Saturday, 15 June 2019

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#पता
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" एक बर्थडे  केक बनाना था बेटा "

" अंकल फ्लेवर ....? "

तभी~

" हे रोहन ..व्हाट्स दी स्कोर यार...?"

" छोड़ यार अदिति अब नो स्कोर-व्हिस्कोर शी इज माय लास्ट ...आई लव हर ...सीरियसली यार..."

" चल डफर ..बड़ा आया शी इज माय लास्ट ...बट यू आर नॉट लास्ट ओके .. ..."

" मीन्स ...?"

" मीन्स जो तेरी थर्टी फर्स्ट गर्ल फ्रेंड है न वो मेरी फ्रेंड है ...और वो आज निखिल के साथ मनाली में डेट कर रही है "

तभी शॉप पर खड़े बुजुर्ग दुबारा बोले ~

" बेटा फ्रूट फ्लेवर ...लो चॉकलेट ....और ..."

" वेट अंकल ..तू क्या दाँत फाड़ रही है ...तेरा अंकित यानी तेरा फॉर्टी थर्ड बॉय फ्रेंड भी आज मरिया के साथ अपने फॉर्म हॉउस में झिंगा ला ला कर रहा है "

बुजुर्ग फिर बोलते हैं ~

" बेटा ये मेरा एड्रेस है . ...शाम 4 बजे तक केक मुझे मेरे ' फ़्लैट 'में  चाहिये प्लीज ...."

" ओके अंकल ...केक पर नाम किसका होगा ..?"

" लक्ष्मी ... "

" पोती या बेटी ...मीन्स जस्ट केजुवल "

" माय गर्ल फ्रैंड ..नो थर्टी फर्स्ट ..नो फॉर्टी थर्ड ...एन्ड शी इज माय फर्स्ट एंड लास्ट लव !"

अदिति और रोहन उस रौबीले बुजुर्ग का चेहरा देखते रहे ...बुजुर्ग ने एडवांस के तौर पर उस बर्थ डे केक के पैसे निकालने के लिए पर्स खोला और रोहन ने उन्हें बाकि पैसे वापस दिये ...पैसे उसने  उसी पते के ऊपर रखे .जो बुजुर्ग ने डिलिवरी के लिए दिया था ...बुजुर्ग ने पैसे के साथ पता भी अपने पर्स में रखकर जैसे ही पर्स बन्द किया ...एक छोटा सा पर्चा उस पर्स में से बाहर गिर गया .....धीरे -धीरे उस बुजुर्ग ने अपनी राह पकड़ी ...तभी अदिति चिल्लाई ...

" हे रोहन ! वो देख ...आई थिंक ही इज मेड और समथिंग डिस्टर्ब ...देख तो सही "

मानो ऐसा लगा वो बुजुर्ग  किसी का हाथ पकड़ कर चल रहा है ...चल ही नही रहा था ...बल्कि वो तो बाते भी कर रहा था ...

" आई थिंग सम प्रॉब्लम विथ हिम ..लेकिन इस ऐज में गर्लफ्रेंड ..हा हा हा ..लीव इट यार ...चल यार अदिति कोई मूवी देखते हैं आज ...चल न पापा आने वाले है शॉप पर फिर चलते हैं...एक मिनट यार उस अंकल का एड्रेस ...एड्रेस कहाँ गया यार..?"

तभी अदिति बोली ~

" यार यहीं तो रखा था उसने ..ये ..ये...ये ..फ्लोर पर कुछ गिरा है यार ...."

उसमें लिखा था ...

" लक्ष्मी वर्मा ... भैरव नगर ..मकान नम्बर 240 "

यार अब क्या होगा ...उस अंकल ने तो किसी फ़्लैट को कहा था ...लक्ष्मी यार ये तो उसकी गर्ल फ्रेंड मतलब उसी आंटी का एड्रेस है....यार लकड़ी हो जायेगी ...पापा शॉप पर लापरवाही बर्दाश्त नही करते ....चल यार भैरव नगर इसी पते पर चलते है और बुड्ढे का एक्चुवल एड्रेस लेकर आते हैं "

रोहन ने बाइक स्टार्ट की और अदिति के साथ भैरव नगर पहुँचा ~

" हे भैय्या ..जरा ये एड्रेस बताओ तो प्लीज "

" ये क्या सामने है ...यही तो है .."

पता गलत था या फिर वो आदमी.. जिसे वो मकान नम्बर 240 बता रहा था वो तो आलीशान बंगलो था ....परमिशन ली और नॉक किया ...

" यस ? "

" सर वो लक्ष्मी आंटी से मिलना था ...!"

" हु आर यू ...? वो अब यहाँ नही रहती "

" सर आई एम् ..."

तभी अदिति ने मुझे कोहनी से मारा और खुद बोली ~

" सर वो मेरी ममा की बचपन की फ्रेंड रही हैं लक्ष्मी आंटी ..अभी यहाँ शिफ्ट किया है तो सोचा मिल लें "

तभी अंदर से आवाज आती है ...

" डार्लिंग प्लीज कम बेबी आई एम वोटिंग ओह्ह्ह "

तौलिया लपेटे उस आदमी को देखकर हम समझ गये कि वो किस काम में बीजी था ....खैर हम आगे बढ़े तभी एक माली जो बुजुर्ग था उसने हमे रोका ~

" बिटिया ले जाओ उस देवी को ...जिसने जीवन पर्यन्त दुःख के अतिरिक्त और कुछ नही देखा ...आज जब सुख देखने का वक्त आया ...तो इस चुड़ैल ने उस देवी को घर से बाहर निकाल दिया ...एक साधारण मकान पर खड़ा ये बंगला उसी देवी के सतकर्म और संघर्ष का नतीजा है "

" कौन चुड़ैल और कौन देवी ...?"

" चुड़ैल  मोहिनी.. देवी लक्ष्मी देवी  के पुत्र  कुलदीप की ब्याहता  "

बूढ़े माली ने और बताया कि कैसे लक्ष्मी देवी का विवाह उनकी मर्जी के बगैर एक शराबी और जुआरी आदमी से हुआ ..कैसे उस आदमी ने लक्ष्मी देवी की सारी संपत्ति अपने नाम कर ली ...कैसे वो विधवा हुई और कैसे उसने समाज और खुद से लड़के अपने इकलौते बेटे को पढ़ने के लिए विदेश भेजा ...और आज ....

" लेकिन माली अंकल हमें पता नही कि लक्ष्मी देवी कहाँ मिलेगी ...?"

" वो देवी मेरे घर में निवास करती है ....चलो मैं मिलवाता हूँ ..."

भैरव नगर से कच्ची पुलिया को जाते हुए उस माली का घर था ...जहाँ कुछ बच्चों के मध्य सफेद साड़ी में एक देवी उदास और निढाल अवस्था में बैठी थी ...."

बहुत बात करने की कोशिश की उनसे लेकिन उन्होंने जुबान नही खोली ...औलाद के जुल्म का सदमा उन्हें गहरा लगा था ....मैं हार गया और अदिति भी ...हम बाइक पर बैठे तभी अदिति ने बाइक से बोला ~

" आंटी ! आप मत बोलो ...लेकिन कोई है जो आज तक सिर्फ आपको ही याद करता है ...आपके लिए ही जिन्दा है ...कोई है आंटी जो आज तलक आपका इन्तेजार कर रहा है ...वो जो आज तक आपको अपना पहला और आखरी प्यार बोलता है ...वो जो आज हमसे मिला था ..आप का बर्थ डे का केक लेने आया था ...विश यू अ वेरी हैप्पी बर्थ डे आंटी "

वो बूढ़ी जैसे एक नींद से जागी और चिल्ला के बोली~

"  वो ...वो..वो तो " अभि " होगा .."

बहुत रोई वो औरत और वो भी सिसकियों से ...फिर उन्होंने बताया कि अभिमन्यु सिंह उन्ही के कॉलेज में पड़ता था ..वो लड़का जिसने कॉलेज के आधे वर्ष सिर्फ मुझे छिप -छिप के देखने में गुजार दिए और  बाकि बचे आधे वर्ष मेरे आस-पास चक्कर लगाने में ...मुझे भी अच्छा लगता था अभि ...लेकिन मैं बेहद शर्मीली थी पहल कैसे करती ...लेकिन जब अभि ने पहल की तो देर हो चुकी थी मेरी शादी बिना मेरी मर्जी के तय हो चुकी थी ...लेकिन मैंने अभि को अपने नये घर का एड्रेस भिजवाया था ताकि वो मुझे आकर ले जाये ...लेकिन वो नही आया "

फिर रोहन बोला ~

" वो आये थे आंटी ...आज ही मेरी शॉप में लेकिन हमसे उनका पता कहीं मिस हो गया ..."

फिर अदिति बोली ~

" हे रोहन ...यार यहाँ आस -पास सिर्फ दो एरियाज में ही फ़्लैट हैं ...हम सर्च कर सकते हैं"

बाइक वहीँ खड़ी की और एक ऑटो वाले को हाथ दिया ...आंटी हमारे साथ थी ...पहले वाले एरिये के फ़्लैट में उनका कोई पता नही मिला ...शाम के 6 बज चुके थे ...हमने अगले एरिये में इंट्री की और गेटकीपर को अंकल का हुलिया बताया ...उसने फ़्लैट नम्बर  7 का एड्रेस दिया ....

हम सबकी धड़कने ..दिल के काबू में नही थी ...और फिर डोर बेल बजाई ...

" यू ...व्हेर इज माय केक ..?.तुम आज के यूथ को न टाइम की वैल्यू है न लव की..गिव मी माय पार्सल ..."

तभी अदिति कान पकड़कर आगे आते हुए बोलती है ~

" सॉरी अंकल केक तो मिस कर गए ...बट आपके लिए प्रेजेंट जरूर लाये हैं .... आइये आंटी "

वो सीन हिंदी सिनेमा के हर सीन से भावुक था ..वो सीन इस कायनात की खूबसूरती में सबसे सुंदर था ...वो लम्हा जिसपर इश्क ज़िंदा था ..वो पल जिसमें इश्क -इश्क को आँखों में गिरते आँसुओं से चख रहा था ....अंकल ढहते घुटनों से जमीन पर बैठे और लक्ष्मी आंटी से बोले ...

" आई लव यू लक्ष्मी ...विल यू मेरी मी "

लक्ष्मी आंटी शर्म से लाल हो गई लेकिन उनकी आँख में बेपनाह आँसू थे और तभी अदिति ने मेरा हाथ पकड़ लिया ...अब हम दोनों भी समझ चुके थे कि प्यार सिर्फ एक बार होता है और प्यार का कोई नम्बर कोई स्कोर नही होता ..... अंकल -आंटी ने हम दोनों के सर पर हाथ रखा ... मैंने अदिति को वहीँ छोड़ा और तुरन्त पास के एक कॉर्नर से केक लेकर आया ...फिर  सेलिब्रेशन हुआ... ...जहां उम्र के ढहते पड़ाव ने अपना इन्तेजार अपना इश्क मुकम्मल किया.. वहीँ हम दोनों का रिश्ता भी दोस्ती से कब प्यार में बदल गया ...हमें भी पता नही चला ...

आज अदिति मेरे बेटे की माँ है और आज भी हम उन इश्क करने वालों से  मिलने अक्सर जाया करतें हैं जो सिर्फ एक दूसरे के लिए बने थे
...

और आज जिनके एक होने का आधार जहाँ वो अटूट प्रेम बना वहीँ वो पता भी जिसे मैं यानि रोहन  हमेशा अपने बटुए में रखता हूँ  ....

नवाज़िश

By~
Junaid Royal Pathan

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