Sunday, 30 September 2018

सभ्य समाज

अबे पप्पू आवाज न फेंक  रिया ये ....फू ..फू..फू...हैलो माय टेस्टिंग ..चेक ..चेक..चेक ...टेस्टिंग ..1234...टेस्टिंग ....
अबे ठीक है ठीक है हिलाइयो मत अब ....

" जी...तो नमस्कार समस्त सभ्य आगंतुकों ..समस्त मानवता के सेवकगण ..आधुनिक भारत के निर्माताओं ..कलम के धनी..पत्रकारिता के निष्पक्ष सुमन गुच्छ..मानवाधिकार .. स्त्री विमर्श , समाजसेवक ..चिकत्सा और शिक्षा के आयाम ..भारतीय जनमानस के नेतृत्वकर्ता नेतागण ................

" आज हम अत्यंत प्रफुल्लित ..आशावान एवं ऊर्जावान है ..क्यूँकि हम अबसे मात्र कुछ क्षणों बाद नववर्ष की नैया में यात्रा करके पूर्व वर्षों की भाँति ये संकल्प लेने वाले है कि आने वाले वर्ष को भी हम समस्त सभ्य ..जी हाँ सभ्य बुद्धिगण ..मानवता की अपनी सेवा और विकास की अपनी संकल्पना को यूँ ही आगे बढ़ाते रहेंगे....

" इस सभ्य पर्व पर एवं सभ्य मिलन पर आयोजक मण्डल ने सभी के लिए एक  सरप्राइज रखा है रात्रि 11:55 पर 5 मिनट के लिये बत्ती ऑफ करेंगे और 12 बजे ऑन करेंगे और सरप्राइज इसी के मध्य है ......तो हे सभ्य एवं चितेरे महामानवों 11:55 होने में सिर्फ एक मिनट बाकि है .......

समस्त सुधिगणों में पर्याप्त हर्ष एवं उससे चौगनी उत्सुकता थी ..बौद्धिक एवं कलाकार सभ्य महिला एवं सभ्य पुरुषों का ये समागम देखते ही बनता था ...तभी

धुप्पप !

" क्या कर रहे हो मिश्रा जी ...भोलू के पापा भी यहीं है ..."

" पूरे 5 मिनट का अँधेरा है कवियित्री रौशनी ...बस चुम्मा लेंगे ...

" ऐं..ऐं ये क्या बदतमीजी है नेता जी ...सब्र करो ..हाथ निकालो वहाँ से !

" हाय मैं मर जाऊँ मेरी कलाकन फटाफट रिपोर्टर ...सब्र नही होता ..बहुत करारी लग रई हो "

" उफ्फ्फ निजाम साहब ..चिंगोटी तो न काटिये ..

" न काटे तो क्या करें ..आपने आज जो बदन पे ये चुस्त लिबास लपेटा है हमारी लार तो इसपर कबसे ख़राब थी ...

" क्या कर रही हो फूलबानों ..हमारी बेगम साथ है "

" क्या हो गया डॉक्टर साहब ...जब आप ने बेहोशी का इंजेक्शन ठोक के हमारे बटन खोले थे क्या हमनें कुछ बोला था ...

" एहें ..एहें .. मास्साहब ..आप का हाथ हमारी पीठ को सहला रहा है ....."

" सहलाने दो न ...कौन सा यहाँ बत्ती जली है जो महिला उत्पीड़न की निगेहबान आप लाइट में आ जायेगी ...

"  न न लेटेंगे नही ..

"अरे ..साड़ी खुल जायेगी... .

" छोड़िये न मिसेज तड़ित ...नाड़ा खुल जाएगा

" ई ..ई.. ई दाढ़ी चुभ रही है आपकी ...

" अरे होंठ नही कान है  ..

" चश्मा तो उतारने दो ...

" सिर्फ कुर्ती खोलेंगे...अभी 3 मिनट बाकि है !

तभी धुप्प !

बत्ती जलते ही सामने सभ्य समाज का एक खूबसूरत सभ्य नजारा था ...इतना खूबसूरत की सामने लॉन पर न जात -पात का ढकोसला था ..न धर्म -मजहब की नफरत ..न स्त्री -पुरुष का भेद ...न रूढ़िवादिता का दंश ..न संस्कृति की केंचुली ..न सभ्यता का परम्परा वादी रूप .... कोई किसी की लिए खड़ा था ..कोई किसी की लिए पड़ा था..कोई किसी पर तो कोई किसी पर चढ़ा था ....

लेकिन बत्ती जलते ही एकदम सन्नाटा हो गया ...सभ्य समाज सकते में आ गया ..सभ्य और बौद्धिक जनों ने अपने लिबास दुरुस्त किये ...लटके नाड़ो पर मिल्ट्री गाँठ गेरी .. होंठों और गलों से लिपस्टिक के निशान पहुँचे ...और फिर बौद्धिक सुधिजनों ने आपस में एक दुसरे से नजर ही नजर में बात की ...

और यौन उत्पीड़न ..बालात्कार मुक्त भारत की तेजस्वनी ने आगे डग भरे और संचालक का गला पकड़ लिया ...

" हम सभ्य और इंटेलेक्चुअल्स की इन्सल्ट करने यहाँ बुलाया था ...हमारे साथ चीटिंग की गई ...5 मिनट की बत्ती गुल करने को बोला था और 3 मिनट में ही ऑन कर दी ....उसके बाद तो सभ्य समाज एक हो गया और किसी ने इस धोखाधड़ी के खिलाफ सड़क मार्च ..तो किसी ने अख़बारों में लेख ..तो किसी ने फटाफट रिपोर्टिंग में इस कांड का खुलासा ..किसी ने विपक्ष की चाल ...किसी ने अधिकारों का हनन ..किसी ने निजता को चुनौती ..किसी ने मानहानि ..किसी ने लोटा किसी ने लस्सन वगैरह वगैरह की धमकी से संचालक को घेर लिया ......

अंततः ..आयोजक को बुलाया गया ...3 मिनट में बत्ती जलाने की लापरवाही में गरीब पप्पू पर दोषारोपण कर उसे सेवा से तत्काल बर्खास्त किया गया ..और तब प्राण छूटे जब सभ्य समाज को 10 मिनट की बत्ती गुल का मानहानि उपहार पुनः दिया गया ...नवाजिश
#जुनैद........

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