर बाद ...शौच को गये तो देखा कम्मो फर्श साफ कर रही थी ...कम्मो को आज फिर दाब लिया ...और वायदा किया कि आज सोने की बालियाँ देंगे ...कम्मो ने हथियार डाल दिए ...उसे पता था ये पूर्व की भाँति वाला आश्वाशन हैं ..आखिर नेता जो हैं ....कम्मो और शौच से फारिग होने के बाद ....शहर से आई बिटिया को ...उसकी नई कार की चाबी दी ....सास को सोने के तार वाली बनारसी साड़ी ...साले को म्युन्सिपालटी का टेंडर दिलवाया ...

तभी नजर पड़ी ...एक 14 साल की सजी सुथरी लौंडिया पर -

" अरे हल्दू कौन है बे ये लौंडिया ...?

" हजूर कम्मो की लौंडिया है ...."

" अबे कस बल के खूब बढ़ी हो गई है ...जरा बुलवाइयो तो मेरे कने !"

" क्या नाम है री तेरा ...? "

" जी पूजा......तभी कम्मो इंट्री करती है ...

" कंजरी तू यहाँ क्यूँ आई कुत्ती ..कहा था न यहाँ मत आइयो !

" अरी कम्मो क्यूँ डाँट रही हो लौंडिया को ...प्यारी है ...हमें पसन्द है ...

" देखो मंत्री जी ...हमारी कोख का बीज है ..कुचलने न देंगे ...हम छोड़ देंगे आपकी ये मजूरी नी तो !"

" अरे कम्मो ! तू तो खाली ख़ौलिया रई है री ...हम तो ऐसे ही तारीफ़ कर रिये थे .....अच्छा इसे लेकर आइयो शाम को पार्टी में .....

रात को जब नंगा नाच शुरू हुआ तो ...मंत्री की लुगाई  पैर  से फर्श की जगह भीखू ड्राइवर के पैर  को थाप देंने लगी ...मंत्री की लौंडिया अपने शहरी बॉय फ्रेंड के साथ फुल वोडका के नशे में धुत ऊपरी  मंजिल के कमरे से कपड़ो के जंजाल से मुक्त होकर  ...काँच की धुन्ध पोंछ -पोंछ कर कभी-कभी नीचे देख ले रही थी ...क्यूँकि बॉयफ्रेंड मजे लेकर नीचे वाली बिजली के साथ जो कमर मटका रहा था....

मंत्री नशे में टल्ली थे और अब तलक हवा में चार राऊँड फायर भी ठोक चुके थे ....नचनिया बिजली को उनके अलावा सिर्फ उनके साले की छूने की अनुमति थी .....मंत्री इस कदर धुत हो चुके थे पीकर की दो बार ...कांदा ..सीताफल ले लो भैया ...ताजा चकोर खेत का माल है भैया ... भी चिल्ला उठे ...वो तो पी. ए ने मंत्री को बाजू पकड़ किनारे कर लिया वरना सब जान जाते आज का मंत्री ...जुनैद पठान की तरह कल का फुटपाथिया कुंजड़ा रह चुका है .....

खैर तभी मंत्री की नजर लपलपाई कम्मो की लौंडिया पर ...जो उस वक्त पंडाल के किनारे खड़ी आइसक्रीम चूस रही थी ...उसने जलाल लठैत को बुलवाया और लौंडिया ऊपर की मंजिल की ऐशगाह में मंगवाई ....

कुछ देर बाद मंत्री को लठैत ने आकर कहा  ....

" हजूर जाइए बेहोश दबा आया हूँ  बिस्तर में ...जाइए कच्ची -कली का रस चूस लीजिये और उसे फूल बना दीजिये ....लेकिन...लेकिन वो...वो..  ऐशगाह में तो.. हजूर भण्डार घर के बाजू वाले गोदाम में गेर आया हूँ लौंडिया हजूर...

आवाज इतनी तेज थी गाने -हुल्लड़ की मंत्री जी ये तो समझ गए कि लौंडिया ऊपर पहुँच चुकी है ....वो लड़खड़ाते जैसे -तैसे ऐशगाह पहुँचें...उन्होंने झटके में कमरा खोला ...कमरे की बत्ती बुझी हुई थी ....उन्होंने कुछ आँखों का साईज बड़ा कर देखा तो पाया बिस्तर में उनका शिकार नंगे बदन लेटा हुआ है ....उन्होंने एक पल में अपने कपड़े तन से अलग कर दिए ....और उस शिकार पर गड्डी फेंट कर पत्ता फेंकने ही वाले थे तभी .....एक आवाज सुनाई दी .....

" मंत्री जी .....बिटिया रानी है वो ....छुइयेगा नही वरना अधर्म हो जायेगा ...लेकिन मंत्री ने कुछ न सुना ....तभी उनके पीठ पर वार हुआ ...वो झुके थे और तिलमिलाते हुए खड़े हुए ...कमरे की बत्ती खटक से जली तभी ....उनकी नजर अपनी बेटी के बेलिबास जिस्म पर टकराई ...उनका सारा नशा फरार हो गया .....और उन्होंने झट से दुशाला खींच बेटी पर चढ़ा दिया .....और अपना मुँह दीवार में गड़ा के खूब दहाड़े से रोने लगे ....

जब कुछ शांत हुए तो ...कम्मो के पैरों पर गिर पड़े ....ओ री कम्मो ....ओ देवी ...तूने आज मुझे अधर्म से बचा लिया री ...मैं तेरे पैर धोकर पियूँ तो वो भी कम है ....माँग क्या माँगती है ...सब तेरे नाम लिख दूँगा ...बोल री बोल कम्मो.....

" मंत्री जी ! पहले मन किया ये अधर्म होने दूँ ...क्यूँकि जब मेरी बच्ची पूरे हल्ले में न दिखाई दी तो समझ गई कि वो कहाँ होगी ...मन किया ये अधर्म होने दूँ सुना आपने ....लेकिन फिर सोचा जैसे मेरी बच्ची का कोई कुसूर नही ...वैसे आपकी बच्ची भी बेकसूर है ...मंत्री जी माँ दुर्गा को मत्था टेकते है आप ...अपनी माँ की तस्वीर को पूजते है आप...लेकिन किसी मासूम गरीब औरत और उसकी बेटी में भी तो दुर्गा वास करती है .... मेरी मजबूरी थी चुप रहने और आपको अपने जिस्म में सहने की क्यूँकि मेरा खसम किसी लायक का नही ....और इस गरीबी में चार औलादें और एक शराबी पति कितना भी हलाल काम कर लूँ नही पाल सकती ....लेकिन अपनी बच्चों को हलाल से पाला है मंत्री जी ...इनको कुछ बनाऊँगी ताकि मैं आपसे बरी हो सकूँ और मेरी चिता मुझे खाने में संकोच न करे .....

और अगर मुझे कुछ दे ही सकते है मंत्री जी तो आज से सौगंध लीजिये कि जिस माँ -बहन ने आपको ये कुर्सी अपनी इज्जत और अपने भविष्य की सलामती वास्ते सौंपी है  आप उनके विश्वास को भी उसी तरह बनाये रखेंगे और उसकी शुरुवात आज से कीजिये ...किसी की बहन किसी की बेटी को यूँ नंगा नाच करवा के आपकी उम्र तो बढ़ने से रही आपके पाप जरूर बढ़ गए है .....प्राश्चित कीजिये मंत्री जी ........

मंत्री ने अपने कपड़े पहने ....और इस बार  नीचे आकर पूरे होशोहवास में तीन फायर हवा में दागे ......उनकी चिल्लाने की आवाज में मुझे सिर्फ इतना ही सुनाई और समझ में आया ...कि अब औरत इस शहर में महफूज और रुतबे वाली बनकर रहेगी ....लेकिन अफ़सोस सिर्फ इतना है कि ये सब इसलिए नही बदला कि जनता के रहनुमा का हृदय परिवर्तन जनता और औरत के दर्द को देखकर हुआ .....बल्कि जब खुद पर बीती तो शैतान, साधु बन गया ...तो इसका मतलब हम या तो फिर ऐसा ही कोई हादसा घटने की उम्मीद करें या फिर ये उम्मीद त्याग.. ये सत्य भूला दें कि  औरत जनतन्त्र में सामजिक न्याय और प्रतिष्ठा में पुरुष के बराबर का हक रखती है .... नवाज़िश
#जुनैद........

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