Monday, 11 February 2019

शुक्रिया

#शुक्रिया
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नमन ...आदाब ..सत श्री अकाल !

ये बात कम संतुलित लगे कि मैं कुछ खास महसूस कर रहा हूँ , परन्तु ये दृढ़ और अडिग है कि मुझे आज आप साहिबान ने खास बना दिया या फिर आज मुझे एक दिन ही सही खास होने का एहसास मुहैय्या कराया ।।।।

जितने विश्वास और स्नेह के पुष्प आज मुझपर बरसे सम्भवतः ये कब हुआ ..या ये कभी हुआ भी इसका मुझे इस इकलौती उम्र में एहसास नही ... लेकिन इतना पता है कि मुझे आपने ये जतला अथवा बतला दिया कि मुझे आप मित्र स्वीकार कर चुके हैं ...और जानकर सुकून हुआ कि कुछ मित्रों ने मुझे अपने हृदय में भी स्थान दिया है ...

किसी को मैं मद में लगूँ लेकिन कई मित्रों ने मुझे अपने परिवार का हिस्सा भी मान लिया है ....किसी ने बेटा ...किसी ने भाई तो किसी ने अपना गहरा और विश्वासप्रद मित्र भी स्वीकारा है मुझे ।।।

प्रतिदिन मुझे मित्र अपनी समस्याएं ..अपने सुझाव , और मार्गदर्शन भी प्रदान करते है .....और हूक उठ जाती है कलेजे में जब मित्र अपने जीवन के वो राज , वो घटनाएं भी मुझसे साझा करते हैं जो आज तलक उन्होंने केवल स्वयं को ही एकांत में हौले से बताई है ....

विगत वर्ष बड़े उतार चढ़ावों के नाम रहा ..जहाँ मैंने अपनी किस्सों की शक्ति को खोया अर्थात अपनी बड़ी नानी जिन्होंने मुझे कलम पकड़वाने में अपनी पूरी उम्र दे दी वहीँ एक सगा मित्र भी मुझे मझधार में अलविदा कह गया ....

वो पल बड़ा अनूठा रहा मेरे निमित्त जब मैंने  मित्रता रिक्वेस्ट का  अम्बार देखा ...जब मैंने लाइक्स कमेंट की भरमार देखी ...चकरा सा गया मैं ,, मैंने देखा कि पुराने किस्से जिन्हें सिर्फ कुछ लोग पढ़ कर वाह करके मुझे सेंकते थे उन्हीं किस्सों को नव मित्रों ने खोद के मुझे मेरी मेहनत और कल्पनाओं का असल ईनआम दिया ....

एकाएक मैं प्रसिद्ध सा हो गया ...गर्व की बात रही जब एक प्रतिष्ठित अखबार ने मेरे किस्से "मोक्ष" को अपने अखबार में जगह दी ...

कुछ कम बजट के फ़िल्मी डायरेक्टर्स ने भी मुझसे सम्पर्क साधा ...और लोकल चैनल्स पर धारवाहिक बनाने वाले दो निर्देशकों ने भी ,,, एक लोकल समाचार पत्र ने भी मुझसे स्तम्भ लेख लिखने की बात भी कही....इन जल्दी -जल्दी घटने वाली घटनाओं ने मुझे भी जल्दी का इंसान बना दिया ...मतलब मैं अपनी स्वाभाविक और अंतर्मुखी जिंदगी में एक नग्न द्वन्द देखने वाला दर्शक मात्र बनकर रह गया ....

और एक तीखा निर्णय लेकर मैंने फ़िलहाल अपनी पूर्व लाइफ को ही वाइफ मानकर उससे ही निकाह बनाये रखा ...और चकाचौन्ध को फिलहाल अलविदा कहा ।।।।

जहाँ मैंने प्रशंसा एवं प्रशंसक कमाये वहीँ मैंने अनजाने में उन जीवों का संग्रहण कर लिया जो मुझसे मात्र इसलिए जुड़े थे कि उन्हें मुझमें कुछ आशा की किरण नजर आई .....उनका लगा कि मैं  उनकी किसी गुप्त कुंठा को सार्वजनिक नंगी जुबान प्रदान कर सकता हूँ ...उन्हें लगा कि मैं उनके किसी एजेंडे को आगे बढ़ा सकता हूँ ...तो उन्होंने दिल खोलकर मुझे प्रमोट किया और अपने जैसे और जीव मुझसे जुड़वा दिए ....

लेकिन धीरे -धीरे उनको चोट लगनी शुरू हुई जब उन्हें लगा मै उन जैसा नही अपितु मैं तो वो निर्लज हूँ जो किसी का सगा किसी का सौतेला नही.....

फिर क्या था दाता ही खाता बन गया ...ये सब सामान्य होगा ...खुर्राट फेसबुक मित्रों ने सलाह दी कि ये सामान्य है ...कुछ दो हाथ आगे बढ़कर बोले कि इसका अर्थ आप प्रसिद्ध हो रहें है ....

लेकिन यदि मान भी लूँ कि मैं प्रसिद्ध होना चाहता भी हूँ तो उसकी कीमत क्या होगी ....कीमत के तौर पर पेशगी ये रही कि अब तक सिर्फ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करती आई  मेरी " पाक अम्मीजान " को भी इन्होंने अभद्र अल्फाजों से नवाजा ...जबकि उनको तो फेसबुक लॉगिन करना भी नही आता ....फिर मेरे परिवार के हर सदस्य को इन्होंने अपने परिवार से पृथक करते हुए वो गालियाँ दी जिनको यदि इनका परिवार सुन ले तो निःसंदेह उनका सर शर्म से झुक जायेगा ।।।

खैर खुद को इनसे पृथक किया ...और लाइक्स ..कमेंट्स से मोह भंग हुआ ...एक वृहत् संख्या यानि 585 जीवों को मैंने अमित्र किया और आगे भी पहचान-पहचान करता जाऊँगा .....

कुछ ऐसे भी मित्र है जो स्वयं के लिए सक्रिय एवं मेरे लिए निष्क्रिय है तो उनको भी बाइज्जत विदा बोलता रहूँगा ...फिर चाहे कुछ न रहे मेरे पास लेकिन कम से कम इतना तो बचा रहेगा कि मेरी कलम ओहदे वाली तो बनी रहेगी ...और मेरा परिवार मेरी कलम की जद से आजाद तो होगा ।

अब बात उन मित्रों की जो मेरी कलम की असली शक्ति मेरे किस्सों का असली जेवर हैं ...मैं उनको सलाम पेश करता हूँ ... मैं उन प्रत्येक मित्रों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ जो निरन्तर मुझे फोन अथवा मेसेज के माध्यम से पूछते रहतें है कि आज किस्सा लिखोगे या नही ...?

मैं आभार प्रकट करता हूँ उन बेहद भावुक मित्रों का जिन्होंने मुझे पत्र भी लिखे हैं ...उनका जिन्होंने मेरा स्कैच बनाया है ....

आज 11 फ़रवरी को अल्मोड़ा , हल्द्वानी , रुद्रपुर , श्रीनगर  , अफजलगढ़ , बरेली , सुल्तानपुर पट्टी , चौरस एवं गोंडा में  मेरे सम्मान एवं प्रेम में एक मुशायरा , जनमिलन , विद्यालय भोज , फल वितरण आदि आप लोगों ने किया ..ये बर्दाश्त योग्य नही था मेरे लिए परन्तु जब मित्रों ने इसका प्रमाण प्रस्तुत किया तो मुझे लगा कि वाकई मैंने कुछ कमाया न कमाया लेकिन कुछ इंसान तो कमा ही लिए ....

आज विद्यालय में एक मीटिंग प्रस्तावित थी ..प्रभारी प्रधानचार्य का पद वहन करते हुए पता ही नही चला कि कब बच्चों ने एक विद्यालय में मुझ कमीन के वास्ते दो बर्थडे पार्टी इतने कम समय में आयोजित कर दी ...उसके उपरांत दो अन्य स्थानों पर भी क्षेत्रीय लोगों ने ये सम्मान मुझे प्रदान दिया ...

उन साहिबान का भी विशेष धन्यवाद जिन्होंने मेरे जन्मदिवस को अपनी वॉल पर जगह दी ....उन समस्त का भी अभिनंदन जिन्होंने मुझे इनबॉक्स में तकरीबन 2700 मेसेज प्रेषित किये ....

मैं प्रयास करूँगा कि आप तमाम साहिबान का जवाब देकर अपने को जिम्मेदार जता सकूँ ...और नमकहलाल भी ....परन्तु कुछ मित्रों ने चौंकाया भी ,..और जानते-बूझते भी एक ढेला मुहब्बत का नजर नही किया ....मैं उनका भी आहत परन्तु आभारी हूँ ......

बाकि लिखता था ...लिखता रहूँगा और तब तलक तो यकीन मानिये जब तलक या तो मुझे सब पढ़े या फिर खुद को सिर्फ  मैं .....

प्रसिद्धि के लिए नही अपने करार ..अपने जिंदगी के कमिटमेंट और अपने लेखन के प्रति नशेड़ी रवैये के अड़ियल पने के लिए लिखता हूँ ...कोई गम नही होगा कि मुझे कसम है पाक पैदा करने वाले की ..कि कोई मुझे छोड़े ..तोड़े ..मोड़े या रूठे .......कट्टर खानाबदोश कलम है मेरी और व्यक्तित्व बेहद अंतर्मुखी और एकाकी ....जो जुड़ेगा और एक बूँद इज्जत देगा मैं उसके लिए कालीन बनने का हुनर और सलीका भी जानता हूँ और जो एक भी तंज बेवजह नजर करेगा ....तो मैं उससे अपनी मित्रता ही बेवजह मान कर उसे अलविदा कहने में गुरेज भी न करूँगा ......

आप सभी मित्रों का तहे दिल से इस्तकबाल ...सलाम ...शुक्रिया और मुझ कमअक्ल को इतनी मुहब्बत से नवाजने का आभार .....

आप सभी मित्रों को पुनः मेरा नमन ..आदाब ..सत श्री अकाल ....

हर मजहब कि मैं इज्जत करता हूँ ...क्यूँकि हर मजहब मेरे मुकम्मल मुल्क को सींचता है ....लेकिन इंसानियत को मैं रगों में रखता हूँ ताकि खून का रंग और मिजाज न बदले ।।।

नवाज़िश

Junaid Royal Pathan

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