#8_पी_एम
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" छोड़ यार ! हम साले आम आदमी होते ही कीड़े हैं...ले पैग मार ...अबे क्या देखता है भाई ..कच्ची नही है भाई ...8 पी.एम है "
इतनी पिला दी रघु ने कि सुबह 5 का अलार्म बजता रहा फिर भी मेरी आँख नही खुली ..... 10 बज चुके हैं सुबह के ...लेकिन सर दर्द के मारे फटा जा रहा है ....लोग कहते हैं कि शराब की खुमारी का तोड़ शराब ...लेकिन ऐसा शराबी नही हूँ मैं.. कि सुबह से ही पीना शुरू कर दूँ ...मैंने अपनी पूरी जिंदगी में कल शराब को हाथ लगाया ....और आज खुद पर शर्म आ रही है .....
कि बीवी की चिता फूँक कर कोई शराब पीता है क्या ...और वो बीवी जिससे पूरे 10 साल लम्बी मुहब्बत के बाद मैंने शादी की .....
वैसे तो लमसम सब कल ही खत्म हो चुका है मेरा ...माँ मुझे पैदा करते ही स्वर्ग सिधार गई थी...और बाबा गाँव में रहते हैं....
सरपंच थे बाबा लेकिन ..मीना से शादी करते ही ...बाबा फिर कुछ भी नही रहे ...मीना छोटी जाति से थी ...मैं इस जात-पात को नही मानता लेकिन ..मेरे मानने से क्या होता है ...पूरा देश इस धर्म-मजहब ..जात-पात वगैरह के इंजन से ही चलता है ....
मैं क्या जानूँ देश -परदेश ...लेकिन इतना अवश्य जानता हूँ कि बाबा फिर पूरे गाँव में कभी अपनी मूँछ और छाती ऊंची न कर पाये .... त्याग दिया बाबा ने मुझे ....उन्हें ये गम नही कि सरपंची हाथ से गई उन्हें ये जिंदगी भर का अफ़सोस रहा कि मैंने उनसे झूठ बोला -
हाँ,, मैंने अपनी जिंदगी में कभी झूठ नही बोला .. लेकिन एक बार बाबा से बोला था कि जब उन्होंने पूछा था ...
" क्यूँ आनन्द ..ये रौशन लाल की बेटी से क्या कोई प्रेम -सम्बन्ध है तुम्हारा ...?"
" न.. बाबा ..न ... बस पुस्तकें माँगने आई थी ..और गाँव वालों ने बात पकड़ के मचान बना दिया ..."
" स्वयं से अधिक विश्वास रखते हैं तुमपर आनन्द ...और जानते हैं कि तुम कभी झूठ नही बोल सकते ..."
कौन से युग में जी रहे थे बाबा ... बाबा को कैसे कहूँ कि ये त्रेता युग नही ...और अगर होता भी तो क्या ...क्यूँकि उस युग में भी सच सिर्फ " राम "ही बोलते थे ...या कोई भले साधू-सन्त !
बाबा राम हैं मेरे ...लेकिन उन्होंने समझना था कि इस दुनिया में अब सच का कोई मोल नही जबकि सच ये है कि ...जो जितना झूठा वो साला उतना ऊँचा ....
बी .कॉम किया था शहर से ...लेकिन गाँव को कभी नही भूला मीना की याद हमेशा कलेजे में ज़िंदा रही ..होली के अगले दिन ही उसे भगा कर शहर ले आया ...और यहीं के एक मन्दिर में उससे विवाह रचाया ...बाबा को बहुत फोन किया ..चिट्ठी लिखी लेकिन कभी उन्होंने जवाब नही दिया ...
सिर्फ एक बार बोले कि -
" तुम मेरे रक्त का अंश नही हो सकते आनन्द क्यूँकि मेरा रक्त दरिद्र हो सकता है झूठा तो कदापि नही "
निकाल दी गाँव की यादें मन से ...लेकिन बाबा की याद कभी न निकली ...दीवार पर बाबा की तस्वीर में मुझे मेरा भगवान नजर आता है ....
मीना भी रोज ईश्वर को हाथ जोड़ने से पूर्व बाबा को नमन करती थी ...एक प्राइवेट कम्पनी में अकॉउंटेंट की नौकरी कर ली ...जिंदगी आराम से गुजर रही थी ..हाँलाकि सैलेरी अधिक नही थी लेकिन दाल- रोटी हँसी -ख़ुशी चल जाती थी ...
सोचते -सोचते ध्यान बंटा ...मैनें खिड़की से नीचे झाँककर देखा ...एक नेता जय जयकार के रेले के साथ चुनावी रैली लिए आगे बढ़ रहा था ....
मैंने मुट्ठियाँ भींच ली ...और सीधे सीढ़ियों से नीचे उतरा ...रास्ता बनाया और नेता की गाड़ी में चढ़कर उसके गाल पर एक करारा थप्पड़ जड़ा ....
एक मिनट की चुप्पी के बाद ...सिर्फ एक थप्पड़ के बदले ..मुझे अनगिनत जूते ..लात ..और घूँसे मिले ...और बेहोशी के बाद आँख खुली ..सरकारी अस्पताल में ....जहाँ एक टी.वी मद्धम आवाज में चल रहा था ...
मेरे थप्पड़ को नेता ने विपक्ष की साजिश करार दिया ..उसने मुझे किसी राजनीतिक दल का कार्यकर्ता भी बता दिया ...फिर अचानक मीडिया के माइक मेरे मुँह के आगे नाचने लगे ....
मैं उनसे कहता रहा कि हटाओं इन सब को ..मेरे बाबा कहीं इस हालत में मुझे टी .वी में न देख लें ...लेकिन उनको टी.आर.पी और नम्बर बढ़ाने थे ....तभी उन्हें एक फटकार लगाई डॉक्टर सलीम ने ....
" शर्म आनी चाहिये आपको ...पेसेंट के जबड़े पूरी तरह से टूट चुके हैं ...फिर भी आप लोग ये ...छी ..बाहर निकलिये सब "
झूठ बोला था डॉक्टर साहब ने लेकिन शायद मेरी मजबूरी को समझते हुए ....उन्होंने प्यार से मेरे सर पर हाथ फेरा और बोले -
" आखिर क्यूँ किया तुमने ये ...?"
" इसलिए डॉक्टर साहब कि इन नेताओं की भीड़ ..चुनावी रैलियों ने मेरी बीवी और बच्चे को मुझसे छीन लिया ... किसने हक दिया इनको की अपने स्वार्थ और सत्ता के लिए ये आम आदमी की जिंदगी को नर्क बना दे ..मेरी गर्भवती बीवी उस दिन एम्बुलैंस में थी डॉक्टर साहब...वो एम्बुलैंस जो किसी नेता की चुनावी रैली में फँसी हुई थी ...एड़िया रगड़ रही थी वो और हाथ जोड़ रहा था मैं इनसे ...कि मेरी बीवी मेरा बच्चा मर जायेगा ...लेकिन किसी ने मेरी एक न सुनी ....मेरी बीवी और मेरा बच्चा न रहा और......."
डॉक्टर साहब ने दिलाशा दिया ...और वो चले गए ..लेकिन फिर बगल में लेटा एक पेसेंट हँसा और बोला -
" अबे नामर्द है तू ... तुझसे रत्ती भर भी हमदर्दी नही मुझे ... तू क्या सोचता है एक थप्पड़ मार कर तूने अपनी बीवी और बच्चे का बदला ले लिया ...सोच न जाने कितने इंसान आये दिन इस राजनीति की भेंट चढ़ते हैं ..न जाने कितनी सुहागनें विधवा होती हैं ..न जाने कितने बच्चे अनाथ होते हैं और कितने तेरी तरह रंडवे ..."
" कौन हो तुम "
" अनिल दास गुप्ता ...6 या 7 दिन में मर जाऊँगा कैंसर की आखरी स्टेज पर मौत से लड़ रहा हूँ ..तेरी तरह आंसू नही बहा रहा ...अगर तुझे वाकई अपने बीवी और बच्चों की जिंदगी का बदला लेना है तो बदल दे ये निजाम ...बदल ले ये राजनीति का ये नंगा नाच ..बदल दे ये दस्तूर कि नेता रैलियों ,,हंगामे ..झूठ और भाषणों से नही बल्कि अपने काम से उस सिंहासन पर बैठेगा जहाँ उसकी ......"
और वो व्यक्ति खाँसने लगा ..उसके मुँह से लगातार ब्लड गिरने लगा ...लेकिन मेरे ब्लड में न जाने क्यूँ एक उबाल आ गया .... हाँलाकि उसका एक -एक लफ्ज सच्चा और पवित्र था लेकिन जब उसने "झूठ" शब्द कहा तो लगा कि बीवी ..बच्चों का ही नही बाबा का कर्ज भी उतारना है मुझे .....
ठीक होते ही मैंने ...हर गली ..हर मुहल्ले पर जाकर चिल्ला -चिल्ला कर उस व्यक्ति के नजरिये को अपनी जुबान दी ...मैंने बताया कि नेता का मतलब मालिक या रसूख नही होता ...बताया सड़के और जुबान साफ़ चाहिये ..सिर्फ विकास और पूरा आकाश चाहिये .........
आज पूरा एक दशक लग गया अपने देश की जनता को समझाने में ...आज सड़के खुली हैं ..आज सिर्फ काम के नाम पर जनता वोट देती है ...आज किसी नेता की मजाल नही कि वो झूठ बोल सके ...कोई भड़काऊ बात बोल सके ..कोई जात-पात या धर्म-मजहब के नाम पर देश की जनता को बाँट सके ....बाबा आज मुझपर फक्र करते है...और आज ही गॉंव से मुझसे मिलने आने वाले हैं ....मुझसे कोई भी कभी भी मिल सकता है ..देश की जनता के पैसे का सदुपयोग कुछ इस तरह से हुआ कि देश की हर गली , हर गाँव में कैमरे और वीडियो स्क्रीन लगी है ...जनता हर रोज मुझसे मुखातिब होती है बल्कि हमेशा मुझसे जुड़ी रहती है ...क्यूँकि मेरे ऑफिस में भी एक ऑडियो-वीडियो कैमरा लगा है ...जिससे जनता जान सके कि उनका " प्रधानमन्त्री " क्या करता है ..किससे मिलता है ...और क्या बाते करता है ..बस देश की सुरक्षा से सम्बंधित कुछ बातें गोपनीय रखी जाती है .....तभी इंटरकॉम बजता है
" सर आपके पिताजी आ चुके हैं ...."
बाबा अंदर आये और मुझे देश की कमान संभालते हुए देख कर आँखों से आँसू छलका कर जैसे ही कुछ बोलते ...तभी इंटरकॉम फिर बजता है -
" सर आपके मित्र श्री रघुनाथ आपसे मिलने आयें हैं ...सर तलाशी ?.."
" रहने दो उन्हें अंदर भेजो "
दरवाजा खुला ...और रघु मुझे देखते ही मेरे गले लग गया और बोला -
" देखा भाई ..अपुन बोलता था न कि एक दिन तू कुछ बड़ा करेगा ... चल भाई आज फिर एक पार्टी बनती है ..... ये देख क्या लाया हूँ ....अबे भाई कच्ची नही है 8 पी.एम है ..8 पी .एम "
जनता स्क्रीन पर पी .एम ऑफिस में 8 पी.एम देख रही थी .. पिताजी मुझे और मैं दाँत पीसकर रघु को .............
नवाज़िश
Junaid Royal Pathan