#सरहद
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" जाने दो अब्बू ..गर आम कश्मीरी बन कर जीया तो कभी न कभी किसी बम किसी दहशतगर्द की गोली का शिकार हो जाऊँगा ..और पत्थर या बन्दूक उठाई तो फौज सीने में लोहा उतार देगी !!
लेकिन बेटा फौज में भर्ती हो भी गया तब क्या ये दहशत गर्द छोड़ देंगे ...?
" तो ठीक है न अब्बू ,, इनके हाथ मरा तो कल पूरे मूलक में तुम छाती तान कर चल सकते हो और जे मारा गया फौज के हाथ तो अब्बू गैरत से घर का तवा भी न घूर पाओगे ....
जाहिद के अब्बू और परिवार का हर कतरा ये सुन कर खामोश हो गया !
जाहिद बख्श उम्र 19 साल , रंग दूध पर तीन चुटकी घुला केसर सा ...घुँघराले काले चिट्टे बाल ..अपने बाप की चार औलादों में अब सबसे बड़ा ..पीछे दो छोटी बहनें ,,, एक हमेशा रोती रहती माँ ...और कांगड़ी में कोयला रखता एक सुस्त और कमजोर बाप.....
फौज में भर्ती इसलिए नही हुआ कि उसे वतन से मुहब्बत है ...फौज में भरती न होता तो घर का हुक्का भी गिरवी पड़ जाता ..आज जब ट्रेनिंग में जाने के लिए ठण्डी सर्द रात के तीन बजे उठकर ..लालटेन को औंधी ..मद्धम जला कर अपना सामान पैक कर रहा था ....तभी उसकी नजर सामने खिड़की से एक लाल रौशनी पर पड़ती है ,,,,,!!!
वो दबे पाँव पत्थर की सीढ़ियां उतर कर जैसे ही उस लाल रौशनी के करीब पहुँचता है ...देखता है ...इंडियन आर्मी की वर्दी पहने एक जवान अपनी ऑटोमेटिक गन के साथ लहूलुहान जमीन पर पड़ा है ....उसकी साँसे अब भी चल रही है..और उसके हाथ में रेडियो वायरलैस में कन्टीन्यू एक लाल बत्ती जल रही है ,,,
माहौल इस कदर गर्म था कि यदि वो उस जवान की मदद के लिए किसी को बुलाता तो ...पत्थरबाजों की मौत के बदले उसकी मौत निश्चित थी ....
घर ले जाता तो पूरे घर पर आफत आ जाती ..आर्मी बेस कैम्प यहाँ से कुछ 7 किलोमीटर दूर था ....और वहां तक जवान को पहुंचाने में जवान की मौत शर्तिया थी .....
सुबह होने में महज कुछ एक ड़ेढ़ घण्टे का वक्त था ,,, और उससे भी बड़ा डर ये कि कोई कुत्ता भौंकने लगा ...या कोई उठ गया ...तो जवान लड़ती सांसों से पहले बरी हो जाएगा ....
जाहिद का कलेजा बड़ी जोर से धड़का जब उसने कुछ हल्की सी हलचल महसूस की ....वो सन्न रह गया ...और आँख मूँद कर खड़ा हो गया ...तभी उसने एक फैसला बड़ी जल्दी में किया ....
उसने जवान को अपने कंधे में डाला ..और एक ढलान होती पहाड़ी पर नीचे उतरने लगा .....उसकी साँसे ठण्ड और बोझ से उखड़ने लगी....उसने जवान को काँधे से उतारा .. ..हल्का जलता चाँद अब जवान के चेहरे पर पड़ने लगा ...लेकिन जाहिद की नजर जवान के सीने में लगी नेम प्लेट से उलझ गई ....
" तेज प्रताप सिंह " ..जाहिद के दिमाग में ये भी सवाल तैयार हो गया कि ये जवान यहाँ तलक कैसे पहुँचा ...और इतना लहूलुहान कैसे है ...?
लेकिन इतना सोचने का भी उसके पास वक्त नही था ....क्यूँकि दो कदमों की आवाज उसको फिर से आती हुई सुनाई दी ।
उसने हिम्मत और साँसे बटोरी ....और जवान को कांधे में डाला तभी एक आवाज उसके कानों में टकराई -
" जाहिद ..ठहरो ...रुको जाहिद ........."
ये आवाज किसी लड़की की थी ...और जाहिद तुरन्त पहचान गया ....वो लड़की पास आई ....
" आबिदा तुम ...तुम यहां क्या कर रही हो ....और इतनी रात ....लौट जाओ ...लौट जाओ आबिदा ...."
" मुझे तुमसे अभी बहस नही करनी ...मुझे बस ये जानना है कि ये कौन है ...और तुम इसे लेकर कहाँ जा रहे हो ..?
" आबिदा ...खुदा के लिये किसी से कुछ न कहना ...वरना ...गजब हो जाएगा ...तुम्हें मेरी मुहब्बत की कसम ...."
" लेकिन जाहिद ये है कौन ...?"
" ये..ये...ये...इंडियन आर्मी का जवान है ...और इस वक्त इसकी जान पर बनी है !"
" वाह जाहिद वाह ! ...फौज की जिस गोली , जिस वर्दी , जिस सोच ने तुम्हारे भाई वाहिद की जान ले ली ...तुम उसी फौज के जवान की जान बचाने के लिए मरे जा रहे हो !"
" वो एक हादसा था आबिदा ...अगर उस वक्त फौज के वो जवान गोली नही चलाते तो भीड़ उन्हें जिन्दा फूँक देती ...भाई पत्थरबाजों में शरीक था ...ये तुम अच्छी तरह से जानती हो !
" जानती तो मैं ये भी भी हूँ कि पूरा गाँव तुम्हे बेशर्म ..बेगैरत ...और जलील बोल रहा है .....
" आबिदा ! " (गुस्से में )
" हाँ जाहिद हाँ ...तुम्हे कोई और पेशा नही मिला जो फौज में जाने के लिए मरे रहे हो ...तुम क्या सोचते हो कि तुम इस गाँव से निकलकर नीचे घाटी पहुँच जाओगे ......अरे रात भर से नजर तुम्हारे दरवाजे पर गढ़ा रखी है ....क्यूँकि दहशत परस्त ये जान चुके है कि आज तुम फौज की ट्रेनिंग में जाने के लिए घाटी से बस पकड़ोगे ....वो रास्ते में ही तुम्हे भून देंगे .....परखच्चे उड़ा देंगे तुम्हारे ....सुना तुमने सुना ...मार डालेंगे तुम्हे .....( और आबिदा फूट-फूट कर रोने लगी )
"सम्हालो अपने आप को आबिदा ....और तुम्हें कैसे पता ...कि वो लोग मुझे आज मारने वाले है ....
" भाईजान ने मुखबिरी कर दी है जाहिद ...."
जाहिद कुछ बोलता इससे पहले ही ....सेना का वो जवान कार्राहने लगा !
" आबिदा इस वक्त इसकी जान पर बनी है ...और इसकी जान बचाना इस वक्त मुझे अपनी जान बचाने से जियादह ज़ुरूरी लगता है ...उठाओ इसे !
" लेकिन जाहिद इसे ले कर कहाँ जा रहे हो ...बताओ तो सही ?"
" सरहद ! "
" क्या ....क्या कहा तुमने ...तुम पागल हो क्या ... वो देखते ही हमें गोली मार देंगे ....!"
" आबिदा लौट जाओ ...मुझे बस इसे सरहद छोड़ना है ...क्यूँकि सरहद ही इस वक्त यहाँ से सबसे जियादह करीब है ....."
" जाहिद खुदा के लिए अपनी जान का जुआ मत खेलो ...तुम्हारे सिवा तुम्हारे परिवार का अब कोई वारिस कोई सहारा नही ...उनका क्या होगा ...सोचो मेरा क्या होगा ....और सोचो इतनी मेहनत का क्या होगा क्यूँकि जब दोनों ओर से कोई भी गोली चलायेगा तो ...क्या वो इस फौजी को नही लगेगी ..?
" आबिदा मैं अभी ज़िंदा हूँ ....और जरुरी नही कि मौत ही मेरा मुकद्दर हो... और रही बात इस जवान की तो अगर इसे ऐसे ही छोड़ दिया तो ये या तो तड़पते -तड़पते खुद मर जायेगा या फिर किसी दहशतगर्द की गोली का शिकार हो जाएगा ...तुम लौट जाओ जल्द ही सुबह होने वाली है ..! "
" नही ...जाहिद नही ...तुम रस्में दो ...कसमें दो ...कुछ भी कर लो ..मैं तुम्हें छोड़ कर नही जाऊँगी ....मैं भी तुम्हारे साथ सरहद चलूंगी .. ..जिन्दा रहने तक की मुहब्बत न समझना मेरी ..मेरी मुहब्बत मेरी मौत के बाद भी तुम्हारे साथ की हामिल है ....."
आँखों में एकसाथ कतरे उतर आये दोनों के ...खूब रोये ...एक दूसरे को गले लगाया ....जाहिद ने फिर जवान को अपने कन्धे में डाला और सरहद की ओर चार कदम तेजी से बढ़ने लगे ....
सरहद की दीवार जो कँटीले तारों से बनी थी अब महज कुछ 100 कदम की दूरी पर थी ...
" बोलो जाहिद क्या करने वाले हो अब ...?"
" आबिदा सर्च लाइट से बचते हुए और गश्ती टोली से छिपके मुझे इस जवान को वो सामने बने आर्मी पेट्रोल बैस में ले जाना होगा .... और सुनो ! तुम मेरे साथ नही चलोगी ..बल्कि तुम मेरा यहां इन्तेजार करोगी ...समझी तुम ....
" लेकिन जाहिद ....?"
तभी उस जवान का वायरलेस सेट गिर पड़ता है ....और जाहिद उस जवान को उठाकर पेट्रोल बेस की जानिब निकल पड़ता है ......
जाहिद कुछ ही दूरी पर पहुंचता है कि आबिदा को वायरलैस सेट पर कुछ सुनाई पड़ता है ....
" ट्र्रर्र ...मुस्तकीम ...टर्रर ...मुस्तकीम बच्चा कैसे हो ...बोलो ...बच्चा वक्त आ गया है कुरबानी का ....सरफराज ने बताया है कि तुम्हे गोली लगी है ...बेटा ...मिशन को अंजाम देना है ...सुन रहे हो बेटा ...अल्लाह तुम्हे जन्नत के दरजात देगा ..... तुम्हारे जिस्म में इंडियन फौज की वर्दी है .. जाओ बेटा जाओ ...और तबाह कर दो ...इंडियन आर्मी का बैस कैम्प ...तुम्हारे सीने में लगा बम अब से महज चार मिनट बाद फट पड़ेगा।।
फी अमनिल्लाह ....अल्लाह हाफिज मेरे बच्चे !
"
खून जम गया आबिदा का ..बेतहाशा दौड़ पड़ी सरहद को ....इतनी बेखबर और इतने पास से दौड़ी तारों के कि गोलीयां किस पार की उसका जिस्म भेद गई पता नही चला .....जाहिद गोलियों की आवाज सुन सन्न रह गया ...और वहीँ बैठ गया ....तभी वो जवान जो अब जमीन पर पड़ा था उसने दम तोड़ दिया ....जाहिद कुछ सोचता इससे पहले ही उसे सीने के बल रेंगती हुई ...आबिदा नजर आई ..जाहिद ने उसे बाहों में थाम लिया ...सिर्फ आधे मिनट का वक्त बाकि था ...आबिदा ने हल्के एक साँस में जाहिद को सब बता दिया ...और उसका हाथ अपने सर पर रखकर उसे भाग जाने को कहा ....लेकिन जाहिद अड़ गया ....वक्त गुजर गया ...लेकिन कोई धमाका नही हुआ ....जाहिद की बाहों में आबिदा ने जैसे ही आधा दम दिया ...उसने क़लमा न पढ़कर ...जाहिद से कहा ---
"आह्ह्ह जाहिद ...फौजी ...ज.अ..अरुर ..बनना !
और आबिदा गुजर गई ....जाहिद वहीँ ..रोता बिलखता रहा ...गोलियों की आवाजें अब भी आ रही थी ....जाहिद के आँसू जब खत्म हुए तो उसकी नजर उस जवान पर पड़ी और फिर उसकी मुट्ठी में ....जिसमें एक लाल तार दबा था ...और वो समझ गया कि धमाका क्यूँ नही हुआ क्यूँकि वो लाल वायर उस उस बम की स्विच वायर थी ..जिसे उस जवान ने मरने से पहले जिस्म से खींच लिया था ..
वो लाल वायर जाहिद से चीख -चीख कर कह रही थी ...कि बेकसूर पुर्जे नुमा नौजवान सरहद के दोनों ओर हैं ...और उनको रिमोट से तो कभी मजहब की गलत व्याख्या कर चलाने वाले खुदगर्ज आका भी ......
जाहिद ने अपनी आबिदा को अपने हाथों में उठाया और उठाई सरहद की मिट्टी भी ....आज जाहिद अपनी वतनपरस्ती और बहादुरी से सेना में एक ऊँचे ओहदे पर काबिज है ...हिंदुस्तान को उसपर फक्र है ...लेकिन आज भी जब सरहद के पास से गुजर होता है तो आबिदा अब भी उसे बाँहें फैलाये नजर आती है ......नवाज़िश
#जुनैद.............
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