Thursday, 31 January 2019

जन्नत

#जन्नत
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" डेमिट ..फक ...स्टॉप दा कार ....हे गाइज तुमने अभी देखा ...वो ..वो ..सामने ..."

" अबे आकाश तभी कहा था इस फट्टू को मत दिया कर पीने को ....क्या हुआ बे ..?"

" अपनी जुबान सम्हाल रोहन ....साले तेरी भी फट के हाथ पर आ जाती अगर तू भी देख लेता ..."

" अबे क्या देख लेता ...व्हाट डू यू मीन ..?"

" अबे मैंने अभी देखा ..वो  सड़क के किनारे एक सफेद कपड़ो में लिपटी औरत को ....उसकी गोद में एक बच्चा भी था "

" हा हा हा हा हा ...अबे सुना रोहन ...हा हा हा ..इस झान्टू को पालयट बनना है ....अबे फट..फट..फट्टू ...देख तेरी फ़टी तो नही चुड़ैल देखकर ..."

" हे गाइज चिल ...कहाँ देखी तूने वो औरत नंदलाल शर्मा .."

" ओये आकाश ! पूरा नाम मत ले ..नील बोल कमीने ...वो वहाँ पीछे माइल स्टोन के पास ...."

ड्राइविंग सीट पर बैठे आकाश ने कार  बैक की ...और कार माइल स्टोन के पास ले जाकर रोकी ..

" बता ...नही बोल कहाँ है वो औरत ..साले सड़ी हिन्दी हॉरर मूवी देखेगा तो ऐसा ही होगा ...बता कहाँ हैं ..?"

तभी रोहन बोला -

" ही ही ही ...अबे बोल रामसे की औलाद कहाँ है ..? साले हॉलीवुड देखा कर कम से सब कुछ खुला देखने को तो मिलता है ...यहाँ तो सी ग्रेड हीरोईन नहाती भी है तो कपड़े पहनकर ...."

" हा हा हा हा हा हा ..."

कुछ नही था उधर और नन्दलाल उर्फ़ नील ने भी अपनी अच्छी किरकिरी करवा ली .....गाड़ी आगे बढ़ी अचानक से कार पर फिर ब्रेक लगे ...और इस बार ड्राइविंग सीट पर बैठे आकाश ने उस औरत को देखने का दावा किया ....लेकिन रोहन ने फिर बात हवा में उड़ा दी ....

कौन थी ये औरत ...? जो मुझे भी दिखाई दी थी ..ये सवाल मैं यानि एक बैंकर उम्र 30 साल भी आज तलक खुद से पूछ रहा हूँ ..मेरा रास्ता यही है आने -जाने का ...रात को क्लोजिंग के बाद ..दिन के स्ट्रेस के चलते .. थोड़ा बार में वक्त गुजारता हूँ तो अक्सर घर पहुँचने में लेट हो जाता हूँ ... लेकिन मेरे कान तब खड़े हो गए जब एक दिन मैं कैश काऊँटर में कैश डिस्ट्रिब्यूट कर रहा था ...और नंदलाल शर्मा नाम का ये युवा यही कहानी फोन में किसी को सुना रहा था ....

जब उसकी बारी आई तो मैंने उससे उसका नम्बर और घर का एड्रेस लिया ...और ऑफिशियल छुट्टी पर उसके घर गया और उससे इस बारे में बात की ...वो हैरत में पड़ गया और उसने मुझे जो घटा वो सब सच बता दिया ...अब उस औरत पर जहाँ नील को कोई शक नही था वहाँ मैं भी सन्तुष्ट था कि उस औरत का भी कोई वुजूद है ,,

अब मैं अक्सर रात को घर लौटते वक्त चौकस रहता ..लेकिन वो औरत मुझे फिर कभी दिखाई नही दी ...और ये बात मेरे जहन से उतर गई ...भूत-प्रेत पर मैं हरगिज विश्वास नही करता ... लेकिन न जाने क्यूँ मुझे ऐसा लगने लगा था कि कुछ होता तो जरूर है .....

बॉस की फेयरवेल पार्टी रात के 1 बजे खत्म हुई ....धुत नशे में , मैं फिर उसी सड़क से गुजरा ....तभी मुझे लगा कि मैंने कुछ देखा ....मैंने आव देखा न ताव और गाड़ी को जल्दी में बैक किया ....माइल स्टोन में पहुँचने तक वो औरत जंगल में आगे बढ़ चुकी थी ....नशे ने मुझे साहस दिया ..और मैं उसके पीछे हो लिया ...लेकिन अजीब बात आज वो औरत अकेली थी ,,,

पेड़ों का झुरमुट खत्म हुआ ,,और मेरे उसके बीच फासला भी ...वो औरत भागते हुए कुछ पलटी ..तभी चाँद की रौशनी उसके चेहरे से टकराई ....मैंने किस्सों में सुना था कि चुड़ैल बहुत जवान और खूबसूरत होती है लेकिन ये तो अधेड़ और सामान्य सी थी .....तभी सामने एक खण्डर दिखाई दिया ...मैंने आँख का व्यास बढ़ा कर देखा तो पाया ..कि वो अंग्रेजो के ज़माने की  हथियार रखने की कोई इमारत है ...जो अब खस्ताहाल है ...वो औरत उस इमारत में दाखिल हुई .....

शराब का नशा काफी हद तक उतर चुका था ...और एक अनजाने डर ने मेरे मन और जिस्म में दस्तक दी ..मेरी साँसों के साथ मेरे रोम भी फूलने लगे ...मैंने इरादा कर लिया कि अंदर दाखिल होकर पता लगाऊँगा आखिर ये सब क्या माजरा  है ....

मैं जैसे ही अंदर दाखिल हुआ एक सड़ते हुए गोश्त की बू मेरी नाक में दाखिल हुई ....मेरा जी मचल गया ...और वहीं मैंने उलटी करना शुरू कर दिया ...जब कुछ सम्हला तो मैंने नाक में रुमाल रखा और आगे बढ़ा ....और सामने देखते ही मेरी रूह में दर्जनों सुराग हो गए ....एक बच्चे और एक मृत बूढ़े की देह जमीन पर गिरी- बिछी थी ...और उनमें तेज बदबू भरी थी ....मैं कुछ समझता तभी वो औरत सामने आई और बोली -

" डरिये मत साहब ...मैं कोई चुड़ैल नही ...बल्कि किस्मत की मारी एक इंसान हूँ......"

मैं कुछ समझता या कोई सवाल करता इससे पहले ही वह फफक कर रो पड़ी ...

मैंने उसके काँधे पर हाथ रखा और बोला -

" ये सब क्या है  ...?"

" ये मेरी किस्मत है ...और मेरे बेटे के किये का सरमाया ...आज अगर मैं इस कदर मजबूर और बदतर नजर आ रही हूँ तो ये सब मेरे बेटे ने मुझे मेरी नेक तरबियत के एवज् में नजर किया है ..."

" मेरी कुछ समझ में नही आ रहा है ..."

" मैं सब बताऊँगी लेकिन पहले वायदा करो ...कि मेरे शौहर और और इस मासूम का बाइज्जत कफ़न-दफन करवाओगे ..."

" आप मुसलमान हो ...?"

" हाँ ...और एक काश्मीरी मुसलमान ...."

मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई ...सोचा यहाँ से कट लूँ ...न जाने किस फछड़े में फँस गया हूँ ...लेकिन उस बच्चे की मृत देह देखकर ...कदम वापस पीछे न खींच पाया ...

" हाँ जुबान देता हूँ ...सब सच बताइये "

" मेरा इकलौता बेटा जाहिद आलम .... आई .पी.एस ऑफिसर बनना चाहता था ...रात- दिन पढ़ता रहता था ...उसे सिर्फ एक ही जूनून था कि उसे किसी तरह अपने अम्मी-अब्बू और मुल्क का नाम रौशन करना है ... लेकिन फिर एक दिन आर्मी की गोली से उसका एक जिगरी दोस्त अनवर मारा गया  ...आर्मी को किसी ने एक मकान में दहशत गर्दो के छुपे होने की खबर दी ...और वो मकान अनवर का था ....अनवर भी एक ऑफिसर बनना चाहता था ...लेकिन आर्मी के मकान घेरे जाने पर दहशतगर्दो ने अंदर से फायरिंग शुरू कर दी और पटलवार में आर्मी ने सबको मार गिराया .....उसके बाद जाहिद फिर हमेशा के लिए बदल गया ...अनवर सिर्फ जाहिद का सच्चा दोस्त ही नही जाहिद की तरह एक सच्चा वतनपरस्त भी था .... और फिर जाहिद से दहशतगर्दो ने राब्ता कायम किया ...उनके आकाओं ने कल के होने वाले ईमानदार और वतनपरस्त ऑफिसर को जन्नत और हूर के ख्वाब दिखा कर वो करवा दिया जिसके बाद हम खानाबदोश और सजायाफ्ता हो गए ...."

" मतलब ..?"

" उसने अपने जिस्म में बम बांधकर आर्मी के एक बेस कैम्प को उड़ा दिया ....लाख समझाया था उसको कि अनवर की मौत इत्तेफ़ाकन हुई थी . जाहिद तो आकाओं की दिखाई जन्नत में दाखिल हो गया ...और टी.वी मीडिया और पुलिस ने हमारा जीना जहन्नम कर दिया ...हर जगह हमारे चेहरे पर लोग थूकने लगे ...जिसे पता नही था उसे भी मुल्क की मीडिया ने दिखा दिया कि मैंने एक दहशतगर्द को अपनी कोख में पाला है ....फिर न कोई रिश्तेदार रहा और न कोई सहारा ...हर जगह मुँह छिपाते -छिपाते यहाँ इस वीराने में आकर पनाह ली ...."

मैंने एक ठण्डी साँस भरी और आँखों से आँसुओं को जुदा किया और हकलाते हुए पूछा -

" ये ..ये ..ये..बच्चा ...? "

इस बार वो औरत शर्म और जिल्लत से मचल उठी और दीवार पर मुँह जोड़ कर नाखूनों से दीवार के पत्थर खुरचने लगी ..और फिर चीखकर बोली -

" तुम्हारे जैसे ही कई इंसानों की हवश का नतीजा है ये मासूम .... वो हैवान जो औरत की उम्र नही ..सिर्फ उसका बदन देखते हैं ...जिससे भी मदद माँगी उसने मदद के बदले जिस्म नोंच डाला...हर मजहब का नुमाइंदा इस चलती सड़क पर मुझे रौंद गया ...रात ढलने पर इसलिए बाहर निकलती हूँ कि हम पेट की भूख मिटा सकें ...लेकिन किसी ने चुड़ैल समझा तो किसी ने अय्याशी का सामान ....लेकिन आज इसलिए बाहर सड़क पर आई ताकि इन दोनों का कफ़न -दफन हो सके ..और इनको तो कम से कम कब्र नसीब हो !"

" बस करो ...भगवान के लिए बस करो...."

कफन -दफन  बाइज्जत  हुआ ...शादी नही  की है अभी ...और माँ-बाप एक हादसे में खो चुका हूँ ...खैर सन्डे के दिन गार्डन की गुनगुनी धूप में अख़बार पढ़ रहा था तभी -

" बेटा अविनाश खाना लग गया ...जल्दी आ जाओ वरना ..मैं भी नही खाऊँगी .."

" आया अम्मीजान ..."

कल की एक चुड़ैल आज मेरी " माँ " है ...वो माँ जिसके पैरों के नीचे जन्नत होती है ....काश जाहिद जैसे नौजवान ...मुफ़्त में मिली इस जमीनी जन्नत की इज्जत करते और आकाओं की दिखाई जन्नत से नफरत.. तो यकीनन खुदा उसकी जमीन और आसमान दोनों जन्नत बना देता ......

नवाज़िश

Junaid Royal Pathan

Wednesday, 30 January 2019

शैतानी_सल्तनत

#शैतानी_सल्तनत
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" अरे बाप रे बाप ...ई हस्पताल है कि कोई राजा का महल ..."

" सुनो जी ! हल्के बोलो ..ई हमार गाँव नही ..देखो सब कइसे टुकर-टुकर देख रहे हैं "

" अच्छा चम्पा तुम दीपू के साथ इहीं बैठो ..हम आये अभी पता -जवाब करके "

तभी एक फॉर्मेसिस्ट का गुजर हुआ ...और वो चम्पा और उसके तकरीबन 7 साला बच्चे को देखकर बोला -

" अरे क्या कर रही हो ..मार्बल खराब होगा ऊपर बैठो ...वो कुर्सी लगी तो है "

मैं वहीं था ..वहीं बिल्कुल उस देहाती औरत के सामने बैठा.. .. रूटीन चैकअप कराने आता हूँ ,, बहुत सतर्क हूँ अपनी हेल्थ को लेकर ....अब मेरी नजर उसके पति पर पड़ी ...

" भैय्या ई का लिखा है ...मतलब बता दियो तो मेहरबानी होगी "

" हूं ..हूं ..अल्ट्रासाउंड ..ये सामने जहाँ ..जिस विंडो में लाइन लगी है वही आप भी खड़े हो जाओ "

" मालिक बरकत दे ....आपको "

अब एक स्वीट लौंडिया के पीछे और एक मॉडर्न हॉउस वाइफ के बीच में खड़ा था वो देहाती ..लेकिन स्वीट लौंडिया को कोई प्रॉब्लम नही क्यूँकि वो शायद अपनी dp पर कमेंट देख रही थी ,, उसकी अल्हड़ तो नही मगर वेस्टर्न मुस्कुराहट से मुझे ऐसा लगा ...मगर मॉडर्न हाउस वाइफ को उस देहाती से बदबू आ रही थी ..उसने मुँह में रुमाल रख लिया ,, उसकी जगह मैं भी होता तो बेशक यही करता ...अबे गरीब हो तो इसका मतलब ये नही कि साफ-सफाई छोड़ दो ...लेकिन झट उसकी बीवी पर नजर पड़ी तो पता नही क्यूँ एहसास हुआ कि ये साले ...बहुत लम्बा सफर करके यहाँ पहुँचे हैं ....तो बदबू लाजमी है ...एक पिठल्ले भर का मंगलसूत्र , कान में गुम होती दो टिल्ली वाली छटांग भर की बालियाँ ...और हाथ में सस्ती चूड़िया ..दाँये में पाँच और बाँये में दो ....बाकि और कुछ नही था उसमें देखने को ...हाँलाकि मैं बी ग्रेड सेक्सी मूवीज बनाता हूँ ...और हर औरत में मुझे कुछ न कुछ सेक्स अपील दिखाई देती है लेकिन ये औरत मुझे हर नजर से बंजर दिखी .....फिर आँख फेरी देहाती पर ...

" हजूर ई मामला है जरा हाथ लगा दो "

" 800 रूपीज दीजिये "

" क्या ...मालिक मिल्कियत क्या कहा 800 रुपया ..?"

" हाँ जल्दी करो ..."

झट से लाइन से टूट कर अलग हो गया देहाती और दौड़ता हुआ अपनी बीवी के पास पहुँचा -

" चम्पा लूट है ...800 रुपया माँग रहे हैं ..देखो तो ..?"

जितना देहाती न सहमा था उतना ही अंदर तक काँप गई उसकी लुगाई ..बच्चा गोद में बैठ टिम-टिम सब देख और सुन रहा था ....दोनों कुछ देर खामोश रहे ...और न जाने क्यूँ चम्पा आँख में आँसू खरीद लाई ....

बगल में बैठे सीनियर सिटीजन ने नेक कॉलर लगी गर्दन को बड़ी मेहनत कर उनपर टिकाया और मामले का संज्ञान लिया ...और कहा-

" देखो भैय्या इसे कहते है अल्ट्रासाउंड ... पेट में जो खराबी हमें बाहर से नही दिखती इसके मारफत वो दिख जाती है ...क्या समस्या किसको है ..? अच्छा ये ..ये..दीपक लिखा है ...ये इस बच्चे का है ..?"

" जी माईबाप ...तीन दिन से पेट ने गर्मी पकड़ ली है इसके ... उलटी करता है और उसमें खून आता है "

" तो ये तो गम्भीर बात है ..अल्ट्रासाउंड तो करवाना होगा ...अच्छा मेरा नम्बर आ गया ....."

साला अल्ट्रासाउंड नही हो गया कोई तोप चीज हो गई ....मन किया खड़ा होकर चिल्ला कर कहूँ कि क्यूँ बे जब औकात नही तो यहाँ आया क्यूँ ..? तुम जैसों के लिए तो सिर्फ सरकारी अस्पताल बने है ।

लेकिन मेरे इस सवाल का जवाब खटाक से दिया चम्पा ने वो बोली -

" अब का होगा दीपू के बापू ..सरकारी बालों ने तो मशीन नही है ..डोटर साब नही है कहकर यहाँ भेजा अब क्या होगा ...?"

फिर साला रोना ...शुरू कर दिया ...मन किया कहूँ गेटकीपर से अबे इन नौटंकीबाजों को बाहर कर ..लेकिन मेरे मन की रौद्र बात शायद देहाती ने सुनी और झट से कुर्ते के अंदर की चोर जेब में हाथ डाला... गिनती के कुछ 1700 रूपये निकले ....धत् साला .. आठ सौ आठ बार गिने और लाइन पर दुबारा खड़ा हो गया ....

मेरे  डॉक्टर आज ट्रैफिक में फँस गए हैं फोन आया था उनका  ...हाँ तो फिर अल्ट्रा साउंड भी हुआ देहाती का ...पता -खोला पूछ कर डॉक्टर से भी जा मिला ....डॉक्टर के केबिन के अंदर घुस रहा था तो थोड़ा घबराया हुआ जरूर था ...लेकिन बाहर निकलते वक्त उसका कुर्ता उसकी आँख के पानी से भीगा हुआ था ....वहीं सटी दीवार में मुँह टेक दिया उसने और सिसक -सिसक कर रोता रहा ....फिर उसने अपने आँसू अपने गमछे से पोंछे और बीवी के पास पहुँचकर बोला -

" चम्पा दीपू का आपरेशन करवाना होगा और वो भी आज रात "

" पत्थर की मूरत बन गई देहातन ....लेकिन आँसू की एक तेज धार से पता चला कि उसमें जान है ..."

" चम्पा जान बच जायेगी ..तू चिंता न कर ...लेकिन "

" लेकिन.. क्या दीपू के बापू ? "

" 70 हजार ...70 हजार रुपया लगेगा .. ?"

" कय्य्या ...दीपू के बापू कहाँ से लायेंगे ...सिर्फ नाम भर सुना है इसका ..क्या करेंगे बोलो ...बोलते क्यूँ नही ...?"

" वही जो एक खुद्दार इंसान नही करता ..वो मर सकता है लेकिन किसी के आगे हाथ नही फैला सकता "

और झट उठा देहाती और एक ऊंची आवाज में अपने बच्चे के दर्द और अपनी मजबूरी को बयाँ कर गया ...

आते -जाते लोग दर्शक थे ...कुछ एक डॉक्टर भी बाहर आये ....अस्पताल मैनेजमेंट ने सिक्योरटी वाले को इशारा किया और उसने उस देहाती का हाथ पकड़ उसे बाहर खींचा .....उसके पीछे देहातन भी दौड़ गई ....बच्चा भी नन्ही टाँगो से बाहर आ गया ...अब अस्पताल के अंदर कुछ था तो उनकी पोटली जिसे सिक्योरटी वाले ने उनको थमा दिया ...लेकिन उसकी फरियाद खाली नही गई ...कोठी..महलों ..गाड़ी वाले ..100 रूपये तो ज्यादा 500 रूपये का महादान करते रहे ....चम्पा अपने पति की इस लाचारी पर सिर्फ रोती और सिर्फ रोती रही ....कुछ साढ़े 5 हजार जमा हुए ...और जमा हुई एक गहरी ख़ामोशी ... जिसे तोड़ा चम्पा ने और झट से अपने मंगलसूत्र और बालियों को देहाती के हाथ में रखा ..और देहाती न रोया , न कुछ बोला ..बस खड़ा होकर चलता रहा ...

कुछ देर में कोई 17 हजार बटोर कर लौटा ... मैंने इस इमोशनल ड्रामे से खुद को अलग किया और उठ कर अपनी कार तलक पहुँचा ...तभी न चाहते हुए.. फिर मैं  इस ड्रामे का हिस्सा बन गया ....क्यूँकि अब जो घट रहा था वो सब कम से कम मेरे लिये तो कतई सामान्य नही था ...

एक आदमी आया उसने देहाती को 70 हजार देने का आश्वाशन दिया ...देहाती ने चम्पा की ओर देखा ...और चम्पा हक्की-बक्की होकर होंठ सिल बैठी .....उसने देहाती को अपने साथ लिया और मुख्य सड़क पर आया ...एक ऑटो वाले को हाथ दिया ...और ऑटो चल निकला ...एक अनजाने डर ने पता नही क्यूँ मुझे ऑटो का पीछा करने को कहा ...ऑटो तकरीबन 20 मिनट की यात्रा के बाद जाकर रुका एक  कम भीड़-भाड़ वाली गली में ....मैंने भी गाड़ी वहीं पार्क की और उन दोनों का पीछा किया .. सामने एक  डॉक्टर का एक छोटा सा पर्सनल क्लीनिक दिखाई दिया ....

जब देहाती उस व्यक्ति के साथ डॉक्टर के चेकअप रूम के अंदर घुसा तो मैंने भी बाहर से दरवाजे पर कान लगा दिए .....

अंदर जो सुनाई दिया मेरी आत्मा हिल गई ...मैं हड़बड़ाहट में तुरन्त बाहर आया ...और सीधे पुलिस को फोन किया ....पुलिस भी अफिल्मी अंदाज में वक्त से पहले पहुँची ...और किडनी रेकेट चलाने वाले इस पूरे खेल का पर्दाफाश हुआ ....लेकिन मैंने जबरन की लकड़ी ले ली ...क्यूँकि अब सवाल फिर कुछ हजारों का था  जिसकी देहाती को जरूरत थी ....

देहाती लाचार होकर अस्पताल लौट गया ...लेकिन मैं कार में बैठकर ये सोचता रहा कि क्यूँ न उसकी जरूरत मैं पूरी कर दूँ ....लेकिन एक लड़ाई अपने आप से चलती रही कि मैं भी तो जब इस शहर में आया था तो किसने मेरी मदद की ...मेरी मासूम बच्ची भी पैसे की तंगी के चलते इसी तरह बिना इलाज के मर गई ...मैं भी तो गाँव से आया था तो क्यूँ नही किसी गाँव वाले ने मुझपर भरोसा किया मेरा साथ दिया ...खुद से 15 मिनट चली इस लड़ाई में जीत इंसानियत की हुई ...और मैं सीधे  अस्पताल को निकल गया ...

कुछ दूरी पर मुझे वो देहाती बेसुध होकर हल्के कदमों से चलता दिखाई दिया ...मैंने सोचा लिफ्ट देकर उसको रूबाब में कहूँगा .. " कि मैं हूँ ..अब तू चिंता न कर "

लेकिन उसतक पहुँचने से पहले ही वो मौत तलक पहुँच गया ...एक तेज गति से आते ट्रक ने उसे कुचल दिया ....मैं फौरन कार से उतरा और उसके मसले हुए शरीर तलक पहुँचा ...उसने आखरी हिचकी ली और बोला - " दीप्पू "

भीड़ लग गई चारों ओर ...मेरे हृदय परिवर्तन में हुई देरी ने एक मासूम की जान ले ली ...लेकिन दूसरा अपनी जान नही देगा ...मैंने आनन -फानन में कार को अस्पताल ले जाकर रोका ...शाम ढल चुकी थी और उस बेवा ..उजाड़ देहातन की सूनी गोद में एक जिंदगी और हमेशा के लिए विराम पा चुकी थी .....वो बेवा देहातन जिसमें मुझे कोई सेक्स अपील नही दिखी थी दरअसल ..वो इसलिये नजर नही आई क्यूँकि वो एक " माँ " थी ...शैतान भी माँ से 25 कदम पीछे रहता है ...लेकिन मेरे अंदर का शैतान जिन्दा था या मर गया ..इसे कभी और दिन तोलूँगा ...लेकिन सामने खड़ी अस्पताल की वो बिल्डिंग ..जो जीवन रक्षक मानी जाती है ...जहाँ हर डॉक्टर भगवान का रूप होता है ...वहाँ  शैतान की सल्तनत चलती है ...इसका मुझे पूरा यकीन हो गया ,,,भारत में आये दिन ऐसे ही अस्पताल न जाने कितनी जिंदगियाँ लील जाते हैं ... वो बेवा देहातन अब भी खामोश है ...शायद उसे किसी के लौटने का इन्तेजार है ताकि वो उसकी छाती से लगकर उमड़ पड़े ........

नवाज़िश

Junaid Royal Pathan

Tuesday, 29 January 2019

आखरी_छलाँग

#आखरी_छलाँग
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" जी हाँ ..सबसे पहले ..सबसे तेज ये खबर हम आप तलक पहुँचा रहें हैं ....हमारे साथ मौजूद हैं ..अंजुमन मस्जिद के पेश ईमाम ...हाँ तो मौलवी साहब क्या देखा आपने ..?"

" एहें..एहें ...अमां मियाँ जिरा इस बाली ईमारत में लगाइयो तो कैमरा ...हाँ तो मोहतरमा .. तकरीबन रात 1 बजे ..जब हम हाजमें की शिकायत से जूझ रहे थे ..तो छत पर टहलने ऊपर आये ...देखतें क्या है ...जे मोटा इंसान ..चेहरा बन्दर जैसा ..वो उल्ली वाली ईमारत से कूदा और जे बाली पर पहुँचा .. हमको देखा और बोला....."

" आप ये इतने विश्वास से कैसे ..."

" अमां पूरा न बोलने दे रई हो ...हमें देखा मुस्कुराया और बोला " जय श्री राम ".."

इस बात को बोलने के  बाद मौलवी फिर एक आम मौलवी नही रहे ... उनके इस एक जुमले ने पूरे बजरंगपुर का माहौल ही बदल दिया ...मैं नीरजा वर्मा ..कुछ 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में संघर्ष कर रहीं हूँ ..मेरा भी एक अरमान है कि मैं अपना एक प्राइम टाइम चलाऊँ ...लेकिन फील्ड से वहाँ तक मेरा पहुँचना जैसे नामुमकिन सा लगने लगा था ,,, लेकिन आज के बाद मौलवी की तरह मैं भी आम पत्रकार नही रही ...भारत आस्थाओं का देश है ..यहाँ आस्था पर शीष झुकते हैं और उसके बनाम शीष उतारने हेतु ईनाम भी रखे जाते हैं ...मैं तब दिल्ली में पढ़ती थी तब ऐसी ही कहानियों से दिल्ली का जीना मुहाल हो गया था ...ये घटना दिल्ली जैसी तो है लेकिन राम का नाम शामिल होते ही ये घटना ..मात्र घटना नही एक सुनामी बन गई थी ...क्यूँकि अभी तक भारत में आस्था , आस्था से टकराती रही और उसे कमजोर करने का प्रयास करती रही ...लेकिन आज एक परस्पर विपरीत आस्था ही दूसरी आस्था को मजबूत कर रही थी ....खैर मेरी नजर में ये सिर्फ एक अंधविश्वास था ,,लेकिन अगर अपनी नजर को सार्वजनिक कर दूँ तो आस्था और मेरा टकराव मुझे और मेरे करियर को समाप्त करने हेतु काफी था ...मैं अपने मन की बात कहूँ तो मैं अब खुद चाहने लगी थी कि इस पूरे मजमे को हवा लगे ..और मैं इसपर धुंआधार रिपोर्टिंग करके ...अपनी मंजिल को पा सकूँ ।

पूरा बजरंगपुर अब सिर्फ एक ही रंग में था ..हर तरफ राम के नारे ..बजरंगबली की जय ...मौलाना हर टी.वी चैनल के मुख्य आकर्षण बने थे ...नक्सलियों के द्वारा शहीद हुए सैनिक ..काश्मीर घाटी में चरमपंथी हमला ..सब गौड़ हो चुका था ...जहाँ मौलाना एक सम्प्रदाय की नजर में नायक बन चुके थे ...वहीं दूसरी ओर एक समाज उन्हें इसका ..उसका ..मौलाना बोल के पल्ला झाड़ रहा था ..देश का नास्तिक वर्ग इसे घोर अंधविश्वास बोल रहा था ...तो देश का सबसे बड़ा शोषित वर्ग अर्थात गरीब ..इसे राम के आगमन की पुनः सूचना मान रहा था ...जिसे विश्वास होने लगा था कि राम हम आहत वर्ग के उद्धार हेतु पुनः जन्म लेने वाले हैं.. राम एवं  हनुमान के प्रत्येक मन्दिर पूरे राष्ट्र में भक्तों से गुलजार थे ...लेकिन बजरंगपुर इन सबसे अलग होकर स्वयं को देश का प्रतिनिधि मान रहा था ...आनन -फानन में नेताओं ने बजरंगपुर को जिला घोषित किया ..सड़के -स्वास्थ्य जगमगाने लगे ...हर समाज बजरंगपुर कूच करने लगा ...जगह -जगह कीर्तन ..सत्संग ...धार्मिक रैलियां ... इस घटना के मद्देनजर सब आस्तिक था और न्यायिक भी ...परन्तु इस घटना से सम्बंधित घटनाओं की अब बाड़ सी आने लगी .. लूटपाट हेतु असामाजिक तत्व स्वयं को  'मंकी मैन' बनाने लगे ...हर जगह से एक ही शोर था कि उसने ' मंकी मैन ' को देखा है ....

आस्था के नाम पर होते इस बवाल से त्रस्त होकर संत समाज आगे आया और उसने घोषणा की, कि ये इस्लाम वालों की चाल है सनातन धर्म को बदनाम करने हेतु ....कृपया इस झाँसे में न आये ।

लेकिन जब आस्था सर पर सवार हो तो उससे डिगना नामुमकिन होता है ...इसी क्रम में एक समाज ने इस घटना क्रम को अपनी हार के रूप में स्वीकारा और आगे आकर घोषणा की ,,कि वो ' मंकी मैन ' हरगिज हनुमान नही थे ..बल्कि मौलाना की नजर कमजोर है ...वो तो साक्षात पीर थे ...जिनका गुजर यहाँ से हुआ ....आस्था बनाम आस्था की इस लड़ाई में हर वर्ग कूदने लगा और खुद को ' मंकी मैन ' से जोड़ने लगा ....अगले दिन जब मौलाना प्रेस के सवालों का जवाब देने प्रकट हुए तभी -

" देखो मौलाना ...या तो बोल दो ये सब झूठ था ...वरना साबित कर कि जो तुम बोल रहे है वो सब सच है ...."

" कैसी बात कर रिये हो महावीर भाई ...अमां ईमान से जो के रिया हूँ सोलह आने सच है ....."

" मौलाना तुम मुझे नही जानता ...बजरंगबली का कट्टर भक्त हूँ ...अगर मेरे प्रभु के सम्मान में कोई झूठ दिखाई दिया ...तो याद रखना सार्वजनिक बोल रहा हूँ ....तुम्हारा लंका दहन मैं करूँगा ! "

बात आस्था से अब साम्प्रदायिक होने लगी ...दो समाज अब सीधे आमने -सामने आने लगे ...शासन -प्रशासन के हाथ फूलने लगे ...हर जगह पुलिस गश्त ...और पहरा .....

अगली सुबह जब मैं उठी तो एक दो जगह से छिटपुट हिंसा की भी खबरें आने लगी ....दिन आगे बढ़ा तो मिल्ट्री भी जमा होने लगी .....

मुझे किसी अशुभ घटना के घटने का भय सताने लगा ...और अब मेरा धैर्य भी जवाब देने लगा ...मैंने मन में कहा भाड़ में जाये करियर ...मौलाना को कोई हक नही कि वो एक खूनी खेल का केंद्र बने ...मैंने इरादा कर लिया कि अब मैं मौलाना के इस मनगढ़न्त खेल को बेनकाब कर दूँगी ताकि समाज में कटुता कम हो ...और दोषी सिर्फ मौलाना माना जाये ......

रात के ग्यारह बजे थे ...मैं  सेंडिल अपने हाथ में लेकर चुपचाप होटल की सीढ़ियों से नीचे उतरी ....गश्त के जवान जब आगे बढे तो मैं सीधे एक अँधेरी गली में चलने लगी ...ये गली से दो मोड़ आगे मौलाना का घर था ....तभी

" देख महावीर अब भी सोच ले ..अगर मौलाना की बात सच हुई तो ..?"

" सच होती तो बजरंगबली मुझे या तुझे दर्शन देते ...उस विधर्मी को नही ...ये सब उसने हमारे धर्म को बदनाम करने हेतु रचा है ...मौलाना के लिए आज की रात उसकी आखरी रात होगी .....ला पेट्रोल दे !"

मैं सन्न रह गई ...वास्तव मैं मौलाना ने एक धर्म की आस्था को चोट पहुँचाई है और लोगों की जान और माल को खतरे में डाला है .और वो वास्तव में सजा पाने का अधिकारी है ...लेकिन जब देश में एक कानून व्यवस्था है तो फिर किसी को हक नही किसी की जान लेने का ...मैं दूसरी गली से मौलाना को ये खबर देने बढ़ी ...मौलाना के घर के आगे दो जवान गस्त कर रहे थे ...मैंने सोचा कि जाकर इनको सब सच बता दूँ ...लेकिन जैसे ही मैं आगे बढ़ी तभी दूसरी ओर से गोली चलने की आवाज आई ....और वो जवान दूसरी तरफ दौड़ गए ...मैं समझ गई ये सब महावीर का प्लान है ...मैं भाग के मौलाना के घर के करीब पहुँची ...दरवाजा खटखटाती कि तभी अंदर से किसी बच्चे की खाँसी की आवाज सुनाई दी ...और मैं उनके मकान के पीछे वाली खिड़की पर कान लगाकर खड़ी हो गई ..

" सब्र कर मेरे बच्चे परसों अल्लाह ने चाहा तो तुझे इस बीमारी से हमेशा के लिए निजात मिल जायेगी ..."

" इसे तो इसकी बीमारी से निजात मिल जायेगी ..इमाम साहब ...लेकिन जो बीमारी आपने मआशरे (समाज) को दी है उसका क्या ...?"

" खुदा के लिए खामोश हो जाओ ..आलिया ...जवान बाहर हैं किसी ने सुन लिया तो जान न बचेगी फिर .."

" अपनी जान की इतनी फ़िक्र है आपको ...और जो मासूम आज आपके चलते दंगों में मारे गए उनका क्या ...?"

" देखो आलिया ...मैंने कुछ गलत नही किया ..बल्कि ये सब कुछ मैंने अपने बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए किया ...देखो आज हमारे पास इतना पैसा है कि हम इसको फिर जिंदगी दे सकते है ...और कहीं दूर जाकर फिर एक नई जिंदगी शुरू कर सकते है .."

" नही चाहिये ऐसी जिंदगी मेरी औलाद को और मुझे ...खुदा का ख़ौफ़ तो खाते ..और सोचो कितने लोग तुम्हारे यानि एक झूठे इमाम के पीछे नमाज पढ़ते हैं उनका क्या ...बोलो क्यूँ किया ये सब कुछ बोलो ..?"

" आलिया तुम ठीक कहती हो लेकिन मैं क्या करता बोलो ...?कहाँ से लाता इतना पैसा बोलो .? इकलौती औलाद को कैंसर से मरने देता ...जो झूठ किसी की जिंदगी बचाये वो झूठ नही होता ...लेकिन अब एहसास हुआ कि एक जिंदगी बचाने के लिए हजार जिंदगियाँ दाँव पर लग गई है ...उस दिन मैं खुदखुशी करने जा रहा था ..जिस दिन वो मनहूस अख़बार का फटा टुकड़ा हवा संग मेरे चेहरे से आ लगा ..जिसमें लिखा था कि पूरी दिल्ली  एक ' मंकी मैन ' के चलते रुक सी गई है ...मैंने उसी वक्त प्लान बनाया कि मैं अगर फिर कुछ ऐसा करूँ तो सुर्ख़ियों में आ जाऊँगा ...एक मुसलमान और वो मस्जिद का ईमाम जब ये बोलेगा तो ये बात हर जगह फ़ैल जायेगी और टी.वी न्यूज़ , इंटरव्यू वाले मुझे घेर लेंगे ...मैं उनसे इसके बदले मोटी रकम माँगूँगा और अपनी औलाद का ईलाज करवा लूँगा ....."

तभी मुख्य दरवाजा भड़ाक से खुलने की आवाज सुनाई दी और -

" घबराओ मत मौलाना मैंने सब कुछ सुन लिया है ...आया था तुम्हारे घर को फूँकने लेकिन अब नही ...मौलाना मैं समझ गया कि तुम्हारा इरादा सिर्फ बेटे का ईलाज था ...किसी धर्म को बदनाम करना नही लेकिन अब जो ये हंगामा बरपा हो गया है बोलो कैसे रोकोगे इसे ...?.लोग एक -दूसरे के खून के प्यासे हो रहे हैं ..."

मौलाना खामोश होकर नजर नीची करके सुबकने लगे .....

" सुनो मौलाना ! अब तुमसे कुछ नही होगा ..इस आग को रोकने का बस एक ही तरीका है ...कि तुम लोगों के सामने आकर ये कहो कि बजरंगबली पुनः तुम्हे दिखने का वायदा कर गयें हैं ...और फिर वो उसी इमारत से छलांग लगायेंगे और अदृश्य हो जायेंगे और फिर कभी दिखाई नही देंगे ...अतः इसके बाद जो भी बजरंगबली को देखने का दावा करेगा वो झूठ बोलेगा और जो भी अपराध घटित होगा वो इंसानों के द्वारा किया जायेगा ......"

" मौलाना फ़टी आँखों से महावीर को देखने लगे और ममियाते हुये बोले ...लेकिन महावीर भाई ...हर तरफ कर्फ्यू सा माहौल है ...मैं कैसे लोगों तक अपनी बात पहुँचाऊँ ...?और आप जानते हो कि ये सब झूठ था तो कोई इंसान इतनी लम्बी छलांग कैसे लगा सकता है ...कैसे होगा ये सब कुछ ...?"

" होगा मौलाना ....विश्वास रखो ....लेकिन तुम अपनी बात कैसे लोगों तक पहुँचाओगे बस ये सोच रहा हूँ .....

तभी मैंने अपना कैमरा सम्हाला और अंदर प्रवेश किया -

" मैं पहुँचाऊँगी  लोगों तक !"

और मैंने एक साँस में सब सच बता दिया लेकिन ये प्रश्न घनघोर सता रहा था कि जब सब कुछ झूठ है तो हनुमान दिखेंगे कैसे ...और इतनी असम्भव छलाँग कौन लगाएगा ...?

खैर मैंने मौलवी की बात को लोगों तक पहुँचा दिया और कह दिया कि इमारत के 200 मीटर तक कोई इंसान न हो वरना ये घटना नही घटेगी..... और उसी वक्त मुझे चीफ ने खबर दी कि आज से तुम प्राइम टाइम चलाओगी
..मेरी ख़ुशी मेरे मन में नही उतर रही थी क्यूँकि कल यानि मौलाना के द्वारा घोषित दिन और समय क्या होगा ....इसकी अनिश्चितता को लेकर मैं काँप रही थी ।

कर्फ्यू बना रहा लेकिन पत्रकारों को छूट दी गई कि वो इस घटनाक्रम का लाइव टेलीकास्ट करें ....

पुलिस और सेना के घेरे के बीच खड़ी वो दो इमारतें भारत में ही नही बल्कि विश्व् में कौतुहल का केंद्र बनी थी ....तभी एक ' मंकी मैन ' ने छलाँग लगाई और मेरी और मौलाना की आँखे फ़टी की फ़टी रह गई .....लेकिन ये छलाँग पूरी न हो सकी और ' मंकी मैन ' नीचे आ गिरा ....पहले सब भौंचक्के रहे फिर घटना स्थल पर तेजी से दौड़कर पहुँचे .... लेकिन नीचे जमीन में कुछ नही था ......तभी एक पुलिस वाला बोला कि शायद प्रभु बीच में ही अदृश्य हो गए ...

सबने सहर्ष इसे स्वीकार लिया लेकिन मेरे और मौलवी के मन ने नही ...तभी किसी ने मेरे कान में कुछ कहा और मैं स्तब्ध रह गई ....भीड़ -भाड़ के चलते मैंने मौलवी को बात बताई ....और हम दोनों एक गली से आगे बढ़े ....

सामने एक प्लास्टिक की सीट पर महावीर का लहूलुहान शरीर पड़ा था ...पूरी सीट खून से लथपथ थी ....अब समझ में आया कि महावीर ही मंकी मैन बनकर कूदा और नीचे प्लास्टिक की सीट की वजह से उसका खून जमीन पर नही फैला ....

महावीर के साथ उसके दोस्त खड़े थे ....लेकिन मौलाना जमीन पर बैठ गए और महावीर के सर को अपनी गोद में रखकर खूब रोये ....महावीर के प्राण निकल चुके थे ... मौलाना ने उसे सच्चा हनुमान भक्त और आला शहीद कहा ...

लोग इस घटना के बाद अपने घरों से बाहर निकले ...सभी मजहब के लोग एक दूसरे को मुबारकबाद देने लगे ...नफरत पर फिर मुहब्बत छाने लगी...एकदम से समस्त   घटनाओं पर लगाम लग गई ....आज तीन साल बाद सब इस घटना को भूल चुके हैं ....लेकिन मुझे और मौलवी को मनुष्यों में अमन हेतु  शहीद महावीर और उसकी 'आखरी छलांग' हमेशा याद रहेगी .....

नवाज़िश

Junaid Royal Pathan