#कोल्ड_कॉफी
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" हा हा हा ... हे गाइज ..लिसन ..लिसन ..फिर क्या हुआ सुनो तो सही ... उसने जलियाँ गार्डन की डस्ट उठाई फिर ओथ ली कि ..आई विल...."
" वो डस्ट नही बल्कि हिन्दुस्तानी मिट्टी थी ..और वो पाक मिट्टी जो इस देश के सच्चे वतनपरस्तों के लहू से भीगी हुई थी .... और सरदार ने महज मिट्टी उठाई नही बल्कि उसे अपने माथे से लगाया ..उसे अपनी आँखों से इज्जत पेश की ...और फिर हाथ आगे बढ़ा कर खुले आसमान के नीचे कसम खाई कि इन मासूम निर्दोषों के हत्यारों को वो इसी तरह मिटा देने के बाद ही ....एक घूँट चैन की पीयेगा ..ताकि तुम जैसे ..सच्चे वतनपरस्तों पर हँसने वाले लौंडे आजाद भारत में गुलामी की कॉफ़ी न पी सके "
चारों तरफ सन्नाटा पसर गया ...और वो इंसान ..इतना बोलकर कॉलेज के गेट से बाहर निकल गया ..
आकाश .. रोहित और पीटर के हाथों का कॉफ़ी मग उनके हाथ में जैसे फ्रिज हो गया ...बड़े -बड़े लैक्चर सुने थे उन्होंने पेट्रियोटिज्म पर ...आकाश के फादर तो खुद डिफेन्स मिनिस्टर ऑफ़ इण्डिया हैं..और रोहित के सेकेट्री ऑफ़ डिफेन्स ...पीटर के फादर एयर चीफ मार्शल ... तीनों लौंडे दिल्ली की अबसे बड़ी यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं ...नेक्स्ट इयर तीनों ही क्रमशः जर्मनी , अमेरिका एंड इंग्लैण्ड आगे की पढ़ाई के लिए चले जायेंगे ...लेकिन जो कुछ सेकेण्ड्स के लेक्चर में देशभक्ति की इक्जेक्ट डेफिनेशन समझा गया वो बन्दा कौन था ...?
खैर बेल लगी और तीनों अपनी -अपनी क्लास में मूव कर गए ...शाम को ये तीनों पुनः एक क्लब में मिले ..वो भी अपनी-अपनी गर्लफ्रेंड्स को साथ लेकर ...लेकिन आज पता नही क्यूँ तीनों कुछ उचाट से थे ...लेकिन गर्लफ्रेंड्स साथ हो तो जन्नत से निकलने का भी मलाल नही होता ....खूब इन्जॉय हुआ ..खाली बियर कैन की कॉउंटिंग टेबल करने लगी .. और किस-विस ..समथिंग..समथिंग ...
हाफ तो फुल टल्ली होकर तीनों बन्दे अपनी गर्लफ्रेंड्स को उनकी कार में छोड़कर अपनी कार की ओर मूव करने लगे ....और कार में बैठकर थोड़ा आगे बढे ही थे कि तभी उनकी नजर इण्डिया गेट पर पड़ी ...
एक बन्दा कैंडल लिए आँख बन्द करे अमर शहीदों को याद कर रहा था ..
" हे रोहित प्लीज स्टॉप दी कार ...अबे ये आज वाला ही बन्दा ...मीन्स कॉलेजवाला ..."
" या ...ये तो वही है ...बट व्हाट्स ही डूइंग ..?"
" यार अक्की आई थिंक हीज मैड ऑर साइको .."
कार रुकी और तीनों हल्के -हल्के कदम भरकर उसके पास पहुँचें ...और उसको करीब से देखा ..उसकी आँख में आँसू थे ...और पिघलती हुई मोमबत्ती का गर्म पानी भी उसपर कोई असर नह करता था ....
तीनों दोस्तों की आँखे भी कुछ नम पड़ने लगी ...
तभी उस बन्दे ने आँख खोली ..मोमबत्ती जमीन पर रखी ...और फिर सीधा खड़ा होकर सर झुकाया और अपना दाँया हाथ अपनी छाती पर रखा ....और कुछ देर शांत रहने के बाद ...अपनी आँख खोली अपना पिट्ठू बैग और हेलमेट उठाया ...और अपनी बाइक तलक पहुँचा
" एक्सक्यूज मी ...हे ..हम आज सुबह कॉलेज में मिले थे ..."
" हाँ आकाश याद है ..."
" हे गॉड ...हू आर यू .? आप मेरा नाम कैसे जानते हैं "
" तुम्हारा ही नही तुम्हारे बल्कि तुम्हारे दो दोस्तों रोहित और पीटर का भी ...और तुम सब के फैमली मेम्बर्स का भी "
तीनों दोस्त आवाक से रह गए ..
" बी पेशेंस ... ओके गाइज फिर मिलेंगे ..बॉय "
और उस बन्दे ने बाइक स्टार्ट की और वो आगे बढ़ गया ...
" अब्बे आकाश क्या स्टैचू बना है पीछा कर साले का फुली मिस्ट्री है ये.. ..."
" लेट्स गो गाइज "
उस बन्दे का अंधाधुन्ध पीछा शुरू हुआ ...वो बन्दा जहाँ भी कोई मन्दिर मस्जिद ..गिरजाघर देखता बाइक रोककर सीने में हाथ रख लेता ...जितनी भी हिस्टोरिकल बिल्डिंग्स आती सब को देख सर झुकाता ...कन्ट्री के जितने भी फॉर्मल कांस्टिटूशन इंस्टिट्यूशन आते सब को सल्यूट करता ...
" ये न ओवर डोज मेटीरियल है पीटर देशभक्ति का ...अबे इतना भी कोई करता है "
" हे गाइज लुक !"
फिर उसने सड़क के किनारे सोते हर गरीब को अपने बैग से निकालर कुछ खाने के पार्सल दिए ..और आगे बढ़ा
" साला है कौन ये .?..यार ये बन्दा स्ट्रेंज है ...पता नही क्यूँ साला इसको विंटर सैल्यूट बनाने का दिल कर रहा है "
" सही बोलता है पीटर ...ये बन्दा रियल में देशभक्त है .. इतने सालों
में जो फीलिंग्स साला अपने बाप के देशभक्ति के भाषण सुनकर ..टीचर्स के बोरिंग पैट्रिऑटिज्म के लेक्चर सुनकर नही आई वो इस बन्दे से बस एक छोटी सी मुलाकात से जोर मारने लगी है रोहित पेट्रॉल खत्म हो रहा है यार और ये तो रुकता ही नही क्या करें ...?"
" ले तेरी बात सुन ली ...कार चुपचाप उसकी बाइक के पीछे पार्क कर "
तीन अँधेरी गलियों के बाद वो एक अपार्टमेंट में घुसा ...और एक दो मंजिला ईमारत की सीढ़ी चढ़ कर एक कमरे का डोर ,,की से ऑपन किया
" क्या बोलता है रोहित वापस चलें या डोर नॉक करें ...?"
कॉइन निकाला गया ..हेड आते ही डोर नॉक हुआ ..
" तुम्मम्म ...व्हाट्स योर प्रॉब्लम ..?"
" सर वी डोंट नो ...बट यू आर रियली अ पेट्रियट ...सैल्यूट सर !"
" कॉफी पीओगे ..?"
तीनों ने अंदर इंट्री की ...किसी भी जगह भगवान की जगह नजर नही आ रही थी ...हर जगह सिर्फ भगत .,इकबाल ..बिस्मिल के शेर ..आजादी के शेरों की तस्वीरें ....वगैरह
तभी रोहित बोला -
" सर आप करते क्या हैं ?"
" मैं वो करता हूँ रोहित जो तुम्हे चैन की नींद सोने देता है "
तीनों ने एक साथ होंठ गोल किये और बोले -
" मतलब....?"
" आई एम दि पार्ट ऑफ़ इंडियन आर्मी ...अ सीक्रेट पार्ट ...मैं मुल्क में छुपे टेरेरिस्टों को ढूँढता हूँ ...देश के खिलाफ षड्यंत्र रचने वालों का सफाया करता हूँ ..."
" ओह मॉय गॉड ...सर यू आर ग्रेट "
तभी फिर वो देशभक्त बोला -
" पीटर इस बार हम सब खतरें में हैं ...."
" व्हाट डू यू मीन सर ..?"
" पीटर आने वाली 26 जनवरी को दिल्ली खून और बारूद से लाल होने वाली है "
" ओह्ह्ह माय गॉड सर ...क्या कह रहें हैं सर "
" रोहित पाकिस्तान के आतंकी बेसकैम्पों से 26 जनवरी को अनगिनत मिसाइल्स दिल्ली में दागी जायेंगी ...."
" तो सर आप डिफेन्स मीन्स गवर्मेंट को बता दीजिये .."
" ये सिस्टम करप्ट है ..हर जगह आतंकियों के सपोर्टर और स्पोन्सर्स मौजूद है ..,.इंडियन आर्मी जो अब तक बची हुई थी उसमें भी इनके लोग समा चुके हैं ...देश खतरे में है दोस्तों ...अगर उन आतंकियों को जरा भी भनक लग गई तो वो मिसाइल्स कभी भी लौंच कर सकतें है ...हमारे एंटी मिसाइल्स सिस्टम से मॉडर्न मिसाइल्स सिस्टम है उनका राडार भी इंटरसैप्ट नही कर पायेगा "
ख़ामोशी फिर छा गई और हॉट कॉफी फिर कोल्ड हो गई ...इस ख़ामोशी की चीरा आकाश ने ...
" सर अब क्या कोई रास्ता नही ...?"
" सिर्फ एक रास्ता है आकाश ..अगर हम उन मिसाइल्स के लॉन्च होने से पहले उन पर अपनी मिसाइल्स दाग दें तो ..."
" इससे तो वॉर हो सकता है सर "
" नही ! आये दिन बॉर्डर के पार से गोलियाँ चलती है ...हम इसी बीच उनको इंटरसेप्ट करके उन पर मिसाइल्स दाग सकते हैं ....और सब नॉर्मल लगेगा ...क्यूँकि वो बेस कैम्प जहां से मिसाइल्स छोड़ी जाने वाली है वो पाकिस्तान के बीहड़ जंगलों के बीच है "
तीनों ने एक साथ बोला-
" वो क्या अंतिम रास्ता है सर जिससे दिल्ली को बचाया जा सकता है ...?"
वो देशभक्त कोल्ड कॉफी को एक साँस में खत्म कर बोला -
"हमें इन्डियन अल्ट्रा बेस मिसाइल्स एक्टिवेट करनी होगी ....और वो तभी एक्टिव हो सकती है जब उसका रिमोर्ट और पासवर्ड हमें मिल सके "
" ये कैसे मिल सकता है सर ...?"
" आकाश तुम तीनों मिलकर दिल्ली बचा सकते हो ...मिसाइल्स रेंज कोड रक्षा मंत्री के पास होता है ..चार्जिंग कोड सेकेट्री के पास और लॉन्चिंग पासवर्ड एयर चीफ मार्शल के पास ....बाकि तुम खुद समझदार हो ...लेकिन याद रखना ये खबर अगर जरा सी भी लीक हुई तो दिल्ली की बर्बादी तुम तीनों के नाम होगी ...हमारे पास सिर्फ तीन दिन बचे हैं "
तीनों दोस्त बाहर आये कार पर बैठे ...और खामोशी से कार चलने लगी ...पेट्रोल पम्प से तेल भरवाया और सब अपने -अपने घर चले गए ...लेकिन नींद किसी की भी आँखों में नही थी
सुबह तीनों फिर मिले ...और तीनों ने इरादा कर लिया कि दिल्ली बचा कर रहेंगे चाहे खुद बचें न बचें
तीनों ने अपने पिता के वहाँ सघन चोरी की ...इसके लिए तीनों को स्टेप बाइ स्टेप योजना बनाकर दी उस सच्चे देशभक्त ने ।
तीनों सारा ख़ुफ़िया सामान लेकर फिर क्लब में मिले और कॉफी की सिप लेते -लेते वो देशभक्त बोला -
" गाइज अब दिल्ली बच जायेगी ...थैंक्स फॉर दिल्ली "
तभी आकाश बोला -
" सर दिल्ली उजड़ जाये दिल्ली फिर भी दिल्ली है ...हम तीनों ने ये सब दिल्ली के लिए नही बल्कि दिल्ली के मासूम और निर्दोष लोगों के लिए किया है ...हम तीनों तो ये भी नही चाहते कि जहां हमारी मिसाइल्स जाकर गिरे वहाँ एक भी निर्दोष पाकिस्तानी मारा जाये ...क्यूँकि वो भी इंसान है ..? और किसी के बेटे, किसी के भाई , किसी के सुहाग ...,सर आजादी के परवानों ने भी किसी मासूम की जान नही ली ...और हम उन्हीं परवानों के अनुयायी हैं ...."
देशभक्त ने उन तीनों के मासूम चेहरे और आँखों में नजर डाली और पता नही क्यूँ उस महान वतनपरस्त की आँखें झुक गयीं
अगले दिन यानि 25 जनवरी की शाम तीनों आनन -फानन में उस देशभक्त के घर पहुँचे ...
" क्या हुआ तुम तीनों को ...?"
" सर अभी तक कोई खबर नह है ...सर वो मिसाइल्स नष्ट हुईं की नही ?"
" बैठो !"
उनके बैठते ही कुर्सी पर ऑटोमेटिक लॉक लग गया ..वो तीनों कुछ पूछते ही तभी देशभक्त का फोन बजा और उसने फोन स्पीकर पर लिया -
" ...वक्त आ गया है मेरे बच्चे ...तबाह कर दो दिल्ली को उनकी ही मिसाइल्स से ...बच्चे तुम आज तक की नस्ल ए मुजाहिद में सबसे बड़े गाज़ी हो ...दुनिया जरूर तुम्हे इंजीनियर इमरान जमान कहे लेकिन तुम आने वाली मुजाहिद नस्ल के अमीर हो क्या प्लान बनाया.. क्या किरदार निभाया ..क्या तीनों को बोतल में वतनपरस्ती दिखा -सुना कर जज्बाती किया ....वाह ...वक्त कम है बच्चे तबाह कर दो दिल्ली सुनते हो ..?"
इमरान ने कुर्सी में बैठे -बैठे अपनी कमर से रिवाल्वर निकाली और तीनों पर तान दी फिर यकायक उसे टेबल में रखा और फोन पर मुखातिब हुआ -
" अमीर साहब ...मेरी अम्मी की कोख आज नापाक हो जाती ...और नापाक हो जाता नस्ल ए आदम का लहू ...मेरे आका सरवर ए कायनात की उम्मत रुसवा और पामाल हो जाती ...अल्लाह मुझे कभी माफ़ नही करता ....अगर ये तीनों सच्चे हिंदुस्तानी लौंडे मुझसे न मिलते ...अमीर साहब एक आप हैं जो मुसलमानों की बदतरीन हालात के हवाले से मासूम पाकिस्तानी लौंडो के मन में हिन्दुस्तान के खिलाफ जहर भरते हैं ...उन्हें कलम की जगह बम और रिसालों की जगह बन्दूक थमाते हैं ...आप हिंदुस्तान के इंसान के बहते लहू को देखकर मुस्कुराहतें हैं उसे अल्लाह का काम बोलते हैं और एक ये मासूम हिंदुस्तानी है जो ये कहतें हैं कि मिसाइल्स से कोई निर्दोष पाकिस्तानी न मारा जाये....क्यूँकि वो भी किसी का बेटा, भाई और शौहर है ....इन लौंडो को दिल्ली की नही बल्कि दिल्ली के इंसानों की फ़िक्र है ...वो इंसान जिसमें हिन्दू ...मुसलमान और सभी मजहब के मानने वाले बसतें हैं ....जबकि आपके दहशतपरस्त तो भीड़ में गोलियाँ और बम बरसाते वक्त किसी से ये भी नही पूछते कि तुममें से मुसलमान कौन है ..? जिस काम को आप मुसलमानों की बेहतरी और रब्ब का काम बोलतें है बेशक वो शैतान का काम है ..आजादी के 70 साल से अब तलक तुम अमीरों , आकाओं ने इस पार और उस पार के न जाने कितने मासूमों को मौत से बदल डाला ..लेकिन इंडियन आर्मी के एक जवान को न बदल सके ...खैर ....और फ़िक्र न करें अमीर साहब ... मिसाइल्स छूटने वाली हैं लेकिन अमीर साहब दिल्ली नही बल्कि दहशतपरस्ती और उनके आकाओं पर ...."
बटन दबा ...और इंडियन मिसाइल्स दहशत की हुकूमत की ओर निकल पड़ी ...हमारे भी लॉक खुले ...इमरान ने कलमा पढ़ा और अपने रब्ब का शुक्र अदा किया ....और अपने दिमाग में नली चढ़ाकर खुद का खात्मा कर दिया ....
पता नही क्यूँ हम तीनों के हाथ खुद ब खुद उसकी सलामी पर खड़े हो गए ....दिल्ली और दिलवालों की जीत तो हुई लेकिन
टेबल पर रखी इमरान की कोल्ड कॉफी अब तलक हिल रही थी ....जैसे बोल रही हो
" जय हिन्द ! "
नवाज़िश
Junaid Royal Pathan
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