Thursday, 20 June 2019

Pink

#पिंक
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" आज भी अंदर पिंक पहना है  क्या ....?"

आत्मा तक सिहर उठी ..मनचलों की उस भीड़ में उस एक आवाज से ...मैंने कनखियों से देखा वो मेरी ही उम्र का लड़का था ..जिसने ये बेहुदा फिकरा मुझ पर फेंका था ....

लेकिन मैं चलती रही ..और वो भी तेज-तेज कदमों से ...लेकिन अब वो फिकरा उन लफंगों की टीम की जैसे आदत बन गई ....जैसे ही लाल-चौक से गुजरती ..रूँह अंदर तक काँप जाती ...क्यूँकि वहीँ इन लफंगों का जमावड़ा जो लगता था ....

मैंने लाल चौक से निकलना ही छोड़ दिया ..दूसरा रास्ता हाँलाकि थोड़ा लम्बा जरूर था लेकिन वहाँ ऐसे लफंगे नही थे ....

ऑटो वाले को हाथ दिया ..उसने मुझे मेरे दफ्तर छोड़ा ~

" कितना हुआ भैय्या ...?"

" भैय्या मत कहो पिंक मैडम ..आपके लिए सब फ्री है ...बस एक बार हमें भी ...?"

उसके मुँह में पचास का नोट मारकर भागी और दफ्तर के अपने केबिन की सीट पर धाप से जा बैठी ....

आँखों में आँसू उतरने ही वाले थे कि तभी बॉस आ गए उन्होंने मुझे अपने केबिन में बुलाया ~

" देखो श्वेता आज रात हमारे एक क्लाइंट जर्मनी से आ रहें हैं तो तुम्हे आज रात मेरे साथ होटल शालीमार में चलना होगा .."

" पर सर घर में पापा अकेले हैं ..."

" देखो श्वेता तुम चाहो तो अभी छुट्टी ले लो ...लेकिन रात को ठीक 9 बजे तुम्हे शालीमार आना ही होगा ...रूम नम्बर  305 "

मैं घर चली गई ...बाबूजी ने पूछा तो उन्हें सब सच बता दिया ...उन्होंने जाने के लिए मना किया लेकिन फिर उनको समझाया कि पापा पूरा घर इसी जॉब से चल रहा है ....उन्होंने मायूसी में मुँह दूसरी तरफ  फेर लिया और मैंने घर से साढ़े आठ बजे शालीमार होटल को प्रस्थान किया ...

" ओह्ह्ह श्वेता आओ ...बैठो ..बहुत हसीन लग रही हो "

बॉस शराब पी रहे थे और अकेले थे ..मैंने पूछा ~

" सर क्लाइंट नही आये अभी ...?"

बाथ गाऊन की स्ट्रिप बाँधकर बॉस खड़े हुए और मेरी तरफ बढे ...और उन्होंने मेरे होंठों पर अपने होंठ रखने की कोशिश की ..मैंने उनको धक्का दिया और वो जमीन पर गिर गये ...

" साली ..रंडी ..छिनाल ..साली सती सावित्री बनती है मेरे सामने ...जानता हूँ तेरी औकात ..तू क्या है ..साली पिंक कुतिया "

मैंने सीधे दरवाजा खोला और दौड़ गई ...अंधाधुंध दौड़ती रही ..ये तक ख्याल नही रहा कि मुझे कहाँ जाना है ...दौड़ते -दौड़ते लाल -चौक पहुँची तो वही लफंगा मिला जो अक्सर मुझे देख कर बेहूदा फिकरे कसता है ....मैं सकपका और घबरा गई ~

" ओये.. होये मैडम पिंक... कभी हमें भी रात्रि सेवा का अवसर दे दो ...कभी हमें भी पिंक पीस लाइव फ्लेवर दिखा दो "

" तुझे देखना है न तो ले देख हरामजादे देख ...मेरे पास सब कुछ वही है जो तेरी माँ -बहन के पास है ..देख कुत्ते ..देख ..."

मैंने जैसे ही अपनी कुर्ती उतारी वो लफंगा डर के मारे भाग निकला ...

घर पहुँची ....दरवाजा बन्द किया ..और बाथरूम में जाकर फूट-फूट कर रोने लगी ....और फिर इरादा कर लिया कि अब जिन्दा नही रहना ...किचन में गई और चाकू हाथ में लिया और जैसे ही उसे हाथ की नश में रखा तभी पापा की खाँसी की आवाज सुनाई दी ...और न जाने क्यूँ चाक़ू खुद ब खुद हाथ से फर्श पर गिर गया ....

फैसला कर लिया था कि अब उस नीच के ऑफिस में काम नही करूंगी ...3 दिन घर में रहने के बाद चौथे दिन इंटरव्यू देने एक कम्पनी जा रही थी कि रास्ते में लाल -चौक पड़ा ..और बैठे दिखे वो लफंगे ...मैंने डर के मारे मुठ्ठियाँ भींच ली ....लेकिन चमत्कार हुआ और एक भी फिकरा आज मुझपर नही उछला ...

जैसे ही लाल चौक से निकल कर ऑटो का वेट करने लगी तभी ~

" सॉरी मैडम ..वो उस रात कुछ ज्यादा मिसबिहेव कर दिया अपन ने ..सॉरी ...अपन भी तो गन्दे काम  पंटरगिरी ..और रंगबाजी करके अपनी फैमली पालता है ...तो अपन आप को बुरा क्यूँ कहे ...अपन और अपन के फ्रेंड्स आज
के बाद आप को प्रॉब्लम नही देंगे ...."

वो मवाली लौटने लगा तो मैंने चिल्लाकर बोला ~

" ए..ए ...हाँ यू ..तुमसे किसने कहा कि मैं गन्दे काम करके अपनी फैमली को पालती हूँ ..तुम्हारी तरह नही हूँ समझे ...गो टू हेल "

तभी वो लफंगा पास आया और बोला ~

" ओये मैडम अपन तेरे को इज्जत दे रेला है ..सॉरी बोल रेला है और तू भाव खा रेली है ...अपन क्या पूरा शहर जनता है तू कैसा आइटम है समझी "

मैं आगे बढ़ी और एक जोरदार तमाचा उस मवाली के मुँह पर मारा ~

" कुत्ते ..मेरी जगह तेरी बहन भी होती न ..तो आज ये पूरा शहर उसे भी यही बोलता...दो पैसे के टपोरी जानता भी है क्या हुआ था मेरे साथ ?"

ऑटो आ चुका था ..और मैं इंटरव्यू देने निकल गई ...लेकिन अब वो टपोरी न मुझे छेड़ता था न सामने आता था ...कभी नजर मिल जाए तो नजरे झुका लेता था ...तभी एक दिन लाल चौक से गुजरते वक्त उस टपोरी के एक दोस्त ने  मुझे छेड़ा~

" कभी हमें भी पिंक टू पीस के दर्शन करा दो "

मैं कुछ प्रतिक्रिया करती इससे पहले ही मुझसे सॉरी बोलने वाले उस टपोरी ने उस दूसरे टपोरी जिसने मुझे छेड़ा था उसको मार-मार कर अधमरा कर दिया ...और उसने मुझे देखा ..लेकिन उसकी इस हीरोगर्दी से मेरे दिल में उसके लिए जरा सी भी इज्जत न बढ़ी ...

एक दिन रात को पापा को अस्थमा का अटैक पड़ा ... मैंने एम्बुलेंस को फोन किया और एम्बुलेंस आ गई ...पापा की जान खतरे में थी ..तभी जेम लग गया ...मैंने सड़क पर उतरकर स्थिति को देखा तो पाया कि बीच में एक ट्रक और कार का एक्सिडेंट हो गया है ...अब ये जेम लम्बा था और पापा की हालत बिगड़ती जा रही थी ...तभी मैं वापस एम्बुलेंस के करीब पहुँची तो पाया पापा वहाँ नही थे ...

" पापा .कहाँ हैं मेरे ...?"

" मैडम एक गुंडा आया और बोला ..सीन हॉस्पिटल ले जा रहा हूँ उसके हाथ में चाकू था "

मैं सड़क की दूसरी लेन में गई और ऑटो पकड़कर सीन हॉस्पिटल पहुँची वो लफंगा वहीँ खड़ा था ...

" तुम ..तुम ..यहाँ भी .. ..कहीं तुम ही तो नही  ..तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई अभी पुलिस कम्प्लेन ....."

तभी  डॉक्टर साहब बोल पड़े ~

" रहने दीजिये मिस ...यदि ये आपके पापा को यहाँ नही लाता तो आप के पापा शायद नही बचते "

पूरा दृश्य फ़िल्म जैसा था ...लेकिन था वास्तविक. मेरी आँखों में आँसू उतर गए .... लेकिन अभी भी मेरे मुँह से उस लफंगे के लिए सॉरी या थैंक्स नही निकला ~

" अपन को मालूम है आप अपन को थैंक्स बोलना चाहती हैं मैडम ..बट कोई बात नही अपन साला इस लायक नही ..ये अपन का नम्बर है ..कोई बात हुई तो अपन को फोन करना अपन मर भी रहा होगा तो आपके वास्ते मौत से लड़कर यहाँ पहुँच जायेगा "

वो जाने लगा तभी मैं बोल पड़ी ~

" सु ..सुनो ..तुम्हारा नाम क्या है ..."

" अपन की माई अपन से दिनेश बोलती है और खांटी भाई लोग डेंजर "

" सुनो दिनेश थैंक्स ..तुमने आज पापा की जान बचाई "

तभी दिनेश बोला ~

" लेकिन अपन तुम को तभी थैंक्स बोलेगा मैडम जब तुम अपन को वो सच बताओगी जिसके वास्ते अपन ने अपने गाल पर तुम्हारा चांटा भी चिपकाया है "

कुछ देर की ख़ामोशी के बाद ..मैं बोली ~

" यहाँ बैठो ..."

" हम दोनों आई .सी .यू के बाहर लगी सीट पर बैठे ...

" एक लड़के से बहुत प्यार करती थी मैं ...ये बात तब की है जब मैंने एक नई -नई कम्पनी में जॉब के लिए अप्लाई किया ..वो भी मेरे साथ एक केंडिनेट था ... उसने अपना नाम राजेश बताया था मुझे ...मैंने उसके डाक्यूमेंट्स पर भी उसका यही नाम पढ़ा था ...बातों ही बातों में हमारी दोस्ती हो गई ...और फोन नम्बर एक्सचेंज हो गए ...हैलो ..हाई ..गुड मोर्निग ..गुड नाईट के मेसेज  बाद में लम्बी -लम्बी बातों में बदलने लगे ..बातों से सिलसिला साथ घूमने -फिरने और फ़िल्म देखने तक पहुँच गया ....और जब उसने मेरा विश्वास पूरी तरह से जीत लिया तो फिर... मैं वो कदम उठा बैठी जिसका पछतावा आज तक मेरी जिंदगी में एक गाली बनकर चिपका हुआ  है ....वो एक दिन अपने बर्थ डे की पार्टी बोलकर मुझे एक होटल में ले गया ...उसने शराब पी और मुझे जबरदस्ती वोडका पिला दिया और जब मुझे नशा ज्यादा हो गया तो  उसके बाद वो मुझे बिस्तर पर ले गया और मेरे कपड़े उतार कर ... मेरे साथ .....हाँ उस दिन मैंने पिंक अंडर गारमेंट्स पहने थे ....उस कमीने ने न सिर्फ मेरी इज्जत तार-तार की बल्कि मेरी वीडियो क्लिप बनाकर उसे वायरल कर दिया ....बाद में मुझे पता चला कि वो उसका धंधा था .... उसने मुझे अपने नाम के आलावा कभी कुछ नही बताया और जो कुछ बताया वो सब झूठ था जो मुझे बाद में पता चला ... और दिनेश जब वो क्लिप हर जगह वायरल हुई तो सबसे पहले मेरे भैय्या -भाभी ने मेरा त्याग किया ..और वो बैंगलूर चले गए ...माँ इस सदमे से चल बसी ..बाबूजी की हालत और बिगड़ गई ...और मैं एक लड़की ..एक इंसान से महज पिंक बन गई  "

मैं वहीँ फूट -फूट कर रोने लगी ...लेकिन तभी मुझे सहारा दिया दिनेश ने ~

" मैडम अपन  पढ़ा -लिखा और आप के लायक  नही वरना अबीच बोलता कि अपन को आप से प्यार हो गेला है ...और अपन आप के साथ शादी बनाना चाहता है ...अपन उस हरामी की तरह फ्रॉड नही ..अपन गरीब और गुंडा जरूर है ...लेकिन अपन तुम्हारे वास्ते दिन-रात  मेहनत करके अपनी गरीबी दूर करेगा और गुंडागर्दी अपन आज से ही छोड़ता है ....अपन प्रोमिश करता है ...कि अपन को सिर्फ एक साल का बकत दो अपन इन एक सालों में आपके लायक बनकर दिखायेगा ...अपन बहुत बड़ी बाते नही करेगा लेकिन अपन इतना जरूर कहेगा कि ...अपन साला आपको बहुत खुश रखेगा .. बहुत खुश "

दिनेश की आँखों में जहाँ मेरे लिए बेहिसाब प्यार नजर आ रहा था वहीं  बेशुमार आँसू भी थे .. एक गहरा दर्द और एक प्राश्चित भी ...लेकिन मुझे लगा कि वो मेरी स्टोरी सुनकर सेंटीमेंटल हो गया है तब ऐसा बोल रहा है ....मैं चुप रही और वक्त गुजरता रहा
और फिर ~

एक दिन किसी ने दरवाजे पर दस्तक दी ..दरवाजा खोला तो सामने उजली सफेद कमीज में दिनेश खड़ा था ...उसका हुलिया बिलकुल बदल गया था.. छोटे बाल ..फ़टी जीन्स की जगह इस्त्री करी हुई काली पेंट ...

" मैडम ..माफ़ करना आपके पूरे लायक बनने में तो जिंदगी निकल जायेगी ...एक साल हो गया ..और अपनी दी हुई जबान के मुताबिक मैं अभी सिर्फ एक इज्जतदार रोजगार ही हासिल कर पाया ..बाकि पढ़ -लिख भी रहा हूँ ..इतना कहने आया था कुछ और साल की मोहलत मिल जाती तो पूरा आपके लायक बनकर लौटता  .."

कुछ ही पल का सन्नाटा रहा  ...लेकिन इन कुछ पलों में ... मैं खुद से बाहर जा खड़ी हुई औरबोली ...

" लेकिन मैं अब तुम्हारे बिन एक दिन..एक पल नही जी सकती दिनेश मुझे अपना लो ...मुझे अपना लो..   "

और ये कहते -कहते छलछलाती आँख में आँसू भरकर मैं  दिनेश के गले लग गई और जिंदगी जैसे पिंक से बदलकर इंद्रधनुष के समस्त रंगों में रंग गई  ......

नवाज़िश

By~
Junaid Royal Pathan

( Story image credit goes to ~ Sunita Srivastava)   Thanks !

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