Wednesday, 26 December 2018

Jeevan

" हें ...हें ...आप कौन हो भैय्ये ...और ये भैंसा किया विलायती है.. इत्ता बड़ा ...अच्छा ये बताओ दरवज्जे से अंदर घुस कैसे गिए ....चील का पेशाब न आता है इस दरवज्जे से अंदर ..इत्ता छोटा है ....क्या कोई हाट चकल्लस लगी है ईदगाह में .....?

चुप कर बे ..! " यम है हम " ..यमराज ..मृत्यु के देवता ! तेरा टेम हो गया है चल अब आत्मा निकालने दे ....!

" मजे ले रिये हो ...आत्मा निकालने दे ..आत्मा है ....कोई मलाई का  घी नही जो निकालने दे .....और मुसलमान हूँ मैं ...और खालिस कुँवारा ....गलत पते पे आ लगे महाराज ...बगल वाले जीवन के लिए आये होगे ..जाओ खींच लियो आत्मा ...वैसे भी वो आपका ही इन्तेजार कर रिया है ...?

सॉरी वत्स ! वो नाम का कन्फ्यूजन हो गया था !

उनका भैंसा दुड़की लेने ही वाला था तभी हम बोले-
महाराज ...चलो मैं लेकर चलता हूँ ....
मैंने बगल वाले दरवज्जे को खटखटा कर खोला
-
हें महाराज.... इधर तो कोई नी है ...लगता है काम पे गया होगा ...आप  बैठिये मैं उसे बुला कर लाता हूँ।

" ओके वत्स थैंक्स ..आई एम वेटिंग ...!

मैं सीधा जकड़पुर के महंत के पास भागता हुआ पहुँचा..उनके कान में कुछ कहा और उन्होंने मेरे हाथ में एक लिफाफा दिया...? सीधा बैंक पहुँचा ...जल्दी बाजी में वहाँ का काम निपटाया .. फिर रिक्शा पकड़कर पहुँचा लालपुर ... वहाँ जाकर एक हज्जाम से जल्दी में दाढ़ी बनवाई ..उसकी जेब में एक चेक डाला ..फिर एक मॉल से कुछ सुथरे कपड़े खरीदे ...और फिर हसमत नगर पहुँचा ..वहाँ एक निकाह में सम्मिमलित हुआ ..दुल्हन की माँ को पंडाल पीछे बुलाया ..उसके हाथ में एक लिफाफा दिया ...दुल्हन के सर पर हाथ रखा ... फिर भिश्तीगंज पहुँचा.. एक लड़की से मिला उसे गले लगाया ..उसके कान में कुछ बड़बड़ाया ..उसकी आँखे डबडबा गई ..फिर मैंने पीछे पलटकर नही देखा....
फिर पहुँचा एक अनाथाश्रम ..वहाँ के संचालक को एक बांड पेपर और एक चेक  दिया ...

कदम बढ़ाये और कॉसमॉस बंगलो के गेट कीपर से कुछ कहा उसने बंगलो के मालिक को फोन लगाया ...एक चमचमाती गाड़ी स्टार्ट हुई एक पेसेंट को उसके अंदर लोड किया गया ...मुझे गेट से पिक किया गया और कार पहुँची ..लाइफ सिटी हॉस्पिटल में .....स्टॉफ ने जल्दी से मेरे कुछ टेस्ट किये कुछ सेम्पल लिए और मुझे लेटा दिया ऑपेरशन थियेटर में .....
जैसे ही कमरा शांत हुआ ...मैं फूट-फूट कर रोने लगा.....तभी एक आवाज आई।

" वत्स कॉम डाउन ..नही तो मैं भी रो पढ़ूँगा ...मैं कुछ कहूँ या  करूँ मुझे शुरू से रेपिट फायर में बता कि तू किनसे मिला और क्यूँ मिला ....?

" महाराज मैं एक अनाथ था ...लेकिन मुझे  गोद लिया हाफिज बरकत और उनकी बेगम ने ..वो भी तब जब मैं 11 साल का हो गया था ...वो महंत जी जिनसे पास मैंने अपना सारा बैंक का चिट्ठा लिया जो मेरे पिता हाफिज बरकत के सबसे गहरे दोस्त है ..मेरे पिता मरते-मरते कह गए थे ..कि  तेरे , मुन्नी और तेरी माँ के सिवा हमारा कोई नही ...

मेरी मौत के बाद वो सब आकर खड़े हो जायेंगे जिन्हें मेरी जिंदगी से नही मेरी मौत से मुनाफा है  ..इसलिए महंत के पास घर जमीन और बैंक के सारे कागजात छोड़ कर जा रहा हूँ ...बैंक से अपने पिता की सम्पूर्ण रकम के कुछ चैक बनाये ....और फिर पहुँचा रशीद हज्जाम के पास जिसने मेरे पिता की बुरे वक्त में बहुत मदद की ..तो उस रकम का ब्याज सहित पैसा मैं हौले से उसकी जेब में डाल आया ...जब आप पहुँचे तो मैं सारी तैयारी के बाद मुन्नी के निकाह के लिए तैयार हो रहा था ...माँ  को वो तमाम जमीन और जायदाद के पेपर और बैंक में जमा पैसे के चेक दिए जिसपर मेरे दस्तखत थे...

बहन को घूरने की हिम्मत न थी ...फिर महाराज अपनी महबूबा से मिला ..और उसे मुझे भूल जाने की बात बोली ...फिर उसी अनाथाश्रम में पहुँचा जहाँ मुझे मेरे पिता ने गोद लिया था अपनी आजतक की खुद की कमाई के सारे पैसे वहाँ डोनेट किये और मरने के बाद अपनी आँखों के दान का एक बांड भी ...चिराग नाम का एक लड़का वहां देख नही सकता ...महाराज उसकी आँखों में रौशनी नही है ...

फिर पहुँचा उस सेठ की कोठी जिसे अपनी जिंदगी के लिए किडनी चाहिये और मुझे कुछ 5 लाख ... ताकि मैं अपने शहर में एक  गंगा -जमुनी अनाथाश्रम खोल सकूँ जहाँ से गोद लिये बच्चे की सिर्फ जिंदगी बदली जाए उसका मजहब नही । ...प्लान  तो कब से तैयार है महाराज लेकिन रोकड़ा नही था .....खैर जहां आपने इतना वेट किया कुछ टाइम और ताकि मेरी किडनी निकलने के बाद ये पैसा मेरे सपने के काम आ जाये ...क्यूँकि हर अनाथ को हाफिज बरकत सा पिता नही मिलता जो एक अनाथ मासूम की जिंदगी तो बदल देता है लेकिन उसका नाम  उसकी पहचान और उसका मजहब नही ....

महाराज ने तुरन्त मुझे भैंसे में लोड किया और उसी घर में लाकर पटका जहाँ उनसे पहली मीटिंग हुई थी ..और बोले -

"जीवन ! अभी तेरी बहन रुक्सत नही हुई है ...तेरी महबूबा की आँखों से आँसू नही सूखे है ...तेरा सपना अभी अधूरा है ....जा यार तैयार हो और वो अपने सरहाने पड़ा रबड़ मुझे पकड़ा दे ताकि चित्रगुप्त से कहकर तेरी मौत का योग मिटा सकूँ ......"

सुबकते-सुबकते अंतर्ध्यान होते महाराज से मैंने प्रश्न दाग ही दिया -
" महाराज ये भैंसा क्या सच में विलायती है या देशी ...? नवाजिश
#जुनैद............

Saturday, 22 December 2018

कलयुगी_शिक्षक

#कलयुगी_शिक्षक
****************

अरे ...अरे ...सुनती हो इंदु ...अरे इंदु ! अरे कहाँ हो ...???"

" क्या हुआ जीइइइइई .... अभी आई ! "

" अरे अभी नही ..अभी ही आओ ...देखो ..देखो अरे देखो तो सही ..."

" क्या हुआ बोलो ...देखते नही मैं किचन में आटा सान रही हूँ ... "

" अरे देखो तो जितेंद्र अवस्थी  की फोटो छपी है अखबार में ...."

" हूं ..हूं ..तो मैं क्या करूँ ...कमीना खड़ूस कहीं का मेरी बला से ..."

अरे नही मैडम इंदु देक्खो तो सही साथ में टाइटल क्या है ...."

" कहा न मुझे इस खड़ूस ..कमीने की न सूरत देखनी है न इसके बारे में कुछ सुनना है ...जाओ आप पराठे बनाओ मैं जरा नहा लूँ आज 15 अगस्त है वैसे भी मुझे जल्दी पहुंचना है विद्यालय.. नही तो ये कमीना आज फिर प्रिंसिपल के कान भर देगा ! "

" ...लेकिन सुनो तो सही ...."

तभी इंदु सारस्वत के फोन की रिंग बजती है 

" हैलो मुनीर सर गुड मॉर्निंग ...हैप्पी इंडिपेंन्डेस डे ! "

" ओह्ह्ह ..थैंक्यू इंदु मेम ...आपको भी डबल आजादी मुबारक हो !"

" डबल मीन्स ? "

" अरे खड़ूस निपट गया ...अखबार नही पढ़ा आज का ...देखो कमीने की फोटो छपी है .."

" पता है तभी अपसेड हूँ सर ..इस जैसे कमीने को इतना फेम मिल रहा है और इसने हमारे फेम और लाइफ को डिप्रेस कर रखा है ...."

" अरे मेम जी टाइटल तो पढ़िए ..."

" नही पढ़ना ...मुझे इस कमीने में रत्ती भर भी इंट्रस्ट नही ! "

" कलयुगी मास्टर ने किया अपनी ही मासूम छात्रा का यौन शोषण ...मतलब फँ ..फँ ...फँसा खड़ूस हा हा हा ....."

" ओह्ह्ह माय गॉड ...व्हाट अ मूवमेन्ट ..व्हाट अ पैराडाइज न्यूज़ ...ओह्ह्ह सर आई एम् रियली वेरी हैप्पी ...कमीने के साथ यही होना था ...आज मैं बहुत खुश हूँ ...मिलते है सर स्कूल में ...आज कमीने के मुँह पर जुबान से कालिख पोतनी है .....मेरी तरफ से आपको, वर्मा सर , शालिनी मैडम , श्वेता मेडम , गीता मेडम ,, और राजेन्द्र सर को  ट्रीट भी पक्की !

तभी मिस्टर सारस्वत अखबार टेबल पर पटक कर खड़े होकर बोलते है -

" ये क्या नीचता है इंदु .. तुम्हे शर्म आनी चाहिये ..एक शिक्षिका को क्या ये जुबान और ये आचरण शोभा देता है ...तुम्हे तो इस वक्त सच्चाई को समझना था ..और यदि मिस्टर अवस्थी वास्तव में गुनहगार हैं तो उसकी सजा उन्हें कानून देगा ...ये ट्रीट ..ये जुबानी फिकरे.. ये ख़ुशी ....बहुत दुःख हुआ तुम्हारा आचरण देख !"

" आप न जी चुप रहिये ...और ये अपना भाषण अपने ऑफिस में बजाइये तालियां मिलेंगी ...जीना हराम कर दिया था इस कमीने ने ....समझे आप ! "

" लेकिन गलती भी तो तुम्हारी है ...सरकार , समाज और सरोकार तुम्हे कक्षा -कक्ष छोड़कर गप्पे लड़ाने ..की अनुमति या वेतन नही देते "

" हुँह आपके मुँह लगकर में अपना मजा ख़राब नही कर सकती ओके ..मैं जा रही हूँ नहाने ! "

मिस्टर सारस्वत ने जितेंद्र अवस्थी को फोन किया लेकिन  ...स्विच ऑफ़ !

मिस्टर सारस्वत ने जल्दी कपड़े बदले और बाइक लेकर मिस्टर अवस्थी के घर पहुँचे ...वहाँ ताला लगा था ....किसी ने कहा विद्यालय निकल पड़े हैं ....विद्यालय को बाइक घुमाई .... अभी झण्डारोहण में 2 घण्टे बाकि थे ...विद्यालय पहुँचकर देखा तो पूरा विद्यालय सुनसान आकाश बना था ...लेकिन तभी दो कदमों की चहलकदमी दिखी ...और साथ में सुनी झाड़ू लगने की आवाज ...कुछ पास से मगर छिपकर देखा तो पाया ये मिस्टर अवस्थी थे .... पूरे प्रांगण को झाड़ने के बाद उन्होंने उस स्थान को पानी से बुहारा और सुगन्धित किया वो स्थान जहाँ माँ सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलित होगा ...फिर उन्होंने झंडे के डंडे की मजबूती और आदत को चेक किया ...फिर प्रांगण में एक -एक कुर्सी स्वयं उठा कर रखी ताकि दर्शकगणों को तकलीफ न हो ......मैंने चकित होकर चपरासी क्वार्टर की ओर झाँका तो वहाँ अभी भी खर्राटों की आवाजें मचल रही थी .....

समय 1 घण्टा शेष था और इस 1 घण्टे के बाद मिस्टर अवस्थी जो वास्तविक अर्थों में शिक्षक थे ...उनकी इस निष्ठा का बलात्कार होना तय था ...लेकिन सोच का विषय यह था कि मिस्टर अवस्थी के कान पर जूं तक क्यूँ नही रेंग रही थी ...? क्या उन्होंने अखबार नही पढ़ा क्या उन्हें नही पता ....?और यदि ये पाप उन्होंने किया है तो क्यूँ उनकी चित एकदम शांत है ...?क्यूँ उनमें कोई भय या बैचैनी नही ?।।। एक बार लगा कि उनके पास जाकर थोड़ा क्रोधी स्वर में बोलूँ कि -" क्या आपको शर्म नही ...क्यूँ ये ढोंग कर रहें है ...आपने ऐसा क्यूँ किया ..? क्या आपको लाज या मर्यादा नही आई ...? क्यूँ आपने शिक्षक से भक्षक बनकर अपने व्यक्तित्व और शिक्षक धर्म को तार-तार कर दिया ?"

श्री: हरि ! मेरे इष्ट है और उनकी कसम ,, मैं क्या साक्षात् श्री: हरि ! भी उनसे इन प्रश्नों को पूछकर स्वयं को लज्जित एवं ग्लानिबोध महसूस नही कर सकते लेकिन आखिर सत्य क्या है ...?पुलिस पहुँचने और मेरी भार्या के मय सहकार्मिकों के पहुँचने में मात्र 50 मिनट शेष थे ....

तभी मैंने उस बालिका के घर की राह ली जिसनें ये आरोप अपने शिक्षक पर लगाया था ....उसका घर करीब ही था ....मैंने उसके घर का दरवाजा खटखटाया ....उसके पिता ने दरवाजा खोला और आश्चर्य से मुझे देखा ...वो मुझे नही पहचाने ... और मुझे कुछ सूझा जिससे सच बेनकाब हो जाये....!

" जी ! आप कौन ..?"

" मैं कोतवाल हूँ ...आपकी बेटी को गिरफ्तार करने आया हूँ "

" क्याय्याआ ..? साहब मेरी बेटी ने क्या किया जबकि उसके साथ....."

" जिसपर आपकी बेटी ने आरोप मढ़ा है उस मास्टर ने आत्महत्या कर ली है ...और उसने अपनी आत्महत्या से पूर्व एक पत्र लिखा है जिसपर लिखा है कि आपकी बेटी ने उनपर झूठे आरोप लगाये हैं ...  और वो कुछ सबूत छोड़कर भी मरे हैं जिससे ये स्पष्ट हो गया है कि आपकी पुत्री ने उनपर झूठा आरोप मढ़ा है ....."

इतना कहते ही उस व्यक्ति और उसके परिवार में हलचल मच गई ...उस संयुक्त परिवार में उसकी पत्नी ..उसका भाई ..भाई की बीवी ...और कुल मिलाकर साथ बच्चे थे जिनमें तीन कन्याएं थी ,, ...लेकिन मैं पहचान नही पाया कि आखिर वो कौनसी बालिका है जिसने मिस्टर अवस्थी पर आरोप लगाया है .....

" ये झूठ है साहब ...ये झूठ है साहब ....मेरी बेटी श्रद्धा ने कुछ नही किया ....

तभी एक लड़की अचानक से चीख पड़ी ...और दहाड़े दे देकर रोने लगी ...और फिर सम्हली और बोली -

" सर मेरे मास्टरजी ने मेरे साथ कुछ नही किया है ...वो तो देवता थे ....

" तो तुमने उनपर आरोप क्यूँ लगाया..? ( ऊँचे क्रोधी स्वर में ) "

" सर मैंने कोई आरोप नही लगाया ...सब कुछ मेरे चाचा ने किया है ....ये पिछले 3 महीनों से मेरे साथ गलत कर रहें है ....बात उस दिन की है .....

तभी उसका चाचा भाग गया , मैंने उसे पकड़ने की कोशिश की लेकिन वो हाथ न आया .....

मैंने लड़की के सर पर हाथ फेरा और उसे विश्वास में लिया ....वो बोली -

" सर मेरे अवस्थी सर जैसा तो पूरे स्कूल में कोई टीचर ही नही ...हमेशा हमारे हित हमारे भले को सोचते हैं .... उस दिन जब मैं तीन दिन से स्कूल न आई ....तब वो मेरे घर आये थे ....और उन्होंने इस जानवर चाचा के साथ मुझे .......सर मैं डर गई और चाचा ने मुझे धमकाया कि इससे पहले अवस्थी सर किसी से कुछ कहें तू उनपर ही आरोप लगा दे ....नही तो पूरा स्कूल तुझपर थूकेगा और तू स्कूल से बाहर निकाल दी जायेगी ....और तेरा पढ़ने और कुछ करने का सपना भी मिट्टी में मिल जायेगा   ..... मैं डर गई सर ...और ....लेकिन मेरे सर निर्दोष हैं सर ...वो देवता हैं ...उनकी जगह तो मुझे मरना चाहिये था सर ....और वो रोने लगी ....मैंने आगे बढ़कर उसको सम्हाला और  गले से लगाया और मिस्टर अवस्थी  के लिए मेरे मन में  श्रद्धा और बढ़ गई ....

मैंने उस बालिका से स्कूल ड्रेस पहनने का अनुरोध किया ...वो झिझकी और संकोच करने लगी ...लेकिन फिर अवस्थी सर को बेकसूर साबित करने की बात पर राजी हो गई ....उसके घर के हर कतरे की आँख में आँसू थे ....उसका बाप असहाय था ...उसके मन में एक रोष एक गुस्सा था लेकिन  उससे लगती एक गंभीर याचना भी थी कि ....कहीं उसकी बेटी का मजाक और उसकी इज्जत की धज्जियां न उड़ जाए ....???

मैं उसे लेकर सीधे विद्यालय की ओर रवाना हुआ ...मैं पीछे था और पुलिस की गाड़ी आगे...लेकिन मेरे पीछे मेरी भार्या इंदु और उसका स्टाफ भी कार में था ...

सबने विद्यालय में एक साथ पैर धरा... सबकी नजर मिस्टर अवस्थी पर जाकर रुक गई जो तिरंगे को सजा और फूलों से भरकर , उसे बाँधकर.. ऊँचा और ऊँचा उठा रहे थे ......

जैसे ही पुलिस इंस्पेक्टर ने मिस्टर अवस्थी की जानिब कदम बढ़ाया ...वो कन्या दौड़कर मिस्टर अवस्थी के कदमों में गिर पड़ी -

" सर ..सर ..आप जीवित हैं सर ...सर मुझे क्षमा कर दीजिये ...सर मुझे दण्ड दीजिये मैंने आप जैसे देवता और सच्चे शिक्षक पर आरोप लगाया ...सर ...सर ...."

मिस्टर अवस्थी ने उसे अपने कदमों से उठाया और बोले -

" श्रद्धा तुमनें मुझपर नही अपितु समाज पर आरोप लगाया ...तुम्हारा दोष कुछ भी नही बेटी !... दोष तो उस समाज का है जिसने तुम जैसी मेधावी छात्रा को ये करने में विवश किया ...बेटी ! मैंने तुम्हे क्षमा किया लेकिन उस समाज को क्षमा नही किया जिसने अपने कर्तव्यों और मर्यादाओं से मुँह मोड़ रखा है ...."

मेरी बीवी और उसके साथियों को ये बात अंदर तक भेद गई लेकिन मुझे ख़ुशी हुई ......झण्डारोहण हुआ और पुलिस लाव -लश्कर के असली आरोपी और दोषी की गिरफ्तारी को निकल पड़ी .....

जब सांस्कृतिक कार्यक्रम समाप्त हुआ तो मैंने मिस्टर अवस्थी से जोर देकर ये ये पूछा -

"  आपको डर नही लगा साहब ...?"

" कैसा डर मिस्टर सारस्वत ! डर उसे लगेगा जिसकी निष्ठा और कर्म , कर्तव्य के अतिरिक्त कुछ और सोचे ....मेरा कर्म शिक्षण हैं और मेरा धर्म भी यही है ..... और जिसका धर्म और कर्म शिक्षा बन जाता है परमेश्वर उसकी ढ़ाल और उसका संरक्षण बन जाता है "

मैंने इंदु की ओर डरते -डरते देखा ...लेकिन उसकी आँखों में पश्चाताप था ...और कुछ नमी भी ...मैंने उसके काँधे पर हाथ धरा और बोला -

" उदास न हो , प्रफुल्लित हो उठो ...और धन्यवाद दो श्री: हरि ! को ,कि उन्होंने तुम्हें उस रथ का यात्री बनाया जिसकी लगाम मिस्टर अवस्थी जैसे सच्चे और आदर्श शिक्षक के हाथ में हैं...इनसे यदि तुम भी एक छात्रा की भाँति शिक्षा लोगी तो विश्वास करो इंदु ...मुझे और प्रत्येक सच्चे शिक्षक को तुमपर गर्व होगा  ........और हाँ याद रखना हमेशा पुरुष गलत हो ये बात यदि सत्य होती तो अवश्य इसे गीता , रामायण , कुरआन या बाइबिल में उकेरा जाता !"

खैर अगले दिन मैं सुबह  ही ...अखबार के प्रत्येक स्टॉल पर पहुँचा हर पन्ना पलटा लेकिन कहीं भी यथार्थ कलयुगी  शिक्षक हेतु एक भी पंक्ति नही मिली .....माफ़ीनामा तो दूर की कौड़ी थी ......लेकिन कहीं किसी कोने में ये छपा जुरूर दिखा कि

" सत्यमेव जयते !"

..........नवाज़िश
#जुनैद..........

Saturday, 15 December 2018

होशियारपुर_एक्सप्रेस

#होशियारपुर_एक्सप्रेस
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देखो ...देखो ....बेगम ये है ताजमहल .....

जीइई...

अबे क्या कर री हो नकाब क्यूँ उठा री हो ....? नीचे करो !

( कुछ देर बाद)

लो अब पहुँचे लोटापुर ..देखो यहाँ बनते है लोटे ....

जीइइ...

अबे ! अबे....मना किया न कि नकाब न उठाओ !खबरदार जो अब हाथ भी लगाया तो !

अबे ! क्या चूतिया हो बे तुम ....बार बार बोल रहे हो.. देखो..देखो ...और जैसी ही जनानी देखने के लिए नकाब उठा रई है ...डँपट दे रहे हो !

अबे मियाँ तुमसे मतलब ..लुगाई मेरी .. टिकट हमारा सीट हमारी तुम क्यूँ तुगलक बन रहे हो बे ?

अबे नारी मुक्ति मोर्चा की अध्यक्ष के पति हैं बे ! नाम है तेजेश्वर शास्त्री ...साला औरत को क्या कोल्हू का बैल समझे हो बे ? या कोई पालतू जानवर...?

मियाँ शास्त्री तुम न ...उखाड़ लियो बे ! स्याला डरे तो हम निजाम से भी नही नाम हमारा भी सुन लो बे जुनैद रॉयल पठान ..मियाँ सूर लड़ाकों की नस्ल से हैं ..समझे !

अब बात बुरखे और औरत की आजादी से स्लिप  होकर पहुँच गई ...सनातन बनाम इस्लाम में ...हल्दी घाटी ..सोमनाथ लूट .. ..शुंग से लेकर टीपू...और आजादी की जंग तक .....तभी ड्राईवर ने ब्रेक गेरा...और बोला-

" देखो बे ...अगर बस को संसद और टीवी का न्यूज स्टूडियो बनाया तो स्याला मुल्ला-पंडे दोनों को यहीं हिलोरापुर उतार देंगे ....!

बस में बेमियादी चकल्लस और बहस का पोस्मार्टम हुआ तो इन सब से बेखबर एक शराबखोर. पियक्कड़ धुत नशे में अब तक अपनी पीछेवाली सीट पर सोया हुआ था झट से खड़ा हुआ और बोला -

" अबे पायलट ठेका दिखे तो रोकना ...साला इन कम्बख्तों ने पूरी उतार दी ...और फिर धप्प से अपनी सीट पर बैठा और सो गया ! "

तभी बड़ी देर से मन ही मन बड़बड़ाते हुए एक बुजर्ग चौकस और आक्रोशित होकर  बोले -

" लेकिन आपको वाकई में शर्म आनी चाहिये मुल्ला जी ...माना आपके वहाँ पर्दे की प्रथा है ...लेकिन ये क्या बात हुई कि आप एक औरत की भावनाओं का मजाक उड़ाये और उसका मानसिक व भावनात्मक शोषण करें ...."

" देखो ! बुजुर्ग मोहतरम ...जब हमारी लुगाई को कोई दिक्कत नही तो आप क्यूँ बिन पानी की मछली की तरह फ़ड़फ़ड़ा रहें है ..?

फिर एक महिला बोली -
" लेकिन मुल्लाभाई ...अंकल ने क्या गलत बोला ..? आप से डरती होंगी शायद इसलिये आपके हर जुल्म को सह रहीं है ...या कोई मजबूरी होगी ..?

" लो कर लो बात .. अमां मोहतरमा हम कोई डरने या डराने की चीज है ...जबकि हम तो फलक के वो चाँद है जिससे लोग मुहब्बत करते हैं ...समझी !" (आँख मारकर )

" बदतमीज ...आँख मारता है ...."

" अरे ...नही ...नही ...मोहतरमा दब जाती है ससुरी औरत देख ...पीढ़ियों का मर्ज है बुरा न मानिए ...!"

एक प्रोग्रेसिव यंग मैन खड़े हुए और बोले -

" देखो मुल्ला जी ...आई एम् एथिस्ट मीन्स नॉट रिलिजियस ...लेकिन आप वास्तव में शोषण कर रहें हैं अपनी बीवी का ..."

" लो अब मुर्गाबी के भी चील से पर निकल आये ...अमां बरखुरदार ये दाँव हमपर न चलो ...समझे ..हम जानते है तुम्हारे जैसे नास्तिकों को ,लेकिन हम आस्तिक है और हमारा मजहब औरत को नुमाइश की चीज बनने से रोकता है समझे !"

ड्राईवर ने झन्ना के ब्रेक दाबे और बोला -

" उतर बे मुल्ला ...अभी उतर ! "

बस में होहल्ला मच गया ..तमाम यात्री अपनी सीट पर खड़े हो गए और  मुल्ला को बाहर खदेड़ने लगे !और उसे खदेड़ते-खदेड़ते बस के दरवाजे तक ले आये ....तभी मुल्ला बोला -

" अबे ..जहन्नमियों जालिमों ..अबे मेरी बीवी को भी तो उतार दो "

तभी एक नौजवान ने फुर्ती दिखाई और बोला -

" देखो बे मुल्ला ! मैंने अभी शरीफ खातून से बात की है और वो बोलती है कि वो तेरे साथ नही आएगी ...उसे तुझसे आजादी चाहिये देख कैसे आराम से बैठी है ...उसे कोई तकलीफ नही है ....

समस्त यात्रियों ने ...पीछे को गर्दन घुमाई तभी मुल्ला बोला -

" हरगिज न जाऊँगा बे ...बेगम.. अरी ओ बेगम ...कमबख्त ...इसी लिए ब्याह के लाया था तुझे ...तुझे ज़िंदा नही छोडूँगा .."

और मुल्ला बस में घुसने की पुनः कोशिश करने लगा ...तभी उस नौजवान ने मुल्ला को कोहलियों में दाबा और बोला -

" ड्राईवर साहब आप बस दौड़ाओं ..इसके सर पर खून सवार है ..मैं इसको यहीं रोकता हूँ ...और आप आगे जाकर पुलिस को खबर जरूर कर देना "

यात्रि एक स्वर में बोले -

" चलो ! "

बस चलने लगी ...सबने सजल नेत्रों से उस वीर नौजवान को भावभीनी विदाई दी जैसे उसने अकेले सरहद पर शत्रु सेना को रोककर अन्य की जान बचाई हो .....

बस में एक सन्नाटा सा पसर गया सभी यात्री अपनी सीट पर बैठकर आँख मूँद लिए और चैन की सांस भरने लगे .....

तभी शास्त्री जी बोले -

" बहनजी आपके पास पानी होगा ...?"

" जी भाईसाहब ! अभी देती हूँ बैग में रखा है "

और वो खड़ी होती है और सर के ऊपर के लगेज कॉर्नर में देखकर चीख पड़ती है -

" हे भगवान ...अरे लूट गई ...मेरा बैग कहाँ गया ..???"

बस फिर ब्रेक का गोता खाकर रुकती है....

" अबे मेरा भी नही है बे "

"मेरा भी लापता है "

" मेरा भी ...."

पूरी बस में हल्ला बरपा हो जाता है .....रात का वक्त और तन्हाई का आलम ...

" जरूर मुल्ला की शरारत है ....."

" हाँ ...मुझे भी लगता है "

" पुलिस को बुलाओ .."

" अरे इसकी बीवी को जगाओ "

क्रांतकारी रोष लेकर एक महिला मुल्ला की बेगम के पास पहुँचती है ...उसे हिलाती है और बोलती है -

" बहन उठो ...बहन जागो ..."

तभी वो पर्दानशीन बोलती है -

" क्यूँ पायलट क्या ठेका आ गया ....?"

इतना सुनकर झट से एक पुरुष उसका नकाब उठाता है --

" अबे ये तो शराबी है ...अबे उसकी बेगम कहाँ गई .........."

तभी एक पुलिस इंस्पेक्टर एक  पुराने खटारे स्कूटर  पे आते दिखे  सबने राहत की साँस ली सब कुछ सुनकर इंस्पेक्टर साहब बोले -

" दरअसल उसकी बेगम उसके साथ ही खड़ी या खड़ा थी ....वो नौजवान जिसे आप बुद्धिजीवियों ने बहादुर और मसीहा समझकर उतारा वो ही उसकी बेगम थी ....जिसने आप सब को मुल्ला को धक्के -मारकर बाहर करते वक्त चुपचाप अपना बुरखा इस शराबी को पहना दिया और आपका समान धीरे -धीरे ..हौले -हौले आँख बचाकर खिड़की से नीचे करती रही मतलब करता रहा जहाँ उनका आदमी पहले से खड़ा था ... ....और आप को राहत मिलेगी ये जानकर कि आप न पहले लुटने वाले है न आखरी ...और बात रही इस शराबी की तो वो लुटेरे जो  अक्सर तीन टिकट लेते है और ऐसे ही किसी शराबी को खूब पिलाकर पीछे वाली सीट पर सुला देते है ...और जानिये अभी हफ्ता भर पहले इन लुटेरों ने जोगी बन कर एक मुसलमान जमात से भरी बस को लूटा था ........"

और इतना कहते ही इंस्पेक्टर साहब ने सिगरेट केश निकालकर ..उसमें से बीड़ी निकाली और उसे होंठों पर लगाकर जलाया ही था कि  .....शास्त्री जी बोले -

" लेकिन इंस्पेक्टर साहब  अब क्या होगा ....?"

" होगा क्या ...आप सब जेबें हल्की कीजिये और देखिये 1 घण्टे में चोर और आपका सामान यहाँ हाजिर ..."

" आप घूस माँग रहें है ...?"( बुजुर्ग बोले )

" तो घुस लियो चचा रपट लिख देंगे और फिर जो होगा आप तो जानते हैं...."

सभी ने शर्मिंदा होकर सरेंडर कर दिया और बचा खुचा जेब का झाड़ा इंस्पेक्टर साहब को दिया ....कई घण्टे बीते ..लेकिन न इंस्पेक्टर साहब लौटे न चोर .......ड्राईवर ने कोतवाली के आगे बस टेक दी ........

" साला तुम चूतिये लुटने के लिए ही बने हो ...अबे एक बार लुटकर चैन न मिला जो दुबारा भी ......

" मतलब ...?"  (शास्त्री जी सहम कर बोले )

" अबे अक्लमंदों क्या कभी किसी घूसखोर इंस्पेक्टर को स्कूटर चलाते देखा है ..????"

बस फिर चल पड़ी ... तभी पीछे से एक आवाज फिर सुनाई दी

" अबे पायलट  ठेका आया की नही ...????"नवाजिश

#जुनैद