Sunday, 30 September 2018

दहशतगर्द

""" खट..खट..."""

" ....जी ...जी ...आप कौन "

उस शख्स ने सीधे रिवाल्वर मेरे माथे पर टेक दी

" चल अंदर ...बताते है कि हम कौन है "

वो शख्स अकेला नही था उसके पीछे तीन और लोग थे ...दो आदमी और एक खूबसूरत औरत ...

" हाँ तो जुनैद भाई ...मैं रज्जाक ये बशीर ..ये मुनव्वर और ये आशिका ...अब जल्दी से काम की बात ...हम संकल्प मेले की धज्जियां उड़ाना चाहते है ...हमारी पहचान ये है कि हम इस मुल्क के बाशिंदे नही ...हमारी हसरत अपनी कौम पर हुए एक-एक जुल्म का बदला लेना ...हम बाबरी मस्जिद की शहादत और उसके बाद के दंगों को अब तक नही भूले ..न भूले है अपनी कौम का बहता लहू ..और आज भी गोकशी के नाम पर मासूम मुसलमानों का क़त्ल ...हमारे आका कहते है कि हिन्दुस्तान का मुसलमान बुजदिल है ...वो बेगैरत है उसको अपनी कौम का बहता लहू देखने की आदत है ...लेकिन हम पड़ोसी न कायर है और न बेगैरत........

" सुनो ..सुनो... ये मेरे मुल्क का मुआमला है आप कौन होते है बीच में बोलने वाले ..और आप मेरे मुल्क में दाखिल कैसे हुए ...?

उसने मेरे गाल लर तमाचा मारकर बोला ...

" साले हिजड़े ..ये तेरे मुल्क का मुआमला हो या न हो लेकिन ये हमारी कौम का मुआमला है ..हम मुसलमान एक कलमे के शरीक है ....

" कौन है जी .....?

" शायरा तुम और आसिफा अंदर जाओ ....

" एक ..एक..मिनट बड़ी प्यारी बच्ची है सुब्हानअल्लाह ..नाम भी मासाअल्लाह बड़ा खूबसूरत है " आसिफा "

" याद कर जनखे वो आठ साल की मासूम बच्ची का नाम भी आसिफा था जिसको इन नामर्दों ने नोच -खा कर शहीद कर दिया ...

" देखिये मुझे आपकी बातें समझ में नही आ रही है ...आप यहाँ से चल दीजिये ..."

" अपने स्कूल के दिनों की रजनी मेम के चमाट की याद आ गई ...गाल बेशक रंग बदल गया था उस तूफानी औरत के थप्पड़ से ....

" बदजात ...इतना कुछ हो गया और फिर भी तू ....

" देखा एक जिहादी औरत के जूनून का तमाचा ...कमबख्त अब सुन तुझे आशिका को बस संकल्प मेले में इंट्री करवाना है ...और चुपचाप वहाँ से खिसक लेना है ...तुझे इसलिए चुना गया है क्यूँकि तू उस मेले का सर्किल ऑफिसर है ....याद रख तू हमारा काम करेगा तो जहां नेकी मिलेगी वहाँ तेरे बीवी बच्चों के ज़िंदा ढाँचे वगरना याद रखना मुझे गला रेतने की बहुत बुरी लत है"

अक्ल बिल्कुल तन से जुदा हो गई ... मैंने कसम परेड में कसम खाई थी कि कुछ भी हो जाए ..परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत हो अपने मुल्क और मुल्कवासियों की अजमत और जिंदगियों की रक्षा करूँगा ....एक गहरी सांस भरी और मैंने कहा चलो .....

मैंने आशिका को अपनी बाइक पर बैठाया और
बाइक संकल्प मेले की ओर घुमा दी ...लेकिन ये सिर्फ मैं जानता था कि संकल्प मेले में 10 मिनट में भी पहुँचा जा सकता है और 1 घण्टे में भी .....मैंने बाइक नूर बस्ती की ओर घुमा दी

" अस्सलाम अलैकुम रिजवान भाई"

"  वाअलैकुम अस्सलाम जुनैद भाई ... आज कहाँ की हिजरत पर हो मियाँ ..?

" रिजवान भाई बस ऐसे ही और बताइये ...दुर्गा की मूर्ती का काम कैसा चल रहा है सुना है इस बार पूरी बस्ती के पास काम ही काम है हर घर में दुर्गा बन रही है ..."

" अल्लाह का शुक्र है जुनैद भाई ..इस बार बहुत काम मिला है ...हम बस्ती वालों की गुरबत पर जैसे अल्लाह को तरस आ गया ...अब इंसाअल्लाह मेरी बेटियो  की भी शादी हो जायेगी और बस्ती के बुरे दिनों का जनाजा भी उठ जाएगा ...बैठिये मैं चाय मंगवाता हूँ

" अरे नही भाईजान जल्दी में हूँ जरा फिर किसी दिन .."

अब मैंने बाइक मोड़ी शकूर बस्ती की ओर .

" क्यूँ रजिया बी आज सुबह से ही काम में लग गई ...."

" अरे जुनैद भाई ...आइये बैठिये न ...हाँ वो क्या है संकल्प मेले वालों ने 1000 बेंत की कुर्सियों का आर्डर दिया है ...अल्लाह भला करे शंकर भाई का जिन्होंने ये मेला लगवाया .....बड़ी तंगी चल रही थी भाई अब मुन्नी की तालीम का खर्चा पूरा हो सकेगा ....

" अरे ..अरे ..जितेंद्र दा आज लेट हो गए विद्यालय के लिए ...?

" अरे जुनैद मियाँ ये कमबख्त बन्ने ख़ान का लौंडा स्कूल ही नही आता इस को लेने गया था ..कई बार समझाया कि बेटा पढ़ ले तो अपाहिज बाप का सहारा बनेगा ....

गाड़ी मोड़ ही रहा था तभी डॉक्टर विनोद बक्शी दिखाई दिए ...

" अरे डॉक्टर साहब बड़ी जल्दी में ..."

" यार अभी जाने दो करीम की बिटिया की तबियत बहुत खराब है ....

मैंने बाइक आगे बढ़ाई ....तभी पीछे से आवाज आई -
" जुनैद रुको !"
मैंने बाइक पर कसा हुआ ब्रेक लगाया ...आशिका उतरी और बोली -

" मैं जानती हूँ तुम मुझे इन रास्तों से क्यूँ लेकर आये .. वाकई तुम सही थे और मैं गलत क्यूंकि मैंने अपने आका की बात सुन कर कई मासूम जिंदगियों को कत्ल करने की ठान ली ...लेकिन तुमने मुझे असल हिन्दुस्तान दिखाया है ...जहाँ बेशक बहुत मुहब्बत और अमन बसा पड़ा है ...लेकिन फिर वो लोग कौन है जो आये दिन ...

उसकी बात पूरी होने से पहले मैंने अपनी कही -

" वो लोग जो भी है महज मुट्ठीभर है ...जैसे तुम लोग ..बेशक  तुम्हारे मुल्क में भी लोग सिर्फ अमन चाहते है लेकिन तुम चन्द लोगों की कारगुजारी और कत्लोगारत से एक तरफ तो हर मुसलमान बदनाम हो रहा है और दूसरी जानिब से इस्लाम !

उसने अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा दिए ....मैंने कहा-

" लेकिन मेरे बीवी बच्चों का क्या होगा ..."

" वो महफूज है ...कोई भी किसी भी मजहब का दहशतगर्द बड़ा बुजदिल होता है ...अगर न होता तो एक औरत के सीने में बम नही बाँधता ..किसी मजलूम को घेर कर नही मारता ....वो तो मेरे यहाँ रवाना होते ही तुम्हारे बीवी बच्चों के मुँह ,हाथ, पैर बाँध कर बाहर से ताला लगाकर फरार हो चुके होंगे ......

" आशिका मैं कोशिश करूँगा कि हमारे मुल्क का कानून तुम्हे बहुत कम से कम सजा दे ..तुम सिर्फ कठपुतली हो वरना इस कमसिन उम्र में किसी खुदगर्ज आका की बाँधी डोर पर नही नाचती .....

वाकई हिन्दुस्तान बहुत खूबसूरत और बेमिशाल है जुनैद ....यकीनन तभी तुम हिदुस्तानी दिलों में हुकूमत करने का हुनर जानते हो .....

मैंने गर्व से सीना चौड़ा कर आँख बन्द कर वही कहा - नवाज़िश
#जुनैद...........

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