Tuesday, 26 February 2019

डॉन_डायरी

#डॉन_डायरी
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" मैंने कहा..हाथ छोड़िये मेरा ...शेम ऑन यू "

अपन सिर्फ आई लव यू का मतलब समझता है...मतलब प्रेम ..मतलब लौंडिया रेडी फॉर सेक्स।

...लेकिन मोनिका का यू न प्रेम शो कर रिया था न सेक्स ...वो तो हौली कच्ची नागिन सी फुंकार रई थी ...मतलब बोले तो एकदम डेंजर लग रेली थी ..

अपन का फ्लेवर है मोनिका  ..अक्खा कॉलोनी जानती है कि अपन इस पर मरता है ... सोलह की है लेकिन अपन बस इसके अठरह के होने का वेट कर रेला है ...फिर घोड़ा इसके बाप के मत्थे पर टेक अपन इसको लेकर धारावी उड़ लेगा ...धारावी बोले तो अपन की मदर लैंड ....

यहाँ मतलब बोले तो तेलीनगर में अपन के पंटर लोग फैले हैं...और अपने अंडरवर्ल्ड गुरु बोले तो पेंथर  भाई की भी यही कर्मभूमि है ...अपन का एक सपना है कि अपन एक बार पैंथर भाई के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद ले और उनकी तरह अपना टेरर बना सके ... अपन के पंटर भी अपन को छोटा पैंथर बोलते हैं ... पंटर बोले तो अपन के बीड़ू रंगबाज ..यहाँ पहाड़ी चरस का कारोबार जमाया है अपन ने  ...चरस बोले तो काला सोना .....

अपन ऐज 30 मेंटेन किये हुए है ... अपन मोनिका से सच्चा प्यार- श्यार करता है ...अपन जब भी किसी छीनाल संग सोता है ... इमेजिन साला मोनिका को ही करता है ...अपन ने अपनी दाईं कलाई पर मोनिका भी लिखवाया है ताकि अपन को काम और क्रीड़ा में भी साला अपन की सॉफ़्टी विथ टूटी-फ्रूटी याद रहे ...

अपन अक्खा तेलीनगर में सिर्फ अपने ससुर की इज्जत करता है ...और उसकी अपन को देखकर पता नही काहे हो फटती है ....

लेकिन फटेगी तो आज अंकल की...घोड़ा पिछवाड़े पर दबेगा और लोहा मुँह से निकलेगा ... साला महीना भर कॉलोनी का राऊँड नही लिया तो ये चिरकुट बुड्ढा-बाढ़्ढ़ा भी अपन की आईस क्रीम पर लार गिराने पहुँच गया ...

मोनिका अपन को नही जानती ...न ये जानती है कि अपन साला टपोरी -मवाली उस पर मरता है ...लेकिन उसे इतनी तो भनक है कि साला जो उसपर मरता है फिर वो अपने पैरों पर नही चलता है ,,,

अपन ने अपने माल के बस पकड़ने का  वेट किया ...और जैसी ही उसकी बस आई अपन अंकल के क्लोज हो गया ..ताकि अपन उस का डी एन्ड करने से पेले उसे दी एन्ड की गुड न्यूज़ दे दे ....

लेकिन अपन का प्यार शायद गॉड-शोड तक पहुँच गेला है ...तभी उस अंकल की इज्जत पर कारतूस लगने लगा ...

" शर्म आनी चाहिए आपको मिस्टर अपनी उम्र का तो लिहाज कीजिये "

" बेटी की बराबर की बच्ची को भी ...छी "

" पुलिस में रिपोर्ट करो साले की "

पुलिस का नाम सुनते ही अपन का डोर पार्सल भीग गया बोले तो कच्छा ...अपन डरता तो 11 मुल्कों की पुलिस से भी नही है लेकिन पैंथर भाई के बाद अपने मुल्क की पुलिस से अपन की तब से फटती है जब से अपन ने पहली बार उनके तेल पीये लठ अपने गोदाम में गिरवाये थे ...

गोदाम बोले तो ....

तभी एक  लौंडे ने अंकल के मुँह पर देशी लोखण्ड बोले तो मुक्का जड़ दिया ...टाइमिंग और फ़ोर्स एकदम खलटु था बोले तो परफेक्ट ...ब्लड ने नाक से इंट्री दी ...तो एक लात भी अंकल के पेट पर गिरी ...साला चालू निकला अंकल वहीँ लेट गया ताकि और मुम्बईया बरसात न हो ....

साला जिगर की आखरी चिंगारी भी तब बुझी जब अंकल का ढेढ़ हाथ दूर गिरा चश्मा भी एक फेमेनिस्ट लुगाई ने पैरों से मसल दिया ....

बाकि औरतें डर गईं ...और भाग खड़ी हुई ...लेकन अंकल साला पैसेंजर वेटिंग कॉर्नर के मार्बल को स्लीप वेल का गद्दा समझ उसी में पड़ा रहा ....

अपन को दया आ गई ...क्यूँकि दया साला अपन की ऑनरेबल आई का नाम है ...आई बोले तो अपन की " माँ "....

जैसे ही अपन कलटी लेने लगा ...वैसे ही अंकल ने नाग की तरह पैर सीधे कर हाथ को ओरटा बीन बनाया ...

और फिर लेटे -लेटे ...अपना पर्स ऑपन किया ...भीड़ छँट चुकी थी ....तभी अपन की नजर उसके पर्स पर स्लिप हुई तो ...अपन रेटिना ज़ूम कर देखा कि साला अपने माल की फोटू साला अंकल पर्स में लिए घूम रेला है ....और फिर अपन ने घोड़ा निकाल ही लिया जब ..हलकट ने अपने माल की फोटो को ऑन पब्लिक प्लेस किस किया ....

अपन घोड़ा इसलिए अनलोड नही किया क्यूँकि अपन साला मैगजीन रूम में रखकर चलता है वो क्या है अपन थोड़ा वहमी है ...अपन को लगता है कि अगर कमर पेटी में घोड़ा ऑटोमेटिक दब गया तो अपन मोनिका के बच्चों का बाप फिर कैसे बनेगा ....?

लेकिन अपन ने वहीँ सॉइल उठाई और कसम ली कि अपन साला आज ही इस अंकल को खल्लास करेगा ....सॉइल के चक्कर में अपन साला मिलावटी कंक्रीट उठा बैठा ...खैर अपन ने सोचा पेले इस लोटन कबूतर का घर देख लूँ ताकि शाम को इसके घर पर ही इसको ठोक सकूँ ....

अंकल उठा और धीरे-धीरे आगे बढ़ा ...चश्मे न होने की वजह से अपन ने देखा उसे थोड़ी प्रॉब्लम हो रेली थी ....

उसने टैक्सी को हाथ दिया और अपन ने ठीक उसके पीछे पास खड़ी अपनी मोटरसाइकिल को किक !

हिम्मत देखो साले की सीधा अपने माल के स्कूल के गेट के सामने टैक्सी रुकवाई और गेटकीपर को एक लेटर -शेटर टाइप कुछ दिया .....

और फिर टैक्सी में बैठ गया ...अपन को उसका पीछा करना था ...लेकिन अपन को ये भी जानना था कि साला अपने माल को हरामी अंकल ने क्या टिच -टाइप किया है ....

तो जैसे ही गेटकीपर ने उस लेटर को अपनी यूनिफॉर्म में आधा अपलोड किया वैसे ही अपन ने उसे उसकी जेब से लिफ्ट किया और बाइक फिर अंकल की टैक्सी के पीछे रौंद दी ...

अपन को हिलोरा तो हो रेला था कि एक बार लेटर पढ़ ले ताकि अंकल को ठोकते वक्त अपन को डबल एंग्री फिलिंग आये ....लेकिन रिस्क था क्यूँकि अंकल स्लिप हो सकता था ....

अंकल ने टैक्सी गोदावरी बस्ती में स्टॉप करवाई और भाड़ा चुका कर अंकल एक गली के अंदर जा घुसा ....

अपन ने भी गली में बाइक की इंट्री करवाई तो अपन और बाइक दोनों गली में फँस गई ....अंकल को ठोकने की फिलिंग जाती रही और अब फिलिंग ये थी कि हरामखोर उस इंजीनियर और सरकार को ठोक दूँ जिसने इस गली को नाड़े से भी पतला करने में खोखा और पेटी निगल ली ....अपन फँसी बाइक से एयर लिफ्ट हुआ और अंकल के फिर पीछे ...

अंकल ने एक बासी सडल्ले कमरे का जंग खाया ताला ओपन किया और चरचराते दरवाजों को अंदर धकेला ....डोर खुला ही था तो अपन ने भी जूते की आवाज न हो तो बाहर बैठ उसको उतार कर उसके ऊपर मोज़े पहन लिए .....

अंदर इंट्री करते ही अपन की खोपड़ी की बोले तो वॉट लग गई ....आई शपथ अंकल साला एक नम्बर का हारामी निकला ...
अक्खे कमरे की दिवार पर फोटो ही फोटो चिपकी थी और उनके बीच में  अपन के माल की बहुत सारी फोटो टेक रक्खी थी ....

और वो फोटू जो अपन के माल की चोरी -छिपे खींची गई थी.....

अपन ने घोड़ा पकड़ लिया लेकिन दबाया नही ...लेकिन फिर ये घोड़े चलने की इतनी लॉउड आवाज कहाँ से आई ....

अपन ने अंदर जाकर देखा तो अपन की फट के फतेहपुर पहुँच गई ....अंकल ने खुद को शूट कर लिया था ....

अपन इससे पहले कलटी होता पब्लिक ने अपन को दबोच लिया और खूब पिलाई कर दी .....

पुलिस आई और अपन को साथ लिए उड़ चली ....अपन की खोपड़ी में इस वक्त माल नही मार चल रही थी और तेल पीये लठ अपन को फ्लैशबेक हो रहे थे .....

बड़े साहब ने जब अपन से नरमी से पूछा तो अपन ने एक साँस में झट पूरी कहानी सूना दी ....क्यूँकि अपन ने हिंदी फिल्मों  देख रेला है पेले साहब नरमी से पूछते है फिर दुबारा पूछने से पेले चूल्हे में गर्मी करते हैं ....

" अबे दो कौड़ी के टपोरी ...साले..हमने तफ्तीश कर ली है ...वो अंकल उस लड़की का बाप है ...तेरी जुबान में कहूँ तो ओरिजिनल फादर ....उसकी माँ का पहला पति ...समझा भूतनी के ....बेटा छोड़ रहें है क्यूँकि वो सुसाइड नॉट लिखकर गया है अपनी मौत का ....लेकिन अब तेलीनगर और उस लौंडिया के आस-पास भी दिखाई दिया तो ...तेरा एनकाऊँटर पक्का ...बोले तो ठोक देंगे साले ...."

अपन सीधे अपने रूम में गया ...पंटर लोगों को भी कहानी सुनाई ...और कहा धारावी निकल लो...अपन के पसीने के साथ अपन का प्यार भी अपन की बॉडी और दिल से निकल गया ....अपन ने फैसला किया कि साला धारावी में मुन्ना लुक्खे की लौंडिया को दाना डालेंगे ....

अपन जब दौड़ती ट्रेन में पसीना पोछने के वास्ते टेरिस वाली जेब से रुमाल निकालता है तो रुमाल संग अंकल का वो लेटर भी डाउन फॉल होता है ...

अपन सन्न रह जाता है और काँपते हाथों से उसे उठाकर खोलता है ....

" प्यारी गुड़िया मोनी ,,,
आज आपका जन्मदिन है बेटा ..मेरी भी उम्र आपको लग जाये मेरी रानी परी ...मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ बेटा ...इतना कि जितना प्यार मैंने आपकी मम्मी को किया है ...बेटा मैं मानता हूँ मैंने आपकी मम्मी को धोखा दिया ..उसे झूठ बोला कि मैं एक कम्पनी में नौकरी करता हूँ ..सिर्फ इसलिए कि वो मुझे छोड़ कर न चली जाए ....कहीं उसे ये न पता चल जाये उससे रोज मिलने वाला एक शर्मिला सा लड़का रतन ....इस शहर का सबसे बड़ा टेरर किंग पैंथर भाई है .....लेकिन तुम्हारी मम्मी के प्यार से मैं बदलने लगा और मैंने इरादा कर लिया कि मैं आपकी मम्मी को लेकर हमेशा के लिए इस शहर से दूर चला जाऊँगा और एक इज्जत की जिंदगी जीयूँगा ....हमनें गुप-चुप शादी भी कर ली थी ...जब आपकी मम्मी ने मुझे आपके ,,उनके पेट में होने की खबर दी तो मैं इतना खुश हुआ कि मैंने उसी दिन फैसला कर लिया कि मैं  आपको,, आपकी मम्मी को लेकर हमेशा के लिए दूर चला जाऊँगा ....लेकिन जाने से पहले मैंने आपकी मम्मी को सारा सच बताने का मन बना लिया और मुझे विश्वास था हमारा प्यार इतना सच्चा है कि आपकी मम्मी ..मुझे माफ़ कर देगी लेकिन माफ़ी क्या वो तो कुछ भी देकर न गई बल्कि आपको भी मुझसे हमेशा के लिए दूर ले गई ...रोज आपको दूर से तकता हूँ ...रोज आपकी तस्वीर चुपके-चुपके खींचता हूँ ...मैं बदल गया हूँ बेटा ...मुझे फेस टू फेस जानने वाले मेरे गुर्गे  ,,पुलिस एनकाऊँटर में मारे गए ... आपकी मम्मी के मेरी जिंदगी से जाते ही मैंने जुर्म की दुनिया छोड़ दी और आज एक अखबार छापाखाने में नौकरी करता हूँ ....जिस पैंथर भाई का नाम ही लोगों की नब्ज जमा देता था आज वो सिर्फ आपके लिए दिन-रात रोता है ....मैंने आपकी सारी बचपन की तस्वीरें भी आपके घर से चुराई हैं ...मैंने आपको हर साल बदलते देखा है सोना परी ....हर वक्त आपकी तस्वीरों से बात करता हूँ ...आज आपका जन्मदिवस है बेटा आज एक बार आपको सब सच बताना चाहता हूँ ...और इसके बाद फिर आपके बिना जीना भी नही चाहता ....जिस वक्त आप ये लेटर पढ़ रही होंगी उस वक्त मैं इस दुनिया से जा चुका होऊंगा ... लेकिन बेटा मेरी आत्मा मेरा आशीष सदा आपके साथ चलता रहेगा ...आई लव यू बेटा ..."

अपन की बॉडी और आँखों को साला  लकवा मार गया ...साला सब पानी -पानी हो गया ..कीचड़ जम गई आँखों में..साला अपन किसको ठोकने चला था ..उसको जिसका नाम सुनकर अक्खा तेलीनगर का मूत निकल जाता है ...अपन के भगवान की बेटी है मोनिका और अपन साला उसपर की गन्दी नजर रखता था ....चैन खींची ट्रेन की..जिससे अब जो हो उखाड़ ले ...साला अब अपन को एनकाऊँटर का भी डर नही ...अपन जम्प किया और दौड़ा ताकि अपन के भगवान की पाती उसकी बिटिया को भी बता सके ...कि उसका बाप एक बहुत बड़ा आदमी ही नही एक सच्चा इंसान भी था ....वो इंसान जिसे भगवान ने तो बदलने का मौका दिया लेकिन उस भगवान की बनाई एक औरत ने नही ....और वो औरत जो एक प्रेमिका ...एक पत्नी और एक माँ भी थी "

नवाज़िश

Junaid Royal Pathan

Sunday, 24 February 2019

Condom

#कॉन्डम
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" भैया कॉन्डम होगा ..?"

" फ्लेवर क्या लेंगे ...?"

" जी..जी... कोई भी दे दो "

मैं वहीँ था.. कान पर फोन लगा था ,,,गले में मॉफरल  और आँखों में सन ग्लास तो सुधीर पहचान नही पाया मुझे ....लेकिन अपने मुहल्ले का सबसे शरीफ लौंडा है सुधीर ...और कॉन्डम ....?

बात किसी को सीरियस न लगे ...असमान्य न लगे ..प्रगतिशील लगे और वैज्ञानिक भी लेकिन सुधीर और कॉन्डम वैसे ही बेमेल है जैसे अदरक और अंगूर !

सुधीर कॉन्डम लेकर सीधे एक गली में घुसा ...और मैं उसके पीछे .... सुधीर की चाल आज एक चोर सी लगी ...वो स्वाभिमानी लौंडा जो जब मुहल्ले से निकलता है तो ऐसा लगता है जैसे सूरज मुँह पर बाँधे चलता हो ...वो जिसको देख छोटे से बड़ा हर इंसान आँखों में श्रद्धा उतार लाता हो ...जिसको देख मुहल्ले की मुट्ठीभर जलील औरतें और लौंडियाँए भी आँखे नीची कर लेती हों ....उस सुधीर को आज सकपकाता हुआ देख मुझे हैरानी ही नही परेशानी भी हुई ....

वो बार-बार हर घर हर दुकान को ऐसे नीची और शर्मिंदा नजरों से देखता जैसे हर इमारत उससे सवाल कर रही हो ....वो जो हर इंसान को देख ऐसे पानी-पानी हो रहा था जैसे हर इंसान जान गया कि सुधीर की जेब में कॉन्डम रखा हो .....

सुधीर जो आई. ए. एस की तैयारी कर रहा है ...उसके माता-पिता नही हैं ..एक सड़क दुर्घटना में मारे गए ..लेकिन बड़े भाई ने कभी उसको पिता की कमी खलने नही दी ...और उसकी वजह से ही लेट शादी की ताकि सुधीर को उसकी शिक्षा और सपनों से कोई समझौता न करना पड़े ....

सुबह से शाम तलक सिर्फ पढ़ता और पढ़ाता है सुधीर और मुझे कट्टर भरोसा है इस बार वो आई .ए. एस बनकर रहेगा ....

लेकिन कॉन्डम ...?

मैंने कदम तेज किये ताकि सुधीर को रोक कर पूछ सकूँ कि आखिर माजरा क्या है लेकिन फिर कदम खुद ब खुद हल्के कर लिए जब खुद की परछाई कॉफी कॉर्नर के शीशे में देखी ....

मैं अव्वल नम्बर का लौंडियाबाज ...जिसने जिंदगी भर सिर्फ यही एक काम तबियत से किया ...मेरी अय्याशी जहाँ बाप को कंगाल बना गई ...वहीँ हमेशा उनका सर मेरी करतूतों से ही नीचा हुआ ...मेरी वासना ने जहाँ रिश्ते बिगाड़े वहीँ रिश्तों को भी तार -तार किया ...मैं आज सुधीर जैसे लौंडे से पूछने चला हूँ कि तुम जिंदगी में पहली बार कॉन्डम खरीद रहे हो ...और वो भी इतना डरते-घबराते ...और एक मैं हूँ जिसने न जाने कितनी लड़कियों को अपने प्यार के झांसे में लेकर उनका गर्भपात करवाया है ....

लेकिन तभी अंतरात्मा ने समझाया कि माना जिंदगी भर तूने गलत काम किये हैं ...लेकिन आज तुझे प्राश्चित का मौका मिला है रोक ले सुधीर को और जाकर पूछ कि आखिर आई.ए.एस और कॉन्डम में से वो क्यूँ कॉन्डम चुन रहा है ...क्यूँ अपने सपने के इतने पास खड़े होकर उसे छूने की जगह वो मुँह फेर रहा है ....

मैंने सुधीर को आवाज दी ...लेकिन वो इससे पहले ही एक टैम्पो में जा बैठा ....मुझे एक पल लगा जाने दो साले को ...किसका बिगाड़ेगा खुद का न ...साला आखिर हमारी ही जमात को आगे बढ़ा रहा है ....जो मुहल्ला मुझे देख कर थूकता है कम से अब उस थूक से अब सुधीर का मुँह भी भीगेगा ....साले जो कहतें है मुझसे कि तू इस मुहल्ले का श्राप है ...कलंक है कम से उनकी आँखे तो खुलेंगी और पता चलेगा कि मैं जो हूँ सामने हूँ लेकिन जो पीठ पीछे रंगदारी करके ओछी अय्याशी करते हैं और समाज में भले -भद्र बनकर घूमते हैं उनका भी चेहरा मेरी तरह काला है ...

और मेरा बाप जो कहता है कि तुझ हरामी का पैदा होते ही गला दबा देना चाहिये था उसे भी पता चलेगा कि हमाम में सब नंगे हैं ....

लेकिन दिमाग को फिर दिल ने शिकस्त दी और मैंने भी टैम्पो पकड़ा और सुधीर का पीछा किया ....

वो एक सिनेमा के आगे उतरा और मैं टैम्पो वाले के पैसे चुकता कर उसको दबोचता इससे पहले ही उसका हाथ पकड़ा उसकी भाभी ने .....

हे भगवान ! मैंने तो सिर्फ दूर की भतीजी से ही रिश्ता रखा ये तो सगी भाभी .....

मन में तसल्ली हुई और आज पहली बार अपनी आत्मा को लताड़ लगा कर मैंने कहा -

" देख तुझे बड़ी खुज़ली होती है कि मैं वासना में न घर देखता हूँ न बाहर लेकिन देख मैंने फिर भी सगे रिश्तों में लार न गिराई और ये महात्मा सुधीर अपनी सगी भाभी से ....छी ...आक थू "

जहाँ अभी तलक मेरे मन में सुधीर के लिए  सम्मान और श्रद्धा थी अब प्रतिकार और घिन ...मैंने इरादा कर लिया कि इस साले को भरे मुहल्ले में एक्सपोज कर के रहूँगा ....

तभी मैन देखा कि मौजबहारा भाभी आँखों में आँसू ले आई ....साला ख़ुशी के फर्जी गिल्सरीन आँसू फिल्मों में देखे जरूर थे मगर आज विश्वास हुआ कि मजे कि कल्पना भी खुशियों के आँसू बहा सकती है ....

मैंने मोबाईल निकाला और दोनों की एक पिक ली ....लेकिन जब स्क्रीन में देखा तो काला टैम्पो दिखाई दिया ....मैंने झट फिर टैम्पो पकड़ा और उन दोनों का पीछा किया ....

मुझे शहर का हर निर्जन और खेल -खिलाई अड्डा पता था ...लेकिन टैम्पो जहाँ मुड़ा वहाँ तो अय्याशी का लाल किला था यानि रेड अलर्ट एरिया ....

इस बदनाम गली में आखिर सुधीर क्यूँ जा रहा है ....?पर जवाब भी मैंने खुद को ही दिया

नया-नया इश्क है तो रास्ते और मंजिल भी अपरिचित हैं ....लेकिन फिर मान गया सुधीर के आई.ए.एस दिमाग को और मुझे उससे प्रेरणा मिली कि कोठे के कमरों की बुकिंग अपने माल के साथ की जाए तो किसी के देखने का भय भी नही और न कोई होटल..झाड़ी..पहाड़ी का रिस्क ....

टैम्पो आगे नही गया ...शाम ढल चुकी थी और सोहबत जवान हो रही थी ...हर लकड़ी की सीढ़िया .. जमाल ए हुश्न से सजने लगी ....हर ऊंचाई से फिकरे जमीन पर गिरने लगे ....

" ओये हीरो आता है क्या ...जन्नत का मजा दूँगी "

" ओये चिकने देखता क्या है ...चढ़ जा ऊपर कच्चा माँस शराब संग पेश करूंगी "

फूहड़ गाने कानों पर गिरने लगे ...और बिरयानी और शराब की कॉकटेल सुगंध भी दिमाग में जवाल पैदा करने लगी ....

मैंने हर ब्रांड ...हर ऐज को गटका है लेकिन कभी कोठे पर नही गया ...मान गया कि सुधीर साला एक नम्बर का हरामी है या उसे हरामी बनाने वाली उसकी  हरामन भाभी एक नम्बर की चालू खेली -खिलाई औरत है ....मेरी अय्याश आत्मा को आखिर सुधीर के भाई पर तरस आया कि आखिर उसने कितनी क़ुरबानी दी इस हरामखोर के लिए और इसकी शिक्षा -दीक्षा पराई औरत और उसके मिजाज से प्रभावित न हो इसलिए इस उम्र में शादी की और फिर भी इन नेकियों के बदले मिला इस बेवफा और अय्याश औरत का साथ ....छी साला ...

मेरी आत्मा ने सुधीर के भाई को इतने मन से याद किया कि मुझे वो साक्षात दिखने लगा ....

और वो भी कोठे की सीढ़ियों पर चढ़ते हुए ....

मैं खुद को पिंच करता तभी सुधीर दौड़ा और अपने भाई के काँधे पर हाथ धरकर बोला -

" भैया ..हम थक गए आपको समझाते हुए कि यहाँ मत आओ ...माना आपके असंख्य एहसान है मुझपर और आपने मेरे लिए शादी भी इस उम्र में करी लेकिन भैया मुझे नही पता था कि आप यहाँ आते -जाते हैं... वो तो भाभी ने आपका पीछा किया और राज मालूम किया ....हम दोनों आपको समझा कर थक गयें हैं इसलिए  मैं आज आपको रोकने नही आया बल्कि ये कहने आया हूँ कि आप चाहे जो करो लेकिन मैं नही चाहता मेरी भाभी को एड्स हो जाए ....क्यूँकि उस सती- सावित्री का कोई दोष नही और न इसमें कोई सहभागिता .....वो तो इतनी आदर्श पत्नी है कि सब जानते -बूझते भी आप के साथ बिना मुँह खोले निबाह कर रही है ....खैर आपको लेट हो रहा है ....ये लीजिये कॉन्डम ...ताकि मेरी भाभी को आपके किये की सजा न मिले ....."

सुधीर के ये लफ्ज जहाँ मुझ परम् अय्याश को पिघला गए वहीँ सन्न कर गए उसके भाई का वुजूद भी ...वो सीढ़ी न चढ़ सका न उतर सका ....सुधीर ने अपनी भाभी का हाथ पकड़ा और आगे बढ़ता गया तभी एक आवाज गूँजी ....

" नरेश बाबू ..जाइए यहाँ से आप जैसे  आदमी के लिए यहाँ कोई जगह नही ....मैं तो समझती थी आप मेरे पास इसलिए आते हैं क्यूँकि आप को प्यार करने वाला मेरे अलावा कोई दूसरा नही ....लेकिन पुनः एक रण्डी के प्यार को एक पत्नी के प्यार ने हरा दिया ...जाइए ...!अगर मेरे मुल्क में हर आदमी को ऐसी औरत मिल जाए तो भला लोग फिर रण्डीखाने क्यूँ आयें ....जाइए ...ऐसी औरतें बड़ी नेक कमाई और कर्म से मिलती हैं और मेरा मालिक ऐसी औरतों को धड़ाधड़ बनाता रहे ताकि एक औरत फिर कभी रण्डी न बन सके "

नरेश बेहिसाब भागता रहा ...और मुझे यकीन है उसे उसकी मंजिल आखिर मिल ही जायेगी लेकिन मुझे भी कुछ मिल गया था शायद ये नजरिया की हर औरत सिर्फ अय्याशी का सामान भर नही होती बल्कि कुछ औरतें तो ऐसी भी बनाई है मेरे  मालिक ने कि वो खुद उनपर फक्र करता है ......

सुधीर आई .ए. एस बाद में बनेगा लेकिन आज वो मेरे लिये  मेरा सच्चा  मार्गदर्शक बन गया .....

नवाज़िश

Junaid Royal Pathan

Tuesday, 19 February 2019

दहशतपरस्ती

#दहशतपरस्ती
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" काट डालो हरामजादे को  "

" पुलवामा का बदला लेकर रहेंगे "

मैं अक्सर जब भी रघुनंदन शास्त्री के घर के बिलकुल बाजू से निकलता हूँ तो कोई आवाज नही लगाता ,,,आवाज क्या मैं तो कोशिश भी ये करता हूँ कि उनको मेरा दाढ़ी वाला चेहरा न दिखाई दे ....एक होती है ईर्ष्या और दूसरा भाव जिसे घिन कहते हैं ...इन दोनों भावों के सम्मिलित प्रभाव को यदि 10 से गुणा कर दिया जाए तो फल में जो भाव हाथ लगेगा  बस वो ही भाव रघुनन्दन के मन में हम मुसलमानों के लिए है ।।।।

मैंने कई दफ़ा उनके मुँह से अपनी कौम के लिए जहरीले बयान सुने हैं ...कई दफा उनको पीर (सोमवार) बाजार में सस्ता धंधा करते अपने मुसलमान व्यापारी भाइयों पर अपने "शक्ति दल " से डंडे पिलवाते तक देखा है ...उनका मानना है कि मुसलमानों के बाहर से आकर व्यापार करने से क्षेत्र के अन्य हिन्दु मझोले व्यापारियों के व्यापार
में कमी आयेगी ।।।

निःसंतान हैं ...और मेरा मानना है भला ही हुआ अपितु साँप से सँपोले ही उतपन्न होते और जहर ही उगलते .....

लेकिन उनकी बेगम ...मतलब मेरी मुँहबोली बहन ...क्या कहने उस औरत का ...रत्ती भर भी विषैली नही ..और तो और बड़ी नेक खातून है ..बड़ी दिलवाली ..5000 रूपये उधार लिए थे शास्त्री के पीछे और आज तलक न लौटा सका ..कसम नम्बर 786 की ..कि 786 बार ही टकराई होगी लेकिन कभी नेक मेहरबां ने तकादा न किया ....

जम्मू -कश्मीर से हूँ मैं,, हर साल ठण्ड बढ़ते ही कम्बल , दुशाले लेकर महादेवपुर इसलिए आता हूँ क्यूँकि ये ससुरे सिर्फ कश्मीर से नफरत करतें है ...उसके बारे में और कुछ नही जानते ...थोड़ा कश्मीरी बोल दी ...सत्रह -अठरह झूठी कसम  खा दी ... तो झक से माल खरीद लेते हैं ...

कुछ तो एक- दूसरे को नीचा दिखाने के लिए शेखी में मुँहबोला दाम चुकाते हैं तो कोई शेखी में जौहरी बन जाते हैं कम्बल और दुशालों के ...और दिल्ली के मेरे माल को खुद कश्मीर के किसी गाँव से जोड़ कर धंधा और चमका देते हैं ....

लेकिन अब वो बात नही रही ...जब से माहौल खराब हुआ ...मसलन जब से दहशतगर्दी ...पत्थरबाजी और ये बेलगाम नारे -वारे शुरू हुए ....तब से मुझसे माल खरीदना तो दूर कोई सीधे मुँह बात नही करता ...मैंने इस कस्बे की हर गली ..हर घर का पानी और नमक चखा है ...हर जवान को बूढ़ा और हर बच्चे  को जवान होते देखा है .....

लेकिन अगर मैं कुछ नही देख पाया तो इनके मन में जवान होती नफरत को ....पहले " खान भाई " का लक़ब था मेरा ...जैसे ही बस से उतर पहला कदम  बस्ती में डालूँ तो लगता था जैसे अपने दूसरे घर दाखिल हो गया ....

बड़ी इज्जत करते थे सयाने ..बड़ा रूतबा देते थे बुजुर्ग ...और बेपनाह मुहब्बत करते थे बच्चे ....

हाँलाकि आज भी इस बस्ती का एक भी बाशिंदा मुझसे नफरत नही करता लेकिन मेरे मजहब ..मेरी मादरे जमीन कश्मीर से इनकी नफरत हर सर्दी कुछ बढ़ती ही जा रही है ...

जब 19 का था तब इस कस्बे में इत्तेफाक से माल बेचने उतर गया था ...और गाड़ी से उतरते ही धक्का लगा था ...लेकिन आज जब धर्म के जोश में तर एक नौजवान ने मुझे काँधा मारकर गिरा दिया और कहा -

" देख खान ! आइंदा से अब इस बस्ती में न घुसियो वरना इज्जत -विज्जत सब भूल के बारह कर दूँगा "

जिंदगी ने बेशुमार धक्के दियें हैं मुझे ... इकलौता बेटा सरहद लाँघ कर दहशतगर्द बन या और एक दिन फौज की टुकड़ी पर बम बाँधकर फट गया ... ... खैर आम पाकिस्तान परस्त कश्मीरी इस वास्ते मेरे लौंडे की इज्जत करते है ...और उसे शहीद कहतें हैं .....लेकिन मैंने उसपर आखरी बात तभी फक्र किया था जब वो बोला था -

" अब्बू मिलटरी में दाखिल होकर मिलटरी बाला बनूँगा "

पीछे छोड़ गया चार बहनें और एक खामोश माँ ....खैर

तभी जलेबी चासनी में डुबोते ...नंदलाल भाई उठ खड़े हुए और उस लौंडे के आगे तन के खड़े होकर उसके मुँह पर एक करारा तमाचा देकर बोले -

" नीच ! काश तेरे पैदा होते ही मैंने तेरा गला घोंट दिया होता ...तेरे बाप की उम्र से भी ज्यादा उम्र है इनकी ....खान भाई हैं ये ...गोद में खिलाया हैं इन्होंने तुझे ...शरीर में आग से चकत्ते छप गए थे तेरे ...तो कम्बल यूँ ही दुकान में फेंक सीधे लौटे थे कश्मीर और पहले तेरे लिए जड़ी लाये थे ये ....माफ़ी माँग इनसे ..अभी के अभी "

नौजवान था ..और आज
का नौजवान ...और कुछ एक हमउम्र लड़किया भी देख रहीं थी उसकी वरना जरूर माफ़ी माँग लेता ....

नंदलाल भाई की दुकान पर बैठने वाली स्टूल से पानी की कुछ बूँदे झाड़ी और जैसे ही बैठा तभी रघुनंदन हाजिर हुए और बोले -

" देखो खान ! हम तुम्हारी इज्जत करतें है ...लेकिन तुम भी हमारी इज्जत बना के रखो ...आगे से मैं नही चाहता तुम बस्ती में वापस कभी दिखो "

बड़ा मुश्किल था सब सुनना ...क्यूँकि रघुनन्दन को ये महज एक बस्ती लगे  लेकिन मेरी जवानी और खड़ा बुढ़ापा सब इसपर कुर्बान हो गया ....अब इस उम्र में और कहाँ जाऊँ ...लेकिन रघुनंदन से उलझना या कोई सवाल करना पत्थर पर सर सेंकना था ....

चाय पी ...और आगे बढ़ने लगा ...सोचा अब वैसे भी यहाँ कुछ नही रह गया ...न पुराने लोग ..न पुरानी मुहब्बत ..और न यकीन ।।

और इनमें इन लोगों की कोई गलती नही ...अल्लाह जहन्नम नसीब करे मेरे बेटे और उस जैसे उन तमाम दहशत परस्तों को जिन्होंने एक आम से मुसलमान की भी जिंदगी बारूद के ढेर में बैठा दी ...

वतन हिन्दुस्तान छपा है मेरे कागजातों में ...और यही मेरा मुल्क है ...मेरा बाप बेहतर वतनपरस्त था और चचा फौज में ...लेकिन पता नही कौन जहर घोल गया मेरी मादरे जमीन में कि आज वहाँ उन लोगों की तादाद बढ़ती ही जा रही है जो न मुल्क से मुहब्बत करतें है ...न फौज से ...न उन लोगों से जो हिन्दुस्तान को अपना मुल्क मानते है ...

सिर्फ मुसलमान ही नही ...इनकी वजह से मेरा मजहब ..मेरी किताब..मेरे मजहब के  पैगम्बर पर भी लोग अँगुली उठाने लगे है जबकि जियादह दूर न जाऊँ तो वही किताब हमीद ने भी पढ़ी ..अशफ़ाक ने भी ...डाक्टर कलाम साहिब और मैंने भी तो ....और उन तमाम मुसलमानों ने जो आज वतनपरस्ती के मद्देनजर इन दहशतगर्दो की बम -बन्दूक का शिकार हो रहें है .....

खैर !  जैसे ही बस अड्डे पहुँचा ...अफरा-तफरी का माहौल लगा दिखा ....

" ये साला मुल्ला है ...मारो इसे "

"कश्मीरी है हरामखोर छोड़ना मत "

" काट डालो हरामजादे को "

" पुलवामा का बदला लेकर रहेंगे "

एक भीड़ का गुच्छा मेरी जानिब तेजी से बढ़ा ...न मेरे पैरों में इतनी जान थी और न मेरे जिस्म में की भाग सकूँ या इनसे खुद को बचा सकूँ....

मौत सिर्फ कुछ कदम की दूरी पर थी मेरी ...उनके हाथ में हाँलाकि कोई धारदार हथियार नही था ...लेकिन वो जवान थे ,,उनके कुछ मुक्के और लातें मुझे खत्म करने के लिए काफी थे .....मैंने काँधे से कम्बल गिराये ...और घुटनों के बल बैठ गया ... आँख बन्द की और याद आया अपनी बेगम का चेहरा ...फिर अपनी चार बिन ब्याही बेटियों का चेहरा जिनकी इस वजह से अच्छे घर में शादी न कर पाया क्यूँकि कोई इज्जतदार मोमिन दहशतगर्द के परिवार से रिश्ता नही जोड़ना चाहता था....और किसी और से इसलिए नही क्यूँकि वो दहशतगर्दी में फिर कभी भी राख हो सकते थे ....

भीड़ की आवाज बेहद करीब पहुँच गई और मैंने वहीँ अल्लाह की बारगाह में सजदा करके कलमा पढ़ा और अपने और  अपने बेटे के तमाम गुनाहों के लिए खुदा से माफ़ी माँगी ।।।

" रुक जाओ ! ....लौट जाओ !... वरना खान से पहले तुम्हे मेरी लाश गिरानी होगी "

एकदम से सन्नाटा तारी हो गया ...मैंने सजदे से उठ कर उस शख्स का चेहरा देखा और होंठ बुदबुदाये

" रघुनन्दन भाई आप ...?"

खैर मजमा छँट गया ...रघुनन्दन ने मुझे  सहारा देकर उठाया और बोले -

" खान इसलिए कह रहा  था कि अब वापस मत आना अब ...क्यूँकि सब बदल चुका है अब ...मैं जानता हूँ तुम निर्दोष हो ..बहुत मुहब्बत करते हो मुल्क और मुल्कवासियों से ...लेकिन कोई इसलिए मानने को अब तैयार नही क्यूँकि तुम्हारे ही हुलिये और मजहब के लोग इस मुल्क से उसके बच्चे ..उसका भविष्य छीन रहें है ... खान बेऔलाद नही हूँ मैं ...मेरा भी एक बेटा था ...जो तुम्हारी तरह मुल्क से बेहद मुहब्बत करता था ...फौज में भर्ती हुआ ...और अपनी शादी के महज 3 दिन पहले दहशतगर्दो की गोलियों का शिकार हो गया ....तब से मेरी जिंदगी ही बदल गई ....खैर जाओ ...जल्दी अपनी मादर ए जमीन पहुँच जाओ "

मैं बस रघुनन्दन को देखता ही रह गया ... और समझ गया कि दहशतगर्दी  जहाँ मासूम इंसानों की जिंदगी छीन लेती है वहीं समाज में कुछ  इंसानों से उनकी भली आत्मा  को रघुनन्दन बनने पर मजबूर भी कर देती है ....

और जो इसके बाद ये चिल्लाये कि रघुनंदन जैसे लोग इस्लाम के दुश्मन है तो उनसे सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा कि रघुनंदन नही बल्कि इस्लाम का इस वक्त  अगर कोई सबसे बड़ा दुश्मन है तो वो है सिर्फ दहशतगर्द और दहशतपरस्ती .......

बाकि 5000 थे जेब में जो रघुनंदन की बेगम का कर्ज था मुझपर सिर्फ ये सोच कर वापस नही किये कि इसी बहाने कभी फिर इस बस्ती में क्या पता लौटना आसान हो सके

नवाजिश

Junaid Royal Pathan