झूठ बोले कौवा काटे का ये जुमला बचपन से सुनता आया हूँ , हांलाकि ये जुमला अब तक सहिष्णु और बे विवादित संपत्ति है ... मतलब सीधे शब्दों में किसी भी धर्म , पंथ अथवा समुदाय ने इसपर अपने धर्म का आधिकारिक और ठप्पे वाला दम नही भरा है ....
मेरा बड़ा कर्रा और साबुत यकीन ये भी है कि जिस शब्द के पीछे फिर आलय लग जाये वो शब्द एवं संज्ञा फिर ऑर्थोडॉक्स नही रहती .... मतलब शौचालय ,देवालय , मस्तालय, पुस्तकालय आदि ....
प्रथम बार साँप को मैंने देखा भी अपने शहर की पुस्तकालय की खिड़की में ...साँप का भला पुस्तकालय में क्या काम ...?
मैं यदि आयु से ठिगना न होता तो अवश्य नगर के चीफ एक्सक्यूटिव ऑफिसर से उस साँप को अवश्य कोई प्रशस्ति दिलवाने की अपील करता ... या फिर शहर के किसी सम्मानित सीनियर सिटीजन से उसको कोई कम्बल .. लिहाफ ..काजल ..कंघा आदि तो अवश्य दिलवाता ...लेकिन जब वो उस माननीय सर्प को कोई कलम .दवात ..स्लेट..खड़ी या फिर कोई पुस्तक देते तो मैं उनका हाथ पकड़ लेता ....
और कहता मान्यवर ये सर्प है कोई इंसान नही है ... महोदय इसका निरादर तो न करें ... इसकी भारी भूल रही कि ये पुस्तकालय आया परन्तु मैं इस निमित्त इस सर्प हेतु सम्मान का आकांक्षी नही जबकि मैं तो इसलिए लालायित होकर इससे प्रभावित हुआ क्यूँकि इसने अपनी गलती को त्वरित सुधारा और पुस्तकालय से विमुख होकर किसी झाड़ी या बिल की राह लेने हेतु निकल पड़ा .....
मैं लाफ़ करता हूँ अक्सर उन चिके चिल्लमों पर जो साँप को पृथ्वी का सबसे विषैला जीव घोषित करने हेतु जंगलों में उनके पीछे कैमरा लगाकर उसको डिस्टर्ब करते हैं ।।।
जबकि मैं उनसे कह सकता कि साँप का मतलब यदि विषैला या प्राण हड़पने वाला ही बताने पर तुले हो तो साँप से विषैले और फ़नफनाते जीव तो हम मनुष्य है ...
साँप को सुना कभी किसी नागिन का बलात्कार करते हुए ..? या फिर किसी प्रकार के साम्प्रदायिक दंगे करते हुए ? कहीं नही सुना होगा साँप आपका वाला डेमोक्रेटिक है ...और इसकी आड़ में चुनाव लड़ता है ... साँप को आपने कभी विद्यार्थियों की रगों में जहर भरते भी नही देखा होगा ...अपनी जात हमारी औकात पर भेदभाव ये भी साँप को नही आता ... साँप स्वार्थपूरा होने पर बेवफाई भी नही करता ... आपके बीच रहके आपकी काट करने के प्रकरण में भी साँप पप्पू है .. साँप सच्चा सहिष्णु है इसकी महानता इस बात से प्रचारित होती है कि ये अमर ..अकबर ..एंथोनी और अमरजीत को काटने में पहले उनका नाम या पहचान नही पूछता ...जैसे दंगे के दौरान हम ईश्वर की श्रेष्ठ व्रेस्ठ- कृति पूछती हैं....
साँप डंक चेपने से पहले न ही मॉब लिंचिंग करता है न ही राम के नारे लगवता है.... ये भला है अल्लाह हु अकबर कहकर निर्दोषों की जाने भी नही लेता ..
ये जोमैटो से न खाना आर्डर करता है न ... न मी टू टाइप की घटिया सिटियाबाजी करता है ...
ये तो उनको भी माफ कर चुका है जिसने इसके कैरेक्टर और प्रियम्बल कि धज्जियाँ उड़ाई हैं ...मतलब 100 साल का हुआ तो इच्छाधारी बनकर जंगलों में नागिन को तंग और छोटे कपड़े पहनवाकर उसके साथ पोल डाँस करे ....
आदरणीय साँप तो नागिन के उस अपमान पर भी विचलित नही होता कि जब नागिन को मादक .. क्रीम ..लिपिस्टिक ..पाऊडर से पोत कर पुरुषों के गुप्तांगों की नशे झनझनाने हेतु 70 एम .एम. के पर्दे पर छोड़ दिया जाता है ....
यकीन मानिए साँप बेहद भला ..शिष्ट और नैतिक होता है ... उसे हमारी मॉडर्न एजुकेशन की कोई जरूरत नही उसका अपना ज्ञान-विज्ञान बेहद परिपक्व और प्रगति के पथ पर है ...
क्या हुआ जो उसने आज तक कोई सेटेलाईट या स्पेस शिप स्पेस में नही भेजा ... जबकि वो जानता है इससे घण्टा भी एक पैसे का फायदा नही ... क्यूंकि वो जानता है कि फिजूल में एलियन्स को अर्थ हेतु ललचाने में अपना ही नाड़ा ढीला होगा .... जबकि अभी नीचे रहकर ही बहुत बीमारियों और विकास कार्यों पर खर्च करना बाकि है .....
साँप पर अगर मेरा ज्ञान और तर्क चुतिपयापे के शिरोमौर्य लगते है तो मैं उनको भी नमन करता हूँ क्यूँकि साँप ने अपने विष को मेरे रक्त में प्रवाहित कर मुझे यही समझाया है कि जो आपके बारे में अपशब्द कहें ..गॉशिप करें ... अपना वेरी इम्पोर्टेन्ट काम छोड़कर आप को अपनी वार्तालाप का केंद्र बना लें... अपनी शादीशुदा जिंदगी और जीवनसाथी से असंतुष्ट होकर आपकी गर्ल फ्रेंड ..लिव इन ..वाली पर विशेष फोकस करें ...या फिर सदा आपसे पूछते चलें कि शादी कब करोगे ...तो सर्प वचन ये कि इनपर विशेष ध्यान न दो अपितु इनपर दया करो क्यूँकि ये दया के पात्र हैं ...
वरना जीवन मे इतने ऊहापोह के मध्य इन्होंने आपको अपने मस्तिष्क ..फैमली ..बच्चों किचन ..बाथरूम ...संडास और बेडरूम में कैसे घुसा लिया ....
सर्प अगर कोई नीच जेंडर होता तो क्या शिव उसे अपने गले मे धारण करते ...तो रहा सहा ये कि ~
इसी महान ..तेजस्वी ..अनुशासित ..विनयशील ...ओजस्वी ...आदि .आदि सर्प के मात्र किसी सरफिरे या बिरादरी से तड़ीपार सर्प ने मात्र मेरे पैर में दाँत गड़ाये थे ..इसके लिए वो सदा अपनी जाति में अपमानित इसलिए होगा क्यूँकि उसने सर्प प्रजाति को बदनाम ही नही किया अपितु प्राण घटकम प्रोसेस में अनुतीर्ण रहने पर उसे इसलिए भी आई .सी . यू और वैक्यूम प्रोसेस में रखा गया होगा क्यूँकि इंसान का गंदा ..घटिया और बेवफा रक्त उसके जबड़ों में लग चुका है और इससे अन्य सर्प जाति संक्रमित भी हो सकती है ....
परन्तु ये साँप जिसने मुझे डंक दिया अवश्य मन्द बुद्धि अथवा विक्षिप्त रहा होगा अपितु स्वप्न में भी मानव को काटकर अपने जबड़े मैला करना साँप का स्वप्न नही होता ...विशेष परिस्थिति में प्रोटोकॉल वश इसे कुछ छूट अवश्य है ....
लेकिन ये मन्दबुद्धि सर्प मेरा तो जबर भला कर गया ...मतलब मेरी विचारधारा को और अधिक प्रगाढ़ और सुदृढ़ बना गया ....जनाब साँप को मेरा सत सत नमन कि इसने मुझे अपने शुभचिंतकों और शुभचिंतकों की खाल में छिपे नक्कालों से अवगत कराया ....वो नक्काल और नीच जिनकी आवश्यकता पर मैंने अपनी जान की बाजी लगाई ...इनका वजन एक स्थान से दूसरे स्थान पर ढोया ... इनकी पुस्तकों की फरमाइश पूरी की ... इनके भविष्य और रोजगार पर लटकते खतरों को मुझ महा चूतिया ने ढाल पकड़कर दूसरी तरफ धकेला .....
मुहब्बत भी लुटाई और वफ़ा भी ... लेकिन इन नमक हराम के जनों ने एक बार नही पूछा आर यू ऑल राइट जुनैद सर ...?
मोहतरम साँप न होते तो मुझे इश्क के टटोले कैसे पता चलते ...बड़े मजे कि रही कि इनमें वो भी रहीं जो मुझे इश्क करने की बात कहकर सर्प दंश से जूझते मेरे निश्चेत जिस्म को बाद में कॉल करूँगी कहकर टाल गयीं ...वो भी रहीं जो बोल गई
" घुत्ता साँप क्या ऐसे काटता है "
आगे वाली ये बोल के तर्क बाजारी करने लगी कि
" बोलो साँप काटा तो जिंदा कैसे हो मैन ...?"
और वो भी थी जिसने इस वजह से फोन ही न किया कि उनके हसबैंड घर पर थे ....
यहाँ लँगोट की गाँठ काम आई और अच्छा हुआ कि मैंने सब बोला पर कभी आई लव यू टू नही बोला ....वरना ये बाजारू घण्टियाँ वास्तव में गले पड़ जाती ....
मेरी अम्मी मुबारक अक्सर कहती हैं कि क्या मिलता है तुझे हमेशा ये मोबाइल से चिपककर ये फेसबुक -वेसबुक बन्द कर ..और मुँह धोकर बाहर निकलकर मेरे लिए कोई बहू देख ।....
लेकिन अब अम्मी से अक्सर कहता हूँ ....कि अम्मी मुझे जो मिला फेसबुक में आकर मिला ...जो मिलता है फेसबुक में आकर मिलता है ... मुझे यहाँ वो दोस्त मिले जो मुझे अपनी जिंदगी से भी अधिक प्रेम करतें हैं ...वो भाई मिले जो कभी बड़प्पन तो कभी छुटकपन का अहसास कराकर मुझे मुकम्मल होने का एहसास देते हैं ... दिल से बेटा बोलने और मानने वाली अजीम और बड़ी हस्तियाँ मिली ....एक सगी बहन का रुतबा रखता था फेसबुक ने मुझे जांनिसार बहनों की बौछारों से पाक करवाया ....
उपर्युक्त ये कुछ पंक्तियां लिखकर भावुक सा हो गया ...लेकिन भावुकता में ही सही परन्तु इतना तो अवश्य कहना चाहूँगा कि सर्प का दंश इसलिए मेरी जान नही ले पाया क्यूँकि मेरे साथ आपकी यानि मेरे अपनों की दुवाएँ और प्रार्थनाओं की एक पूरी फ़ौज खड़ी थी ....
शुक्रिया अजीजों .... आपकी बैचैनी पोस्ट और मेसेंजर में देखकर मुझे लगता है कि अब उत्तर भारत के किसी भी शहर में चला जाऊँ न ही भूख से मरूँगा न ही मुहब्बत के बिना .......बाकि साँप का क्या है उसे तो पता तक नही कि उसने मुझे काट कर अपनों से जोड़ा है ।।।
नवाज़िश
आपका~
Junaid Royal Pathan