Friday, 29 November 2019

A jurny

#A_जर्नी 
★★★★★

" हैलो गाइज ...रात के बज रहें हैं बारह ...मैं आपका दोस्त आर. जे   निशांत मेहरा .....दिल टूटे या ..कोई रूठे ...कोई करे बेवफाई.. या जी.एफ . हो जाये पराई.... अब न रहेगा कोई टेंशन ...बस दबाओ एक्सरिलेटर ...दिखे कोई खाई ..या कोई बोल्डर ..धकेल दो गाड़ी ....और हो जाओ कूल ...मरना ही तो है जिंदगी से कनेक्शन.... तो क्यों लेते हो टेंशन.... गो ..मूव... प्लेयिंग दिस सांग योर लास्ट जर्नी ....."

" आकाश ....आकाश ....वो .....सामने...इडियट वो खाई है ....."

कार को उर्मिला ने हेंड ब्रेक खींच कर जेम कर दिया ....लेकिन मुझे क्या हुआ था ...मेरा दिमाग कैसे जेम हो गया ....ओह्ह माय गॉड मेरा पूरा हँसता -खेलता परिवार कार में था... मेरी पत्नी उर्मिला मेरे दोनों बच्चे वैभव और त्रिशला 

 "आर यू ऑल राइट अक्की ....कॉम डाउन बेबी ...क्या हो गया था तुमको ?"

" उर्मिला न जाने क्या हो गया था ..हाँ  याद आया ...तुमने वो आर. जे निशांत की बातें सुनी रेडियो पर ...?"

" हाँ वो तो हम रोज ही सुनते हैं ...इट्स वेरी कॉमन  एंड नॉर्मल ...हुआ क्या अक्की बताओ तो सही प्लीज ...?"

मैंने अपनी हथेलियों से अपने चेहरे पर पसीने की बूँदों को पोंछा ...और फिर  चिल्लाकर उर्मिला से कहा ...

" आर यू ड्रंक्ड...इडियट वो  कह रहा था कि मैं कार का एक्सीडेंट कर दूँ... और मैं.. मैं ..फूल उसकी बातें फॉलो कर रहा था ...फक यार "

" अक्की करेक्ट योर लेंग्वेज ...किड्स आर हेयर एंड स्लीपिंग  ....बट रियली वो ऐसा कुछ नही बोल रहा था ....बिलीव मी "

बात आई गई हो गई लेकिन सिर्फ मेरी फैमिली के लिए ...लेकिन अगले दिन में ...लेमन टेल  एफ.एम के ऑफिस गया ...और ऑनर मिस्टर कार्तिक धवन से मिला ...मैंने उन्हें कल रात की पूरी बात बताई ....और वो सीधे मुझे रिकॉर्डिंग रूम में ले गए ...

आर. जे निशांत का पूरा वायरलेस ऑडियो उन्होंने मुझे सुनाया ....लेकिन कहीं भी उसने ऐसा कुछ भी  नही कहा जिसको सुनकर मैं अपने और अपने परिवार की जान लेने पर आमादा हो गया ......

मैं मिस्टर धवन से हार्डली माफी माँग कर जब लेमन टेल एफ. एम ऑफिस से बाहर आया तभी मैंने एक सोचा कि क्यों नही एक  बार मैं आर. जे निशांत से भी मिल लूँ ....

लेकिन पूछ ताछ करने पर पता चला वो सिर्फ रात का प्रोग्राम ऑपरेट करता है ......मैं सीधे वहाँ से निकलर अपने एक साइकोलॉजिस्ट फ्रेंड दिवाकर बख्शी से जाकर मिला और उसे बीती रात की पूरी घटना सुनाई ....

" इट्स हॉररिबिल ...बट इट्स वेरी नॉर्मल ....आई थिंक या तो तुमने ज्यादा ड्रिंक कर ली होगी ...या फिर तुम आजकल पूरी नींद नही लेते ...हो सकता है तुम्हे ड्राइव करते टाइम झपकी आ गई  हो और उसी में तुमने कोई सपना देखा हो ..लेकिन क्या पता ये कुछ और हो...होता है आकाश ...इवन मेरे साथ तो अक्सर होता है ....मैं आज तलक निर्मला को नही भूल पाया और अगर मैं कहूँ कि वो इस वक्त तुम्हारे बगल की शीट पर बैठी है तो तुम बिलीव नही करोगे पर वो है ..सी इन योर लेफ्ट साइट "

मैं डर से काँपते हुए एकदम से अपनी कुर्सी से उठ खड़ा गया ..निर्मला.. दिवाकर की स्वर्गीय पत्नी है ...हाउ केन पॉसिबल ..? दिवाकर मुझे रोकता रहा लेकिन फिर मैंने सीधे घर की राह ली ...डोर बेल दी -

" अक्की ..व्हेर आर यू ...फोन घर में भूल गए ...ऑफिस में फोन किया तो पता चला तुम आज ऑफिस नही गए तो फिर तुम कहाँ थे अब तक ...?"

मैंने उर्मिला की बात का कोई जवाब नही दिया ....और सीधे बैडरूम में जाकर सो गया ...आँख खुली शाम के 5 बजे तो उर्मिला मेरे लिए कॉफी लेकर आई ....

"अक्की प्लीज शेयर मी... इट वॉज जस्ट एन इंसिडेंट बेबी प्लीज फॉरगेट ....चलो बच्चे भी जिद कर रहें हैं कोई बढ़िया सी रोमेंटिक मूवी देखकर आते हैं आज "

मैंने उर्मिला को गले से लगा लिया ....और गहरी-गहरी साँसे लेकर उसे जताया कि तुम हो तो मैं जिंदा हूँ ...तुम्हारी जिन्दगी और खुशी मेरे लिए सबसे बढ़कर है .....कॉफी पीकर मैंने शावर लिया और फिर हम सब वाल्ट्री मल्टीप्लेक्स में थे ....फ़िल्म बहुत अच्छी थी लेकिन न जाने क्यों अब भी मेरे दिमाग में कल की घटना ही घूम रही रही ....खैर फिर हमने एक अच्छे से होटल में खाना खाया और फिर हम घर चले गए .....

सब सो गये ...लेकिन मेरी आँखों मे नींद नही थी ...तभी मैंने मोबाइल में टाइम देखा ....पौने बारह बज रहे थे ....मैंने चुपके से उर्मिला का हाथ अपनी कमर से हटाया और जाकर कपड़े पहने ....और चुपचाप कार लेकर मैं लेमन टेल एफ. एम के ऑफिस चला गया ...रिकॉर्डिंग कंवरशेसन  स्टूडियो का आधा दरवाजा खुला था .....

अंदर एक बहुत हैंडसम लड़का ..आर .टी टेलीफोनी रेडियो कम्युनिकेशन फ्रीक्वेंसी सेट में लिसनर्स को डील कर रहा था ......पता किया तो पता चला.. ही इज निशांत।।

निशांत ने जब लिसनर्स के लिये सांग प्ले किया तो मैंने अंदर एंट्री की ...वो सकपका गया और उसने मुझे बाहर जाने का इशारा किया ...लेकिन मैंने इंसिस्ट किया  तो उसने आधे घण्टे वेट करने को कहा ....उसका रिलीवर आने तक .........

आधे घण्टे इंतेजार के बाद जब निशांत स्टूडियो से बाहर आया मैंने उसको अपना पूरा परिचय दिया और उस घटना का उससे जिक्र किया .....वो बहुत जोर से हँसा ...और बोला ~

" सर आई एम नॉट हिप्नोटाइजर ...आई एम ओनली ए रेडियो जॉकी ...."

उसने इन सब बातों को मेरा इनकॉन्शियस वहम बताया...लगभग 15 मिनट की उसके साथ हुई बातचीत ने मेरा मन मोह लिया ...और मैं उसका एक सीरियस फैन बन गया ......

स्टूडियो से बाहर निकला तभी मुझे अपने दोस्त साइकेट्रिस्ट दिवाकर की कार भी लेमन टेल ऑफिस के आगे  पार्क मिली ....मैंने उनको कॉल लगाया तो पता चला वो मेरे साथ हुए इस इत्तेफ़ाक पर एक किताब लिख रहें हैं और आर .जे निशांत से इस संदर्भ में कोई बात करने आएं हैं ....लेकिन अंदर तो वो कहीं दिखे ही नही .....खैर वो बाहर आये और हमने कोजो बार मे बैठकर एंटीक्यूटि वाइन के दो-दो पैग लिए ....

" यार आकाश ..बहुत कुछ रिसर्च करने के बाद लग रहा है ...कोई नेगेटिव एनर्जी का  तुम पर  इनफ्लुएंस है ...."

" व्हाट ...आर यू सीरियस दिवाकर ..मीन्स यू आर सेयिंग ...अ पेरानॉर्मल नेगेटिविटी डूइंग दिस ......मतलब कोई भूत-वूत ....एक डॉक्टर होकर तुम ....."

डॉक्टर दिवाकर ने एक और पैग आर्डर किया ....और उसे एक घूँट में अंदर करके बोले ~

" मैंने तुम्हें कब कन्वेंस किया कि ..मैं बुरी आत्माओं पर बिलीव नही करता ...मैं करता हूँ बल्कि ये होती है ...मेरी बीवी मरकर भी जिंदा है आकाश ..तुम इसे पागलपन कहोगे लेकिन मैं प्रूफ कर सकता हूँ.... "

" आर यू मेड डॉक्टर ...ओके प्रूफ करो ..."

" तो देखो उस वाइन कप को ..जो उस टेबल में रखा है ..."

मैं उस काँच के वाइन कप को देखने लगा ...तभी डॉक्टर बोले ~

" निर्मला प्लीज डिस्ट्रॉय वाइन कप "

मैंने चौंककर डॉक्टर को देखा लेकिन तब तलक एक आवाज के साथ वो गिलास चकनाचूर हो गया ....मैं अपनी राउंड चेयर से खड़ा हो गया ......और मुँह फाड़ कर कभी डॉक्टर तो कभी उस वाइन कप को देखने लगा .....डॉक्टर मुस्कुराह रहे थे लेकिन मैं थरथरा कर काँप रहा था .......

उस दिन के बाद मुझे लगने लगा कि कोई है जो मुझे नुकसान पहुंचाना चाहता है ...कोई है जो मुझे जान से मार देना चाहता है ....लेकिन मेरी बात का न मेरी पत्नी उर्मिला ने यकीन किया न मेरे बच्चों ने ....लेकिन डॉकटर दिवाकर ही थे जो मुझे समझते थे ....

मेरा व्यवहार बदलने लगा ...क्यूँकि अब वो साया मुझे दिखने लगा ...महसूस होने लगा वो कभी मेरे साथ हैं तो कभी मुझे घूर रहा है.....इस वजह से मेरा मानसिक संतुलन बिगड़ने लगा ....तभी पता चला डॉक्टर दिवाकर कुछ हफ्तों के लिए मॉरीशस चले गए .....

मैं अकेला पड़ गया ...मेरे असमान्य व्यवहार की वजह से उर्मिला बच्चों के साथ मायके चली गई ......

मैं अब उस घर मे अकेला था जहाँ वो साया अब हर वक्त मेरे साथ था ....दिन में मैं खुद को बाथरूम में बंद कर लेता और रात को पलंग के नीचे छिपा रहता ...नींद न आने की वजह से मेरा मानसिक आधार धीरे-धीरे फिसलने लगा ...भोजन न करने के कारण  मैं बहुत कमजोर हो गया ....एक रात अचानक से घर की बत्ती ऑफ हो गई ...और तभी मुझे वो साया अपनी खिड़की पर नजर आया ....मै  भाग कर बैडरूम में चला गया ....तभी  फोन की घण्टी बजी .....मैंने तुरन्त फोन पिक किया .....

" हे आकाश मैं लौट आया हूँ ....दिवाकर बोल रहा हूँ तुम जल्दी उस घर से बाहर निकलर सीधे मेरे घर आ जाओ वरना वो साया तुम्हे मार देगा "

मैंने तुरन्त फोन कट किया और जेब में डाला ..और फिर कार की तरफ दौड़ा 12 बज रहे थे .....जैसे ही कार स्टार्ट की तभी फोन की रिंग फिर बजी ....मैंने बात करके कार को आगे बढ़ाया ...और तभी एफ. एम बजने लगा .....

" हैलो गाइज  ....मैं आपका दोस्त निशांत ...यानि निशा का अंत... अंत ही जीवन का आरम्भ है ...अंत ही नव जीवन प्रदान करता है ....क्या रखा है इस जीवन मे जहाँ हर कोई आपकी जान लेना चाहता है ...मिटा तो खुद इस जीवन को वरना कोई तुम्हारे इस जीवन को खुद मिटा देगा ....ये गहरी खाइयां तुम्हारे हर दर्द को समेट लेंगी ....समा जाओ इनमें समा जाओ ... टर्न योर कार ...टर्न एंड जम्प "

और मैंने कार को नीचे खाई में जम्प करा दिया .....अगले दिन न्यूज पेपर ने मेरी मौत की पुष्टि की और मेरी लाश  नदी में बह जाने की वजह से न तलाशी गई ...

दो दिन बाद ....जब मेरे घर में ...एक जमावड़ा सा लगा था ...तब किसी ने दरवाजा नॉक किया ....अंदर आर .जे. निशांत .डॉक्टर दिवाकर और उर्मिला शराब के नशे में धुत थे ...

" यू आर अंडर अरेस्ट फ़ॉर आ सीवियर मर्डर प्लान "

पहले तो पुलिस फिर प्लान सुनते ही उनके होश उड़ गए ....और तब वो लड़खड़ाकर गिरने लगे जब उन्होंने मुझे अपने दोनों बच्चों के साथ देखा ...

पुलिस की सख्ती में उन्होंने कुबूल किया ....कि मैं यानि आकाश गुप्ता जो समृद्धि में एक लैंड लार्ड और एक बड़ी कम्पनी का मालिक हूँ ....उसकी ब्याहता उर्मिला ...और उसके दोस्त दिवाकर के बीच अवैध संबंध हैं ...दिवाकर जिसने इसी तरह से अपनी बीवी को मानसिक बीमार बनाकर कत्ल किया ...और मेरे लिए ये प्लान बनाया ...क्यूँकि मेरी मृत्यु यदि एक्सीडेंट के अलावा और कहीं भी होती तो वो फँस सकते थे ...सिर्फ कार एक्सीडेंट ही वो एक  वजह थी जो असमान्य नही लगती ....उन्होंने बताया कि इस षडयंत्र में आर. जे निशांत को इसलिए शामिल किया गया क्यूँकि मैं रेडियों और गीतों का बहुत शौकीन हूँ ..और हमेशा ड्राइव करते हुए रेडीयो सुनता हूँ ...आर.जे .निशांत जिसकी आवाज में काबिलियत है हिप्नोटाइज करने की ....उस दिन जब मैं कार में था तब अचानक से चलती कार में फ्रीक्वेंसी बदली मेरी पत्नी उर्मिला ने वो फ्रिक्वेंशी जो लेमन टेल प्रोग्राम की नही थी लेकिन प्लान अकरोडिंग उसे आर. जे .निशांत ने फिक्स्ड किया था ....उस समय बच्चे पीछे सो रहे थे जब निशांत ने मुझे कार को खाई में डालने के लिए प्रेरित किया ....और प्लान के अक्रोडिंग उसे फेल किया उर्मिला ने हैंड ब्रेक खींचकर ..ताकि इस घटना के बाद वो अपने प्लान को आगे बढ़ा सकें ........डॉक्टर दिवाकर का मेरा विश्वास जीत कर मुझे फिर ये समझाना कि ये सब नॉर्मल नही है ....और मैं फिर इन तीनों के बुने जाल में फँसता रहा और इन तीनों पर कभी मेरा शक भी नही गहराया ... मेरी बीवी जिसे सिर्फ दिवाकर और दौलत से प्यार रहा उसने कभी रत्ती भर एहसास नही होने दिया कि वो  इस घिनौने खेल में शामिल है..बल्कि इस खेल की चीफ है..वो तो उस रात जब दिवाकर ने मुझे अपने घर फोन पर बुलाया और जैसे ही मैंने कार स्टार्ट की तब मेरी बेटी का फोन आया जिसने एक साँस में इन सबका षडयंत्र मुझे बता दिया ....जो शायद इन मक्कारों की ढिलाई की वजह से उसने सुन लिया था .....

एक औरत अगर अपने पर आ जाये तो यम से प्राण खींच लाती है ...और यदि अपने से बाहर हो जाये तो यम को प्राणों का भोग लगा सकती है ...दोस्ती जो जुड़े रहे तो मरते दम तक साथ देती है लेकिन जहां लालच  और वासना दोस्ती में शामिल हो जाये तो दम नही लेने देती .......एक सवाल था जिसको मैंने हथकड़ी पहने दिवाकर से पूछा ....

" दिवाकर ...तुझसे दोस्ती तो हमेशा के लिये आज तोड़ दी मैंने.. लेकिन जाते-जाते ये बता कि वो वाइन कप कैसे तोड़ा तूने ..?.."

" हाई एल्ट्रा इन्विजुवल बीटा रेज ....जब तूने मुझे देखा तब मैंने शॉर्ट एल्ट्रा गन से उस गिलास पर बीटा रेज स्प्रे की ....."

जिंदगी थ्रिलर और हॉरर हो सकती है ...लेकिन जिंदा इंसान से बड़ा भूत और राक्षस कोई नही ....साया तो रौशनी की किरण बना देती है या मिटा देती है लेकिन वो दर्द जो अपने देते हैं उनको वक्त भी मिटाने से हिचकता है ।।।।।।

नवाज़िश

By✨✍️

Junaid Royal Pathan

🥀 रानीखेत (उत्तराखण्ड )

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