" भारत माता की जय.... वन्दे मातरम् ... संस्कृति विजयं भवति .....भारत माता की जय..........
" हाय ...अब क्या होगा जुनैद ...?
" अब क्या होना है ...ये साले कूटेंगे तबियत से ..मुर्गा बनाये अलग से और ले कालिख -वालिख ...लोटा लस्सन ...?
" तू टिके रहियो ..बरना ...ये इमां से बिखेर देंगे जिसम मेरा ...."
" आज ही जे मुसीबत आनी थी ....?
" तब के रिया था यार गलत दिन का प्रोमिस कर बैठा ...आज भेलेंटाइन डे है कुछ रौला टेका जुरूर होगा !"
" पकड़ ...पकड़ साले को ...'
क्यूँ बे नाम क्या है तेरा ..?
"जी ! जुनैद रॉयल पठान "
" कहाँ से दिख रिया है बे मनहूस तू रॉयल ..मतलब जे बोल तू मुसलमान है ..और ये घूँघट गगरी का नाम चट बता चल ..."
जी...ये...ये.....
मेरे जुमला पूरा करने से पेले मेरी सिट्टी बज गई ...
" जी ! सपना "
" ले बेटा ...ले ...मतलब लव जिहाद ...ले ..फोटो ले बे ..और वीडियो भी बना ...साले हरामजादे हमारे ही धरम की लौंडिया मिले है तुम्हे ...बेटा लम्बा जाएगा ..कल हर अखबार और टीवी पे नजर आएगा ...और तू ...साली मर गयें है अपने धरम के लौंडे जो इन विदेशियों ..विधर्मियों के संग पारक घूम रही है ...
" तो क्या अगर ये हिन्दू लौंडे संग इस पारक में बैठी होती तो क्या तब आपकी संस्कृति न फिसलती ..तब क्या छोड़ देते इसको ...तब अखबार टीवी वाले न बुलाते ...
" अबे खामोश रे बे बरना डण्डा डालूँगा कहीं से और निकालूँगा कहीं से ..."
" नही ...कौन सा अब छोड़ दोगे ...जवाब तो दो ..या वो लाइसेंस तो दिखाओं जिससे तुम्हे इस पारक में छापामारी करने और हमारी इन्सल्ट करने का वीजा मिला है ....'
एक घुमा के दिया कान के नीचे उसने ...
" ले मिल गया लाइसेंस ...और दिखाऊँ ...."
" हाँ दिखाओ न ....और दिखाओ और तब तक दिखाओ जब तक या मैं देखने लायक न रहूँ या आप दिखाने लायक न रहें .........
" अबे जादा बोल रिया है एक तो हमारी संस्कृति ख़राब कर रिया है और ऊपर........
" नही किस संस्कृति की बात कर रहें है आप.....संस्कृति का शाब्दिक अर्थ या परिभाषा भी ज्ञात है आपको ....या फिर कोई एक भी ऐसा उदाहरण जो हमारे सार्वजनिक पारक में बैठने और कोई आपत्तिजनक हरकत न करने पर भी संस्कृति ह्रास का कारण बना हो ...?
" अबे तू विधर्मी हमें अब टीच करेगा पेले तो यहाँ पार्क में हिन्दू लौंडिया को ले के आता है फिर हमसे ही जवाब माँगता है ...!
" कानून के कौनसे भाग ..अध्याय ..उप खण्ड ..अनुच्छेद में लिखा है कि दो परस्पर विपरीत लिंगी ..विपरीत धर्म के लोग भारत के किसी सार्वजनिक स्थान पर बैठ कर बातें नही कर सकते जबकि महान भारत की संस्कृति और उसके संविधान में ये जरूर लिखा है कि समता और स्वतन्त्रता हर भारतीय का मौलिक अधिकार है ...
" अबे ..लो ...ये हरामजादा अब हमें टीच कर रहा है ....अबे देख क्या रहे हो बताओ इसको कि संविधान में क्या और लिखा जाना अभी बाकि है .......
तबियत से कुटाई हुई मेरी ...और ऐसे ही अन्य लोगों की ...जो भारत की संस्कृति में आये इस नवसंशोधन अथवा मोडीफाईड इंसिडेंट से अन्जान थे ......हर तरफ अफरा -तफरी ..भागम- दौड़ ...चिल्ला- पुकार ... कहते है पिछले साल इससे दस गुना जियादह हुआ था ...लेकिन फिर भी पुलिस की कोई व्यवस्था नही ...लेकिन जब हर साल ये होता है और हर साल 14 फ़रवरी भारत में इश्क बनाम संस्कृति का दंगल होता है तो आखिर फिर क्यों लोग इस पारक में आते है ...जबकि इश्क हर साल पिटता है और स्वयंभू संस्कृति हर साल उन्हें पीटती है ...
नल- दमयंती भी ऐसे ही निर्जन स्थानों में ही मिला करते थे ...शकुंतला और दुष्यंत का प्रेम संयोग भी ऐसे ही जवान हुआ ...मनु -श्रद्धा पर कामायनी का स्रोत ही नैसर्गिक मिलन है ...काम -रति... विश्वामित्र -मेनका आदि ...यदि तब संस्कृति इसलिये नही ध्वस्त नही हुई कि उस समय सेंट वेलेंनटाइन नही थे या अंग्रेजी कैलेंडर की 14 फरवरी तो फिर उस दौर तेजाब भी तो नही था ....
क्यूँकि तपाक से जब सपना ने चेहरे से अपना दुपट्टा हटाया ....लठैतों ने उस के चेहरे से जी मिचलाकार और कुछ भय से अपनी आँखे हटा दी
" बोलो ....कौन मर्द है तुममें से जो मुझ हिन्दू लड़की को अपनी धर्मपत्नी बनायेगा...बोलो कौन अपनी संस्कृति के मान को बचाने हेतु आगे आएगा ...बोलो कौन थामेगा मेरा हाथ ...बोलो ...बोलते क्यूँ नही ......
खैर मैं जमीन पर लहूलुहान था और सपना एक पेड़ के तने में अपना सर धाँस कर रो रही थी ....
मेरे साथ पढ़ती थी.. .बहुत खूबसूरत थी ... अपने ही मजहब के एक लौंडे से इश्क करती थी ...एयर होस्टिस बनना चाहती थी ...लेकिन उसके कई एकतरफा आवारा आशिकों में से एक ने एकतरफा प्यार में मिली न से उसका चेहरा तेजाब से बदल दिया ... और जिसने जिंदगी भर सपना का हाथ पकड़ साथ निभाने की कसम खाई थी उसने भी रास्ता बदल दिया ... दोस्त हूँ लेकिन मैं भी उसको एकतरफा चाहता था ..लेकिन इतनी कुव्वत मेरे अंदर भी नही कि अब उससे निकाह या कोई वायदा कर सकूँ लेकिन एक वायदा कभी किया था उससे कि एक दिन तुम्हारे साथ नॉबेल पार्क में 14 फ़रवरी यानि वेलेंटाइन डे के दिन डेट करूँगा .....
उसे ही निभाने चला आया था .....लेकिन पता नही कब संस्कृति भ्रष्ट हुई कब वो कलंकित हुई ...कब उसका उद्धार करने का प्रण लिया गया और कब वो उसके उद्धारक ऊपर से पुर्तगाली कमीज और नीचे से अमेरिकन जींस पहने किसी अन्य शिकार की तलाश में निकल पड़े ....नवाजिश
#जुनैद............
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