Saturday, 12 January 2019

घूँघट

#घूँघट
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" रोहन तेरी ममा कितना अच्छा गाजर का हलवा बनाती है यार ..अमेजिंग .."

" तुझे अच्छा लगा न अंकित...तो ले ये भी खा ले ..."

" यार ...मुझे तेरी ममा से मिलना है ......"

मिलना तो अपन को भी  रोहन की चिकनी माँ से है ...मैं जगन्नाथ उर्फ़ जग्गू ...पूरी गोदावारी कॉलोनी का इकलौता इलेक्ट्रिसियन ,, अक्खी कॉलोनी की टोटली फीमेल इनफार्मेशन विथ फिगर एंड टेस्ट जानता हूँ ... अपन तो ये भी जानता है कि किस मिसेज का किस मिस्टर और किस मिस का किस हिस्स्स्स टाइप हलकट लौंडे से लोचा  चल रहा है ....अपन का सेंस ऑफ़ ह्यूमर इतना प्रोग्रेसिव एवं टेक्निकल है कि अपन औरत की चप्पल देख उसकी अक्कल और उसके केरेक्टर पर अंधा जुआ खेल सकता है .....उस दिन साला अपन सलमान भाई की फ़िल्म देखने गया था तभी मिस्टर शर्मा अपनी फेमली को लेकर नया-नया अपन की कॉलोनी में शिफ्ट हुआ ,,
...

अपन को मिस्टर शर्मा से क्या मतलब अपन तो मिसेज शर्मा का जायका आँखों से चखना चाहता था .....तीन दिन बाद अपन का सूरज चढ़ा ....सिक्योरटी वाले ने अपन को कहा कि फ़्लैट नम्बर 17 में बिजली सुधारनी है ....अंधे को क्या चाहिये .....अपन लपक के 17 के सामने ....एन्ड नॉक ..नॉक ...

" जी ...आप ?"

" सर मैं जग्गू इलेक्ट्रिसियन ...आपने ..."

" ओह्ह्ह अंदर आइये ये ..जरा हमारा बाथरूम के गीजर का कनेक्शन खराब हो रहा है ....."

घण्टा लेना था अपन को गीजर से ..अपन की नजर तो सामने की दिवार पर फ्रिज हो गई ...क्या फिगर क्या सूरत ...कमजोर दिल का न होता तो हुश्न की इस मल्लिका के आगे सजदा कर देता .....

" ओह्ह ये मेरी धर्मपत्नी सुजाता है ...थोड़ा शॉपिंग करने बाहर गई है ....आप गीजर ठीक करें मैं आपके लिए चाय बनाता हूँ "

अपन गीजर तो कम लेकिन बाथरूम के हर कोने को चेक करने में जियादाह इंट्रेस्टेड था ..क्या पता हुश्न की जागीर के जिस्म पर चढ़े किसी लिबास का कोई चीथड़ा ही मिल जाये ...साबुन से लेकर शैम्पू सब में उस रूप की रानी की सुगंध थी ....उस आईने को भी अपन ने टच किया जो रूप की रानी को अनेकों बार बेलिबास देख चुका है ....

गीजर ठीक कर अपन जैसे ही ड्राइंगरूम में दाखिल हुआ ...एक सोफे पर अपन ने उस अप्सरा की नेट वाली दो साड़ियां पड़ी देखी ....उफ्फ्फ्फ्फ़

" अरे जग्गू हो गया काम ...?"

" जीईई..."

" ओके थैंक्स ये लो अपना पेमेंट !"

तभी डोर बेल बजी ...और मेरी हार्ट बीट भी ...क्यूँकि अब मेरे सामने हुश्न का ताजमहल समाने वाला था ...मिस्टर शर्मा ने डोर ओपन किया

" ओह्ह्ह रोहन तुम आ गए ..ग्रेट ...फटा -फट  फ्रेश हो लो मैंने तुम्हारे लिए पास्ता बनाया है ....अरे ये कौन है ...?"

" थैंक्यू पापा ....पापा ये मेरा फ्रेंड अंकित है ...ममा से मिलने आया है ....."

" ओह्ह्ह.. वेलकम अंकित ...प्लीज कम इनसाइड ....तुम्हारी ममा शॉपिंग करने गई है बेटा शाम तक आएगी ....तुम दोनों फ्रेश हो लो ...मैं तुम्हारे लिए गर्मागर्म पास्ता लेकर आता हूँ ...."

मेरी पहले फूली ...फिर सूजी ...फिर नॉर्मल हुई तो मैंने शर्मा जी को थैंक्यू कहा ...लेकिन मांइड का बचपन से शार्प हूँ तो ...बाथरूम में अपना स्क्रू ड्राईवर जान-बूझ कर छोड़ आया ताकि उसके बहाने दुबारा इंट्री कर सकूँ ....

अक्खा दिन साला सिक्योरिटी वाले के साथ गेट पर काटा ताकि रूप की देवी के लौटने पर उसे आँखों से चख सकूँ ... लेकिन ..वो न दिखी ...

" अबे मंगलू भैया ..अबे ये शर्मा की लुगाई कैसी दिखे है बे ...?"

" कौनसे वाले शर्मा जग्गू भैया  ...?"

" अबे ये जो सामने 17 वाले में आये हैं ..."

" भैया पता नही इतनी बड़ी कॉलोनी है कौन आया कौन गया याद नही ..."

शाम ढल गई ..मायूस होकर लौट रहा था तभी अपन को एक जनानी का  साड़ी पहना साया 17 की बॉलकनी में दिखा ....अपन के दाँतों में सोरछी जुबान फँसी की फँसी रह गई ...और दाँतो के बीच से निकला इस्स्स्स.....

वो साया सिर्फ दो पल रुका लेकिन अपन की तो जैसे साँसे ही रुक गई ....

अपन अगले दिन पूरा फ़िल्मी टाइप  जे चेपा लोस्को बनकर  17 के सामने अपना स्क्रू ड्राईवर लेने पहुँचा ...नॉक..नॉक

" अरे ..जग्गू तुम ..?"

"जी सर वो क्या है अपन अपना स्क्रू ड्राईवर आपके बाथरूम में ही भूल गया ...

"ओह्ह्ह..एक मिनट ..."

नॉक ..नॉक ...

" अरे सुजाता देखो तो जरा कोई स्क्रू ड्राईवर तो नही है अंदर ...."

हल्का सा दरवाजा खुला ...और मैंने कुछ न देखा क्यूँकि हलकट शर्मा सामने खड़ा था .....

" ये लो जग्गू ..."

पूरा दिन ..पूरी रात अब सुजाता के नाम थी ...उसका  फोटो वाला चेहरा नजरों से हटता ही नही था ...साला ठेके के बदसूरत साकी में भी वही दिखती ...और बीड़ी के बण्डल के टाइगर में भी वो ..यहाँ तलक मुझे अपने आप में भी वही नजर आती थी ...रोहन से दोस्ती गाँठ ली ...जब भी स्कूल आता जाता अपन उसको अपनी बाइक से छोड़ने जाता और ठीक टाइम पर वापस भी ले आता ...उससे किसी न किसी बहाने उसकी मम्मी की बात करता ....और वो इतनी ढेर सारी बातें बताता अपनी मम्मी की ,,कि मुझे सुजाता से अब लोखण्ड वाला प्यार हो गया ....यानि बोले तो सच्चा वाला .....

एक दिन जब रोहन को लेने उसके स्कूल गया तो उसको बेहद उदास देखा ...

" क्या हुआ रोहन आज बहुत उदास दिख रहे हो ..?"

" कुछ नही जग्गू अंकल बस ऐसे ही "

" अरे बताओ तो सही ..."

" वो कल न पापा-ममा को स्कूल बुलाया है तो... "

दिल में चिंगारियाँ चमक उठी ... और मैं बोला

" तो इसमें क्या प्रॉब्लम है ..ये तो अच्छी बात है ...."

" आप नही समझेंगे जग्गू अंकल "

पूरा रास्ता रोहन कुछ न बोला ..अपन की बला से ...अपन तो रोहन को ड्राप करके सीधे गया ..नजरूल भाई के पास और जितना भी जानवर को इंसान बनाने का समान होता है वो सब अपन ने अपने ऊपर पुतवाया ....अपन के स्पेशल एन्ड फेवरेट हज्जाम है नजरूल भाई ...

अगली सुबह अपन टेम से हीरो बनकर पहले ही गेट पर पहुँचा ...लेकिन झांटू किस्मत ...रोहन और मिस्टर शर्मा ही दिखाई दिए ....ऐसा लगा जैसे अपन के सपनों पर हौबु टांग उठा गया ...हौबु बोले तो अपन का कुत्ता ....

रहा न गया ... तो अपन ने इरादा कर लिया कि अपन आज कुछ् भी करके सुजाता से मिल के रहेगा ....अपन सीधा 17 के सामने पहुंचा ...बेल दी ...और तब नजर नीचे लटकते ताले पर पड़ी ...अपन की दिमागी नसों में स्पार्क हो गया ...वो पूरे जलें इससे पहले अपन ने बाइक पर किक टेकी और सीधे रोहन के स्कूल गया ....और सीधे प्रिंसिपल के कमरे के बाहर कान लगा कर खड़ा हो गया ....

" देखिये मिस्टर शर्मा योर सन् इज वेरी इंटेलिजेंट ...बट ...डिस इज दी फॉर्मेलिटी ....आपको अपनी वाईफ को लेकर यहाँ आना ही होगा ...और वो भी कल ...."

" ओके मैम थैंक्स ...चलो रोहन ..."

मिस्टर शर्मा सीधे रोहन को लेकर स्कूल के गार्डन में ले गए ....और वहीँ उसको लेकर बैठ गए ...अपन भी चुपचाप बिना शोर करे ..उनके करीब के एक पेड़ के पीछे जा लगा .....

" रोहन तू फ़िक्र मत कर ...ले तू पहले लंच कर.."

" नही करना मुझे लंच पापा ...प्रिंसिपल मेम की तरह मैं भी अपने मम्मी -पापा को साथ देखना चाहता हूँ ...मैंने आप दोनों के साथ रहते हुए भी कभी आपको एक साथ नही देखा ..."

" रोहन तू लंच कर बेटा ..फिर घर में बात करते हैं !"

" नही पापा बोलो मम्मी कहाँ गई..? क्यूँ वो आज हमारे साथ नही आई .?..बोलो पापा...बोलो ..."

बच्चे के आँसू देखकर साला अपन का दिल भी पसीज गया और अब न रहा गया तो पेड़ की आड़ से मिस्टर शर्मा के सामने पहाड़ बनकर खड़ा हो गया और बोला -

" ये क्या लोचा है साला ...बोलता काहे नही ...साला बच्चे के साथ अपन और अक्खा कॉलोनी ने भी तुम दोनों जोरू -खसम को साथ नही देखा ....बोल क्या चक्कर है ? कहाँ है तेरी बीवी ?...बोल ....वरना अपन साला अभी पुलिस के पास जाता है ...."

मिस्टर शर्मा अपन की इंट्री से पूरी तरह भौंचक्का रह गया ....और आँख में आँसू भरकर बोला -

" जग्गू मैं जानता हूँ तुम कई दिनों से मेरे परिवार पर नजर रक्खे हो ...जग्गू आज वक्त आ गया है ...तुम्हारे साथ रोहन भी सच जाने तो सुनो जग्गू ...

आज से तकरीबन 10 साल पहले जब मैं जिंदगी से हार कर एक पहाड़ से नीचे कूदकर अपनी जान देने ही वाला था तभी मेरे सामने एक बस खाई में गिरी .....कोई न बचा उसमें ...सिर्फ एक रोहन के सिवा ...ये मासूम अपनी दम तोड़ती माँ के करीब ही पड़ा था ...मैं तेजी से नीचे उतरा और जैसे ही मैंने इसको अपनी गोद में लिया इसकी माँ ने मेरा पैर पकड़ लिया ...खून उलटते मुँह से उसने सिर्फ इतना कहा कि इस मासूम को माँ -बाप दोनों का प्यार मिले ......उसने फिर दम तोड़ दिया .....इसके परिवार का हर सदस्य जो माता-रानी के दरबार में हाजरी लगाने जा रहा था कोई भी न बचा ......तब से जग्गू इस मासूम की माँ भी मैं हूँ और बाप भी ..

साला आँसू तो झपाझप निकले लेकिन एक सवाल भी ....

" तुम काहे को आत्महत्या करने निकला था ...?"

" क्यूँकि मैं एक किन्नर हूँ ....लेकिन किन्नर जैसी जिंदगी जीना नही चाहता ..... बहुत पैसे वाला है बाप मेरा लेकिन मुझे वो अपने घर में रखना नही चाहता उसने मेरी माँ के मरते ही दूसरी शादी कर ली ....और मेरे अकाउंट में हर महीने पैसे डलवा देता है ....हार गया जग्गू लोगों के फिकरों -तानों..हँसी ..मजाक और बदतमीजी से इसलिए मरने का फैसला किया ....लेकिन जबसे इस मासूम को गोद में लिया तब से जिंदगी जीने की एक तमन्ना मन में भर गई ...वो दिवार में जो तस्वीर है.. मेरी ही है ..जिसे तुम सुजाता समझे ...मैं ही हूँ जग्गू जो दिन- भर रोहन का बाप और रात को इसकी माँ बन जाता हूँ ....ताकि इस मासूम को दोनों का प्यार मिले ....और तुम्हे शक न हो इसलिए उस दिन मैंने ही तुम्हे बॉलकनी में साड़ी पहनकर अपने को दिखाया ...और इस  डर से की कोई सच का पता न लगा ले हर तीन या चार महीने में रूम शिफ्ट कर लेता हूँ ..."

आँख से आंसू संग गुबार फूटने लगे ...आँख दर्द से सर्द हो गई ...लेकिन एक सवाल फिर कि-

"वो उस दिन बाथरूम में तुमने सुजाता कहकर स्क्रू ड्राईवर जो माँगा वो ? "

" मैंने तुम्हे डोर के होल से बेल बजाते हुए देख लिया था और मुझे पता था कि तुमने जानबूझकर स्क्रू ड्राईवर छोड़ दिया है ...मैंने स्क्रू ड्राईवर को दरवाजा खोलने से पहले ही जेब में डाल लिया था और बाथरूम जिसमें कोई नही था उसका  दरवाजा सुजाता के नाम से नॉक करके  खोला और चुपचाप स्क्रू ड्राईवर अपनी जेब से हाथ में ले लिया ...किसी को शक न हो इसलिए अक्सर सुजाता यानि अपने ही कपड़े हमेशा सोफे में फैलाये रहता हूँ ....

"बस ...बस ...हो गया ...साला तुम वाकई इंसान नही फ़रिश्ता हो बीड़ू ....अपन तुम को सलाम करता है ....."

रोहन की आँख में आँसू जरूर थे मगर वो खामोश था ....लेकिन फिर अपने पापा से चिपटकर जो रोया तो अपन साला भी कण्ट्रोल न कर पाया ...

अगले दिन मिस्टर शर्मा अपने पापा संग जैसे ही स्कूल गेट पर बिना मम्मी के प्रिंसिपल को सब सच-सच बताने पहुँचा ...और जैसे ही उसने प्रिंसिपल के कमरे में इंट्री की ...एक जनाना हाथ ने मिस्टर शर्मा को बाहर खींच लिया और मिस्टर शर्मा के कान में कुछ कहा ....फिर

" मेम सी इज माय वाइफ सुजाता ....राजस्थानी है ...परम्परा है घूँघट की ...इसकी इसी वजह से कभी इसको अपने साथ कहीं लेकर आता -जाता नही ... पैदाइशी गूँगी है तो और मुश्किल होती है ...."

" इस नाटक की कोई जरूरत नही है मिस्टर शर्मा...आपके जाते ही कल रोहन ने हमें सब सच बता दिया था .....सैल्युट है आपको और आपकी क़ुरबानी को अब आपको कभी ये दोहरी जिंदगी नही जीनी पड़ेगी ....हैं न रोहन ....?"

" यस मेम ...." ( मुस्कुराहते हुए )

और रोहन ने मिस्टर शर्मा को गले लगा लिया ....लेकिन तभी प्रिंसिपल मेम हँस कर बोली -

" लेकिन हम भी तो देखें कि आखिर घूंघट के पीछे सुजाता जी दिखती कैसी है ...?"

कद्दू दिखती हैं ...साला पहली बार जिन्दगीं में कोई अच्छा काम किया और उसमें भी अपन की वाट लग गई .....तब से रोहन जब भी दिखता है साला अपन को जग्गू आंटी बोलता है .......

नवाजिश

Junaid Royal Pathan

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