भाभी'ज को सेक्स सिम्बल बनाने में जितना बड़ा हाथ बी ग्रेड भोजपुरी सिंगर्स का है उतना तो सविता भाभी का भी नही ...
इन भद्र जनों को आपतकाल में भी भाभी'ज की चोली , जीन्स, घाघरा आदि की ठोस एवं विशुद्ध नाप पता रहती है ...इसके इतर हिलती खटिया, सरकती रजाई और चिपके तकिये के भी प्रयोगात्मक प्रत्येक कर्म का भी ये भशीला प्रजेंटेशन जानते है ।
जब हम चार मित्रों में से एक का ब्याह हुआ तो सब नॉर्मल था लेकिन आफ्टर सुहागरात के बाद वाली पार्टी में दोस्त सस्ती शराब पीकर महँगी नॉलेज प्रदान कर गया ...अपनी ब्याहता के साथ हुए काम मिलन को उसने हम तीन मित्रों के सामने शेखी में नंगा किया ... उस दिन के बाद हम मित्रों ने भाभी से माँ नामक सम्मानित शब्द को पृथक कर उन्हें भौजी कहना शुरू किया ताकि फिलिंग देशी बनी रहे ...
भौजी के भड़के रूप यौवन की दास्ताँ सुनकर हमने उस देवी को अपनी निर्मम परन्तु शालीन वासना के शीर्ष आसन पर विराजमान किया ...हम तीनों मित्र वैसे भौजी की बेहद इज्जत करते थे अतः अपने स्टैमिना के एक्रोडिंग ही हम उन्हें कम गन्दी नजरों से देखते थे ..शादी के कुछ वक्फे बाद भौजी पेट से हो चली ..और हम गुलफामों ने उन्हें अपनी स्नेह की शक्ति का साक्षात्कार कराने हेतु ...उनके घर के समस्त कार्यों को आपस में बाँट लिया ...शौचालय सफाई से कपड़ा धुलाई ..खाना पकाई ..सब्जी -भाजी उगाई हमने सब में अपना बेस्ट दिया ...भाभी इम्प्रेश हुई लेकिन सबसे जियादह किससे ये आज तक पता नही ....खैर जहाँ उन्होंने बच्चा दिया वही हमने उनकी बेटी का नामकरण किया ...वो मुस्कुराह रही थी तो हमने उसे "ख़ुशी" नाम दिया ...
दिन -मौसम ..बादल बदलते रहे और बदलता रहा भाभी के हुश्न का चक्का भी अब गदराई हुई भौजी पहले की अपेक्षा जियादह मादक लग रही थी ... उनके बाथरूम का प्लास्टिक वाला पाइप हम वीरों का स्वर्ग था उसी के नीचे बैठ चरस भरने की कवायद के चलते जैसे ही पाइप से बहते पानी में लक्स साबुन की सुगन्ध आती ...दौड़ लगा कर भौजी के दरवज्जे की डोर बेल बजा देते ...ताकि भौजी तर बदन लेकर और जो मिला उससे स्वयं को ढँककर दरवज्जा खोले और हम कहें " हे हे हे भौजी बाजार जा रिये थे कुछ मंगवाना है क्या "
भौजी कातर के साथ खेली- खिलाई खिलाड़ी भी थी ...तो केले , जॉनसन बेबी आयल ,पाउडर , चॉकलेट जो दिमाग से तत्काल जुबान पे टिका आर्डर कर देती थी ...कितने पैसे दूँ कहना न भूलती थी सो हम कहते " देखो भौजी पराया कर री हो पैसे का नाम लेकर ..." भौजी के इन महँगे शौकों ने कम से कम हमारे मिड नाइट के चिलम के खर्चे पर अंकुश लगाया .....
जब भी भौजी को लगता तीन में से कोई एक अंगूर खट्टे का श्लोक पढ़ रहा है तुरन्त देह का क्षणिक घर्षण दिए उसे करन्ट प्रदान करती थी जिससे उम्मीदों का बुल निफ्टी की छलांग मारे ....
भौजी को देखते , मचलते और जवानी बर्बाद करते 11 साल कैसे गुजर गए पता ही नही चला ...ख़ुशी भी 10 साल की हो चली थी .... एक दिन रात को धुत चरस पीये जब हम तीनों मित्र सांड़ आश्रम में विश्राम कर रहे थे तभी बाहर दरवज्जे पर भड़-भड़ हुई ...उसके बाद हमने स्वयं को पुलिस के तेल पीये डंडो के मध्य पाया ...पुलिस वाले वास्तव में आलसी और कामचोर नही होते उस दिन पता चला ...अपने स्टैमिना से जियादह उन्होंने हमारी कुटाई की ....जुर्म अगले दिन कोर्ट में जाके जब पता लगा तो हमारे पैरों तले जमीन खिसक गई ...10 साला ख़ुशी के रेप के बाद उसकी हत्या !
मीडिया वालों ने घर घेर लिया ..और पड़ोस के साबुन , माचिस ,अगरबत्ती बनाने वालों ने हमारे घरों की दीवारें पोत दी ताकि जब मीडिया का कैमरा मकान पर पड़े तो उनके नक्काल प्रोडक्टस का फ्री में राष्ट्रिय स्तर पर प्रचार हो सके ....समझ अक्ल से परे थी कि ख़ुशी जैसी मासूम का कोई बलत्कार भी कर सकता है और उसके बाद जघन्य हत्या भी ....खैर हम दो मित्र बाइज्जत बरी हुए लेकिन एक मित्र जिसने ये कुकर्म और हत्या की थी उसने अदालत को बताया .." जज साहब मैं अपना दोष स्वीकार करता हूँ लेकिन ये दोष अकेले मेरे का नही है बल्कि इस दोष में दो और लोग शामिल है .." ये सुन ईमान से मर्दानगी लकवा खा गई.. हम दोनों मित्रो को बिन जुलाब के सैलाब वाली ठेठ हकीमी फिलिंग हुई ....खैर उसने आगे कहा इस दोष में बराबर की शरीक ये भौजी है जिसने जानते -बूझते कि हम इस पर गन्दी नजर रखते है और इसकी देह का भोग करना चाहते है हमें घर घुसेड़े रखा ...और कामुकता के प्रत्येक उपक्रमों से हमें भरपूर उत्तेजित करने में कोई कोर कसर नही छोड़ी ...जिस औरत ने कभी हमसे ये नही कहा कि भैया वो नही है आप बाद में आइयेगा उस औरत के साथ इसका ये कमीना पति भी बराबर का दोषी है जिसने कभी सुध नही ली कि हम इसके घर में क्यूँ घुसे रहते है ...जिसने कभी दोस्ती और परिवार में पर्दा न रखा ..जिसने अपनी लुगाई को नुमाइश की विषय वस्तु अपनी सुहागरात के बाद ही बना दिया ......नशे में मेरी उत्तेजना कब मेरी वासना से अपराध में बदल गई पता नही चला लेकिन ...
खैर दामिनी फ़िल्म के सनी देओल सा लगा कुकर्मी मित्र का भाषण लेकिन ख़ुशी का हँसना , मुस्कुराहता चेहरा अब भी आँखों के आगे धुंधला रहा था वासना आंसुओं में कुछ देर के लिए अवश्य धुल गई.. परन्तु तब और जोर मारने लगी जब पता चला कि एक मित्र ने ताजा -ताजा ब्याह कर लिया है ...और भौजी को राइडिंग का करारा शौक है ....नवाजिश
#जुनैद......
Sunday, 21 October 2018
भौजी
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