" हें ...हें ...आप कौन हो भैय्ये ...और ये भैंसा किया विलायती है.. इत्ता बड़ा ...अच्छा ये बताओ दरवज्जे से अंदर घुस कैसे गिए ....चील का पेशाब न आता है इस दरवज्जे से अंदर ..इत्ता छोटा है ....क्या कोई हाट चकल्लस लगी है ईदगाह में .....?
चुप कर बे ..! " यम है हम " ..यमराज ..मृत्यु के देवता ! तेरा टेम हो गया है चल अब आत्मा निकालने दे ....!
" मजे ले रिये हो ...आत्मा निकालने दे ..आत्मा है ....कोई मलाई का घी नही जो निकालने दे .....और मुसलमान हूँ मैं ...और खालिस कुँवारा ....गलत पते पे आ लगे महाराज ...बगल वाले जीवन के लिए आये होगे ..जाओ खींच लियो आत्मा ...वैसे भी वो आपका ही इन्तेजार कर रिया है ...?
सॉरी वत्स ! वो नाम का कन्फ्यूजन हो गया था !
उनका भैंसा दुड़की लेने ही वाला था तभी हम बोले-
महाराज ...चलो मैं लेकर चलता हूँ ....
मैंने बगल वाले दरवज्जे को खटखटा कर खोला
-
हें महाराज.... इधर तो कोई नी है ...लगता है काम पे गया होगा ...आप बैठिये मैं उसे बुला कर लाता हूँ।
" ओके वत्स थैंक्स ..आई एम वेटिंग ...!
मैं सीधा जकड़पुर के महंत के पास भागता हुआ पहुँचा..उनके कान में कुछ कहा और उन्होंने मेरे हाथ में एक लिफाफा दिया...? सीधा बैंक पहुँचा ...जल्दी बाजी में वहाँ का काम निपटाया .. फिर रिक्शा पकड़कर पहुँचा लालपुर ... वहाँ जाकर एक हज्जाम से जल्दी में दाढ़ी बनवाई ..उसकी जेब में एक चेक डाला ..फिर एक मॉल से कुछ सुथरे कपड़े खरीदे ...और फिर हसमत नगर पहुँचा ..वहाँ एक निकाह में सम्मिमलित हुआ ..दुल्हन की माँ को पंडाल पीछे बुलाया ..उसके हाथ में एक लिफाफा दिया ...दुल्हन के सर पर हाथ रखा ... फिर भिश्तीगंज पहुँचा.. एक लड़की से मिला उसे गले लगाया ..उसके कान में कुछ बड़बड़ाया ..उसकी आँखे डबडबा गई ..फिर मैंने पीछे पलटकर नही देखा....
फिर पहुँचा एक अनाथाश्रम ..वहाँ के संचालक को एक बांड पेपर और एक चेक दिया ...
कदम बढ़ाये और कॉसमॉस बंगलो के गेट कीपर से कुछ कहा उसने बंगलो के मालिक को फोन लगाया ...एक चमचमाती गाड़ी स्टार्ट हुई एक पेसेंट को उसके अंदर लोड किया गया ...मुझे गेट से पिक किया गया और कार पहुँची ..लाइफ सिटी हॉस्पिटल में .....स्टॉफ ने जल्दी से मेरे कुछ टेस्ट किये कुछ सेम्पल लिए और मुझे लेटा दिया ऑपेरशन थियेटर में .....
जैसे ही कमरा शांत हुआ ...मैं फूट-फूट कर रोने लगा.....तभी एक आवाज आई।
" वत्स कॉम डाउन ..नही तो मैं भी रो पढ़ूँगा ...मैं कुछ कहूँ या करूँ मुझे शुरू से रेपिट फायर में बता कि तू किनसे मिला और क्यूँ मिला ....?
" महाराज मैं एक अनाथ था ...लेकिन मुझे गोद लिया हाफिज बरकत और उनकी बेगम ने ..वो भी तब जब मैं 11 साल का हो गया था ...वो महंत जी जिनसे पास मैंने अपना सारा बैंक का चिट्ठा लिया जो मेरे पिता हाफिज बरकत के सबसे गहरे दोस्त है ..मेरे पिता मरते-मरते कह गए थे ..कि तेरे , मुन्नी और तेरी माँ के सिवा हमारा कोई नही ...
मेरी मौत के बाद वो सब आकर खड़े हो जायेंगे जिन्हें मेरी जिंदगी से नही मेरी मौत से मुनाफा है ..इसलिए महंत के पास घर जमीन और बैंक के सारे कागजात छोड़ कर जा रहा हूँ ...बैंक से अपने पिता की सम्पूर्ण रकम के कुछ चैक बनाये ....और फिर पहुँचा रशीद हज्जाम के पास जिसने मेरे पिता की बुरे वक्त में बहुत मदद की ..तो उस रकम का ब्याज सहित पैसा मैं हौले से उसकी जेब में डाल आया ...जब आप पहुँचे तो मैं सारी तैयारी के बाद मुन्नी के निकाह के लिए तैयार हो रहा था ...माँ को वो तमाम जमीन और जायदाद के पेपर और बैंक में जमा पैसे के चेक दिए जिसपर मेरे दस्तखत थे...
बहन को घूरने की हिम्मत न थी ...फिर महाराज अपनी महबूबा से मिला ..और उसे मुझे भूल जाने की बात बोली ...फिर उसी अनाथाश्रम में पहुँचा जहाँ मुझे मेरे पिता ने गोद लिया था अपनी आजतक की खुद की कमाई के सारे पैसे वहाँ डोनेट किये और मरने के बाद अपनी आँखों के दान का एक बांड भी ...चिराग नाम का एक लड़का वहां देख नही सकता ...महाराज उसकी आँखों में रौशनी नही है ...
फिर पहुँचा उस सेठ की कोठी जिसे अपनी जिंदगी के लिए किडनी चाहिये और मुझे कुछ 5 लाख ... ताकि मैं अपने शहर में एक गंगा -जमुनी अनाथाश्रम खोल सकूँ जहाँ से गोद लिये बच्चे की सिर्फ जिंदगी बदली जाए उसका मजहब नही । ...प्लान तो कब से तैयार है महाराज लेकिन रोकड़ा नही था .....खैर जहां आपने इतना वेट किया कुछ टाइम और ताकि मेरी किडनी निकलने के बाद ये पैसा मेरे सपने के काम आ जाये ...क्यूँकि हर अनाथ को हाफिज बरकत सा पिता नही मिलता जो एक अनाथ मासूम की जिंदगी तो बदल देता है लेकिन उसका नाम उसकी पहचान और उसका मजहब नही ....
महाराज ने तुरन्त मुझे भैंसे में लोड किया और उसी घर में लाकर पटका जहाँ उनसे पहली मीटिंग हुई थी ..और बोले -
"जीवन ! अभी तेरी बहन रुक्सत नही हुई है ...तेरी महबूबा की आँखों से आँसू नही सूखे है ...तेरा सपना अभी अधूरा है ....जा यार तैयार हो और वो अपने सरहाने पड़ा रबड़ मुझे पकड़ा दे ताकि चित्रगुप्त से कहकर तेरी मौत का योग मिटा सकूँ ......"
सुबकते-सुबकते अंतर्ध्यान होते महाराज से मैंने प्रश्न दाग ही दिया -
" महाराज ये भैंसा क्या सच में विलायती है या देशी ...? नवाजिश
#जुनैद............
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