Saturday, 3 November 2018

बेटियों के कातिल

बहनचो.......
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" रे...रे...रे...सुनिये जी ! अशुभ हो गया , नारियल पूजा थाल से लुढ़क कर सीढियां होते हुए नीचे जा रहा है ! "

" अनूपा ! अवश्य इसकी आवश्यकता ईश्वर से अधिक किसी अन्य को होगी ..और यही तो इसका सार्थक उपयोग एवं पूजा है कि प्रभु ने जिसकी अमानत बनाकर इसे शरीर प्रदान किया था ये उसी को ओर जा रहा है ....

" लेकिन ..."

" हे अनूपा ! इस क्षण मुझे तुम्हारा लेकिन -वेकिन का जाप किसी अश्लील जुमले सा प्रतीत हो रहा है ,,कृपया कर उस नारियल का मोह त्यागो और जो ये गरीब बैठे है इनको ,इनका हक अपने हाथ से प्रदान करो !

मरहबा ! ये हैं आचार्य आत्माराम दुर्गेशपाल जी ...उच्चारण में इससे भी बड़ा नाम है इनका ...इतना बड़ा कद कि पूरे शहर में इनके रसूख का नही अपितु चरित्र का सिक्का उछलता है ...मैं इनका पर्सनल ड्रॉइवर जुनैद पठान ,,जब इनके चरित्र का पिटक उज्ज्वल बता रहा हूँ तो जाहिर है कि आसमान के चाँद में दाग है लेकिन इनका चरित्र एवं उसका प्रस्फुटन कफ़न की भाँति सफेद है ........

अनूपा तेजनंदा दुर्गेशपाल इनकी भार्या (पत्नी) हैं ...एकमात्र पुत्र जिसकी आयु यही कोई 16 वर्ष है का नाम विनोद है ...ये ईश्वर का आपराधिक रूप नही तो क्या है कि जिसका पिता ऐसा महात्मा उस बालक को ब्लड कैंसर है जिसका इलाज लगातार चल रहा है ...अनूपा ने विनोद के बाद तीन बार और गर्भ धारण किया परन्तु ..ईश्वर फिर यहाँ क्रूर हो गया और उसने उसकी तीनों सन्तानों को पैदा होते ही लील लिया ...इस बार फिर अनूपा गर्भ से है ...और ईश्वर के दर्शन कम और सन्तान मोह के निमित्त आज वो ईश्वर से निर्दय शून्य होने की भीख मांगने आई थी ताकि इस बार उसका गर्भ उसपर गाली न बन पाये ....

मन्दिर की अंतिम सीढ़ी उतरते ही सलीम ने दुर्गेशपाल जी का हाथ चूम लिया और बोला -

" आचार्य जी ! यदि आप न होते तो रहमान बारात न चढाता अपने लौंडे की मेरे घर ....मालिक ...हजूर आपने रकम देकर तीन पीढ़िया खरीद ली मेरी ...मालिक हुक्म करें कि ये मजूर आपके किस जूते को अपने लहू से चमकाए ...?

" तुमने ऐसा कहकर मुझे पाप का भागी बना दिया सलीम मियाँ ..क्या वो मेरी बच्ची नही है ...बोलो ..? "

" सरकार आपके दिल में  बेटियों के लिए दर्द और हमदर्दी का समन्दर किसी से छिपा नही ... साहिबा सरकार मोहतरमा पेट से हैं ..मैं दुआ देता हूँ कि अल्लाह इस दफा आपकी औलाद की हिफाजत करे और उसकी उम्र में बरकत करे ......आमीन "

" सलीम मियां तुमने दिल जीत लिया ये लो हमारे गले की सोने की चैन ...बस दुआ करो कि जैसा हम सोचते है बस वैसा ही हो !

"" आमीन ! सरकार हजूर आमीन ! ..पूरे शहर की बेटियाँ आपमें अपना मुस्तकबिल अपना मसीहा तलाशती है ...कई बेटियों की तालीम आपके सर ..उनकी शादी ..दवा-बीमारी सब आपके दम पर .....आपकी बेटियों से इतनी मुहब्बत बावस्ता है कि देखना अल्लाह इस बार साहिबा बहादुर को बेटी से ही नवाजेगा ....आमीन !

दुर्गेशपाल जी की मुँहमाँगी हसरत को  दुआ देने वाले सलीम की देह जब  अगली  , सुबह एक पेड़ पर फाँसी में झूलती हुई नजर आई तो ...दुर्गेशपाल जी की आँखों से कतरे तब तलक गिरते रहे जब तलक सलीम को सुपुर्द ए खाक न कर दिया गया ,,,

दिन बीते ...और वो वक्त आया जब उनकी धर्मपत्नी के पेट में शिशु ने दुनिया देखने की जिद जाहिर की ,, दुर्गेशपाल उस दिन बहुत ही कठोर मुद्रा में थे स्वाभाविक था उनका सब कुछ इस छिपे पत्ते की जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था .....मालकिन को हस्पताल  ले जाते हुए मैंने आचार्य जी से कहा भी कि -

" साहेब ! छोटा मुंह बड़ी बात लेकिन मुझे ये शिफ़ा हस्पताल और इनका डॉक्टर करीम शेख बहुत मनहूस लगते हैं ,, गुस्ताखी माफ़ हजूर इस बार मालकिन को क्यूँ न सिटी हॉस्पिटल ले चले ..?

" जुनैद ! भगवान की बनाई इस दुनिया में कोई भी चीज मनहूस नही ...तुम बढे चलो !

लेकिन मालकिन के चेहरे पर मैंने अपने लिए ममता का भाव देखा जैसे वो कह रही हो शुक्रिया जुनैद ...मुझे भी यही लगता है ।

खैर बच्चा ऑपरेशन से हुआ ...जैसे ही ऑपेरशन सफल हुआ ...डॉक्टर करीम हमेशा की तरह बाहर निकले तभी उन्होंने नाक में लगा मास्क हटाया  ....और आचार्य जी की तरफ देखा  तभी शायद उनको कुछ याद आया ...और वो वापस फिर ऑपरेशन थियेटर में घुसे  ...

लेकिन उनके अंदर दाखिल होने से पहले ही एक नकाबपोश हाथ में एक रिवाल्वर लेकर  बिजली की तेजी से अंदर घुसा और उतनी ही तेजी से बाहिर निकला ...उसके एक हाथ में अब एक नवजात बच्ची थी ....उसने आव- देखा न ताव और बेतहासा दौड़ने लगा .....उसने लिफ्ट का इस्तेमाल करना भी जरुरी नही समझा और वो तेजी से 8 मंजिला हस्पताल की सीढियाँ उतर कर फ्लोर की और जाने लगा .....

अफरातफरी मच गई चारों तरफ ...हर जानिब हो-हल्ला दौड़ गया ...आचार्य जी की हालात बेहद ख़राब हो गई ...उनके चेहरे से पहली बार लगा कि वो हार स्वीकार की मुद्रा में आ गए हैं लेकिन फिर उन्होंने बाजी को जीतने की अपनी आदत को तत्काल एकत्रित किया और उस अज्ञात नकाबपोश के पीछे दौड़ने लगे ....पुलिस को फोन लगाया गया ...पुलिस स्टेशन निकट था ...उसके गेट से बाहर निकलने से पहले ही पुलिस वैन हस्पताल में मेन डोर से आ लगी ...

उसको चारों तरफ से घेर लिया गया ....अल्टीमेटम दिया गया कि बच्चा हवाले कर दे वरना मार गिराया जायेगा ....फिर भी उस नकाबपोश के हौंसलें कुछ औरर नजर आये ....और वो खुली खिड़की की जानिब दौड़ने लगा तभी उसकी पीठ पर एक गोली लगी ..ये गोली पुलिस की नही बल्कि आचार्य जी के पर्सनल रिवॉल्वर की थी ...वो वहीं घुटनों पर बैठ गया ...उसके हाथ से तत्काल बच्चा छुड़ाया गया ...और आचार्य की गोद में दिया गया ....तभी वो अज्ञात नकाबपोश साँसे जमा कर चिल्लाया --

" सर ये लड़की इस निर्दयी , हैवान , खूनी आचार्य के हाथ में मत दो वरना ये अपनी पहली तीन पैदा हुई बेटियों की तरह इसे भी अपने कमीने खूनी डॉक्टर दोस्त करीम के साथ मिलकर मार देगा ...सर ये कोई बेटियों का मसीहा नही बल्कि ये अव्वल नम्बर का ढोंगी है ..जिसे सिर्फ समाज में अपनी इज्जत का लोभ है ...वरना ये तो बेटियों के लिये कसाई है ...सर सलीम मिस्त्री का खून भी इसने किया उसने आत्महत्या नही की थी बल्कि उसका दोष सिर्फ इतना था कि उसने , इस जानवर आचार्य को बेटी पैदा होने की दुआ दी थी ...सर ये इस बेटी को भी मार देगा .....मैंने इसको और डॉक्टर करीम को आज इस बच्ची के खून का प्लान बनाते सुना है ...उस डॉक्टर ने.. आह्ह्ह.. डॉक्टर ने कहा था कि यदि बेटी पैदा हुई तो वो एक बार ऑपरेशन थियटर से बाहर आकर मास्क उतारेगा ...और बेटा हुआ तो वो बाहर आकर थम्सअप विथ विक्ट्री साइन देगा ...आआह्हह

नकाबपोश इतना बोल जमीन पर बिछ गया ...एक पुलिस हवलदार ने उसका नकाब उतारा ,,तभी मेरी चीख निकल गई -

छोटे साहब आप ....?

" जुनैद भैय्या मेरी बहन को इस आह्ह्ह इस खूनी भेड़िये से बचा आह्ह्ह्ह्ह् बचा लो ....

आचार्य को साँप सूंघ गया, वो जड़ हो गया ...उसका इकलौता बेटा जिसे कैंसर मार कर खाने ही वाला था उसे आचार्य की गोली ने मौत से पहले मौत दे दी ।

चोर ...चोर की आवाज करते हुए अभी भी कुछ लोग सीढ़ियों से उतर कर नीचे फ्लोर पर आ रहे थे ....

मैंने आखरी बार विनोद बाबा के मुँह से सिर्फ ये अशआर सुने ...

" जुनैद भैया कह दो इनसे मैं चोर नही ...बल्कि मैं तो बहनचोर हूँ ...जिसने अपनी बहन को आह्ह्ह्ह सिर्फ इसलिए चुराया कि उसकी आयु बढ़ सके कह दो भैय्या ..कह दो कि मैं चोर नही .बल्कि मैं तो  आह्ह्ह्ह्ह् बहनचो ........

खैर विनोद तो चला गया लेकिन आचार्य आज भी जिन्दा है ...माना आज उसके पास रुतबा ,पैसा , इज्जत और एक आजाद जिंदगी नही लेकिन फिर ये साबित हो गया कि बुराई रहती दुनिया तलक जिन्दा रहती है और अच्छाई सिर्फ एक मीठे झोंके सी आकर गुजर जाती है ...आचार्य और करीम जैसे लोगों से ये दुनिया पटी पड़ी है ..मगर अफसोस ये सफेदपोश भेड़िये आज भी दुनिया में बेटियों को कत्ल करने के लिए  किसी बेटी की ही कोख से दुनिया में आते है............नवाज़िश
#जुनैद

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