#जय_श्रीराम 🚩
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" दफा हो जा नीच ....फ़कीर ...काफ़िर ....हम चौधरी शेर अली पीरान है ! अल्लाह के सिवा न किसी के आगे झुकते हैं न किसी से फरियाद करतें है ...और एक बार जो इरादा कर लेते हैं ...फिर उससे नही मुकरते ...दफा हो जा वगरना अब लोहा दाग देंगे जिस्म में तेरे ....."
" दुहाई है हजूर तीन बिटिया है मेरी ...हजूर भूख से बिक जायेंगी गरीब ....हजूर रहम ! "
" मौलवी बरकतुल्ला जैसे इस गलीच ...को लेकर आये हो वैसे ही इसे लेकर यहाँ से विदा हो लो ...नही तो तुम दोनों पर आज मेरा गजब टूटेगा ....."
मौलवी साहब उस रोते -बिलखते फरियादी को ठेल-ठेल कर जब ले जाने लगे ....तभी चौधरी कड़कर फिर बोले -
" और सुनो मौलवी ! आईन्दा से अगर फिर आपने ये गुस्ताखी की तो कस्बे की जामा मस्जिद से ही नही आपको कस्बे से ही बेदखल करवा देंगे ....आप सिर्फ मस्जिद और मेरे बेटे अनवर की तालीम का ख्याल रखो ....कस्बा और उसका निजाम देखने के लिए अल्लाह ने हमें मुकर्रर किया है ..जा सकते हो !
मौलवी साहब उस गरीब को लेकर जैसे ही पलटने लगे ...तभी उनकी नजर अपने मासूम शागिर्द अनवर से टकराई ...अनवर बड़ी हैरत और बड़े मासूम मन से उस गरीब के सीने की पसलियों को गिन रहा था ।
उसी दिन चौधरी को खबर लगी की उस गरीब ने हाथ की नस काटकर खुदखुशी कर ली ....अगले रोज चौधरी हाशिमपुर के अपने दोस्त चौधरी शखावत नूर चिश्ती की बेटी की यौम ए पैदाइश (जन्मदिन) में शरीक होने अपनी बेगम और बेटे अनवर से साथ तशरीफ़ ले गए ।। और चौधरी चिश्ती ने उनका अपनी कोठी के गेट पर इस्तकबाल (स्वागत) किया ....
" आइये मेरे दोस्त मेरे अजीज ..खैरमकदम आपका .."
" अनवर बेटे ! सलाम करो चौधरी साहब को ! "
" जय श्री राम ! अंकल "
दोनों चौधरी..दोनों की लुगाईयाँ..दरबानों ...और मेहमानों को साँप सूँघ गया ....तभी चौधरी शेर अली पीरान ने नजाकत को समझा ...
" हे..हे...हे ...बहुत मजाकिया है मेरा बच्चा ..तीन बच्चों के इंतेक़ाल के बाद बड़ी मुश्किल से बचा है ये ...इसलिए नाजों से पला है ..तो थोड़ा नटखट हो गया है ...बेटा अनवर अपने से बड़ों से मजाक नही करते ....चौधरी साहब को सॉरी बोलो और सलाम करो ! "
" सॉरी अंकल ...जय श्री राम ! "
इस बार चौधरी पीरान कुछ बोलते कि चौधरी चिश्ती ने माहौल सम्हाला
" हा ..हा ..हा ...वाकई मजाकिया है अनवर ....आप बाहर क्यूँ खड़े है ...तशरीफ़ लाइए .."
चौधरी तशरीफ़ तो ले आये लेकिन उनका और उनकी बेगम का मन मजमें .. हो-हल्ले में नही अनवर की बदतमीजी पर लगा हुआ था ....वापस लौटकर चौधरी ने अनवर को फटकार लगाई और हिदायत दी कि अगर दुबारा ये हरकत हुई तो समझ लेना जितना हम प्यार करते है उतना ही खाल खींचने का हुनर भी जानते है .....
अगले दिन जुमे की नमाज में जब ..सब नमाजी जैसे ही नीयत बाँधने खड़े हुए ...तभी चौधरी के साथ खड़ा हुआ अनवर तेज आवाज में बोला -
" जय श्री राम ! "
सब नमाजी पीछे पलटे ...चौधरी को काटो तो खून नही ...उस दिन चौधरी ने अनवर की बेहद पिटाई की ...माँ ने रात भर आँखों में आँसू भरकर ..पूरी रात जगकर मासूम अनवर के जिस्म में से चौधरी के बेंतों के निशानों को मिटाया ...
दो दिन बाद अनवर की मौलवी ने चौधरी से रिपोर्ट की ,,, कि वो मुक़द्दस कुरआन खोलकर ..जय श्री राम का विर्द कर रहा है ....
चौधरी ने उस दिन दीवार से हंटर निकाला और उसे लहराया ही था कि उसकी बेगम उसके और अनवर के बीच आ गई --
" जान से मार डालोगे क्या ..इकलौता बच्चा बख्शा है खुदा ने हमें ...इसको कुछ हो गया तो हम आपको कभी माफ़ नही करेंगे "
" लेकिन बेगम इस नालायक ने हमें कहीं का नही छोड़ा ...हमारी इज्जत ..हमारे रुतबे ..हमारे मजहब सब का मजाक उड़ा रहा है ये शैतान ..."
"बोल अनवर ..बोल बेटे ..क्या हो गया है तुझे ..क्यूँ कर रहा है ये सब ...?"
लेकिन अनवर के कान में अपनी माँ के किसी सवाल से जूं तक न रेंगी ...वो जिन्दा लाश सा खड़ा रहा ...अगले दिन चौधरी को किसी काबिल ने राय दी कि वो शहर में अनवर को दिमाग के डॉक्टर को दिखाये....चौधरी बड़े शहर मय बेगम संग पहुँचे और डॉक्टर ने अनवर का चैकअप करने के बाद बोला -
" चौधरी साहब दिस इज दा हेरेडिटि डिसऑर्डर ..."
" मतलब..?"
" माफ़ कीजियेगा ..मतलब आपको समऊँगा तो आप समझेंगे नही ..बस इतना समझ लीजिये ..कि कभी हमें अपनी पीढ़ियों में से किसी एक इंसान की शक्ल ..सूरत और करतूत मिल जाती है ...आप बस अनवर को जितना हो सके बीजी रखिये ...उसे अकेला न छोड़िये ...अच्छी फ़िल्में दिखाइए ...घुमाने ले जाइये ...उसके साथ वक्त बिताइये ....वो अपने आप ठीक हो जाएगा ..."
" टी वी देखना तो हमारे मजहब में गलत है डॉक्टर साहब ...बाकि काम हम कर सकते है ..."
" गलत वो चीज होती है चौधरी साहब...जिसका इस्तेमाल गलत किया जाए ...खैर जैसा आपकी मर्जी ....अच्छा खुदा हाफिज ...बॉय अनवर ..."
" जय श्री राम !"
चौधरी ..बेगम ..डॉक्टर तीनों की फिर सिट्टी बज गई....
अनवर की ये आदत इलाज के बाद और बेलगाम होने लगी ...अब वो हर बात पर हर जगह जय श्री राम का उदघोष करता रहा ...डॉक्टर ..नीम हकीम ..पीर ..फकीर सब ने अनवर को ठीक करने की कोशिश की लेकिन अनवर की हालत और बिगड़ती गई ....चौधरी इस गम में सूख कर काटा होने लगे ...उनकी भूख -प्यास ..सुख-चैन ...सब खत्म होने लगा ...यहाँ तक की अपनी इज्जत -आबरू और कद को भूलकर चौधरी हर सुने के नाम का पीछा करने लगे ..नमाज में तड़प-तड़प कर अल्लाह से दुआ करने लगे ....चिल्लागोशी ...दरगाह ..खैरात सब करने के बाद भी अनवर का जय श्री राम अपनी जगह पर बना रहा ......
अनवर की हालत अब ये थी कि ....न वो खाता ..न किसी से बात करता ...बस दिन -रात जय श्री राम ही करता ....इस वजह से जहाँ चौधरी का मजाक पूरे कस्बे में उड़ने लगा वहीँ उनका कद भी घटने लगा ...काम पर ध्यान नही देने से दौलत भी रिसने लगी .....
उस रात जब चौधरी मस्जिद में रो-रो कर अल्लाह से अपने बच्चे की सेहत माँग रहे थे ....तभी उनके काँधे में किसी ने हाथ रखा ....
" मौलवी साहब....पता नही हमसे क्या गुस्ताखी हो गई ...जो अल्लाह ने इतना बड़ा अज़ाब हमपर नाजिल कर दिया ...हर मोमिन हम पर हँसता है ...पीठ पीछे हमारी मजाक उड़ाता है ..."
" मुझे लगता है चौधरी साहब आप के बेटे के जिस्म पर किसी जिन्नात ने कब्जा कर लिया है "
" या अल्लाह ये क्या फरमा रहें है आप ....अब हम क्या करें ...?"
" ये हम और आप नही जानते...ये जानता है तो बस अल्लाह या फिर वो जिन्नात जो अनवर पर ग़ालिब है ...हमें उसी से पूछना होगा ..."
अगले दिन अनवर को नहलाया गया और मौलवी साहब ने उसपर कुरआन पढ़कर कुछ फूँका ...अनवर फिर जय श्री राम कहने लगा ....मौलवी साहब ने उससे सवाल किये ...
" कौन हो तुम ...?मैंने पूछा कौन हो तुम ..."
" मैं गंगाप्रसाद किसान हूँ ...वही गंगाप्रसाद जिसको चौधरी ने जान देने के लिए मजबूर किया ...जिसकी तीन जवान बेटियों को चौधरी रास्ते पर ले आया ...जिसकी जमीन चौधरी ने धोखा-धड़ी से हड़प ली ...अब मैं इसके बच्चे को अपने साथ ले जाऊँगा "
मौलवी के कुछ बोलने से पहले ही ...चौधरी फफक पड़े ..और रो -रोकर अपने बच्चे की जान की भीख मांगने लगे ....आखिर में जिस्म में चढ़ा जिन्न बोला -
" ठीक है चौधरी मैं चला जाऊँगा लेकिन ...वायदा कर कि अगर तूने इस कस्बे की अल्पसंख्यक हिन्दू आबादी को परेशां किया ...उनकी जमीने छीनी ...उनके मन्दिर और उनकी मान्यताओं की हिफाजत न की तो समझ ले मैं अगली बार आया तो अनवर को साथ लेकर ही जाऊँगा ....और सुन मेरी बेटियों को मेरी जमीन वापस करेगा और उनकी शादी की जिम्मेदारी भी लेगा ....बोल मंजूर है..? "
चौधरी ने हामी भर दी और अनवर खड़े-खड़े जमीन पर गिर गया ....गंगाप्रसाद उसके जिस्म से फरार हो गया ...चौधरी अब वाकई में बदल चुका था ...अब न उसमें ऐंठ थी ...न गुरूर ...हर मजहब के लिए उसकी एक नजर थी ...अब मन्दिर और मस्जिद दोनों साथ -साथ हँसती और मुस्कुराहती थी .....
उस रात जब चौधरी ...की अचानक से आँख खुली ...और वो पानी पीने उठे तभी पास के कमरे से कुछ् आवाजें आई ....
" अनवर बेटा ..नाज है मुझे तुझपर जो भी हुआ तूने अपने बाप को बदल दिया ..."
" अम्मी मैंने कुछ नही किया .... बल्कि जो मैंने उसदिन देखा उससे मैं क्या कोई भी बदल जाता ...अम्मी जब उस दिन गंगाप्रसाद अंकल हमारे घर आये और अब्बू ने उन्हें जलील कर बाहर निकाला ...तब मैंने उनका पीछा किया ...अम्मी उनका घर हमारे खरगोशों के बाड़े से भी छोटा था ... उनके घर में एक तिनका खाने को नही था ... उनकी तीन बेटियाँ थी ...उनके तन में फ़टे कपड़े थे .. मैंने देखा उनकी बेटियाँ भूख से बेहोश सी हैं ...उन्होंने उन सब को एक नजर देखा और खूब रोये ...फिर उसके बाद उन्होंने अपनी धोती में से एक कागज की पुड़ी निकाली और उसे पानी के मटके में डाल दिया .....
उसके बाद वो बोले -
" हे राम ! हम सब तेरे पास आ रहे हैं ..मैंने इस घड़े में जहर मिला दिया है ...मुझे माफ़ करना मेरे राम "
.और मेरे सामने ही उन्होंने अपने हाथ की नस काट ली ....मैं कुछ न कर पाया अम्मी .....फिर जब उनकी बड़ी बेटी उठी और उसने पानी पीने को घड़े में हाथ डाला ...तो मैंने दौड़कर वो घड़ा फोड़ दिया ...वो सब अपने अब्बू की लाश देखकर खूब रोईं ...और फिर मैंने वहीं उनको जुबान दी कि जब तक तुम्हारा सब कुछ इज्जत के साथ दोहरा करके तुम्हे न लौटा दूँ ...चैन से न खुद रहूँगा न अब्बू को रहने दूँगा .......राम के नाम पर जान देने वाले उनके अब्बू की बेटियों को मिलेगा भी सब कुछ राम के नाम से ही ....ये सब नाटक मैंने इस्स्......
तभी अचानक से दरवाजा खुला ...दोनों माँ -बेटे डर से थर-थर काँपने लगे ....चौधरी ने घूर कर अनवर को देखा ...उनकी आँखों में नमी थी.....लेकिन अचानक से चेहरे पर मुस्कान खींच कर अनवर से बोले -
" जय श्री राम !"
नवाजिश.....
Junaid Royal Pathan
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