#इट्स_पॉसिबल
★★★★★★★
" मेरे पास कितना वक्त है डॉक्टर साहब ...नही आज सच बोलिये प्लीज ...कितना ......?"
" ज्यादा से ज्यादा अब 6 महीने !... सुनो ..अरे सुनो... राकेश ..मिस्टर राकेश ....."
हॉस्पिटल से बाहर निकलते ही ..मैंने सबसे पहले अपने होंठों को चबाया ...फिर रुमाल से अपने चेहरे का पसीना पोंछा ..और जेब से सिगरेटकेस निकाला ...जो शरीर में हाँफती- दौड़ती कँपकँपी से जमीन पर गिर गया .....
मैंने उसे उठाकर उसमें से एक सिगरेट निकाली और थरथराती अँगुलियों से सिगरेट को अपने होंठों पर लगाया ।।।।।
लाइटर सर्च किया ....और पाया शायद वो रूम में ही रह गया ......तभी किसी ने लाइटर से मेरी सिगरेट जलाई ......मैंने लाइटर जलाने वाले के चेहरे की ओर देखा .....और उसने तपाक से मुझसे एक सवाल पूछा.....
" कोई प्रॉब्लम है ...इतना परेशान क्यूँ दिख रहें हैं ......?"
" वो ....वो..न..नही ..ऐसा कुछ भी तो नही ....आई एम आल राइट ..थैंक्स फ़ॉर हेल्प "
मैं सिगरेट का एक गहरा कस भरकर जैसे ही आगे बढ़ा ...उस आदमी ने मुझसे कहा.....
" मुझे कुछ पैसा उधार दे सकतें हैं आप ......?"
मैं रुक गया ...और न जाने क्यों ..किस धुन में मैंने सिर्फ युक्ति की तस्वीर और डेबिट कार्ड...ए.टी. एम कार्ड निकालकर बटुवा उसे दे दिया ...ये शायद मेरी मानसिक उलझन का परिणाम था या अवश्य ही ये भावना की जाते -जाते किसी के काम आ सकूँ....
वो आदमी हैरत में था ...इस कदर हैरत में घूरकर मुझे देखने लगा मानो किसी ने उसके विश्वास के या तो परखच्चे उड़ा दिए हों या फिर किसी ने उसके धराशाई विश्वास को जिंदा कर दिया हो ....मैंने उसके काँधे को थपथपाया और मैं अपनी कार की तरफ बढ़ा और उसे स्टार्ट किया ....कुछ मीटर आगे बढ़ा ही था कि मेरी नजर अपनी कार के साइड मिरर पर पड़ी ...और मैंने देखा वो आदमी अब भी वहीं खड़ा था .........
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खड़ा तो आज से 3 साल पहले मैं भी कुम्भा जंक्शन में था ....सर्द ठिठुरती शाम.... और उसपर जंक्शन में सिर्फ इक्का -दुक्का इंसान ........ गाड़ी पटरी पर आ लगी ...तो मैं अपने कम्पार्टमेंट में चढ़ गया ....मैंने सबसे पहले अपने रिजर्वेशन रूम की खिड़कियाँ बन्द की और फिर जैसे ही दरवाजा लॉक कर रहा था तभी ~~
" प्लीज हाथ खींच लो ...सिर्फ 30 मील आगे उतर जाऊँगी ...प्लीज ....!"
ट्रेन विशिल देकर हौले-हौले आगे बढ़ने लगी ..बेशक अगर वो कोई मर्दाना आवाज होती तो मैं उसके मुँह पर दरवाजा मार देता ...बेशक कोई अधेड़ ..बूढ़ी होती तब भी मना कर देता ...लेकिन 20-21 साल की वो लड़की ...जिसकी सुंदरता से मेरी आँखें चुंधियाने लगी ....मैंने तुरन्त उसे ऊपर खींच लिया .......और ट्रेन के पहियों की रफ्तार नंगी पटरियों को चूमने लगी .....
बेशक वैसे ही जैसे मेरी आँखें उसके छुटके से स्कर्ट से उसकी नंगी टाँगों को .....
" ठंड बहुत है ....चाय -वाय तो मिलेगी नही ....थोड़ा रम लेंगी आप ...इफ यू डोंट माइंड "
" ओके ...वैसे मैं लेती नही ...लेकिन आपने मेरी हेल्प की है ...सो चियर्स "
उसके होंठों से चीयर्स सुनकर ..मैं समझ गया कि 30 मील का ये सफर मुझे 30 जन्मों तक याद रहने वाला है ......
इधर-उधर की बाते करते रहे हम ...न मैंने उसे बताया कि मेरी कोई प्रेमिका है ...और वासना के नशे में न उससे कुछ पूछने का मेरे पास वक्त था .....
धीरे-धीरे मैं उसके करीब होता रहा ...और वो मदहोश सी होती रही .....लेकिन जैसे ही मैंने नशे में हिम्मत करके उसे अपनी बाँहों में भरा ...वो चिल्ला उठी ...
" देखो साहब ....मुझे टच मत करो ....वरना मैं चिल्ला दूँगी "
" अबे ड्रामा क्यों कर रही है ...बोल कितना लेगी ..बोल ?"
वो लड़की तुरन्त तपाक से बोली ~
" साहब मैं बता नही सकती ...ठीक है आप को ऊपर-ऊपर जो करना है कर लो ...लेकिन वो नही जो आप चाहते हैं "
मैंने सोचा खाली ड्रामा कर रही है .. और मैंने उसकी हाँ में हाँ मिला दी ...शराब के नशे में न फिर उसको कोई होश रहा न मुझको ...और जब होश मरने लगता है तो इंसान का विवेक भी जगाये से नही जगता ....
हवश शांत होते ही मैंने खड़े होकर अपनी पेंट पहनी और धप से अपनी सीट पर बैठ गया ......और मैंने एक खिड़की खोल दी ....ठंडी हवाओं के अंदर आते ही मेरा नशा भी टूटा और उसका भी ....वो खड़े होकर अपने कपड़े दुरस्त करने लगी ....मैंने 100 के पाँच नोट उसके हाथ मे रख दिये ....फिर हमारी कोई बात नही हुई ...उसका स्टेशन आया और वो जब उतरी तो बोली ~
" मुझे माफ़ कर देना साहब ...हाँ मैं वैश्या हूँ ..एक बहुत बुरी औरत ...लेकिन शराब के नशे ने मुझे बिल्कुल .....साहब मुझे माफ़ कर देना ...."
मुझे आने वाले 6 महीने तक नही पता चला कि वो लड़की क्यूँ मुझसी माफी माँग रही थी ....लेकिन 6 महीने बाद मुझे बताया डॉक्टर ने .....
" राकेश मेरा शक वाजिब था ...यस यू आर HIV + "
मेरे पैरों तले जमीन सरक गई ....मैं गिड़गिड़ाकर डॉक्टर साहब से बोला ~
" लेकिन कैसे ...मैं ही क्यूँ .....?"
तब लगातार उस लड़की की माफ़ी मेरे कानों पर बिजली बनकर टूटने लगी .....
" इट्स ओके ...प्लीज कॉम डाउन ...राकेश मेडिकल साइंस के पास हाँलाकि इसका कोई इलाज नही ..बट हम इसके इफेक्ट को कंट्रोल कर सकतें हैं ....लेकिन अगर तुम चाहो तब ..राकेश ये कोर्स तुम्हे पूरी जिंदगी करना होगा ... एक दिन का भी नागा नही समझे ....एव्री डे आर इम्पोर्टेन्ट ..अंडरस्टैंड !
"
लेकिन मुझे पता था ये सिर्फ एक दिलासा है ...हो सकता है डॉक्टर सही बोल रहें हों .....
तभी मेरी नजर कलेंडर में गई ....15 मार्च 2001 यानि आज मेरी प्रेमिका युक्ति का जन्मदिन .....
मैंने डॉक्टर से इजाजत ली और शाम को युक्ति से इशरत बाग में मिला .....वो बोली ~
" नो ..नो .. प्रेजेंट- व्रेजेंट कुछ नही आई वोंट आ स्मूच किस इन माय लिप्स "
वो आँखें बंद करके अपने होंठों पर मेरे होंठों का इंतेजार करती रह गई .....लेकिन तब तलक मैं उसकी हद से दूर जा चुका था ...एक खत छोड़ कर जिसमें मैंने लिखा था कि ...." मुझे भूल जाना ! "
मुझे नही पता कि युक्ति मुझे भूल गई या नही लेकिन फिर मुझे अपने माँ-पापा की तेज याद आई ...याद आई अपनी बिन ब्याही बहन की ....याद आया पापा का सिवियर अस्थमा और याद आया माँ का ये कहना कि मेरा बेटा एक दिन हमारे दिन जरूर बदलेगा .....
अँधेरी सुनसान उस गली मैं ..मैं एक दीवार से सटकर बैठ गया ....और जी भर कर रोया ....अपने चेहरे को नोचने लगा ...अपने बालों को सर से उखेड़ने लगा ......और तब याद ये भी आया कि जिंदगी का एक रॉंग टर्न पूरी जिंदगी को गलत राह में धकेल देता है .....एक गलत स्टेप ...होश पर जोश को तरजीह देना इंसान को बर्बाद कर देता है ....उस दिन बाद के जरूर मैं दवाइयां खाने लगा ....लेकिन निरन्तर डिप्रेशन के चलते मेरा स्वास्थ्य गिरने लगा .....
खर्चा बहुत बड़ा था तो कार लोन के लिए बैंक तकादा करने लगा... कम्पनी में मेरी सुस्ती को देख मुझे फिर उसी पूर्व पद में स्थापित कर दिया जहाँ पूरे 5 साल काबिलियत ..निष्ठा और ईमानदारी से मैंने उससे मुक्ति पाई थी .....घर उतना पैसा भी नही भेज पा रहा था ...और ये भी भय था यदि किसी को ये राज पता चल गया तो सबसे पहले मेरी जॉब जाएगी फिर दोस्ती और उनका सहयोग .......
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डॉक्टर ने सिगरेट की सख्त मनाही की थी लेकिन अब इस भूतिया ..डरावनी और काली दुनिया में कोई तो उजाला चाहिए था ....सिगरेट जैसे ही मुँह पर लगाई तभी दरवाजे पर किसी ने नॉक किया ....
" तु..तु..तुम ...?
" जी मैं ...आकाश दीक्षित ...क्वांटम एंड पैरा कॉस्मॉस साइंटिस्ट विथ ड्रग न्यूरो ....एंड आई एम फ्रॉम इन वेरी न्यू डेली "
" व्हाट ....तो फिर आज तुम....मतलब आपने वो मुझसे पैसे क्यों माँगे .....?"
" बिकॉज़ ...आई हैव एम्प्टी ऑफ करंट करेंसी ....साफ-साफ कहूँ तो मेरे पास इस दौर का पैसा नही है ..... अंदर नही बुलायेंगे...?"
मैंने उस अजीब से आदमी को अंदर बुलाया ....उसे बैठने का आग्रह किया ...और उसके लिए किचन से पानी लेने गया ....जब पानी लेकर लौटा तो वो बैठा सिगरेट पी रहा था ....और टेबल में पड़ी मेरी मेडिकल फाइल को खँगाल रहा था ...मैंने उसके हाथ से फाइल तुंरत छीनी ..और उसे ऊपर अलमीरा में रख दिया ...
सिगरेट एस ट्रे में बुझाकर ...उसने पानी की एक घूँट पीकर मुझे मेरा पर्स वापस किया और बोला ~
" थैंक्स जेंटल मैन लेकिन ये कुछ बिल्स वगैरह थे पर्स में आपके ...इसलिए पता खोजने में परेशानी नही हुई ..... और आपकी परेशानी का कारण भी पता चल गया अब "
" म..म..मतलब ..?"
" यकीन कीजिये एड्स अब कोई लाइलाज बीमारी नही है ..बल्कि कहूँ तो हल्का सा बुखार जैसी जिसे दवाई की एक घूँट से हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है ..."
मैं सकपका गया ....और बोला
" आप जा सकतें हैं ...मैं समझता हूँ आप जैसे लोगों को...वो लोग जो किसी की बीमारी और दुःख से भी पैसा कमाना जानते हैं ...प्लीज लीव मी अलोन "
वो आदमी खड़ा हुआ ...और बोला ...
" हारा हुआ और मायूस आदमी यही सोच रखता है ...लेकिन यकीन करें ...ये अब कोई बड़ी बीमारी नही है "
मैंने तुरंत गुस्से में उस आदमी का गला पकड़ लिया ... उसने बड़ी इज्जत से मुझसे अपना गला छुड़वाया और बोला .....
" कंट्रोल करो सर ...ये रहा आपका पैसा ...आप भले आदमी लगे इस पूरे शहर मैं जिसने बिना कुछ पूछे -जाने मेरी मदद की ...तब ही आपके लिए दिल में हमदर्दी पैदा हो गई .....कुछ नही चाहिए मुझे ...जबकि मेरे पास इतना है कि आपका ये पूरा शहर खरीद लूँ ..."
मैंने उस आदमी से अब इज्जत से पूछा ~
" कौन हैं आप ...?"
वो फिर एक सिगरेट जलाकर उसे होंठों से लगाकर बोला ~
" टाइम ट्रेवलर ....समय यात्री ....22 वी सदी ...सन 2150 ...नही समझोगे आप ... आइंस्टाइन ने कहा था कि समय यात्रा की जा सकती है बशर्ते हम लाइट की स्पीड से यात्रा कर सकें ...हॉकिन्स ने बोला था कि पेरेलर यूनिवर्स से समय यात्रा सम्भव है ....प्राचीन कथाओं में भगवान का कहीं भी प्रकट हो जाना ...पैगम्बर का मे'अराज करना .... किसी का अचानक से कहना कि ये सब वो पहले कहीं देख चुका है ....ऐसे हजारों उदाहरण जो प्रूफ करते हैं कि समय यात्रा पॉसिबल है ...और लोग जाने-अनजाने करते आ रहें हैं ...लेकिन उनके पास न कोई प्रमाण हैं न कोई समझ ..क्यूँकि ये पलों में होती और समाप्त होती है .....कोमा में गया इंसान भी अक्सर समय से आगे निकलर जब वापस लौटता है तो अक्सर कहता है कि वो किसी और दुनिया से होकर आया है ....दिस इज़ साइंस और 22 वीं शदी में मैंने यानि आकाश दीक्षित ने वो कंडीशन इंवेंट कर ली है जो हमें टाइम ट्रेवल करवा सके ......तभी इस वक्त तुम्हारे सामने खड़ा हूँ "
मुझे उसकी बात पर रत्ती भर यकीन नही था ....लेकिन उसने मुझसे कुछ देर की इजाजत माँगी और फिर कुछ देर बाद वो वापस आया .....उसने मेरी टेबल पर ही कुछ केमिकल्स और टेबलेट्स को मिलाया और बोला ~
" इसे पी लो राकेश ....और अपनी पहले जैसी जिंदगी में लौट जाओ .....मेरा भी अब लौटने का वक्त हो रहा है ....."
मैंने उसकी बात नही मानी और उस लिक्विड की देखने लगा ....फिर जब सर उठाया तो वो आदमी वहां मौजूद नही था ...पता नही वो कहाँ चला गया लेकिन 3 दिन तक मैंने उस लिक्विड को हाथ नही लगाया ...वो सारे रैपर्स फेंक दिए ...सब सफाई कर दी ...तभी न जाने क्यों एक दिन बढ़ती खाँसी औऱ लूज मोशन से धीरे-धीरे मरते मैंने एक बार मरने का इरादा कर लिया ....और चाकू से नश काटने लगा तभी नजर सामने उस लिक्विड पर गई ....न जाने क्या हुआ मुझे और एक घूँट में मैंने वो लिक्विड पी लिया और फिर मुझे नींद आने लगी ....
8 घण्टे बाद जागा तो ...तो शरीर को बहुत हल्का महसूस किया ...और कुछ दिन गुजरने के बाद भी न कोई खाँसी मुझे हुई न कोई सुस्ती और न किसी बीमारी ने मुझे घेरा .....जब बिल्कुल फिट हो गया तो एक दिन मैंने पुनः अपना टेस्ट करवाया ....मेरे सारे रेस्ट निगेटिव थे ...मैंने कई बार अपने टेस्ट करवाये लेकिन हर बार टेस्ट निगेटिव थे ....
मैं जी उठा झूम उठा ....युक्ति के पैरों में गिरकर उससे माफ़ी माँगी ...डॉक्टर साहब पूछते रह गए कि ये मिरिकल कैसे हुआ ...लेकिन मेरे पास कोई जवाब नही था .....मैं इस कहानी की किसी से साझा भी नही करता ..क्यूँकि इससे सिर्फ मेरा मजाक उड़ेगा ...कोई नही मानेगा ...लेकिन एक दिन टाइम ट्रेवल पॉसिबल होगा इस बात की मुझे बेहद खुशी है ....तब तक शायद मैं जिंदा न रहूँ लेकिन मैं अगर फिर होश न खोता तो उस आदमी से कम से कम वो लिक्विड बनाने की जानकारी तो ले ही लेता जिससे तब तलक एड्स से अनगिनत लोगों की जाने तो बचाई जा सके ।।।।।
क्यूँकि हर बार कोई मसीहा समय को फांद कर नही आयेगा ...
नवाज़िश
By~✨✍️
Junaid Royal Pathan
🥀 रानीखेत (उत्तराखंड)
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