Sunday, 30 September 2018

बरकत की निशानी

" हैल्लो जुनैद बोल रिये हो बे ...?

" गुस्ताख  जुनैद रॉयल पठान बोल ..."

" रॉयल पठान की बना बत्ती और डाल छिंदवाड़ा जिले में ...और सुन तेरी लौंडिया हमारे कब्जे में है ।अगर आज शाम 5 बजे तक तूने हमें 1 करोड़ रुपया न दिया तो बेटा समझ ले कीमा भेजेंगे लौंडिया का !

" अबे ! क्या के रिये हो ... सालों नाम से एडिया लगा लियो बड़ा खतरनाक आदमी हूँ मैं ...लौंडिया का बाल भी बाँका हुआ तो आफ्टर सेविंग की औलादों छोडूँगा न इक -इक को ।।।।

" सुन बे चिलमखोर  4 बजे बताएँगे पैसा कहाँ देना है.. वरना पैसा न दिया तो  बेटा आज इंसानी कीमा डालियो मैदे में ।

बेगम...बेगम ..अबे कान में लुकमान की लुप्पी चेप दी क्या ... ?

" आई .....जी बोलिये काहे जुबान का घण्टा हिला रिये हो ...?

" बेगम लोटा -लस्स्सन....लौंडिया खिडनेप हो गई और तुम अंदर खिजाब से बुढ़ापा छुपा रई हो ......

हाय अल्लाह ...ये क्या हो गिया ..बरकत की आखरी निशानी  ...मेरी लौंडिया लाओ जी ....वरना मैं जान दे दूँगी ...!

मर अबी मर बदचलन ये बरकत कौन है बे ...? और तेरा इससे किया रिश्ता है ...बता बेशर्म बता ...?

लुगाई के बेहोश होते ही ...मैं सोच में पड़ गया ...

""कि तबी कहूँ लौंडिया इत्ती गोरी केसे है ...घण्टा 1 रूपया भी न दूँगा मरती है तो मरे हराम की औलाद.."

तबी चार बजे  मेरा फोन बजता है  -

" हाँ बे चुगत पठान ...सुन बे पैसा ..मोनार्की मल्टीप्लेक्स में पहुँचाना है वहाँ तुझे मेरा एक आदमी मिलेगा वो तुझे जब हेल्लो चुगत पठान बोलेगा तो पैसे का बैग उसे दे दियो ...और सुन पुलिस को .....

उसकी बात पूरी होने से पहले मैंने अपनी पूरी की -

" अबे सुन बे बेटाइम की औलाद एक रुपया न दूँगा बेटा ...जा उड़ा लियो मेरा लंकापुर .....

" तो सुन बेटा अपनी बेटी की आवाज......

" पप्पा ...पप्पा ..मुझे बचा लो पप्पा ...पप्पा आई लव यू पप्पा ...पप्पा मेरे तकिये की नीचे एक नीली डायरी है उसे.....

सुन लिया बे अब अगर पैसा 5 बजे तक न मिला तो समझ आज डिनर अपनी बेटी के कीमे से करियो (फोन डिस्कनेक्ट)
....
मैं कुछ देर कुर्सी में ही  बैठा रहा ...इरादा कर लिया था ...एक भी फूटी कौड़ी न देने का  ..बेगम के  कमरे में सर पर पिनक बैठाकर पहुँचा ... वो वहाँ नही थी ...शायद पुलिस स्टेशन निकल गई होगी...फिर यकायक बेटी के आखरी लफ्ज कानों में टकराये .....

मैं सीधे उसके कमरे में गया ...उसका तकिया हटाया एक नीली डायरी बरामद हुई ...उसको पढ़ा और आँखों में कतरे उमड़ पड़े ...कुछ देर वहीँ सुबकता रहा यकायक सामने दीवार घड़ी पर नजर पड़ी ...सवा चार बज रहे थे ...मैंने तुरन्त लॉकर खंगाले और वो तमाम जगह जहाँ मैं रकम और गहनें अड़ा कर रखता हूँ ...लेकिन डायरीनुसार वहाँ कुछ भी न था ...फिर मैंने उस स्थान में जाकर अपने प्रॉपर्टी कागजात निकाले जहाँ मेरी बीवी की भी पहुँच न थी ..उनमें क्रम से सिग्नेचर किये और उन्हें एक बैग में रखा और अपनी कार निकाली ...

सीधा मोनार्की मल्टीप्लेक्स पहुँचा ...वहाँ मुझे एक आदमी ने कोड दिया ...और हाथ आगे बढाया....मैंने सीधे इनकार कर दिया कि बिना बेटी को रिसीव किये रकम न दूँगा .....

तभी मेरे सेल फोन में किडनैपर का फोन आया कि चुपचाप बैग दे दे वरना बेटी की लाश मिलेगी...मैं अड़ गया कि बस मुझे बेटी की शक्ल दिखा दो

...उसने मुझे अपने आदमी के साथ एक गाड़ी में बैठने को कहा ...गाड़ी मुझे एक खण्डर नुमा इमारत में ले गई ...मैंने देखा सामने मेरी बीवी और उसका आशिक  खड़े मुस्कुराह रहे थे ....और मेरी बेटी एक एक पत्थर के टीले पर बैठी थी.

..उसका मुँह बाँध रखा था.. उस खिडनेपर ने मुझसे बैग माँगा ...मैंने बेटी को पास भेजने की बात बोली उसने रिवाल्वर बेटी की कनपटी पर रखा ...मैंने बैग उसके पास फेंक दिया ...उसने बैग में कागजात टटोले और फिर...

" हा हा हा ...अबे चुगत पठान ... अबे तुझ से बड़ा चुतिया न देखा भैय्ये ...अबे ये तेरी नही मेरी और तेरी बेगम यानि मेरी जान शबनम के प्यार की निशानी है ...ये मेरा यानि बरकत और तेरी बीवी का ही प्लान था ..तेरी सारी मिल्कियत  हमने पहले ही जालसाजी से अपने नाम कर ली है अब बचा था तेरा बंगला और ऑफिस ...आज वो भी हमारे नाम हो गया है ...
और तू क्या सोच रहा है तेरे हिस्से क्या आया तो ले तेरे हिस्से आई है ये बन्दूक की गोली ...,

" अबे ओ ! बरकत ..मेरे हिस्से क्या आया है जानना चाहता है तू ...तो खोल इस मासूम का मुँह ..और फिर देख जिसे तू अपनी औलाद बोलता है भले ही वो तेरे और इस बदचलन औरत की अय्याशी का नतीजा है लेकिन अल्लाह ने उसके दिल में अब भी मुझे ही अपना बाप मानने का जज्बा भरा है ..,खोल उसका मुँह ताकि वो तेरे और इस अय्याश औरत के मुँह पर थूक सके ...

शबनम ने तेजी से बच्ची के मुँह से रुमाल हटाया और उसने वही किया दोनों के मुँह पर बराबर का थूका ....और दौड़ कर मेरे गले लग गई .....

मैंने उसको पहले जब भी गले लगाया था तो खुदा का शुक्र किया आज उसे गले लगाकर ऐसा लगा कि जैसे मेरे रब्ब ने मुझे मेरी इबादत का आसमान खोल कर सिला दिया है ....

बरकत ने बढ़कर मेरी बेटी को मेरे गले से अलग किया ...और मेरे मुँह पर एक ठोकर मारी मुँह से लहू जारी हो गया मेरी बेटी चिल्लाई और फिर दौड़कर अपनी फ्रॉक से मेरे मुँह को पोंछने लगी ...बरकत ने उसके बाल पकड़ कर उसे शबनम के आगोश में फेंका ...और मेरी छाती पर रिवाल्वर टेक दी ....फायर हुआ

लेकिन इस बार नेकी का ...पुलिस मौके पर पहुँच चुकी थी ..और सबको गिरफ्तार कर लिया ...मेरी बेटी अब भी मुझे दूर से घूरे जा रही थी और फिर एक मुस्कान बिखेर मेरे गले लग गई .....हम दोनों अपनी कार की तरफ लौट रहे थे तो बेटी बोली -

" पप्पा अगर मैं उस डायरी में मम्मी और बरकत अंकल का सारा प्लान न लिखती और अगर पुलिस अंकल को स्कूल जाने से पहले इन्फॉर्म करके उनके अक्रोडिंग न चलती तो क्या आप मुझे लेने नही आते ...?

" मैं क्या कोई पत्थर भी वो लिखा हुआ पढ़कर तुम्हारी ओर चलने लगता बेटा ...इतना प्यार तो मुझे मेरी सगी औलाद भी न करती ...जितना तूने कर के खरीद लिया ...तेरी कसम बेटा ...आज से मैं ही तेरी माँ हूँ और मैं ही तेरा बाप ...तेरे मेरे बीच अब कोई नही आएगा ...न तेरी असली  माँ न तेरी सौतेली माँ ...लेकिन बेटा तू अपनी स्पेलिंग मिस्टेक सुधार ले तूने  आखरी में लिखा था आई लव यू  फप्पा.....!

उसने ठकाका भरा और मैंने उसको मुट्ठी में भर आसमान की जानिब उछाल दिया
नवाज़िश
#जुनैद.........

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