कड़वी, बेपर्दा मगर समाज की सच्चाई!
#शैतानी_सल्तनत
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" अरे बाप रे बाप ...ई हस्पताल है कि कोई राजा का महल ..."
" सुनो जी ! हल्के बोलो ..ई हमार गाँव नही ..देखो सब कइसे टुकर-टुकर देख रहे हैं "
" अच्छा चम्पा तुम दीपू के साथ इहीं बैठो ..हम आये अभी पता -जवाब करके "
तभी एक फॉर्मेसिस्ट का गुजर हुआ ...और वो चम्पा और उसके तकरीबन 7 साला बच्चे को देखकर बोला -
" अरे क्या कर रही हो ..मार्बल खराब होगा ऊपर बैठो ...वो कुर्सी लगी तो है "
मैं वहीं था ..वहीं बिल्कुल उस देहाती औरत के सामने बैठा.. .. रूटीन चैकअप कराने आता हूँ ,, बहुत सतर्क हूँ अपनी हेल्थ को लेकर ....अब मेरी नजर उसके पति पर पड़ी ...
" भैय्या ई का लिखा है ...मतलब बता दियो तो मेहरबानी होगी "
" हूं ..हूं ..अल्ट्रासाउंड ..ये सामने जहाँ ..जिस विंडो में लाइन लगी है वही आप भी खड़े हो जाओ "
" मालिक बरकत दे ....आपको "
अब एक स्वीट लौंडिया के पीछे और एक मॉडर्न हॉउस वाइफ के बीच में खड़ा था वो देहाती ..लेकिन स्वीट लौंडिया को कोई प्रॉब्लम नही क्यूँकि वो शायद अपनी dp पर कमेंट देख रही थी ,, उसकी अल्हड़ तो नही मगर वेस्टर्न मुस्कुराहट से मुझे ऐसा लगा ...मगर मॉडर्न हाउस वाइफ को उस देहाती से बदबू आ रही थी ..उसने मुँह में रुमाल रख लिया ,, उसकी जगह मैं भी होता तो बेशक यही करता ...अबे गरीब हो तो इसका मतलब ये नही कि साफ-सफाई छोड़ दो ...लेकिन झट उसकी बीवी पर नजर पड़ी तो पता नही क्यूँ एहसास हुआ कि ये साले ...बहुत लम्बा सफर करके यहाँ पहुँचे हैं ....तो बदबू लाजमी है ...एक पिठल्ले भर का मंगलसूत्र , कान में गुम होती दो टिल्ली वाली छटांग भर की बालियाँ ...और हाथ में सस्ती चूड़िया ..दाँये में पाँच और बाँये में दो ....बाकि और कुछ नही था उसमें देखने को ...हाँलाकि मैं बी ग्रेड सेक्सी मूवीज बनाता हूँ ...और हर औरत में मुझे कुछ न कुछ सेक्स अपील दिखाई देती है लेकिन ये औरत मुझे हर नजर से बंजर दिखी .....फिर आँख फेरी देहाती पर ...
" हजूर ई मामला है जरा हाथ लगा दो "
" 800 रूपीज दीजिये "
" क्या ...मालिक मिल्कियत क्या कहा 800 रुपया ..?"
" हाँ जल्दी करो ..."
झट से लाइन से टूट कर अलग हो गया देहाती और दौड़ता हुआ अपनी बीवी के पास पहुँचा -
" चम्पा लूट है ...800 रुपया माँग रहे हैं ..देखो तो ..?"
जितना देहाती न सहमा था उतना ही अंदर तक काँप गई उसकी लुगाई ..बच्चा गोद में बैठ टिम-टिम सब देख और सुन रहा था ....दोनों कुछ देर खामोश रहे ...और न जाने क्यूँ चम्पा आँख में आँसू खरीद लाई ....
बगल में बैठे सीनियर सिटीजन ने नेक कॉलर लगी गर्दन को बड़ी मेहनत कर उनपर टिकाया और मामले का संज्ञान लिया ...और कहा-
" देखो भैय्या इसे कहते है अल्ट्रासाउंड ... पेट में जो खराबी हमें बाहर से नही दिखती इसके मारफत वो दिख जाती है ...क्या समस्या किसको है ..? अच्छा ये ..ये..दीपक लिखा है ...ये इस बच्चे का है ..?"
" जी माईबाप ...तीन दिन से पेट ने गर्मी पकड़ ली है इसके ... उलटी करता है और उसमें खून आता है "
" तो ये तो गम्भीर बात है ..अल्ट्रासाउंड तो करवाना होगा ...अच्छा मेरा नम्बर आ गया ....."
साला अल्ट्रासाउंड नही हो गया कोई तोप चीज हो गई ....मन किया खड़ा होकर चिल्ला कर कहूँ कि क्यूँ बे जब औकात नही तो यहाँ आया क्यूँ ..? तुम जैसों के लिए तो सिर्फ सरकारी अस्पताल बने है ।
लेकिन मेरे इस सवाल का जवाब खटाक से दिया चम्पा ने वो बोली -
" अब का होगा दीपू के बापू ..सरकारी बालों ने तो मशीन नही है ..डोटर साब नही है कहकर यहाँ भेजा अब क्या होगा ...?"
फिर साला रोना ...शुरू कर दिया ...मन किया कहूँ गेटकीपर से अबे इन नौटंकीबाजों को बाहर कर ..लेकिन मेरे मन की रौद्र बात शायद देहाती ने सुनी और झट से कुर्ते के अंदर की चोर जेब में हाथ डाला... गिनती के कुछ 1700 रूपये निकले ....धत् साला .. आठ सौ आठ बार गिने और लाइन पर दुबारा खड़ा हो गया ....
मेरे डॉक्टर आज ट्रैफिक में फँस गए हैं फोन आया था उनका ...हाँ तो फिर अल्ट्रा साउंड भी हुआ देहाती का ...पता -खोला पूछ कर डॉक्टर से भी जा मिला ....डॉक्टर के केबिन के अंदर घुस रहा था तो थोड़ा घबराया हुआ जरूर था ...लेकिन बाहर निकलते वक्त उसका कुर्ता उसकी आँख के पानी से भीगा हुआ था ....वहीं सटी दीवार में मुँह टेक दिया उसने और सिसक -सिसक कर रोता रहा ....फिर उसने अपने आँसू अपने गमछे से पोंछे और बीवी के पास पहुँचकर बोला -
" चम्पा दीपू का आपरेशन करवाना होगा और वो भी आज रात "
" पत्थर की मूरत बन गई देहातन ....लेकिन आँसू की एक तेज धार से पता चला कि उसमें जान है ..."
" चम्पा जान बच जायेगी ..तू चिंता न कर ...लेकिन "
" लेकिन.. क्या दीपू के बापू ? "
" 70 हजार ...70 हजार रुपया लगेगा .. ?"
" कय्य्या ...दीपू के बापू कहाँ से लायेंगे ...सिर्फ नाम भर सुना है इसका ..क्या करेंगे बोलो ...बोलते क्यूँ नही ...?"
" वही जो एक खुद्दार इंसान नही करता ..वो मर सकता है लेकिन किसी के आगे हाथ नही फैला सकता "
और झट उठा देहाती और एक ऊंची आवाज में अपने बच्चे के दर्द और अपनी मजबूरी को बयाँ कर गया ...
आते -जाते लोग दर्शक थे ...कुछ एक डॉक्टर भी बाहर आये ....अस्पताल मैनेजमेंट ने सिक्योरटी वाले को इशारा किया और उसने उस देहाती का हाथ पकड़ उसे बाहर खींचा .....उसके पीछे देहातन भी दौड़ गई ....बच्चा भी नन्ही टाँगो से बाहर आ गया ...अब अस्पताल के अंदर कुछ था तो उनकी पोटली जिसे सिक्योरटी वाले ने उनको थमा दिया ...लेकिन उसकी फरियाद खाली नही गई ...कोठी..महलों ..गाड़ी वाले ..100 रूपये तो ज्यादा 500 रूपये का महादान करते रहे ....चम्पा अपने पति की इस लाचारी पर सिर्फ रोती और सिर्फ रोती रही ....कुछ साढ़े 5 हजार जमा हुए ...और जमा हुई एक गहरी ख़ामोशी ... जिसे तोड़ा चम्पा ने और झट से अपने मंगलसूत्र और बालियों को देहाती के हाथ में रखा ..और देहाती न रोया , न कुछ बोला ..बस खड़ा होकर चलता रहा ...
कुछ देर में कोई 17 हजार बटोर कर लौटा ... मैंने इस इमोशनल ड्रामे से खुद को अलग किया और उठ कर अपनी कार तलक पहुँचा ...तभी न चाहते हुए.. फिर मैं इस ड्रामे का हिस्सा बन गया ....क्यूँकि अब जो घट रहा था वो सब कम से कम मेरे लिये तो कतई सामान्य नही था ...
एक आदमी आया उसने देहाती को 70 हजार देने का आश्वाशन दिया ...देहाती ने चम्पा की ओर देखा ...और चम्पा हक्की-बक्की होकर होंठ सिल बैठी .....उसने देहाती को अपने साथ लिया और मुख्य सड़क पर आया ...एक ऑटो वाले को हाथ दिया ...और ऑटो चल निकला ...एक अनजाने डर ने पता नही क्यूँ मुझे ऑटो का पीछा करने को कहा ...ऑटो तकरीबन 20 मिनट की यात्रा के बाद जाकर रुका एक कम भीड़-भाड़ वाली गली में ....मैंने भी गाड़ी वहीं पार्क की और उन दोनों का पीछा किया .. सामने एक डॉक्टर का एक छोटा सा पर्सनल क्लीनिक दिखाई दिया ....
जब देहाती उस व्यक्ति के साथ डॉक्टर के चेकअप रूम के अंदर घुसा तो मैंने भी बाहर से दरवाजे पर कान लगा दिए .....
अंदर जो सुनाई दिया मेरी आत्मा हिल गई ...मैं हड़बड़ाहट में तुरन्त बाहर आया ...और सीधे पुलिस को फोन किया ....पुलिस भी अफिल्मी अंदाज में वक्त से पहले पहुँची ...और किडनी रेकेट चलाने वाले इस पूरे खेल का पर्दाफाश हुआ ....लेकिन मैंने जबरन की लकड़ी ले ली ...क्यूँकि अब सवाल फिर कुछ हजारों का था जिसकी देहाती को जरूरत थी ....
देहाती लाचार होकर अस्पताल लौट गया ...लेकिन मैं कार में बैठकर ये सोचता रहा कि क्यूँ न उसकी जरूरत मैं पूरी कर दूँ ....लेकिन एक लड़ाई अपने आप से चलती रही कि मैं भी तो जब इस शहर में आया था तो किसने मेरी मदद की ...मेरी मासूम बच्ची भी पैसे की तंगी के चलते इसी तरह बिना इलाज के मर गई ...मैं भी तो गाँव से आया था तो क्यूँ नही किसी गाँव वाले ने मुझपर भरोसा किया मेरा साथ दिया ...खुद से 15 मिनट चली इस लड़ाई में जीत इंसानियत की हुई ...और मैं सीधे अस्पताल को निकल गया ...
कुछ दूरी पर मुझे वो देहाती बेसुध होकर हल्के कदमों से चलता दिखाई दिया ...मैंने सोचा लिफ्ट देकर उसको रूबाब में कहूँगा .. " कि मैं हूँ ..अब तू चिंता न कर "
लेकिन उसतक पहुँचने से पहले ही वो मौत तलक पहुँच गया ...एक तेज गति से आते ट्रक ने उसे कुचल दिया ....मैं फौरन कार से उतरा और उसके मसले हुए शरीर तलक पहुँचा ...उसने आखरी हिचकी ली और बोला - " दीप्पू "
भीड़ लग गई चारों ओर ...मेरे हृदय परिवर्तन में हुई देरी ने एक मासूम की जान ले ली ...लेकिन दूसरा अपनी जान नही देगा ...मैंने आनन -फानन में कार को अस्पताल ले जाकर रोका ...शाम ढल चुकी थी और उस बेवा ..उजाड़ देहातन की सूनी गोद में एक जिंदगी और हमेशा के लिए विराम पा चुकी थी .....वो बेवा देहातन जिसमें मुझे कोई सेक्स अपील नही दिखी थी दरअसल ..वो इसलिये नजर नही आई क्यूँकि वो एक " माँ " थी ...शैतान भी माँ से 25 कदम पीछे रहता है ...लेकिन मेरे अंदर का शैतान जिन्दा था या मर गया ..इसे कभी और दिन तोलूँगा ...लेकिन सामने खड़ी अस्पताल की वो बिल्डिंग ..जो जीवन रक्षक मानी जाती है ...जहाँ हर डॉक्टर भगवान का रूप होता है ...वहाँ शैतान की सल्तनत चलती है ...इसका मुझे पूरा यकीन हो गया ,,,भारत में आये दिन ऐसे ही अस्पताल न जाने कितनी जिंदगियाँ लील जाते हैं ... वो बेवा देहातन अब भी खामोश है ...शायद उसे किसी के लौटने का इन्तेजार है ताकि वो उसकी छाती से लगकर उमड़ पड़े ........
नवाज़िश
Junaid Royal Pathan
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