Tuesday, 29 January 2019

आखरी_छलाँग

#आखरी_छलाँग
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" जी हाँ ..सबसे पहले ..सबसे तेज ये खबर हम आप तलक पहुँचा रहें हैं ....हमारे साथ मौजूद हैं ..अंजुमन मस्जिद के पेश ईमाम ...हाँ तो मौलवी साहब क्या देखा आपने ..?"

" एहें..एहें ...अमां मियाँ जिरा इस बाली ईमारत में लगाइयो तो कैमरा ...हाँ तो मोहतरमा .. तकरीबन रात 1 बजे ..जब हम हाजमें की शिकायत से जूझ रहे थे ..तो छत पर टहलने ऊपर आये ...देखतें क्या है ...जे मोटा इंसान ..चेहरा बन्दर जैसा ..वो उल्ली वाली ईमारत से कूदा और जे बाली पर पहुँचा .. हमको देखा और बोला....."

" आप ये इतने विश्वास से कैसे ..."

" अमां पूरा न बोलने दे रई हो ...हमें देखा मुस्कुराया और बोला " जय श्री राम ".."

इस बात को बोलने के  बाद मौलवी फिर एक आम मौलवी नही रहे ... उनके इस एक जुमले ने पूरे बजरंगपुर का माहौल ही बदल दिया ...मैं नीरजा वर्मा ..कुछ 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में संघर्ष कर रहीं हूँ ..मेरा भी एक अरमान है कि मैं अपना एक प्राइम टाइम चलाऊँ ...लेकिन फील्ड से वहाँ तक मेरा पहुँचना जैसे नामुमकिन सा लगने लगा था ,,, लेकिन आज के बाद मौलवी की तरह मैं भी आम पत्रकार नही रही ...भारत आस्थाओं का देश है ..यहाँ आस्था पर शीष झुकते हैं और उसके बनाम शीष उतारने हेतु ईनाम भी रखे जाते हैं ...मैं तब दिल्ली में पढ़ती थी तब ऐसी ही कहानियों से दिल्ली का जीना मुहाल हो गया था ...ये घटना दिल्ली जैसी तो है लेकिन राम का नाम शामिल होते ही ये घटना ..मात्र घटना नही एक सुनामी बन गई थी ...क्यूँकि अभी तक भारत में आस्था , आस्था से टकराती रही और उसे कमजोर करने का प्रयास करती रही ...लेकिन आज एक परस्पर विपरीत आस्था ही दूसरी आस्था को मजबूत कर रही थी ....खैर मेरी नजर में ये सिर्फ एक अंधविश्वास था ,,लेकिन अगर अपनी नजर को सार्वजनिक कर दूँ तो आस्था और मेरा टकराव मुझे और मेरे करियर को समाप्त करने हेतु काफी था ...मैं अपने मन की बात कहूँ तो मैं अब खुद चाहने लगी थी कि इस पूरे मजमे को हवा लगे ..और मैं इसपर धुंआधार रिपोर्टिंग करके ...अपनी मंजिल को पा सकूँ ।

पूरा बजरंगपुर अब सिर्फ एक ही रंग में था ..हर तरफ राम के नारे ..बजरंगबली की जय ...मौलाना हर टी.वी चैनल के मुख्य आकर्षण बने थे ...नक्सलियों के द्वारा शहीद हुए सैनिक ..काश्मीर घाटी में चरमपंथी हमला ..सब गौड़ हो चुका था ...जहाँ मौलाना एक सम्प्रदाय की नजर में नायक बन चुके थे ...वहीं दूसरी ओर एक समाज उन्हें इसका ..उसका ..मौलाना बोल के पल्ला झाड़ रहा था ..देश का नास्तिक वर्ग इसे घोर अंधविश्वास बोल रहा था ...तो देश का सबसे बड़ा शोषित वर्ग अर्थात गरीब ..इसे राम के आगमन की पुनः सूचना मान रहा था ...जिसे विश्वास होने लगा था कि राम हम आहत वर्ग के उद्धार हेतु पुनः जन्म लेने वाले हैं.. राम एवं  हनुमान के प्रत्येक मन्दिर पूरे राष्ट्र में भक्तों से गुलजार थे ...लेकिन बजरंगपुर इन सबसे अलग होकर स्वयं को देश का प्रतिनिधि मान रहा था ...आनन -फानन में नेताओं ने बजरंगपुर को जिला घोषित किया ..सड़के -स्वास्थ्य जगमगाने लगे ...हर समाज बजरंगपुर कूच करने लगा ...जगह -जगह कीर्तन ..सत्संग ...धार्मिक रैलियां ... इस घटना के मद्देनजर सब आस्तिक था और न्यायिक भी ...परन्तु इस घटना से सम्बंधित घटनाओं की अब बाड़ सी आने लगी .. लूटपाट हेतु असामाजिक तत्व स्वयं को  'मंकी मैन' बनाने लगे ...हर जगह से एक ही शोर था कि उसने ' मंकी मैन ' को देखा है ....

आस्था के नाम पर होते इस बवाल से त्रस्त होकर संत समाज आगे आया और उसने घोषणा की, कि ये इस्लाम वालों की चाल है सनातन धर्म को बदनाम करने हेतु ....कृपया इस झाँसे में न आये ।

लेकिन जब आस्था सर पर सवार हो तो उससे डिगना नामुमकिन होता है ...इसी क्रम में एक समाज ने इस घटना क्रम को अपनी हार के रूप में स्वीकारा और आगे आकर घोषणा की ,,कि वो ' मंकी मैन ' हरगिज हनुमान नही थे ..बल्कि मौलाना की नजर कमजोर है ...वो तो साक्षात पीर थे ...जिनका गुजर यहाँ से हुआ ....आस्था बनाम आस्था की इस लड़ाई में हर वर्ग कूदने लगा और खुद को ' मंकी मैन ' से जोड़ने लगा ....अगले दिन जब मौलाना प्रेस के सवालों का जवाब देने प्रकट हुए तभी -

" देखो मौलाना ...या तो बोल दो ये सब झूठ था ...वरना साबित कर कि जो तुम बोल रहे है वो सब सच है ...."

" कैसी बात कर रिये हो महावीर भाई ...अमां ईमान से जो के रिया हूँ सोलह आने सच है ....."

" मौलाना तुम मुझे नही जानता ...बजरंगबली का कट्टर भक्त हूँ ...अगर मेरे प्रभु के सम्मान में कोई झूठ दिखाई दिया ...तो याद रखना सार्वजनिक बोल रहा हूँ ....तुम्हारा लंका दहन मैं करूँगा ! "

बात आस्था से अब साम्प्रदायिक होने लगी ...दो समाज अब सीधे आमने -सामने आने लगे ...शासन -प्रशासन के हाथ फूलने लगे ...हर जगह पुलिस गश्त ...और पहरा .....

अगली सुबह जब मैं उठी तो एक दो जगह से छिटपुट हिंसा की भी खबरें आने लगी ....दिन आगे बढ़ा तो मिल्ट्री भी जमा होने लगी .....

मुझे किसी अशुभ घटना के घटने का भय सताने लगा ...और अब मेरा धैर्य भी जवाब देने लगा ...मैंने मन में कहा भाड़ में जाये करियर ...मौलाना को कोई हक नही कि वो एक खूनी खेल का केंद्र बने ...मैंने इरादा कर लिया कि अब मैं मौलाना के इस मनगढ़न्त खेल को बेनकाब कर दूँगी ताकि समाज में कटुता कम हो ...और दोषी सिर्फ मौलाना माना जाये ......

रात के ग्यारह बजे थे ...मैं  सेंडिल अपने हाथ में लेकर चुपचाप होटल की सीढ़ियों से नीचे उतरी ....गश्त के जवान जब आगे बढे तो मैं सीधे एक अँधेरी गली में चलने लगी ...ये गली से दो मोड़ आगे मौलाना का घर था ....तभी

" देख महावीर अब भी सोच ले ..अगर मौलाना की बात सच हुई तो ..?"

" सच होती तो बजरंगबली मुझे या तुझे दर्शन देते ...उस विधर्मी को नही ...ये सब उसने हमारे धर्म को बदनाम करने हेतु रचा है ...मौलाना के लिए आज की रात उसकी आखरी रात होगी .....ला पेट्रोल दे !"

मैं सन्न रह गई ...वास्तव मैं मौलाना ने एक धर्म की आस्था को चोट पहुँचाई है और लोगों की जान और माल को खतरे में डाला है .और वो वास्तव में सजा पाने का अधिकारी है ...लेकिन जब देश में एक कानून व्यवस्था है तो फिर किसी को हक नही किसी की जान लेने का ...मैं दूसरी गली से मौलाना को ये खबर देने बढ़ी ...मौलाना के घर के आगे दो जवान गस्त कर रहे थे ...मैंने सोचा कि जाकर इनको सब सच बता दूँ ...लेकिन जैसे ही मैं आगे बढ़ी तभी दूसरी ओर से गोली चलने की आवाज आई ....और वो जवान दूसरी तरफ दौड़ गए ...मैं समझ गई ये सब महावीर का प्लान है ...मैं भाग के मौलाना के घर के करीब पहुँची ...दरवाजा खटखटाती कि तभी अंदर से किसी बच्चे की खाँसी की आवाज सुनाई दी ...और मैं उनके मकान के पीछे वाली खिड़की पर कान लगाकर खड़ी हो गई ..

" सब्र कर मेरे बच्चे परसों अल्लाह ने चाहा तो तुझे इस बीमारी से हमेशा के लिए निजात मिल जायेगी ..."

" इसे तो इसकी बीमारी से निजात मिल जायेगी ..इमाम साहब ...लेकिन जो बीमारी आपने मआशरे (समाज) को दी है उसका क्या ...?"

" खुदा के लिए खामोश हो जाओ ..आलिया ...जवान बाहर हैं किसी ने सुन लिया तो जान न बचेगी फिर .."

" अपनी जान की इतनी फ़िक्र है आपको ...और जो मासूम आज आपके चलते दंगों में मारे गए उनका क्या ...?"

" देखो आलिया ...मैंने कुछ गलत नही किया ..बल्कि ये सब कुछ मैंने अपने बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए किया ...देखो आज हमारे पास इतना पैसा है कि हम इसको फिर जिंदगी दे सकते है ...और कहीं दूर जाकर फिर एक नई जिंदगी शुरू कर सकते है .."

" नही चाहिये ऐसी जिंदगी मेरी औलाद को और मुझे ...खुदा का ख़ौफ़ तो खाते ..और सोचो कितने लोग तुम्हारे यानि एक झूठे इमाम के पीछे नमाज पढ़ते हैं उनका क्या ...बोलो क्यूँ किया ये सब कुछ बोलो ..?"

" आलिया तुम ठीक कहती हो लेकिन मैं क्या करता बोलो ...?कहाँ से लाता इतना पैसा बोलो .? इकलौती औलाद को कैंसर से मरने देता ...जो झूठ किसी की जिंदगी बचाये वो झूठ नही होता ...लेकिन अब एहसास हुआ कि एक जिंदगी बचाने के लिए हजार जिंदगियाँ दाँव पर लग गई है ...उस दिन मैं खुदखुशी करने जा रहा था ..जिस दिन वो मनहूस अख़बार का फटा टुकड़ा हवा संग मेरे चेहरे से आ लगा ..जिसमें लिखा था कि पूरी दिल्ली  एक ' मंकी मैन ' के चलते रुक सी गई है ...मैंने उसी वक्त प्लान बनाया कि मैं अगर फिर कुछ ऐसा करूँ तो सुर्ख़ियों में आ जाऊँगा ...एक मुसलमान और वो मस्जिद का ईमाम जब ये बोलेगा तो ये बात हर जगह फ़ैल जायेगी और टी.वी न्यूज़ , इंटरव्यू वाले मुझे घेर लेंगे ...मैं उनसे इसके बदले मोटी रकम माँगूँगा और अपनी औलाद का ईलाज करवा लूँगा ....."

तभी मुख्य दरवाजा भड़ाक से खुलने की आवाज सुनाई दी और -

" घबराओ मत मौलाना मैंने सब कुछ सुन लिया है ...आया था तुम्हारे घर को फूँकने लेकिन अब नही ...मौलाना मैं समझ गया कि तुम्हारा इरादा सिर्फ बेटे का ईलाज था ...किसी धर्म को बदनाम करना नही लेकिन अब जो ये हंगामा बरपा हो गया है बोलो कैसे रोकोगे इसे ...?.लोग एक -दूसरे के खून के प्यासे हो रहे हैं ..."

मौलाना खामोश होकर नजर नीची करके सुबकने लगे .....

" सुनो मौलाना ! अब तुमसे कुछ नही होगा ..इस आग को रोकने का बस एक ही तरीका है ...कि तुम लोगों के सामने आकर ये कहो कि बजरंगबली पुनः तुम्हे दिखने का वायदा कर गयें हैं ...और फिर वो उसी इमारत से छलांग लगायेंगे और अदृश्य हो जायेंगे और फिर कभी दिखाई नही देंगे ...अतः इसके बाद जो भी बजरंगबली को देखने का दावा करेगा वो झूठ बोलेगा और जो भी अपराध घटित होगा वो इंसानों के द्वारा किया जायेगा ......"

" मौलाना फ़टी आँखों से महावीर को देखने लगे और ममियाते हुये बोले ...लेकिन महावीर भाई ...हर तरफ कर्फ्यू सा माहौल है ...मैं कैसे लोगों तक अपनी बात पहुँचाऊँ ...?और आप जानते हो कि ये सब झूठ था तो कोई इंसान इतनी लम्बी छलांग कैसे लगा सकता है ...कैसे होगा ये सब कुछ ...?"

" होगा मौलाना ....विश्वास रखो ....लेकिन तुम अपनी बात कैसे लोगों तक पहुँचाओगे बस ये सोच रहा हूँ .....

तभी मैंने अपना कैमरा सम्हाला और अंदर प्रवेश किया -

" मैं पहुँचाऊँगी  लोगों तक !"

और मैंने एक साँस में सब सच बता दिया लेकिन ये प्रश्न घनघोर सता रहा था कि जब सब कुछ झूठ है तो हनुमान दिखेंगे कैसे ...और इतनी असम्भव छलाँग कौन लगाएगा ...?

खैर मैंने मौलवी की बात को लोगों तक पहुँचा दिया और कह दिया कि इमारत के 200 मीटर तक कोई इंसान न हो वरना ये घटना नही घटेगी..... और उसी वक्त मुझे चीफ ने खबर दी कि आज से तुम प्राइम टाइम चलाओगी
..मेरी ख़ुशी मेरे मन में नही उतर रही थी क्यूँकि कल यानि मौलाना के द्वारा घोषित दिन और समय क्या होगा ....इसकी अनिश्चितता को लेकर मैं काँप रही थी ।

कर्फ्यू बना रहा लेकिन पत्रकारों को छूट दी गई कि वो इस घटनाक्रम का लाइव टेलीकास्ट करें ....

पुलिस और सेना के घेरे के बीच खड़ी वो दो इमारतें भारत में ही नही बल्कि विश्व् में कौतुहल का केंद्र बनी थी ....तभी एक ' मंकी मैन ' ने छलाँग लगाई और मेरी और मौलाना की आँखे फ़टी की फ़टी रह गई .....लेकिन ये छलाँग पूरी न हो सकी और ' मंकी मैन ' नीचे आ गिरा ....पहले सब भौंचक्के रहे फिर घटना स्थल पर तेजी से दौड़कर पहुँचे .... लेकिन नीचे जमीन में कुछ नही था ......तभी एक पुलिस वाला बोला कि शायद प्रभु बीच में ही अदृश्य हो गए ...

सबने सहर्ष इसे स्वीकार लिया लेकिन मेरे और मौलवी के मन ने नही ...तभी किसी ने मेरे कान में कुछ कहा और मैं स्तब्ध रह गई ....भीड़ -भाड़ के चलते मैंने मौलवी को बात बताई ....और हम दोनों एक गली से आगे बढ़े ....

सामने एक प्लास्टिक की सीट पर महावीर का लहूलुहान शरीर पड़ा था ...पूरी सीट खून से लथपथ थी ....अब समझ में आया कि महावीर ही मंकी मैन बनकर कूदा और नीचे प्लास्टिक की सीट की वजह से उसका खून जमीन पर नही फैला ....

महावीर के साथ उसके दोस्त खड़े थे ....लेकिन मौलाना जमीन पर बैठ गए और महावीर के सर को अपनी गोद में रखकर खूब रोये ....महावीर के प्राण निकल चुके थे ... मौलाना ने उसे सच्चा हनुमान भक्त और आला शहीद कहा ...

लोग इस घटना के बाद अपने घरों से बाहर निकले ...सभी मजहब के लोग एक दूसरे को मुबारकबाद देने लगे ...नफरत पर फिर मुहब्बत छाने लगी...एकदम से समस्त   घटनाओं पर लगाम लग गई ....आज तीन साल बाद सब इस घटना को भूल चुके हैं ....लेकिन मुझे और मौलवी को मनुष्यों में अमन हेतु  शहीद महावीर और उसकी 'आखरी छलांग' हमेशा याद रहेगी .....

नवाज़िश

Junaid Royal Pathan

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