" जी मैं कवि पुष्पक उर्फ़ ' भँवरा ' ! "
" तो मैं क्या करूँ ?"
" जी लेखक भी हैं ...और गीत , भजन भी गा लेते है "
" तो मैं क्या करूँ ...?
" जी आपकी प्रोफाइल देखी थी फेसबुक में ...आपने लिखा था मेरा वर कवि ही होगा ...तब आ गए तीन मील आपका पीछा करते हुए ...वो क्या है माता रानी के आशीष से रिश्ते तो भतेरे आते हैं लेकिन हमें जो पसन्द है वो सारे गुण आप में है !"
वेट ..वेट ...वेट .... घनचक्कर हो तुम ..कवि मेरा होने वाला मंगेतर है और तुम ये पढ़ कर लग गये पीछा करने ....चलो दफा हो लो यहाँ से वरना वो देखो सामने तुम जैसे कवियों को बड़े घर पहुँचाने वाला खड़ा है !
मतलब आप शादी न करेंगी हमसे ...मतलब हम जान दें दे ...मतलब आपके मुंह पर तेज़ाब फेंक दें ...बोलो क्या चाहती हैं आप ....?
व्हाट ..आर यू सिक ...हाउ स्ट्रेंज .. सायको हो तुम..न जान न पहचान..मैं तेरा मेहमान...जाते हो या आवाज लगाऊँ ?
जा रहें है आज ....पर कल जब आप सुबह 4 बजकर 50 मिनट का अलार्म ऑफ करेंगी ..उसके बाद .5 :30 पर बाथ लेंगी ...उसके बाद 6 बजे आप योगा करेंगी ...6:45 पर आप पहली लोकल पकड़ेंगी ..और 7:15 पर आप म्यूजिक क्लास अटेंड करेंगी ... और 8 बजे फिर आप ब्रेक फ़ास्ट करने सन् वे रेस्टोरेंट जाएँगी और....
इनफ ...हु आर यू ...और तुम मेरा रुटीन कैसे जानते हो ...बोलो ...कौन हो तुम ...माय गॉड आर यू मेड ...?
" जी ! मेड नही दीवाने है आपके ...बस आपकी च्वाइस नही पता थी लौंडों में ...तो आपने कवि वाली बात फेसबुक में पोस्ट की तो हमनें जाना आप तो सिरफ़ हमारे लिए ही बनी है ......
गेट आऊट ...एंड गो टू हेल ...हे हवलदार जी ...प्लीज इधर आइये ....प्लीज हेल्प मी !!!!
और उसके बाद वो लड़का वहां से फरार हो गया मुझे कुछ दो दिन लगे इस इंसिडेंट को भूलने में ....
मेरा नाम मीनाक्षी पारेख है ...घर में सब मुझे मीना और मन्नू पुकारते है ...पापा की सबसे लाडली और मम्मी की सबसे प्यारी गुड़िया ...मेरे बाद एक छोटा भाई है जो क्लास 12th में पड़ता है ....मेरा एक बॉय फ्रेंड भी है ... ..हम एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं ...और जल्द ही शादी करने वाले है... मैं एक राइटर हूँ और मेरी एक ही तम्मना है कि एक दिन मैं लिटरेचर का बुकर अवार्ड अचीव करूँ ...
एक लड़की के तौर पर मुझे ये छोटा -मोटा टॉर्चर और कमेंट्स अक्सर सुनने पड़ते है ...और अब इनकी हेबीचुअल हूँ ..बट ये साइको लड़का मेरी लाइफ का अब तक का सबसे बड़ा टॉर्चर था .. यही कोई 5 या 7 मिनट बात करी उसने मुझसे और मुझे लगा जैसे मैं किसी आइसोलेटेड जॉन में हूँ और ये इंसान मुझे नजरों और हाथों से चीर -फाड़ रहा है ...कितना अजीब था वो बिल्कुल जैसे कोई जानवर ...
.मैं शहरी लड़की हूँ और अजनबी लड़कों से रूड बिहेव इसलिये करती हूँ ताकि कोई मुझपे हावी न हो और न मुझे कमजोर समझे ....
एक दिन जब मैं घर से इंस्टिट्यूट जा रही रही तभी पीछे से किसी ने मुझे आवाज दी और मेरे मुँह पर एक बॉटल से कुछ लिक्विड फेंका .........मैं चिल्ला उठी .....तभी वो फरार हो गया ....मैंने मुँह पोंछा तभी मेरे फोन की रिंग बजी .....मैंने फोन पिक किया-
" देखा जानेमन कितना वक्त लगता है तेजाब से चेहरा बदलने में ....उस बॉटल में अगली बार पानी नही होगा ....जिस सुंदरता को मैं नही पा सकता उसे किसी और की भी नही होने दूँगा ....समझी ! या तो मुझसे शादी कर ले या अंजाम भुगतने को तैयार रह ....और सुन पुलिस मेरा इसलिए कुछ नही बिगाड़ सकती क्यूँकि पुलिस मुझे ढूँढ ही नही सकती "
मैंने सीधा ऑटो पकड़ा और सीधा अपने बॉयफ्रेंड के ऑफिस गई ....उसको सारी बातें बताई ...वो मुझे लेकर सीधा पुलिस स्टेशन गया ...पुलिस इन्वेस्टिगेशन में लग गई ...पूरा हफ्ता बीत गया न वो पकड़ा गया न उसका कोई सुराग हाथ लगा ....पुलिस ने ढांढस दिया की अब उसको पता चल गया है कि हम उसके पीछे है अब वो आपके आस-पास फटकने की कोशिश नही करेगा ....
तीन दिन बीते ...रात तीन बजे मेरे फोन की रिंग बजी -
मैंने फोन पिक किया -
" वेरी हॉट ...बहुत कातिल लग रही हो इस पिंक नाइटी में जानेमन ... ?
" तुम्म्म ...तुम्म्म....तुमको कैसे पता कि मैंने .....
" कुतिया ..मुझे तो तेरे अंडरगारमेंट्स का रंग भी पता है ....साली देख लिया पुलिस के पास जाकर ...कुछ भी उखाड़ नही पाई वो मेरा लेकिन तू गई समझ अब.....
" हेल्लो ..हेल्लो ...(फोन डिस्कनेट )
उस दिन के बाद मैं घर में कैद हो गई ...मेरी मम्मी ..पापा ने मुझे बहुत सहारा दिया मगर उस लड़के का डर मेरी हड्डियों तलक में घुस गया था ...और पहली बार पता चला कि जिस शहर की मॉडर्न लड़की होने का मुझे प्राउड और सेफ्टी कॉम्पलेक्स था वो सब एक गन्दे ..नीच ..और दिमागी बीमार लड़के की वजह से टूट गया ..
और तब समझी .. लड़की शहर की हो या किसी देहात की लड़की हमेशा लड़की होती है या हमेशा असुरक्षित ...
..मेरे चेहरे की हँसी जाती रही ,, भूख प्यास उड़ गई ... साइकेट्रिस्ट भी मेरी कोई हेल्प न कर पाया ...और न कोई एलोपैथिक दवा मुझे पहले जैसा बना पाई ...
जब उसके डर के आगे मैंने घुटने टेक दिए तो मैंने एक चाकू लिया और अपनी कलाई की नस काट ली ...मैं दर्द से तड़पते रही और मेरी टकटकी दरवाजे की तरफ थी मैं चीख कर हेल्प बुला सकती थी लेकिन.....
विक्रम मीना का बॉय फ्रेंड जिससे मीना की शादी होने वाली थी उसने मीना का लिखे नॉवल का आखरी पन्ना पड़ा तब सब कुछ उसकी समझ में आ गया और उसने तब अपना सर पकड़ लिया ..जहाँ मीना ने लिखा था कि -
" जब मुझसे (शालनी ) उस लड़के के डर और उसकी डर से ये कैद की ये जिंदगी बर्दाश्त नही हुई तो मैंने एक चाकू उठाकर अपनी नस काट ली ..मेरे नस काटते ही कवि ने दरवाजा तोड़ा और अंदर आ गया और उसने मेरे हाथ में अपना रुमाल बांधा और मुझे गाड़ी में बिठाकर पहले हॉस्पिटल ले गया फिर उसने मुझे खुशखबरी दी और उस सायको लड़के की लाश को दिखाया जिसने प्यार में असफल होने में अपनी जान दे दी थी ....मैं जी उठी और मेरी जिंदगी नॉर्मल हो गई ...और मैं और कवि हमेशा के लिए एक हो गए ।
असल में साइको वो लड़का नही बल्कि मीना थी .... जो अपनी कहानी को लिखते -लिखते उसकी नायिका का किरदार खुद जीने लगी...लेकिन कहानी का अंत नायिका की नस पर टिका था जिसे आकर नायक बचा लेता है लेकिन विक्रम इस कहानी का पात्र नही था ....इसलिए मीना को न बचा पाया ।
....
इंसान को महत्वकांक्षी होना चाहिये ...सपने भी देखने चाहिये ...लेकिन किसी भी सपने को सच करने में सिर्फ अपना बेस्ट देना चाहिये बाकि सब मालिक पर छोड़ देना चाहिये ...एक बुकर अवार्ड का ही जूनून मीना को मौत की गहरी नींद सुला गया ....पागलपन और दीवानगी एक ही सिक्के के दो पहलू है और इंसान तब ही इक बेहतर और एम्बिशियस जिंदगी जी सकता है जब सिक्का हवा में ही रहे ....
लेकिन जिंदगी सिर्फ एक बार मिलती है जिसे मीना अपने जूनून और पागलपन के चलते एक जवान उम्र में खो बैठी ...नवाज़िश
#जुनैद.......
सशक्त हस्ताक्षर
Junaid Royal Pathan
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