" जय श्री राम .....
हिंदुस्तान में रहना होगा जय श्री राम कहना होगा "
"भैया आगे निकलने दीजिये मेरी बच्ची का कम्प्टीशन है !"
" मुसलमान लग रहा है ....गाड़ी के आगे 786... तो बोल जय श्री राम और बना ले अपना काम ....
मतलब..?
"मतलब आगे निकलना है तो बोल जय श्री राम "
" जय श्री राम ...बेटा तुम भी बोलो ....लो बाप- बेटी दोनों ने बोल दिया ...अब थोड़ा रास्ता दे दो प्लीज !
भैय्ये काम के लिए बोल रहा है अच्छा चल वन्दे मातरम् बोल !
" वन्दे मातरम !"
मेरी बेटी ने भी खटाक से बिना मेरे कहे बोल दिया
ऐं ..ऐं ...ऐं ...अब बोल भारत माता की जय !
" एक काम कीजिये ..एक बार ही में बता दीजिये मुझे क्या-क्या बोलना है ...मैं सब बोलूँगा ...बस मुझे रास्ता दे दीजिये।
" भैय्ये अगर तुम्हारे मुहर्रम का जुलूस होता तो तुम क्या हर आते-जाते को रास्ता दे देते ....तुझे देंगे तो फिर सब जिद करेंगे ....सॉरी !
" 3rd स्टैण्डर्ड में पढ़ती है मेरी बेटी ...आज उसको एक कॉम्पटीशन में हिस्सा लेना है ....मेरी बीवी शायरा ने 7 दिन तलक उसकी तैयारी में अपने को इस कदर झोंक दिया कि उसे ये फ़िक्र भी नही रही कि नमाज और अजान का असल वक्त क्या है ..लेकिन फिर भी इस सब के चलते उसकी फर्ज नमाज कभी फौत नही हुई...बेशक मुझसे जियादह परहेजगार और आस्तिक है ..कुरआन की तिलावत ऐसे करती है जैसे किसी ने उसकी जुबान को शीर से वुजू करवा दिया ...टोटली मुस्लिम परवरिश और माहौल में पैदा हुई ...सनातन धर्म के बारे में उसे कुछ तब पता चला जब उसकी मुझसे शादी हुई क्यूँकि सरकार की नौकरी करता हूँ मैं... और हर तीन या चार साल में मेरा तबादला लगभग होता ही रहता है ...आज जिस शहर में कमरा लिया है ...उसके दाँये हाथ में मन्दिर तो बाँये में पण्डित जगमोहन शास्त्री जी का कमरा है ...वहाँ से रोज उठती शंख की सदा और सुबह शाम की आरती ने मेरी बीवी को बता दिया है कि असल हिन्दुस्तान यही विविधता है ...पण्डित शास्त्री की भार्या से अब खूब पटती है शायरा कि ...लेकिन आजकल अबोल हो चला है क्यूँकि उनकी और मेरी बच्ची एक ही स्कूल में पढ़ते है और अबोल का सबसे बड़ा कारण आज का स्कूल कम्पटीशन है .....कल तो शास्त्री जी और मैंने बीच में आकर उनका न्यूज स्टूडियो जैसा विवाद शांत करवाया .....
लेकिन अब मुश्किल ये कि आगे कैसे निकलूँ ...भीड़ के बीच में फंसा था न आगे निकल सकता था न पीछे ....कोई उपाय नही सूझा ...तभी उम्मीद की एक किरण दिखाई दी !
मैंने बाइक को धीरे-धीर आगे बढ़ाकर एक बन्द पड़ी दुकान के आगे पार्क किया ....पास गुजरती गाड़ी से खूब सा चन्दन अपनी बेटी और अपने माथे पर पुतवाया ...चुपके से एक भगवा ध्वज को उतार कर उसे अपने सर पर बाँधा और आगे बढ़ कर उस ट्रक में शरण ली जिसपर श्री राम की मूरत शोभा ,सत्कार एवं वैभव से स्थापित थी ... वो ट्रक अन्य गाड़ियों से थोड़ा तेज चल रहा था ...मैंने राम भक्तों को हाथ दिया और उन्होंने मेरी बेटी को गोद में ले लेकर ...श्री राम के नारे लगाये ...जल्दी ही मैं मेन चौराहे पर पहुँच गया ...वहाँ से मैंने एक ऑटो पकड़ा लेकिन इस आपाधापी में मुझे उस व्यक्ति ने देख लिया जिसने मेरा रास्ता रोका था .... उसने मेरे ऑटो के पीछे एक और युवा को बैठाकर मेरा पीछा किया ....
मैंने ऑटों वाले को दो टेढ़े रास्तों से गुजार उनको कुछ भ्रमित किया ....खैर जैसे ही मैं स्कूल पहुँचा मेरी बच्ची का नाम पुकारा जा रहा था .....
मैंने झट उसको स्टेज पर छोड़ा और उन लोगों ने मुझे दबोचा ....वो जैसे ही कुछ कहते -
मेरी बच्ची ने एक ही स्वर में रामचरित मानस की वो समस्त चौपाइयाँ सुना दी जिसमें श्री राम का प्रेम ..वात्सल्य और पितृत्व का गुण समाहित था ....
जैसे ही मेरी बेटी खामोश हुई ... उस युवा जिसने मेरी क्लास ली थी ...तालियाँ पीटनी शुरू कर दी ...दूसरा वाला दौड़ के गया और मेरी बच्ची को अपनी गोद में उठाकर दुलार करने लगा .....
आखिर में विनर का नाम एलॉउन्स हुआ ..वो सेकंड आई ..मैंने शायरा से कहा था कि एक साँस में रामचरित मानस बोलेगी तो श्रोता क्या समझेंगे ....लेकिन उसने कहा था कि एक साँस में अगर राम की महिमा न बखान सकी तो फिर क्या राम को समझ और समझा पायेगी ......
खैर मैंने शायरा को फोन पर ये ही बताया कि बच्ची फर्स्ट आई .... लेकिन उसके बाद जब मैंने शास्त्री जी की बीवी को उसी कॉम्पिटिशन में अपनी बच्ची को गोद में लेकर ये कहते सुना कि -
"क्या हुआ जो कोई प्लेस नही आया ...कम से कम शायरा का घमण्ड तो टूटा जो कहती थी कि मेरी बेटी ही फर्स्ट आएगी ....हूं .
खैर शायरा झूठ से नफरत करती है या नही ये मुझे खास पता नही लेकिन ये पता है कि जब शास्त्री जी की मिसेज से ये सुनेगी कि बच्ची फर्स्ट न आई तो सच में मेरा लंका दहन तो पक्का है ....अल्लाह रहम .....नवाज़िश
#जुनैद.......
- Junaid Royal Pathan
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