#अश्लील_लौंडा
*************
" भूतनी के और कोई नाम न मिला तुझे ..ये क्या है झूलते अंग ...?"
" देखो मास्साहब .. आपने ही कहा था उपर्युक्त गद्यांश का कोई उपर्युक्त शीर्षक लिखो ...अच्छा नही लगा तो काट दो ..."
मैं मोतीलाल शांतिलाल गैंदामल हूँ ...बच्चे पीठ पीछे मुझे शार्ट में गैंडा कहकर लोफरी लूटते हैं ... लेकिन मुझे इस नाम की अब आदत सी हो चली है ..लेकिन ये जो नया लौंडा यानि जगजीवन नाथ उर्फ़ जग्गू जब से विद्यालय में आया तब से मेरी नाक के अंदर के बाल भूरे -भारे हो गयें हैं.. मुझे इसकी आदत पूरी उम्र साथ बैठा दो तब भी नही होगी ...क्यूँकि ठरकी तो मैं भी अवश्य रहा परन्तु सार्वजनिक तो कतई नही ....
ये भूतनी का हमेशा अश्लीलता को समर्पित रहता है ...उम्र 18 की कक्षा अब भी 9 की ...ये अभिशाप है पहले अपने परिवार के लिए फिर उस समाज के लिए जहाँ कल ये भूतनी का रोजगार के लिए हाथ आगे बढ़ायेगा ...
भूतनी का मेरा तकिया कलाम नही बल्कि मेरी दीनता का चरम है ...पत्नी पीढ़ित होने के कारण ..और पत्नी के दबंग नेचर के कारण कभी उसके सामने क्रोध व्यक्त नही कर पाता अतः अक्सर उसे किसी न किसी बहाने कोसता रहता हूँ ...भूतनी कहकर ....
खैर अगले दिन प्रार्थना सभा में जब जग्गू की समाचार बोलने की बारी आई तो -
" आज के ताजा समाचार इस प्रकार हैं ... दो युवतियों का झुगमपुर में सामूहिक बलत्कार ..डण्डाहोज में सार्वजनिक मौज -बहार करते प्रेमी युगल गिरफ्तार ... ब्रा जी.एस.टी की जद से बाहर ...कंडोम हुआ....."
तुरन्त पप्रिंसिपल साहब ने उसके हाथ का परचा खींचा और उसे दुत्कार कर अपनी पंक्ति में जानें को कहा ...लेकिन तब तक देर हो चुकी थी ...पूरा स्कूल मस्तराम के मजे लूट हँस के लोटपोट हो रहा था ...
अध्यापक और अध्यापिकाएं एक दूसरे से नजरें बचा रहे थे ...खैर उसके माता -पिता को तत्काल प्रभाव से बुलाया गया ...लेकिन ज्ञात हुआ ..मतदान की उम्र वाले इस लौंडे का सगा कहने को सिर्फ मामा ज़िंदा है जो शहर में कहीं रोजगार हेतु बाहर है और जग्गू रहता है अपनी मामी के संग ....
मामी को बुलाया गया तो उसमे प्रिंसिपल के हाथ जोड़ कर निवेदन किया कि अगली दफा ऐसा नही करेगा ...खैर बात आयाराम-गयाराम हो गई ...
लेकिन अब प्रत्येक शिक्षक सतर्कता बरतता था कि न उससे प्रश्न किये जायें न ही उसे कोई मौके दिए जायें ...
उस दिन बड़ी मुश्किल से मैंने अपने क्रोध को फैलने नही दिया जब उसने मेरा और साथी अध्यापिका का एक नग्न अश्लील चित्र बनाया ....
पानी सर के ऊपर से गुजर चुका था और उसकी टी.सी विद्यालय से कटने ही वाली थी कि तभी विद्यालय में एक परम् सुंदरी युवती ने कदम रखा ....पता चला नई नियुक्ति है अंग्रेजी विषय में ....
जब उसके सामने जग्गू को प्रधानाचार्य ने टी.सी काट के हाथ में दी ...वो युवती यानि अध्यापिका तुरन्त खड़े होकर बोली -
" सर...आप इतने गुस्से में ..मैटर क्या है ...?"
तत्काल एक वरिष्ठ अध्यापिका ने उन्हें किनारे ले जाकर प्रकरण समझा दिया ...लेकिन
" सर प्लीज ..मुझे कुछ समय दें ..मुझे यकीन है कि ये बदल सकता है ..."
प्रिंसिपल अडिग तो रहे परन्तु सुंदरता के आगे तो विश्वामित्र भी सरेंडर कर दिए ...
तारे जमीन पर फ़िल्म देखी थी कि डल को बल देकर अरबी अश्व बनाया जा सकता है लेकिन ये भूतनी का तो पहले से घोड़ा बने हिनहिना रहा है इसका क्या होगा ....?
समय बीतता गया और स्वास्थ्य लाभ हेतु मैंने चिकत्सीय अवकाश ले लिया ....दो महीने बाद जब विद्यालय लौटा तो सन्न रह गया ...
जग्गू सीधा दौड़कर मेरे पास आया और मेरे चरण स्पर्श करने लगा ...मैंने तुंरत पायजामा पकड़ लिया ससुरे की शरारत समझता था लेकिन चमत्कार हुआ ...उसने न मात्र चरण स्पर्श किये अपितु मुझे हाथ जोड़कर नमन भी किया ...
" क्यूँ गैंदामल जी होश उड़ गये न ..."
" हाँ यार ...लेकिन ये चमत्कार सब हुआ कैसे मिश्रा जी ...?"
"ये तो हम भी नही जानते...और सुधा मेम कुछ बताती भी नही ..."
मैं सीधे अंग्रेजी की अध्यापिका के पास गया ..और उनसे इस चमत्कार का जंतर पूछा ...तभी चपड़ासी ने आकर खबर दी कि मैडम जग्गू अपनी कक्षा में प्रथम आया है ...
अब बजाओ घण्टा ..इस खबर ने तो मेरे पैर तले जमीन ही खींच ली ...
" मैडम आयु में आप मेरी पुत्री के बराबर है ...मैं आपको एक बेटी समझ कर आपसे निवेदन करता हूँ कि आप मुझे अवश्य बताये कि ये सब चमत्कार आपने कैसे किया ...?"
" गैंदामल सर जी बैठिये ...जानते हैं मात्र अध्यापक बनकर एक बच्चे के व्यवहार पर अपनी प्रतिक्रिया देना ही शिक्षण नही बल्कि कारण जानकर उसका उपचार करना ही शिक्षण हैं ...पता नही मैं कैसे आपको कहूँ लेकिन जग्गू इतनी छोटी आयु में सेक्सोहोलिक बन गया है ..."
" मतलब ..?"
" मतलब ये कि वो बिना सम्भोग के रह नही सकता था ..."
" हे भगवान ! परररर....."
" सर बच्चे की प्रथम पाठशाला उसका परिवार है .लेकिन मैं कहती हूँ बच्चे की प्रथम पाठशाला उसका शरीर है ...कम आयु में ही जग्गू के शरीर से होती छेड़खानी ..उसके अंगो के साथ खिलवाड़ ..काम अनभिज्ञ आयु में उसमें कामुकता निर्माण ..और फिर उसके साथ सम्भोग कर उसे इसकी लत लगवा देना ..."
" राम ! राम ! ..पर किसने "
" उसकी मामी ने ...जग्गू जब 13 साल का था तभी से उसको इस घिनौने खेल का एक उपकरण बनाया जाने लगा ...और किशोरावस्था में जब शरीर में रचनात्मक परिवर्तन होता है तो जग्गू को इस नये अनुभव को आत्मसात करने के अतिरिक्त और कुछ न सूझा ...और जग्गू प्रत्येक स्थान या प्रकरण में सिर्फ काम तलाशने लगा .."
" नीच औरत ...उसको तो पुलिस में दे देना चाहिये .."
" पता लगते ही वो घर से फरार है ..लेकिन जग्गू या उस जैसे बच्चे फिर चाहे वो लड़के हो या लड़कियाँ तो हमारे समीप है ...क्यूँ नही उनको, उनके व्यवहार पर उनको टी.सी थमाने से पूर्व ये जाना जाये कि आखिर उनके इस प्रकार के असमान्य व्यवहार के पीछे कारण क्या है ....?खैर आज जग्गू पूरी तरह बदल गया है ...और शर्मा जी ने उसे अपने घर में रहने की जगह भी दे दी है ...."
सन्न से दिमाग ने ख़ामोशी तोड़ कर बस एक सवाल किया ...
"बेटी नमन है तुम्हे ..तुम वास्तव में एक आदर्श शिक्षिका हो ...काश इस राष्ट्र का प्रत्येक शिक्षक तुम सा हो जाये तो फिर कोई जग्गू या जानकी सवाल न बने ....लेकिन इतनी अल्प आयु में इतना गहन व्यक्तिव ...?"
" क्यूँकि जग्गू से पहले मैं भी इस अनुभव से गुजर चुकी हूँ ...वो शैतान मेरा सगा चाचा था .....और मैं जानती हूँ कि इसके बाद फिर आप कितना भी प्रयास कर लें भीड़ में अकेले ..और जुबान होने के बाद बेजुबान हो जाते हैं "
एकदम सब खामोश सा हो गया ...तभी तालियों की तड़तड़ाहट ने हमारा ध्यान खींचा ....हमनें पीछे मुड़के देखा तो पूरा स्टाफ आँखों में आँसू लिए उस अध्यापिका को सलामी दे रहा था ....मैं भी उनमें शरीक हो गया ...लेकिन अब रिटायरमेंट के मात्र 6 महीने पूर्व मैंने अपने अंदर एक शिक्षक को जन्म लेते देखा ...जो नवजात तो अवश्य था परन्तु नववाद का समर्थक और प्रचारक बनने को पर फ़ड़फ़ड़ा रहा था ।।।।
नवाज़िश
Junaid Royal Pathan
No comments:
Post a Comment