Thursday, 14 February 2019

शहीद

शर्मिंदा हूँ मेरे मादर ए मुल्क ...मेरी जान हिन्दुस्तान ...कि मैं आज सिपाही नही सिर्फ एक छुट्भैय्या कहानीकार हूँ  ।।।।।।।

उम्मत ए रसूल करबला में सामने से लड़ी थी ....

छुप कर पीठ पीछे से सर यजीद के लश्कर ने उतारा था ।।

मेरी बेबाकी मुझे गालियाँ नजर करती है ...और जो आज सरहद पार वालों ने नजर किया है उसको कोई हिजड़ा बहादुरी कहे तो समझ लेना तुमने आलम ए इस्लाम और अपने दायरे में नामर्द और गद्दार पैदा करने शुरू कर दिए है ....

ये गद्दार तब भी थे जब रसूल दुनिया में जिस्म लिए मौजूद थे ...ये अब भी हैं जब आप जिस्म से हमारे बीच नही .....

इनसे हर दौर हमने जंग लड़ी है .... याद करो हजरत हुसैन  को करबला में दाढ़ी ..टोपी वाले  .. ...हाफिज ..कारियों  आलिमों ..और मुबललिगों ने  ही शहीद किया था ....

आज तुम उन्हें मुसलमान नही बोल सकते क्यूँकि वो खूनी थे ...कातिल थे ...गद्दार और एहसान फरामोश ..नमकहराम और उम्मत ए रसूल पर गहरा स्याह दाग थे ....

तो आज अगर किसी ने सरहद पार वाले इन दहशतगर्दो  को मुसलमान कहा तो उसने रसूल के बनाम अपनी उम्मत चुन ली ....

हश्र ए मशहर फैसला करेगा ...कि रसूल की उम्मत से खिलवाड़ ...उनके दीन का नाम और मिजाज खराब करना ...उनकी सुन्नत का मख़ौल उड़ाकर ..अपना इस्लाम बनाना और उसे थोपना ...कुरआन हदीस का गलत तर्जुमा कर लोगों को बम ..बन्दूक से बदलने... के एवज में तुम्हे क्या मिलता है ....

लेकिन मुल्कपरस्ती इस्लाम का एक बुनयादी शुमार है .....और अपनी जमीन ..अपने ओहदे से मुहब्बत करबला का फ़लसफ़ा .....

मैं उस इस्लाम से खुद को अलग करता हूँ जिसकी कार का स्टीयरिंग कट्टरपन्थ के हाथों में हैं ...मैं उस इस्लाम का नुमाइंदा हूँ जहाँ रसूल का अखलाक और वतनपरस्ती जगमगाती है .....

पुलवामा में ..बेटा .. भाई ..पति खोई हर माँ-बहन को मेरा जवाब कि अति के बात अंत सुनुश्चित है ....

मेरा यकीन कीजियेगा ...कि शहीद ठेठ मर्द होते हैं ...और बेशहीद नामर्द पीठ पीछे से घात लगाकर वार करने वाले  .....

और यकीन ये भी कीजियेगा ...हूरें शहीदों के हिस्से आती हैं ...न कि बुजदिल और कायरों के ....

यकीन कीजियेगा शहीद हमेशा ज़िंदा रहते हैं ...और उन्हें हलाक करने वालों को तो ये जमीन भी उगल देती है ....

यकीन कीजियेगा आप के बेटे ..भाई और शौहर पूरे मुल्क के बाशिंदों की आँख भिगो गए ....और इनकी बदनाम कब्रो पर कोई कुत्ता भी टांग  उठा दे तो मेरा गिरेबां आपके हाथों में ....

नवाज़िश

Junaid Royal Pathan

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