" हाय रे मेरी किस्मत ...विमल मैं तो थक गई बेटा अब तू ही समझा आकर इनको ....फिर से भूख हड़ताल पर बैठने को बोल रहे हैं ..बेटा न शरीर में खून है न जिस्म में जान और देख बने है बड़े समाज सुधारक ......"
" यार तुम दोनों बुड्ढे बुढ़िया का ये रोज का नया ड्रामा सुन कर मैं तो तंग आ गया हूँ ....हफ्ते भर तक कोई उम्मीद न करना मेरे आने की ...रिया के एग्जाम है और तुम्हारी बहू की ऑफिसियल ट्रिप हैं सिंगापुर की .....हफ्ते बाद आता हूँ ....अभी रख रहा हूँ ....बॉय !
" सुनीता रंजन ...श्री कैलाश रंजन की धर्मपत्नी ..जिसने अपने जीवन में सिर्फ एक ये ही सुख देखा कि उसको सिर्फ भर पेट खाना मिला ...वरना आदर्शवादी और तनख्वाह के इतर एक पैसा भी हराम का न लेने वाले ...उनके पति कैलाश रंजन सुनीता से और अपने जीवन से भी जियादह तरजीह अपने .. खोटे उसूलों को देते हैं ...अब खोटे इसलिए कि उनका मानना है कि देश तभी बदल सकता है ..जब इसका नागरिक बदलने का संकल्प ले ...उनका तो यहाँ तलक विश्वास है कि सिर्फ इंसान ही नही पत्थर मिट्टी तक में जान होती है अतः हमें उनका सम्मान करना चाहिये ....और उनकी रक्षा करनी चाहिये ...
लौंडे मजे लेते है उनसें ...मैंने कई बार देखा है जैसे ही वो गली पार होते है लौंडे एक साथ चिल्लाने लगते है .....इंकलाब जिंदाबाद ...
इकलौता बेटा है उनका ...विमल जो बाप के इन फिसड्डी उसूलों से इस कदर खुन्नस खाकर पला है कि उसे अपने बाप से एक नफरत सी है ...उसे तो यहाँ तलक लगता है कि परमात्मा हर योनी के जीव निर्मित करे परन्तु उसके बाप वाला साँचा ही तोड़ दे ....
विमल प्रखर बुद्धि का था इसलिए एक आद कम्पीटीशन कूट कर शहर शिफ्ट हो गया ...और बस्ती की ही एक लौंडिया से भाग कर कोर्ट मैरिज भी कर ली इत्तेफ़ाकन लौंडिया भी मेधावी थी तो उसे भी एक बेहतर जॉब मिल गई ...जिसका नाम सुधा है ...5 साला बेटी रिया जिसको सिर्फ दादा -दादी ने एक बार देखा है अक्सर अपने स्कूल की ग्रेमर बुक में एस्से लिखते टाइम अपने दादा-दादी का नाम तलक भूल जाती है ...
कैलाश रंजन इसलिए व्यथित है और हुक्का -पानी बन्द कर इसलिए बिन पंडाल बैठने को राजी हो गए हैं क्यूँकि उन्हें अपने कस्बे मैं एक गर्ल्स डिग्री कॉलेज चाहिये ....और उन गर्ल्स हेतु जो उनकी लौंग बराबर भी इज्जत नही करती ...पीठ ..पीछे पगला ..पकाऊ , सठियाऊ वगैरह वगैरह अलहंकारों से उनको नवाजती है ....बस्ती की गर्ल्स को तो ये तलक लगता है कि ये दिमागी पैदल बुड्ढा उनकी आजादी ही छीनना चाहता है ..उनका भय ये कि अगर ये कॉलेज बन गया तो वो सजेंगी- सँवरेंगी किसके लिए और किसके साथ क्लास बंक कर के हू तू तू करेंगी ...
एक भी आदमी साथ बैठने को तैयार नही है कैलाश रंजन के..कोई पत्रकार इसे न्यूज बनाने को तैयार नही ....कोई पॉलिटिकल पार्टी समर्थन देने को तैयार नही क्यूँकि कैलाश रंजन किसी भी पार्टी की भूमिका में अभिनय करने को तैयार नही .....
आज तीन दिन हो गए है उपवास के ...जहाँ बैठे है उसी के सामने एक बावड़ी हैं जहाँ मुहल्ले की लुगाइयाँ मुँह फुलाए हुए है ...क्यूँकि बुड्ढे के सामने रात के अफ़साने और गर्म बिस्तर की दास्ताँ ...इसकी चुगली उसका चक्कर ...अब सब कुछ लॉउडली कह सुन नही पा रही है ...
लेकिन सच में तीन दिन में टूट गए हैं ....बीवी तीन दिन मुँह फुलाए रही लेकिन अब साथ ही बैठ गई है ...उसने भी पति के बिना अन्न का दाना मुँह में लिया हो तो खून चखा हो अपनी कोख का ....
आज पांचवा दिन है.. कैलाश अब उठ भी नही पा रहे हैं ..पसलियाँ गोश्त छोड़ने लगी है ...जितने ओंस चर्बी बची थी वो भी जिस्म चाट गया ...मुहल्ले का एक काला कुत्ता भी अब वहीँ ढेरा डाल चुका है ..कैलाश ने जिंदगी में बेसबब अनशन किये है लेकिन सबका हासिल जीरो निकला ..पहले गंगा की सफाई ..फिर बाँधों का विरोध ..साम्प्रदायिक उन्माद के लिए कड़ा कानून ..आदि आदि उनके असफल अनशन रहें है,, जिस पर उन्हें आश्वास्नों की झूठी घुट्टी और जूस पिलाकर उनको उठाया गया ...लेकिन इस बार वो टूटना नही चाहते .....
आज बेटा भी पहुँच चुका है ...और बहू और पोती भी ...बेटा ,बीवी को एक वीकेंड हॉलिडे एन्ड पिकनिक टाइप बहाने से साथ ले आया ...लेकिन अब उसकी भी हिम्मत नही कि वो आगे बढ़के बाप को कहे कि बाबा जिद छोड़ो ...क्यूँकि उसे अपनी प्रेस्टीज खोने और लोगों की मुस्कुराहट और मजे लेने की टेंडेंशी भी चुभ रही है ....बहू ने मुँह बना लिया है ...पोती ,माँ का हाथ छुड़ाकर दादा के पास टकटकी बाँधे उन्हें घूर रही है ....लेकिन दादा बुझी आँखों से पहचानने की कोशिश तो कर रहें है लेकिन राम संग बिना प्रतिकार का वनवास झेलती सीता अर्थात सुनीता गुजर चुकी है ....
जब कुत्ते के मुँह सूंघने पर भी वो उठी नही ....तो बेटे के मुँह से एक आह निकली ....और वो सबकी परवाह किये बिना माँ के पास जा पहुँचा ...उसने माँ की लाश को सीने से सुलगाया ...कुछ चीखा और फिर रोते -रोते अपने बाप को जी भर कोसने लगा ....
अब भीड़ लगनी शुरू हुई ...एक टुच्चे पत्रकार ने फोटो लेनी शुरू की ...किसी ने "मी विथ डेथ बॉडी " वाली सेल्फ़ी भी अपलोड कर दी ... और देखते ही देखते छतरी और कैमरे वाला मीडिया भी सबसे तेज और सबसे पुख्ता की न्यूज ...बीच-बीच में कच्छे -बंडी , कंडोम के एड के साथ दिखाने लगा .....विभिन्न पॉलिटिकल पार्टीज के राष्ट्रनायक भी श्रधांजली हेतु पहुँचने लगे ...और विपक्ष पर एक नेमी सती और उसके आराध्य की जुगुप्सा से परिपूर्ण स्थिति पर उसे कोसने लगे ...
.तभी एक पत्रकार ने कैलाश के मुँह के आगे माइक लगाकर उनसे पूछना चाहा कि आप क्या महसूस कर रहें है ..तो पास बैठा कुत्ता भौंकने लगा ....और उसे दौड़ा दिया ....
कैलाश ने आखरी बार खुद के हाथ की माँसपेशियों को समेटा और एक ख़त अपने कुर्ते की जेब से बाहर छलका कर प्राण दे दिए ....कैमरे ऑफ़ ,,,नेता गॉन ...विमल ने खत उठाया और उसे खोला .....
" यदि मेरे साथ सुनीता भी न रही तो मेरा क्रियाकर्म करने हेतु पुत्र तुम अपना धन खर्च मत करना ...मेरे खाते में कुछ पैसे अब भी बाकि है ..इस बार मेरी मौत निश्चित है ...लेकिन एक निवेदन है पुत्र ! यदि मैं पहले प्राण दे दूँ तो सुनीता को भी प्राण त्यागने देना ...मैं मानता हूँ मैंने उसको जीवन भर कोई सुख नही दिया लेकिन कभी उसको दुःख भी नही दिया ...मेरे बाद तुम और तुम्हारी स्त्री उसके आने वाले जीवन हेतु एक गाली बन जाओगे ...वो पगली आज यहाँ इसलिए मेरे साथ नही बैठी है कि मैं यहाँ बैठा हूँ बल्कि इसलिए बैठी है कि तुम ये सुनकर यहाँ आओगे ...और उसे उसकी पोती और बेटे का मुँह देखने को मिलेगा ....बाकि रही ये हड़ताल तो ...मेरे पास वक्त बिताने के लिए अब कुछ नही बचा ...तुम्हारी माँ को तुम्हारी और पोती की याद में छुप -छुप कर रोते और तड़पते देखना मेरे बूते में नही है ...और मुझे तो तुम जानते हो मैं रोता नही बल्कि खोता हूँ ....ये कॉलेज इसलिए भी जरुरी था क्यूँकि अक्सर मैंने आते-जाते बेकसूर , मासूम लड़कियों को कॉलेज के लड़को के फिकरे और शरारत का शिकार होते देखा है जिसमें से तुम्हारी बीवी यानि मेरी बहू भी शामिल थी .......
कैलाश लुढ़क गए ...पीछे से खत विमल की लुगाई ने भी पढ़ लिया ....खैर आज बस्ती में एक के. एस. रंजन डिग्री कॉलेज है ... लेकिन किसने बनाया ये मुझे भी नही पता क्यूँकि सुना वो कुत्ता भी अब जिन्दा नही जिसने इंसानियत की बेहतरी के लिए एक सच्चे इंसान का साथ दिया था और उसकी मौत के बाद तलक कई दिनों वहीं बैठा रहा ताकि कैलाश की आत्मा को ये न लगे कि उसका साथ देने वाला कोई सच्चा इंसान न बचा ...नवाज़िश
#जुनैद.....
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