Tuesday, 16 April 2019

हवस

#हवश
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" ओह्ह तो आप रवि की वाइफ हैं  ..?"

" जी हाँ ! बदकिस्मती से ..."

इतना सुनते ही ..मेरे हाथ में  अंग्रेजी वाइन का पैग लड़खड़ाने लगा ..ऐसा लगा मानो उसको भी हॉट रोमा का ये जुमला सुनकर जैसे नशा सा हो गया ,,,,खैर

जब मैं साबुत  लौंडा था , तो मैंने तब से ही  हल्दी हमेशा पीसी हुई खाई ..हल्दी से मेरा मतलब तो आप समझ गए होंगे ... मतलब लौंडेपन से ही मैं पेशेवर औरतबाज हूँ ..शादीशुदा औरतें ...मतलब ..आँटियाँ ..भौजाईयाँ .. और वो हर छमिया ..आइटम जिसको मुहब्बत का सलीका हो न हो पर बिस्तर का तजुर्बा हो ।।।

मैंने औरतों की इतनी वेराइटी चखी है कि अब मैं महज औरत को सूँघ के बता देता हूँ कि ये कितनी देर में अंडर दी ब्लैंकेट आ सकती है ...

बाप-वाप ..माँ का नाम क्या बताऊँ ..लेकिन एक बात जरूर कहूँगा ..मेरा बाप बड़ा भला आदमी था ..और उसने जिंदगी भर मेरी माँ के अलावा कभी किसी दूसरी औरत के ऊपर आँख उठा कर न देखा ... लेकिन आखिर उसे मिला क्या .. एक सरकारी स्कूल की मास्टरी ..कुछ गिने -चुने कागज के टुकड़े ..और एक आदर्श -वादर्श टाइप की बोर जिंदगी ....

वो चाहता था कि मैं कोई बड़ा आदमी बनूँ ....मैं बनता भी लेकिन मैं बड़े के फेर में फँस गया ...बड़ा बोले तो वहीँ बाजू में रहती देवीलाल की औरत जिसे  बचपन से ही मैं चाची बोलता था ..लेकिन उस चाची ने मुझे वक्त से पहले बता दिया कि औरत और आदमी के बीच कोई सात्विक रिश्ता तब तक कायम रह सकता है जब तलक बीच में कोई नशा या झुमाई इंट्री न करे ।।।

होली के दिन भंग के नशे में ..चाची ने मुझे चचा समझ कर दाब लिया ..और मुझे समझा दिया कि असली सुख स्कूल विस्कूल और किताबों  के चूतियापे में नही असली सुख औरत के  कसमसाते पहलू में है ...लेकिन दो दिन बाद मुझे पता चल गया कि भंग का नशा बहाना था चाची ने पूरे प्लान के साथ मेरा नाड़ा खोला था ....

उसके बाद फिर मैंने पीछे मुड़कर नही देखा ..और अपने से बड़ी उम्र की औरत मेरी कमजोरी और मेरा मजा बन गई ....इन कारनामों के चलते मैंने 16 की उम्र में घर छोड़ दिया लेकिन सच तो ये था कि मेरे बाप ने मुझे धक्के मार -मार के घर से निकाला था ...क्यूँकि वो सब जान चुका था ...दो बहनें पीछे थी ..एक 10 साल की एक एक यही  कोई 4 साल की ...बड़ी शारदा और छोटी रोमिला ।

आज मेरे पास पैसा है ..क्यूँकि हर एक रात का लगभग 40 से 50 हजार रुपया कमाता हूँ मैं ...अपने पति में जोश ढूँढने में असफल पैसे वाली आंटियों का कॉल बॉय हूँ मैं ।।।

अनगिनत बिस्तर उसकी चादरें गवाह हैं कि मैंने नेता ,अभिनेता ,समाजसेवियों ...के घरों में भी रात गुलजार की है ...और कुछ उन फेमेनिस्टों के घर भी जो दिन भर पुरुष को जानवर बोलती है और रात को अपनी ख़ुशी से उसी जानवर को वाइल्ड सेक्स करने के लिए उनकी पीठ पर नाख़ून गड़ाती हैं ....

खैर रोमा जिसको पूरी पार्टी में उसके आने से अब तलक घूर रहा था उसने पहला पत्ता गिरा ही दिया ...मैं समझ गया कि अपने पति को नपसन्द करती ये सुनहरी नागिन थोड़ी सी मेहनत के बाद मेरे पिटारे में आ सकती है ।।

लेकिन  दिक्कत ये थी कि ये एक मध्यमवर्गीय औरत थी ..और यहाँ से फूटी कौड़ी भी न झड़ेगी ...लेकिन उसका कपड़े फाड़ बदन मुझे उसके सिवा कुछ और सोचने की अनुमति नही दे रहा था ...

अब लगानी थी फील्डिंग ..और उसका पहला फेज ये कि मैं जान सकूँ कि रोमा रहती कहाँ हैं ..उसका फोन नम्बर ..उसका पति करता क्या है एक्सेकट्रा ....?

मैंने मिसेज मल्होत्रा को फोन लगाया जो रोमा के साथ बात कर रही थी ...और उनसे कहा कि मुझे हर कीमत में इस औरत की फुल डिटेल चाहिये ...

उन्होंने कातर स्माइल दी ..और मेरा इंट्रो रोमा से करवाया ...

" रोमा ये जैक....मीन्स जतिन ..बहुत टेलेंटेड हैं ..दिल चुराने में "

" हाय ! आई एम रोमा जतिन जी.."

"  प्लीज़ से जैक बेबी ..ओनली जैक ..."

तभी रोमा को एक फोन आया और वो बॉय कहकर जाने लगी ...लेकिन तभी फिर यकायक पलटी ...और उसने स्माइल दी ..फिर आगे जाकर पलटी और फिर स्माइल ... मैं समझ गया कि बॉल अब मेरे राडार पर है ....सम्मान दूँ या सीमा रेखा के बाहर फेंकू दोनों में अपना ही कद इम्प्रूव होगा ...

नेक्सट डे ..मैंने रोमा के पति के बारे में जानकारी ली ..मिसेज मल्होत्रा की कम्पनी में काम करने वाला ..शक्ल सूरत और सेहत से फकीरचन्द ..न स्टाइल न लुक ..और न कोई एट्रेक्शन ...

50% काम लगभग हो चुका था ... अब बारी थी रोमा को इम्प्रेश करके बिस्तर पर लाने की ..हाँलाकि रोमा उम्र में मुझसे छोटी थी लेकिन थी तो एक्सप्रिएन्सेज आइटम ...

मैंने रोमा का नम्बर डायल किया ..लेकिन फोन उसके पति ने उठाया ...फिर डायल किया तो वो ऑफ आया ...शराब के नशे में  रोमा का जिस्म भूले से नही भूल पा रहा था....हर हालत में उसका जिस्म चाहिये था मुझे ...मिसेज ओबरॉय का फोन आया कि जैक प्लीज़ कम ...आई सेड नो ...ऐसे न जाने कितने फोन बजे जिन्हें जैक के जिस्म की जरूरत थी लेकिन जैक को जिसकी भूख थी वो रोमा का बदन था ।।

जॉनी वाकर  के चार पैग खींचकर ...रात की तन्हाई में मैंने फैसला किया कि मैं अभी रोमा से मिलूँगा ..लम्बी कार लेकर .थ्री पीस सूट में ..महकती खुशबू से सराबोर ...मैंने ब्रेक रोमा के घर के आगे लगाया ...

और सोचा कह दूँगा कि यही से गुजर रहा था ...नही ..ये कह दूँगा कि मिसेज मल्होत्रा ने कहा था कि आपके वहाँ कोई पार्टी है ..नही  ...नही ...जो मौके पर जुबान से निकलेगा वही ...

मैंने जैसे ही सूट की क्रीज ठीक कर डोर बेल बजानी चाही ...तभी अंदर से आवाज आई ...मैंने आगे बढ़कर खिड़की पर कान लगाये ..

" छोड़िये न ..प्लीज रवि छोड़िये ..अच्छा बाबा ..नाउ ओनली किस हाँ ..और कोई शरारत न करना हाँ "

" आज तो बदला लूँगा जान ..क्या बोली मिसेज मल्होत्रा से मेरी बदकिस्मती कि ऐसा पति मिला ..."

" तो नही कहती क्या ...तुमने सुबह से कहा था कि पार्टी में साथ चलेंगे ..और लास्ट टाइम पर तुम चली जाओ कहकर मुझे भेज दिया ...जानते हो क्या गुजरी मुझपर वहाँ ..?"

" जानता हूँ जान ..लेकिन मेरी मजबूरी थी ..जान एक अर्जेंट मीटिंग आ गई थी ..नही तो तुम्हें उस नीच  और घटिया लोगों की पार्टी में नही भेजता ..."

" ओह्ह रवि आई लव यू जान..वहाँ हर कोई मुझे खा जाने वाली नजरों से देख रहा था ..अब मैं किसी पार्टी में कभी नही जाऊँगी जान ...लेकिन  थैंक्स रवि ...उस पार्टी में भेजने के लिए .. अगर तुम मुझे उस पार्टी में नही भेजते तो मैं अपने भाई जतिन से नही मिल पाती ...."

" क्या....?"

" हाँ रवि ..जिसको पिताजी ने घर से निकाल दिया था ..क्यूँकि उसकी आदतें ख़राब हो गई थी ..आओ उसकी तस्वीर दिखाती हूँ ...ये जतिन है जो कल मुझे पार्टी में मिला था ..मिसेज मल्होत्रा ने इंट्रो भी करवाया ...मैं जतिन की सबसे छोटी बहन हूँ ..और उसे देखते ही पहचान गई ..लेकिन आज मिसेज मल्होत्रा ने फोन पर जब जतिन की असलियत बताई तो ....मन से बस यही निकला कि ऐसा नीच ..बेशर्म भाई किसी बहन को न मिले ...जानते वो मुझे भी गन्दी नजरों ..."

उसने आँसू बहा दिये और एक साँस में रवि को मेरी असलियत बता दी ...मेरे पैर लड़खड़ाने लगे ..वाकई मैं नीच हूँ ..वो कमीना हूँ जिसने आज तलक औरत को बस हवश की नजरों से ही देखा ..इतना गिरा हुआ कि अपनी सगी बहन को भी हवश के नशे में न पहचान पाया ...इतना जलील कि उसके बार -बार पलट के देखने को ये समझा की वो मुझ पर ...छी ..

जीने का अधिकार नही है मुझे ...लेकिन एक  बात समझ में आ गई कि दुनिया में ऐसी औरतें भी मौजूद हैं जी अपने पति को उसकी सूरत ...उसके शरीर ..उसकी कामयाबी और उसके रुतबे को देखकर प्यार नही करती बल्कि उसका दिल उसका जमीर देखकर उनसे बेतहाशा मुहब्बत करती हैं ...

बड़ी दुआ निकली अपनी बहन रोमिला के लिए दिल से ...और उस हर औरत के लिए ..जो कम खाती है..गम खाती है लेकिन हराम नही चखती ....

पिताजी ने मुझे सीखाया था कि एक सच्चा मर्द एक औरत पर ही टिका रहता है और उन्ही के खून ने आज फिर मुझे समझा दिया एक सच्ची औरत भी एक मर्द के लिए जीती और मरती है ....

कार स्टार्ट की और पता नही किस रास्ते से किस मंजिल को पाने को निकल गया ..लेकिन इतना यकीन था कि अब मेरी मंजिल औरत से शुरू होकर औरत पर खत्म नही होगी ...कोशिश करूँगा कि अगली दफा जब बहन का दरवाजा खटखटाऊँ तो उसे मुझमें सिर्फ एक भाई नजर आये ...कोई हवश का भूखा जानवर नही ।

नवाज़िश

Junaid Royal Pathan

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