Thursday, 21 March 2019

Kahaani

#हटा_सावन_की_घटा
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" अबे करना क्या है बोल तो सही ..?"

" सवाल बहुत पूछता है तू ..अच्छा सुन ! शिल्पा को उड़ाना  है कल रात "

" कय्य्य्या ... अबे हलवा है क्या ...उड़ाना है ..घण्टा भी साथ नही दूँगा समझा ! "

एक सपना था मेरा कि मैं कम से परगना अधिकारी तो बनूँ लेकिन बाँझ किस्मत ने ऐसा रिवर्स लगाया कि आज एक परगने की पॉश कॉलोनी में वॉचमैन की झंडू भूमिका अदा कर रहा हूँ .दो दिन पहले ही यहाँ ज्वाइन किया है...लेकिन जब  ये उड़ाने का शातिर प्लान मेरे कानों में गिरा तो मैं पीछे गया जहाँ से आवाज आई ....

और वहाँ मुझे दो झूलते मरियल खड़ूस बूढ़े बात करते दिखाई दिए ...

दोनों ने मेरी तरफ देखा और खामोश हो गए ..मैं भी ऐसा खण्डा चावल बन तन गया जैसे मैंने कुछ सुना ही नही ....खैर वो मुझे देख आगे बढ़ गए लेकिन मैं समझ गया कि कल रात ये हलकट चूसे आम  अपनी की कॉलोनी के किसी  रसीले सन्तरे को उड़ाने  वाले हैं ...

" चुम्मा सिंह देवरिया   वाले " नाम है मेरा ..  उम्र 35 ..मैंने सोचा अगर इन ढहती इमारतों के राज का पर्दा फाश कर दूँ तो कॉलोनी में नाम भी होगा और पगार भी बढेगी ....

लेकिन अब मेरा पहला काम था ...ये पता लगाना कि कॉलोनी में  " शिल्पा "
कौन है ....

मैंने अपने हेड वॉचमैन चचा को फून लगाया..

" भांग-भसड़ जे बताओ चचा कि हमारी कॉलोनी में ये शिल्पा कौन है ..? "

"क्यूँ बे कच्चे लंगोट ..फिर औरतबाजी में उतर आया ..खबरदार हो जा ...ये दिल्ली पुलिस है ..तबले भी ऐसे सेंकती है जैसे तेरी अम्मा चूल्ले में रोटी "

" अब्बे लो ..कर लो बात ..चचा ..तुम न सूअर की नाक के पिस्सू ही बने रहियो ..गन्दा ही सोचोगे ..काट रहें है ..."

वक्त कम था और अभी तक पता नही था कि कॉलोनी में शिल्पा कितनी है ...हमनें दिमाग लगाया और हर फ़्लैट को नॉक कर पूछा

" जी ..शिल्पा जी होंगी ..वो कोई उन्हें बाहर मिलने आया है ..."

किसी फ़्लैट से फटकार मिली ..तो किसी से अल्टीमेटम.. एक अधेड़ ने तो होंठ काटकर कहा अंदर आ जा वॉचमैन .आज वो मायके गई है..ऐश करेंगे .. ...तुरन्त बित्ती गेरी ..और अब रहा आखरी फ़्लैट ..मैं समझ गया था कि झूलते महल शायद किसी और कॉलोनी का पंखा उतारने का प्लान बना रहे हैं ...खैर नॉक किया ...

" जी...."

" वो माँ जी प्रणाम... वो शिल्पा जी होंगी कोई उनसे बाहर मिलने आया है ..."

" है तो सही लेकिन उसे यहाँ कोई नही जानता ...आप जाइए "

" जी मतलब ..वो ..मतलब ..क्या उम्र होगी उनकी ..?"

" दादी कौन आया है ...?"

पोती देख झट समझ गया माल ये है और माल क्या टिच और रैप्चिक है ...इसे हड़पने के लिए तो कोई भी रेत पर पानी की मीनार बना दे ...

खैर जैसे ही पलटा ..एक औरत की आवाज कान पर गिरी ...

" ओ ..बुढ़िया कहा है न कि पहले सेफ्टी डोर चैन लगा लिया कर फिर दरवाजा खोला कर ...गँवार कहीं की "

सेंटीमेंटल होने का टेम नही था ..ये तो अपने देश में हर बुजुर्ग का  पहला जमीनी नर्क है ...खैर जैसे ही आगे बढ़ा तभी एक जेंटलमैन से टकराया...

" व्हाट द हेल ..कौन हो तुम ?"

" वो साहब वॉचमैन.. वो...आई एम् चुम्म्....."

" इट्स ओके ..बट मेरे फ़्लैट के आगे क्या कर रहे हो ? "

" वो..वो..अच्छा ये आपका फ़्लैट है ..वो न शिल्पा जी से कोई मिलने आया था ..नीचे .."

" बकवाश कर रहे हो ...हमें अभी -अभी यहाँ आये हफ्ता भर भी नही हुआ ...आइन्दा इस फ़्लैट के नजदीक भी मत फटकना समझे "

जरूर ये कातर छबीली का बाप होगा ..मन ही मन कहा

" भूतनी के एक तो तेरा भला करने की सोच रहा हूँ और ऊपर से तू ...बेटा अगर ढील दे दूँ तो समझ लौंडिया बलत्कारी बूढ़े हजम कर लेंगे "

अगली शाम आई और मैं पहले से ज्यादा मुश्तैद हो गया ...इस बार मैंने कमर पर एक चाक़ू भी छिपा लिया ...सारे सी .सी. टी.वी कैमरे भी चेक किये ..सब काम पर थे ...तभी मैंने देखा वो दो बुजुर्ग चले आ रहें है ...मेरा दिल धड़कने लगा ...वो जैसे ही गेट के सामने आये ...मैंने डण्डा मजबूती से थाम लिया

" दरवाजा खोलिए ...हमें शान्तानु जी से मिलना है "

मैं उन्हें रंगे हाथ पकड़ना चाहता था इसलिए गेट खोल दिया ...

वो दोनों अंदर आये और मैंने दबे पैर उनका पीछा किया ....वो बार -बार रुकते और मुझे देखते ...मैं ऊपर देख या तो सिट्टी गेरने लगता या फिर वापस पीछे मुड़ जाता ..

वो सीधे शिल्पा के फ़्लैट के आगे जा पहुँचे और मैं कमरकस तैयार  हो गया ...उन्होंने जेब से कुछ निकाला और मैंने लाठी को हरकत हेतु तैयार कर लिया ....लेकिन फिर वो आगे बढ़ गए ....

और एक फ़्लैट को खोल कर उसके अंदर दाखिल हो गए ...जबकि मैं तो अब तलक नॉक करता हूँ ... ...मैं वहीं हथौड़ा सिंह बनकर बैठा रहा .....

कुछ एक घण्टे बाद वो बाहर निकले ...और मुझे देख स्माइल देकर आगे बढ़ गए ....

मैं पैदा हुआ जरूर 1 अप्रैल को था लेकिन आज विश्वास हो गया कि इसे मूर्ख दिवस क्यूँ कहते हैं... खैर वो आगे बढ़ते रहे तो मैंने उनको रोककर  उनसे पूछा -

" वो कल जो आप कह रहे थे ...मतलब मैंने सुनाना कि आप " शिल्पा " को उड़ाने ...."

बात पूरी भी नही हुई ...और उसमें से एक बुजुर्ग बोला ...अरे भाई मैं एक फ़िल्म डाइरेक्टर हूँ ऐसे ही खाना खाकर टहलते -टहलते अपनी फ़िल्म के डायलॉग अपने मित्र को बता रहा था..इतने में आप आ गए ..और हम चले गए ..."

झंड हो गई मेरी ...और मैंने उनसे माफ़ी माँगी ...और पूछा ...

" यहाँ किससे मिलने आये हैं ..."

" वो जी शांतनु जी मेरी फ़िल्म के राइटर हैं बस उन्हीं से मिलने आये हैं ...जानते तो होंगे आप उन्हें "

मैंने ठसक में सर हिला दिया ...फिर तो बातों का सिलसिला शुरू हो गया मेरे ही कैबिन में ...और फिर महँगी शराब भी आ गई ...

जब वो विदा हुए तो मैं टल्ली तो था मगर फिर भी पूरे होश में....अगली सुबह कॉलोनी में हल्ला हुआ तभी आइटम के बाप ने मुझे जगाकर मेरा गला पकड़ लिया ...

"क्यूँ बे बेवड़े ड्यूटी में सोता है ..कल रात हम एक पार्टी में गए थे मेरी माँ फ़्लैट में नही है बोल कहाँ गई वो ..?"

पुलिस आने में देर थी ...तभी मैं अपने केबिन में घुसा और सब समझ गया... और ये भी कि शिल्पा आखिर थी कौन ...सब समझ में आ गया कि मुझे पिलाकर बातों ही बातों में वो शिल्पा को ले उड़े .....

सी.सी.टी.वी में उनकी फुटेज थी मैंने देखा और आवाज लगाकर शिल्पा के बेटे को  जैसे ही आवाज लगाने को मुँह खोला  ...मेरी नजर एक खत पर गई ।

" वॉचमैन ...जिस शिल्पा को ले जा रहा हूँ ...वो अब शिल्पा नही बल्कि एक दासी है ...वो दासी जिससे मैंने हमेशा  प्यार किया ... इस भागती जिंदगी में इस मासूम को कुछ भी नही मिला ...जबरदस्ती करके मिला एक पति और उससे मिला एक नालायक बेटा जिसने इस अभागी को हमेशा दुःख दिए और शादी होने के बाद इसकी बीवी ने इस देवी की नौकरानी बना दिया ...पति नही है अब इसका ..लेकिन इसके लिए तो वो कभी था भी नही ..ये उसकी दूसरी बीवी थी .. ..इसको ले जा रहा हूँ वॉचमैन ताकि इसकी बची जिंदगी को कुछ हद तक स्वर्ग बना सकूँ ...बड़ी मुश्किल से राजी हुई है .....अब तक कुंवारा हूँ ...लेकिन शादी अब करूँगा .मैं जानता हूँ इसके बाद तुम्हारी जॉब चली जायेगी ...लेकिन मेरी जिंदगी मुझे मिल गई है ...थैंक्स चुम्मा सिंह ..बाकि हो सके तो इस सब के लिए मुझे माफ़ कर देना  ..."

भैंस की पूँछ लंका लग गई दिमाग की ...आँख से आँसू और दिल से एक हूक उठने लगी ...उसी दिन समझ गया था कि शिल्पा यानी उस बूढ़ी की अपनों के बीच क्या औकात है ...पुलिस आने में 10 मिनट थे और मैं इतनी नौकरी करने के बाद और टेक्निशनों की आवाजाही से ये जान चुका था कि 5 मिनट मइ सी.सी.टी.वी कैमरा फुटेज कैसे उड़ाई जाती है और वो भी इस तरह कि फिर कोई भी तीस मार खाँ उसे वापस न लौटा सके ....खत का स्वाद कड़वा था लेकिन फिर भी निगल गया ..... "

बाकि पुलिस आई ..लापरवाही ने जहाँ नौकरी से निकाला ...वहीँ साक्ष्य मिटाने के चलते सजा भी हुई लेकिन फिर जमानत की खबर जब मुझे सन्तरी ने दी तो मैं हैरान हुआ ...

बाहर आकर देखा तो पाया उन दोनों बुजुर्गों में से एक बुजुर्ग मेरे सामने खड़ा था ....बाहर निकलते ही जब मैंने कुछ पूछना चाहा तो वो खटाक से बोले ...

" मैं शांतानु अवस्थी हूँ वहीं शिल्पा के सामने वाले फ़्लैट में रहता हूँ ...लेकिन फरार था जब तसल्ली हुई कि तूने कुछ न उगला तो वापस लौट आया .. वो मेरा मित्र जनार्दन था ...बाकि खत ने सब कुछ तुम्हे समझा ही दिया होगा ... मुझे यकीन नही था कि तुम इस तरह अड़े रहोगे लेकिन जनार्दन बोलता था कि उसका प्यार पत्थर को भी पानी बना सकता है ..."

" कहाँ हैं वो दोनों ...?"

" क्या तू ही राज पचाना जानता है .. फिर भी चल हटा सावन की घटा ...आइसक्रीम खाते हैं "

लेकिन ऐसा लगा कि कोई तो कहीं से मुझे देख रहा है ...वो या तो ऊपर वाला है या फिर वो जो अपनी शिल्पा संग अभी -अभी मुझे नमन कर बस से गुजर गया ...

नवाज़िश

Junaid Royal Pathan

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