#कॉन्डम
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" भैया कॉन्डम होगा ..?"
" फ्लेवर क्या लेंगे ...?"
" जी..जी... कोई भी दे दो "
मैं वहीँ था.. कान पर फोन लगा था ,,,गले में मॉफरल और आँखों में सन ग्लास तो सुधीर पहचान नही पाया मुझे ....लेकिन अपने मुहल्ले का सबसे शरीफ लौंडा है सुधीर ...और कॉन्डम ....?
बात किसी को सीरियस न लगे ...असमान्य न लगे ..प्रगतिशील लगे और वैज्ञानिक भी लेकिन सुधीर और कॉन्डम वैसे ही बेमेल है जैसे अदरक और अंगूर !
सुधीर कॉन्डम लेकर सीधे एक गली में घुसा ...और मैं उसके पीछे .... सुधीर की चाल आज एक चोर सी लगी ...वो स्वाभिमानी लौंडा जो जब मुहल्ले से निकलता है तो ऐसा लगता है जैसे सूरज मुँह पर बाँधे चलता हो ...वो जिसको देख छोटे से बड़ा हर इंसान आँखों में श्रद्धा उतार लाता हो ...जिसको देख मुहल्ले की मुट्ठीभर जलील औरतें और लौंडियाँए भी आँखे नीची कर लेती हों ....उस सुधीर को आज सकपकाता हुआ देख मुझे हैरानी ही नही परेशानी भी हुई ....
वो बार-बार हर घर हर दुकान को ऐसे नीची और शर्मिंदा नजरों से देखता जैसे हर इमारत उससे सवाल कर रही हो ....वो जो हर इंसान को देख ऐसे पानी-पानी हो रहा था जैसे हर इंसान जान गया कि सुधीर की जेब में कॉन्डम रखा हो .....
सुधीर जो आई. ए. एस की तैयारी कर रहा है ...उसके माता-पिता नही हैं ..एक सड़क दुर्घटना में मारे गए ..लेकिन बड़े भाई ने कभी उसको पिता की कमी खलने नही दी ...और उसकी वजह से ही लेट शादी की ताकि सुधीर को उसकी शिक्षा और सपनों से कोई समझौता न करना पड़े ....
सुबह से शाम तलक सिर्फ पढ़ता और पढ़ाता है सुधीर और मुझे कट्टर भरोसा है इस बार वो आई .ए. एस बनकर रहेगा ....
लेकिन कॉन्डम ...?
मैंने कदम तेज किये ताकि सुधीर को रोक कर पूछ सकूँ कि आखिर माजरा क्या है लेकिन फिर कदम खुद ब खुद हल्के कर लिए जब खुद की परछाई कॉफी कॉर्नर के शीशे में देखी ....
मैं अव्वल नम्बर का लौंडियाबाज ...जिसने जिंदगी भर सिर्फ यही एक काम तबियत से किया ...मेरी अय्याशी जहाँ बाप को कंगाल बना गई ...वहीँ हमेशा उनका सर मेरी करतूतों से ही नीचा हुआ ...मेरी वासना ने जहाँ रिश्ते बिगाड़े वहीँ रिश्तों को भी तार -तार किया ...मैं आज सुधीर जैसे लौंडे से पूछने चला हूँ कि तुम जिंदगी में पहली बार कॉन्डम खरीद रहे हो ...और वो भी इतना डरते-घबराते ...और एक मैं हूँ जिसने न जाने कितनी लड़कियों को अपने प्यार के झांसे में लेकर उनका गर्भपात करवाया है ....
लेकिन तभी अंतरात्मा ने समझाया कि माना जिंदगी भर तूने गलत काम किये हैं ...लेकिन आज तुझे प्राश्चित का मौका मिला है रोक ले सुधीर को और जाकर पूछ कि आखिर आई.ए.एस और कॉन्डम में से वो क्यूँ कॉन्डम चुन रहा है ...क्यूँ अपने सपने के इतने पास खड़े होकर उसे छूने की जगह वो मुँह फेर रहा है ....
मैंने सुधीर को आवाज दी ...लेकिन वो इससे पहले ही एक टैम्पो में जा बैठा ....मुझे एक पल लगा जाने दो साले को ...किसका बिगाड़ेगा खुद का न ...साला आखिर हमारी ही जमात को आगे बढ़ा रहा है ....जो मुहल्ला मुझे देख कर थूकता है कम से अब उस थूक से अब सुधीर का मुँह भी भीगेगा ....साले जो कहतें है मुझसे कि तू इस मुहल्ले का श्राप है ...कलंक है कम से उनकी आँखे तो खुलेंगी और पता चलेगा कि मैं जो हूँ सामने हूँ लेकिन जो पीठ पीछे रंगदारी करके ओछी अय्याशी करते हैं और समाज में भले -भद्र बनकर घूमते हैं उनका भी चेहरा मेरी तरह काला है ...
और मेरा बाप जो कहता है कि तुझ हरामी का पैदा होते ही गला दबा देना चाहिये था उसे भी पता चलेगा कि हमाम में सब नंगे हैं ....
लेकिन दिमाग को फिर दिल ने शिकस्त दी और मैंने भी टैम्पो पकड़ा और सुधीर का पीछा किया ....
वो एक सिनेमा के आगे उतरा और मैं टैम्पो वाले के पैसे चुकता कर उसको दबोचता इससे पहले ही उसका हाथ पकड़ा उसकी भाभी ने .....
हे भगवान ! मैंने तो सिर्फ दूर की भतीजी से ही रिश्ता रखा ये तो सगी भाभी .....
मन में तसल्ली हुई और आज पहली बार अपनी आत्मा को लताड़ लगा कर मैंने कहा -
" देख तुझे बड़ी खुज़ली होती है कि मैं वासना में न घर देखता हूँ न बाहर लेकिन देख मैंने फिर भी सगे रिश्तों में लार न गिराई और ये महात्मा सुधीर अपनी सगी भाभी से ....छी ...आक थू "
जहाँ अभी तलक मेरे मन में सुधीर के लिए सम्मान और श्रद्धा थी अब प्रतिकार और घिन ...मैंने इरादा कर लिया कि इस साले को भरे मुहल्ले में एक्सपोज कर के रहूँगा ....
तभी मैन देखा कि मौजबहारा भाभी आँखों में आँसू ले आई ....साला ख़ुशी के फर्जी गिल्सरीन आँसू फिल्मों में देखे जरूर थे मगर आज विश्वास हुआ कि मजे कि कल्पना भी खुशियों के आँसू बहा सकती है ....
मैंने मोबाईल निकाला और दोनों की एक पिक ली ....लेकिन जब स्क्रीन में देखा तो काला टैम्पो दिखाई दिया ....मैंने झट फिर टैम्पो पकड़ा और उन दोनों का पीछा किया ....
मुझे शहर का हर निर्जन और खेल -खिलाई अड्डा पता था ...लेकिन टैम्पो जहाँ मुड़ा वहाँ तो अय्याशी का लाल किला था यानि रेड अलर्ट एरिया ....
इस बदनाम गली में आखिर सुधीर क्यूँ जा रहा है ....?पर जवाब भी मैंने खुद को ही दिया
नया-नया इश्क है तो रास्ते और मंजिल भी अपरिचित हैं ....लेकिन फिर मान गया सुधीर के आई.ए.एस दिमाग को और मुझे उससे प्रेरणा मिली कि कोठे के कमरों की बुकिंग अपने माल के साथ की जाए तो किसी के देखने का भय भी नही और न कोई होटल..झाड़ी..पहाड़ी का रिस्क ....
टैम्पो आगे नही गया ...शाम ढल चुकी थी और सोहबत जवान हो रही थी ...हर लकड़ी की सीढ़िया .. जमाल ए हुश्न से सजने लगी ....हर ऊंचाई से फिकरे जमीन पर गिरने लगे ....
" ओये हीरो आता है क्या ...जन्नत का मजा दूँगी "
" ओये चिकने देखता क्या है ...चढ़ जा ऊपर कच्चा माँस शराब संग पेश करूंगी "
फूहड़ गाने कानों पर गिरने लगे ...और बिरयानी और शराब की कॉकटेल सुगंध भी दिमाग में जवाल पैदा करने लगी ....
मैंने हर ब्रांड ...हर ऐज को गटका है लेकिन कभी कोठे पर नही गया ...मान गया कि सुधीर साला एक नम्बर का हरामी है या उसे हरामी बनाने वाली उसकी हरामन भाभी एक नम्बर की चालू खेली -खिलाई औरत है ....मेरी अय्याश आत्मा को आखिर सुधीर के भाई पर तरस आया कि आखिर उसने कितनी क़ुरबानी दी इस हरामखोर के लिए और इसकी शिक्षा -दीक्षा पराई औरत और उसके मिजाज से प्रभावित न हो इसलिए इस उम्र में शादी की और फिर भी इन नेकियों के बदले मिला इस बेवफा और अय्याश औरत का साथ ....छी साला ...
मेरी आत्मा ने सुधीर के भाई को इतने मन से याद किया कि मुझे वो साक्षात दिखने लगा ....
और वो भी कोठे की सीढ़ियों पर चढ़ते हुए ....
मैं खुद को पिंच करता तभी सुधीर दौड़ा और अपने भाई के काँधे पर हाथ धरकर बोला -
" भैया ..हम थक गए आपको समझाते हुए कि यहाँ मत आओ ...माना आपके असंख्य एहसान है मुझपर और आपने मेरे लिए शादी भी इस उम्र में करी लेकिन भैया मुझे नही पता था कि आप यहाँ आते -जाते हैं... वो तो भाभी ने आपका पीछा किया और राज मालूम किया ....हम दोनों आपको समझा कर थक गयें हैं इसलिए मैं आज आपको रोकने नही आया बल्कि ये कहने आया हूँ कि आप चाहे जो करो लेकिन मैं नही चाहता मेरी भाभी को एड्स हो जाए ....क्यूँकि उस सती- सावित्री का कोई दोष नही और न इसमें कोई सहभागिता .....वो तो इतनी आदर्श पत्नी है कि सब जानते -बूझते भी आप के साथ बिना मुँह खोले निबाह कर रही है ....खैर आपको लेट हो रहा है ....ये लीजिये कॉन्डम ...ताकि मेरी भाभी को आपके किये की सजा न मिले ....."
सुधीर के ये लफ्ज जहाँ मुझ परम् अय्याश को पिघला गए वहीँ सन्न कर गए उसके भाई का वुजूद भी ...वो सीढ़ी न चढ़ सका न उतर सका ....सुधीर ने अपनी भाभी का हाथ पकड़ा और आगे बढ़ता गया तभी एक आवाज गूँजी ....
" नरेश बाबू ..जाइए यहाँ से आप जैसे आदमी के लिए यहाँ कोई जगह नही ....मैं तो समझती थी आप मेरे पास इसलिए आते हैं क्यूँकि आप को प्यार करने वाला मेरे अलावा कोई दूसरा नही ....लेकिन पुनः एक रण्डी के प्यार को एक पत्नी के प्यार ने हरा दिया ...जाइए ...!अगर मेरे मुल्क में हर आदमी को ऐसी औरत मिल जाए तो भला लोग फिर रण्डीखाने क्यूँ आयें ....जाइए ...ऐसी औरतें बड़ी नेक कमाई और कर्म से मिलती हैं और मेरा मालिक ऐसी औरतों को धड़ाधड़ बनाता रहे ताकि एक औरत फिर कभी रण्डी न बन सके "
नरेश बेहिसाब भागता रहा ...और मुझे यकीन है उसे उसकी मंजिल आखिर मिल ही जायेगी लेकिन मुझे भी कुछ मिल गया था शायद ये नजरिया की हर औरत सिर्फ अय्याशी का सामान भर नही होती बल्कि कुछ औरतें तो ऐसी भी बनाई है मेरे मालिक ने कि वो खुद उनपर फक्र करता है ......
सुधीर आई .ए. एस बाद में बनेगा लेकिन आज वो मेरे लिये मेरा सच्चा मार्गदर्शक बन गया .....
नवाज़िश
Junaid Royal Pathan
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