Wednesday, 24 April 2019

मुरली सिन्हा

#मुल्ली
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" हा हा हा ...अबे का जेंडर और धर्म दोनों चेंज करवा लिए ....?"

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" तीनों चेंज कर दो भईया वो क्या है ...जरा कान इध..र कीजियेगा .... " वो क्या है ..लेडीज वाली  र..ख दी आपने "

सेल्समैन मुस्कुराया और बोला -

" बुरा मत मानना भाई जी ....कुँवारे हो या रंडवे ..?"

" ते..रा बहनोई हूँ ..... अबे  बदल कर हमा..रे नाप के जांघिये दो ! "

उसकी जुबान तो बन्द हो गई ...लेकिन ये जुबान भी बड़ी कमीनी चीज है ..सब ने इसे इज्जत दिलाते ..जिल्लत दिलाते तो सुना होगा ...लेकिन मैंने इसे एक इंसान को पल -पल मारते देखा है ....

बीवी का असली नाम मीरा है मेरी ..लेकिन उसे एक लम्बे वक्त तलक   मीरा नही कह पाया..बल्कि अकेले में जान और सबके सामने पिंकी जो उसके घर का नाम है वही बोलता था ,,

मीरा ...जिसने कृष्ण के लिए सिर्फ एक बार जहर का प्याला पीया ..लेकिन मेरी पत्नी ने शादी के बाद कई दिनों तलक जहर का कनिस्तर पीया है ......

माता-पिता का इकलौता बेटा ...पिता हार्ट अटैक से निपट लिए और माँ कुछ निपटाने के लायक न रही ..दमा  है उनको और वो भी इंजेक्शन से कण्ट्रोल होने वाला ....

आत्मविश्वास क्या होता है ..मुझे मेरी बीवी ने बताया ..वरना बीवी से पहले पूरे 32 साल इसके बिना काट दिए ....

मन लगता था  पढाई में मेरा , बहुत पसंद आती थी किताबें मुझे ...रंगीन सफों वाली ...कोयल, बुलबुल ..शेर ...तितली परी वाली ...लेकिन इनसे वैसा जाती रिश्ता नही जुड़ा जैसा एक आम बच्चे का इनसे गहरा नाता होता है ....

एम. ए हिंदी साहित्य से हूँ ..लेकिन पूरी एजुकेशन प्राइवेट ....

प्राइवेट कम्पनी में ही जॉब करता हूँ अब ...लेकिन कभी जब गुजरा वक्त याद आता है तो जहाँ समाज से नफरत गहरी होती जाती है वहीँ अपनी बीवी से मुहब्बत गहरी  और गहरी होती जाती है .....

बीवी यानी मीरा .. माँ को हस्पताल लेकर गया था ...और देखा एक आदमी खून से लथपथ एम्बुलैंस से उतारा गया ...सड़क दुर्घटना में जबरदस्त चोटें आई थी उसको ...मुझे नही लगता था वो बचेगा ...... उसे बी निगेटिव खून की जरूरत थी ...और अस्पताल के ब्लड बैंक में खून नही था ... स्टाफ ने एक जनरल एनॉउन्स भी किया लेकिन ...कोई भी खूनदार आगे न आया ...

मेरी नसों में भी बी निगेटिव दौड़ता है ... और मैंने खून देकर उस शख्स की जान बचा ली ...लेकिन जब खून दे रहा था तो एक मासूम  सी लड़की ...जो जवान थी ...मुझे एकटक घूर कर देख रही थी और रो भी रही थी .....

" आपने पापा को खून दिया ..थैंक्स सर ..."

" मैंने आज तक किसी को कुछ नही दिया बल्कि जो मुझे दिया समाज ने दिया ...भूल जाइये मैंने किसी पर कुछ एहसान किया "

वो लड़की मुझे घूरती रही और बड़ी हैरत से ...फिर वो मुझसे टकराई एक ट्रैफिक की भीड़ में ...

" हैलो सर ..याद आया ...पिंकी ...वो उस दिन आपने पापा को खून..."

" ओ हाँ ..कैसी हैं आप ?"

ट्रैफिक हवलदार ...सीटी बजाता रहा लेकिन हम एक दूसरे को ही देखते रहे ...ट्रैफिक तो जैम हो गया ...लेकिन हमारे दिल में मुहब्बत ओवर फ्लो में बाहर कूदने लगी ....

चालान हुआ और फटकार मिली ...लेकिन अब पिंकी मुझसे हर रोज मिलने लगी ...और मुलाकातों ने एक रिश्ते की शक्ल इख्तियार कर ली ....

कुछ भी नही छिपा था ..मीरा से ..और सब कुछ जानने के बाद भी मीरा ने किसी की परवाह नही की ....

शादी को दो ही दिन बीते थे ...और मीरा को लेकर उसके मायके जा रहा था कि तभी मेरा फोन बजा -

" हैलो सर ..मुबारक हो आपने जीते हैं पूरे ..दो लाख रूपये ...कृपया अपना नाम और नम्बर कन्फर्म कराइये ..."

" हें ..हें ..हें ..जी मेरा नाम है " मुल्ली सिन्हा ""

" क्या ...?"

" जी .. मुल्ली ...मुल्ली सिन्हा "

" हा हा हा ..अबे क्या जेंडर और धर्म दोनों चेंज करवा लिए ...सॉरी ये ऑफ़र छक्कों के लिए नही है ...."

ठहाका फिर गूँजा ..लेकिन इस बार वो अकेला नही था ...ठहाकों की एक पूरी जमात मुझे न सिर्फ सुनाई दी बल्कि दिखाई भी दी ...

ये शरारत मेरे मुहल्ले के उन लड़कों की थी ..जिन्होंने मुझे कभी ..इंसान होने का बोध नही होने दिया ...स्कूल से लेकर जिंदगी के उस हर एक एहम कदम पर इन्होंने मेरा मजाक उड़ाया जब मुझे थोड़ी सी भी ख़ुशी मिली ...इनकी ही वजह से मैंने स्कूल छोड़ा ..कॉलेज छोड़ा ...और शायद अब ये मुहल्ला भी छोड़ना पड़े

गड़ रहा था मैं जमीन पर और दिन तो जहर का घूँट पीकर सब अनदेखा कर आगे बढ़ जाता था ..लेकिन  ...नई -नवेली ब्याहता के साथ .....

उस दिन मीरा ने मायके जाने को मना कर दिया ...और वापस घर पहुँचकर

" क्या हुआ पिंकी ..."

" कुछ नही ... मुझे अफ़सोस  है कि मैं एक कायर और बुजदिल की बीवी हूँ "

" पिंकी उन गुंडों के मुँह कौन लगेगा ..."

" मैं उनके मुँह लगने और उनसे झगड़ने को नही बोल रही हूँ ...बल्कि आपकी आत्मविश्वास विहीन जिंदगी पर मुझे आपके लिए ये शब्द सूझे "

" मतलब ..?"

" मतलब ये कि ...मैं जानती हूँ कि आप बचपन से" र " का उच्चारण नही कर पाते ..और उसकी जगह " ल "बोलतें हैं ....लेकिन क्या आपने कभी कोशिश की..कि आप अपनी कमजोरी पर आँसू बहाने से बेहतर उसको दूर करने में साहस दिखाये ..... ये समाज और दुनिया उसी की मदद और इज्जत करती है मिस्टर मुरली ...जो अपनी मदद खुद करे और अपनी इज्जत भी खुद करवाये ..."

उसके बाद पिंकी ने कमर पर साड़ी का पल्लू ठूंसा और बोली ...

" मेरा नाम लो !"

" मीला "

उस पल के बाद ...मीरा ने ठान लिया कि मेरी तोतली जुबान पर  चढ़ा " ल ".." र " बनकर फूटेगा ... उसने मुझे निर्देश दिए कि अब जो वो कहेगी मुझे वो ही करना होगा ...

मिरर स्पीच... " र" नाम सम्मिलित अनेकों नाम ...किसी की बात से विचलित नही होना ...ऑफिस जाते और घर आते वक्त  साइन बोर्ड और शॉप होर्डिंग पढ़ना ..और वो सब कुछ जिसमें " र" नजर आये ....आदि ..आदि

खैर फिर जादू हुआ ...अटक के ही सही पर " र" अब " ल" नही और मैं अब " मुल्ली " नही ...

उस दिन जब मीरा के साथ सिनेमा देखने जा रहा था तभी फोन फिर बजा -

" भईया आपके घर पर आग लग गई है ....आप जल्दी आ जाइए ..."

" जी आप कौन "

   आग की खबर देने वाला बोला -

" वो ..वो..आप कौन बोल रहें है "

" जी मुल्ली ....मुल्ली सिन्हा "

फिर ठहाके सुनाई दिए ...और मीरा ने अपने माथे पर हाथ रख लिया ...लेकिन फिर मैंने फोन को पुनः कान पर लगाया और बोला -

" भईया मैं मुल्ली ..मुल्ली सिन्हा बोल रहा हूँ...शायद आपने फोन " मुर..ली सिन्हा " को लगाया होगा ..."

फोन डिस्कनेक्ट ..लाफिंग क्लोज  ....एन्ड

" चलो मीर..आ  ...हम लेट हो रहे हैं "

और इस बार ठहाका फिर सुनाई दिया लेकिन वो ठहाका जनानी का था ...मीरा बहुत खूबसूरत हँसती है ...पता है लेकिन इतना खुबसूरत ...खैर अब न कोई फोन आता है न कोई फिकरा ....

कभी -कभी मीरा को छेड़ने के लिए ' मीरा ' को ' मीला 'बोल देता हूँ ताकि मेरी जिंदगी हँसे और मैं उसे हँसता देख जीता रहूँ बस जीता रहूँ ....

लेकिन आज आत्मविश्वास का मतलब भी समझ में आ गया ...ये उस शक्ति और ऊर्जा का वो चरम पर्याय है जो नामुमकिन कार्यों को भी पूर्ण करवा देने का एकमात्र शस्त्र एकमात्र उपाय और एकमात्र रास्ता है ....

" मैं मुरली सिन्हा अपील करता हूँ उन लोगों से जो किसी भी प्रकार के व्यसन ..व्याधियों ..असन्तुलन .असमंजस, पराजय और परीक्षाओं के आगे अपने सबसे कारगर अस्त्र और मित्र की उपेक्षा कर उसको जंग खाने दे रहें हैं...  मैं कहता हूँ एक बार खुद पर पुनः नये सिरे से विश्वास करें ताकि आपका आत्मविश्वास धीरे -धीरे आपके मार्ग की बाधाओं को उसी प्रकार खाये जैसे चिता देह को और कब्र शरीर को खाती है ...."

" आया मीर..आ.... "

मीर..आ बुला रही है शुभ रात्रि ..फिर मिलते हैं

नवाज़िश

Junaid Royal Pathan

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