Wednesday, 13 November 2019

याक़ूत

#स्याह !
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" काले हुए तो क्या हुआ साहब ..आपकी तरह हैं तो इंसान ही न ......!"

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" न भात न खायेंगे अम्मी ...पेले ये बताओ ...अल्लाह का लंग कैसा है ...?"

" तू...तू... तू ...पागल हो गया है क्या ..जुल्फि....अल्लाह तौबा ...चल चुप -चाप भात खा फिर हमें खेत भी जाना है ...अब्बू अकेले हैं वहाँ "

" हलामी हैं छब ...काला-कलूटा ..कोल भट्टाल ..कोलाखान बोलतें हैं ..."

" जुल्फि ...जुल्फि...कहाँ जा रहा है अरे रुक तो सही ...बेटा ...रुक ..."

जुल्फिकार अब बड़ा होने लगा था ..अब तक सब इसलिए सह लेता था क्यूँकि अक्ल नही थी ..और ये भी नही पता था कि लोग जब उसको काला-कलूटा बोलतें है तो असल में वो उसका मजाक बना रहे होते हैं ... लेकिन वो खिल -खिलाकर हँसता था ..उसके साथ के बच्चे उसके रंग से इतनी घिन करते थे कि जुल्फि के हाथ की कोई चीज खाते भी नही थे ....

बच्चों के अंदर ये एहसास कैसे पैदा हुए खुदा जाने लेकिन आज जुल्फि को पहली बार इस रोज की बेइज्जती की शिकायत करते हुए देखा . .आँखों में मन भर भारी आँसू लेकर....सुबह से निकला दिन का थका और भूखा मेरा बच्चा न जाने कहाँ दौड़ गया ....

मैं उसके आने की राह देखती रही कि भूख उसको वापस अपनी अम्मी के पास खींच लायेगी लेकिन मेरी और पेट दोनों की मजबूरी मुझे खेत में ले गई ....जहाँ मेरे मियाँ हल चला रहे थे ......

" सुनो जी ...."

मैंने तमाम बात जुल्फि के अब्बू को कह सुना दी ....

" तो क्या ऋषि कपूर कहें उसको ...साला मनहूस ...न शक्ल का भला न अक्ल का ...जानती हो अभी बताया उसके मास्टर ने कई दिनों से स्कूल नही जा रहा है ....देखो आज रात साले सूअर की खाल खींच लूँगा "

उस रात मैं हाथ जोड़ती रही अपने शौहर के कि मर जायेगा मेरा बच्चा ..लेकिन वो न माने दिन -भर का भूखा -प्यासा मेरा बच्चा इस बेइंतहा मार से बेहोश हो गया .....

रात को 1 बजे तलक उसका सर अपनी गोद मे लेकर दीवार के सहारे बैठी रही ....और तब उसे होश आया ....

" अ..अम.. अम्मी भूत लदी है ..."

मेरी आँखों से खिताब बेजार आँसू मेरे चाँद के चेहरे पर झरने लगे हैं... और उसका सर तकिए पर रखकर ..मैं सीधे बावरची खाने को भागी ....और फिर रोटी का पहला लुकमा जो ही उसके मुँह में डाला ...

" अब्बू ...अम्मी ..कल्लू को खाना खिला रही है ...."

मेरा  छोटा बेटा  जाग गया था  ..और अपने बड़े भाई को कल्लू बोल रहा था ....तभी मेरे शौहर खाट से उठकर आये ....और जैसे ही उन्होंने मेरे हाथ से खाने की रकाबी फेंकने के लिए हाथ आगे बढ़ाया ....मैंने आज शर्म का हर पर्दा जैसे एहतिराम के मिम्बर पर रख दिया ...उनकी आँखों में अपनी बेबाक आँखें पैवस्त कर दी ...वो खड़े-खड़े जम से गये ....और पीछे हट गए ....मैंने अपने लाल को अपने हाथों से खाना खिलाया ...और तब आँखें छल-छल करके बरस पड़ी जब मेरी मासूम बिटिया सबीना हाथों में पानी का कुल्हड़ लिए खड़ी थी ..डरी ..सहमी लेकिन अपने भाई की मुहब्बत से लबालब ...

वक्त कुछ आगे बढ़ा और जुल्फि 18 का हो गया ...इस 18 कि उम्र में वो मेट्रिक में तीन दफा फेल हुआ और पढ़ाई छोड़ दी ...बाप के साथ दिनभर खेत मे बैल की तरह जुता रहता ...

" सुनो आइशा कुछ कहना चाहते हैं तुम से ...."

" बोलो !"

" सनीमा देखने चलोगी हमारे साथ ...कल शहर जा रहें है ...दिन तलक लौटा लायेंगे "

" काहे ...काहे चलें ...पगला गए हो कल्लू ..कालीचरन ?"

" वो प्यार करते हैं तुमसे तबी न बोला "

" छी ..वैक ..अपनी शक्ल देखी है कभी मनहूस तूने ...उल्टा तवा ..कल्लूटा ..सोचा भी कैसे तूने ...अब बोला तो अब्बा से बोल दूँगी समझा ...चल हट रास्ता छोड़ "

आइशा ने फिर भी अपने  अब्बू से कह ही दिया..बड़ी माफी दरयाफ्त कर बात को अपने मियाँ तलक न पहुँचने दी ...फिर एक दिन जब मैं अपने बच्चे और मियाँ को खेत मे खाना खिला रही थी ...तभी मेरा छुटका बेटा दौड़ते हुए आया .....

" कल्ल.....जुल्फि भाईजान ..वो सबीना का दुपट्टा खींच लिया ..रियासत खान के लौंडे ने ...."

मैं आवाज लगाती रही ...लेकिन जुल्फि हाथ में फड़वा लिए दौड़ चुका था ...रियासत खान गांव का दबंग आदमी था ...उसके अब्बू उसके पीछे दौड़े ...लेकिन तब तलक देर हो चुकी थी ....जुल्फि ने वो फड़वा रियासत खान के बेटे के सर पर मार दिया था .....

अपने बच्चे की भागती पीठ ही नजर आती है आज भी सपने में ...जुल्फि ने सोचा उसके हाथों कत्ल हो गया है लेकिन वो लड़का बड़ी हुज्जत और इलाज से बच गया ....लेकिन जुल्फि फिर कभी वापस न लौटा .......

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लौटता भी कैसे ... भला अम्मी और सबीना के सिवा मुझे चाहता ही कौन था वहाँ .... लेकिन आज इस शहर में ....परछाई भी अपनी नही .... 

" क्यों बे हरामी ...साले अंदर कर दूँगा ...अगर कल यहाँ सोते हुए दिखा तो समझा ...चल फूट यहां से "

पुलिस वाले कि बात में दम नही था ....लेकिन उसका जिस्म और डंडा उसकी बात में वजन पैदा कर रहा था .....

" साहब ...फिर इतना बता दो कि इस शहर में वो कौनसी जगह होगी जहाँ मैं सो सकूँ "

पुलिस वाले ने मुझे घूर कर देखा और बोला ...

" कहाँ अपने पूरब से हो का ...?"

मैंने एक साँस में सब न जाने क्यों उसे बताया दिया ....

" देखियो बे लौंडे ...ये फड़वे वाली बात किसी और से मत कहियो समझा ...अब चल मेरे घर में ...नही तो ठंड से मर जायेगा यहाँ "

राधेश्याम तिवारी नाम का वो पुलिस वाला मुझे अपने घर ले गया ....वहाँ मुझे उसकी बीवी मिली जो मेरे ही रंग की थी ...बड़ी इज्जत से उसने मुझे खाना खिलाया ...और मैं सो गया ...

अगले दिन जब तिवारी जी ड्यूटी पर चल दिये तब मैं सोकर उठा ...तो चाय भी मिली और नाश्ता भी ...और पता चला कि इनका मेरी ही उम्र का लड़का एक  मोटर साईकिल के एक्सीडेंट में मारा गया ...अब समझा तिवारी जी मुझे यहाँ क्यों लेकर आये ...तभी

" बहुत भुलक्कड़ हो गयें हैं ये ...अब बताओ अपना फोन और परस भी भूल गए ...चित्रलोक में आज ड्यूटी है उनकी ..सुना कोई फ़िल्म की शूटिंग चल रही है ...ये उनको दे आओगे वहां ....?"

मैंने पर्स और मोबाइल हाथ में लेने से पहले ...एक सवाल दागा 

" अगर इन्हें लेकर भाग गया तो ..?"

" पूरबिया मिट्टी  नमकहराम सपूत नही जनती  बेटे ...ये लो जल्दी दे आओ "

सिर्फ बेटा शब्द बार -बार दिमाग मे मृदंग बजा रहा था ...चित्रलोक पहुँया...

" कहाँ ..अबे कहाँ घुस रहा है बे कालिये ....?"

" वो हवलदार तिवारी जी से मिलना है ये सामान देना है उनको अंदर ...."

" अबे हरामी ....चला रिया है ...साले शूटिंग देखने घुसना चाहता है अंदर ....अरमान खान की फ़िल्म है साले और हम उनकी सिक्योरटी में है समझा "

मैं दूसरी तरफ से घुसने की कोशिश करने लगा वहाँ भी वही हाल था ...बड़ी अजीब बात थी जहाँ बाहर पुलिस को होना चाहिए था वो अंदर थी और ये सिक्योरिटी वाले बाहर ...मैं फिर गेट के पास पहुँचा....

" भैय्या सिर्फ एक बार ...अच्छा उन्हें ही बुलवा दो ..."

" तेरी माँ का कलूटे ...कहा न अरमान खान की फ़िल्म है "

 गुस्से की हद अब पार हो चुकी थी क्यूँकि उस झाड़ ने मेरी अम्मी की गाली दी थी ...मैं चीख कर बोला ~

" अबे तो क्या खुदा हो गया अरमान खान ...अबे है तो इंसान ही ।।अबे चाटने -चुटने न घुस रिया हूँ उसे अंदर ...समझा और घण्टा भी गाली न दियो हमारी अम्मी को वरना एक फड़वा तुम्हारे सर पर भी दे मारेंगे .."

जैसे ही सिक्योरटी वाले ने मेरे ऊपर हाथ उठाना चाहा 
..तभी

" ठहरो ..जॉइंट ...इस लौंडे को अंदर भेजो "

वो आदमी मुझे किनारे ले जाकर बोला ~

" क्यूँ बे चरबी चढ़ गई है साले 
..? डंडा घुसवा देंगे पिछवाड़े पर समझा ...काला कहीं का "

" काले हुए तो क्या हुआ साहब ..आपकी तरह हैं तो इंसान ही न ......!"

वो आदमी मुझे देखता ही रह गया ...और बोला ...

" यही डायलॉग कैमरे के सामने बोल सकता है फटेगी तो नही तेरी ?'

" सच बोलने में कच्चे दूध के जनों की फटती है साहब ..मेरी अम्मी ने बहुत गाढ़ा दूध पिलाया है मुझे "

तिवारी जी दौड़े चले आये ...लेकिन उनको पीछे किया गया .....और जिंदगी में पहली बार मेरी अम्मी के बाद किसी ने मुझे सजाया ..सँवारा ....कैमरा सामने था  और अल्फाज जुबान में ......

उसके बाद न जाने फिर क्या हुआ ...मैंने कभी पीछे मुड़कर ही नही देखा ....और आज जब...कामयाबी का पहला जाम मेरे हिस्से में आया तो मेरे पैर उखड़ने लगे .. साँसे फूलने लगी ....एक से बढ़कर एक हसीन तर हसीनाएं मुझे हवा में चुम्बन फेंक रही थी ... वो मुझे छूना चाहती थीं ....यहाँ तक उन्होंने मुझसे अपने प्यार का इजहार किया ....लेकिन मैं बढ़ता ही जा रहा था .... 

मेरे कान में अब भी ये कामयाबी की आवाजें नही बल्कि वो लफ्ज अब भी धमाके कर रहे थे जो माँ के पेट से जमीन पर उतरने के बाद मुझे मिले...

" कालिया ..कलूटा ..कोलतार .....उल्टा तवा ...मनहूस..हरामी ....मैंने आँख मींच कर  कानों पर हाथ रख लिए ....तभी फिर एक आवाज मद्धम -मद्धम छनते हुए मेरे कानों में टकराई ....जो मेरी अम्मी अक्सर मुझसे कहा करती थी ...

" तू चाँद है बेटा ....उजला अल्लाह ने इसलिए नही बनाया तुझे क्यूँकि तू मैला हो जाता "

मैंने आँखें खोली और कानों से हाथ हटाया ...सामने मंच पर मेरी अम्मी माइक लिए खड़ी थी उसकी आंख में आँसू थे और उसी मंच पर एक किनारे खड़े हवलदार साहब ..उनकी बीवी और मेरी बहन सबीना भी थी ....लेकिन आँखे और सर झुकाकर मेरे अब्बू और भाई भी थे ....और दुनिया के किसी कोने से आइशा भी  जरूर ये मंजर देख रही होगी...मुझे हरगिज नही पता उसका क्या हाल होगा ..लेकिन मैं अब भी सुकून में नही हूँ .. अवार्ड लिया ...तालियां बजी ...नाम फिजा में हर सू फैला ...लेकिन एक सवाल अब भी बाकी रह गया .....

" कि हर काले स्याह रंग को अपनी चमक ,अपना हुनर मनवाकर ही इज्जत मिलेगी ..या फिर अभी हमें एक  और आजादी   मिलनी बाकि है ...वो आजादी जो हमें कुछ हद तो इंसान बना सकती है ......और हमारी इस बेहद स्याह सोच जो जानवरों में भी कहीं नही पलती उसे जमींदोज कर सकती है "

नवाज़िश

By ✍️
Junaid Royal Pathan

🥀 रानीखेत (उत्तराखंड )

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